पहला प्यार पहली बार

हाय फ्रेंड्स मैं इरफान हूँ मैं आपको पहले ही बता दूँ कि यह मात्र एक सेक्स कहानी ही नहीं बल्कि मेरे सच्चे प्यार की कहानी है प्लीज़ आप लोग इसे पूरा पढ़ना यह आपको थोड़ी लम्बी लगे लेकिन इसमें मेरे दिल के सारे अरमान छुपे हुए है और आशा करता हूँ की आपको मेरी कहानी बोर नहीं करेगी।

दोस्तों मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूँ कि मैनें सेक्स की कहानियाँ कामलीला डॉट कॉम से पहले कहीं भी नहीं पढ़ी थी इसके बारे में मुझे मेरे ही एक बहुत ही करीबी दोस्त ने बताया था।

मेरी आज की कहानी में पात्रों के नाम और घटनास्थल का नाम सुरक्षा की द्रष्टि से बदला हुआ है।

मैं अपने बारे में एकबार फिर बता देता हूँ मेरा नाम इरफान है और मैं दिल्ली से हूँ मेरी उम्र 24 साल है और मैं 6.5 फुट का हूँ मेरे लंड का साइज़ इतना है कि कोई भी आंटी या लड़की पागल हो जाए इसलिए साइज़ बताना इतना जरूरी नहीं है और आप सभी इसे एक घटना के तौर पर पढ़े।

हाँ तो लंडधारियों, मैं आपको और बोर ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर ले चलता हूँ मैं एक कम्पयूटर इंजिनियर हूँ और मेरी नौकरी को शुरू हुए बस यही कुछ 15 दिन ही हुए है लेकिन उससे पहले मेरे साथ जो एक घटना घटी वह शायद किसी के भी दिल के अरमानों को जगा सकती है आज से ठीक दो महीने पहले जब मैं बैंगलोर गया था अपने काम की ट्रैनिंग पर। वहाँ ना तो मेरा कोई दोस्त था और ना ही कोई रिश्तेदार वहाँ दो महीने रहने थे इसलिए मैनें एक कमरे की तलाश शुरू कर दी एक अंजान शहर में कमरा मिलना मुश्किल होता है इसलिए मैं पहले दिन तो होटल में ही रुक गया रेल्वे स्टेशन के पास ही और अगले दिन मैं अपनी ट्रैनिंग पर चला गया पहले तो मैं बहुत डर रहा था कि सब कुछ कैसे होगा लेकिन खुशकिस्मती से मुझे वहाँ एक लड़की मिली जिसका नाम शिवानी था और शायद उसका भी ट्रैनिंग पर पहला ही दिन था कुछ देर तो हम बहुत खामोश रहे लेकिन मैंने हिम्मत करके उसे हाय कहा तो जवाब में उसने भी मुझे ऊपरी दिल से हाय कह दिया और वह फिर अपना चेहरा दूसरी तरफ करने लगी तो मैनें फिर उसे परेशान नहीं किया फिर कुछ देर बाद फिर उसी ने मुझसे कहा की क्या तुम भी यहाँ पर ट्रैनिंग के लिए ही आए हो तो मैनें हाँ में जवाब दिया तब जाकर वह थोड़ा सामान्य हुई और उसने एकदम एक छोटे बच्चे के जैसे मुझसे कहा कि चलो अच्छा है हमारी ट्रैनिंग अब आराम से हो जाएगी और फिर हम दोनों हँस पड़े।

बातों ही बातों में उसने मुझसे कहा कि वह यहीं की रहने वाली है देखने में तो वह एक अमीर घर की लग रही थी लेकिन थी बहुत ही प्यारी सी. मेरे कहने और बात करने के अंदाज़ से उसने तुरंत ही यह पहचान लिया की मैं दिल्ली का हूँ और मैंने उसे बधाई देते हुए कहा कि आप तो बहुत समझदार हो मेडम और तो उसका प्यारा सा जवाब आया, धन्यवाद।

उस वक़्त मैनें उसे बहुत प्यार से और ध्यान से देखा. दिखने में वह ज्यादा तो नहीं फिर भी आकर्षक लग रही थी और उसका फिगर भी यही कोई 32-28-34 का तो होगा. बस ना जाने ऐसा क्या हुआ कि मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगा लेकिन उस समय कोई ग़लत ख़याल मेरे दिमाग़ में नहीं आया था अब मैं बस उसे हमेशा ही अपने आँखो के सामने देखना चाहता था खैर अब तक तो हमारी दोस्ती को एक ही दिन हुए था फिर उसने मुझसे पूछा की वैसे तुम यहाँ कहाँ पर रुके हो?

पता नहीं उस वक़्त मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ शायद कुछ होने वाला था और यह उसका ही एक इशारा था और जैसा कि सच था मैनें उसे कहा कि यार, यहाँ मैं दो दिनों से होटल में ही रुका हुआ हूँ अभी तक कोई कमरा नहीं ढूंढ पाया।

शिवानी :- यह तो बहुत दिक्कत की बात है वैसे मैं तुम्हारी कुछ मदद करूँ?

मैने :- तुम? कैसे?

शिवानी :- अगर तुम कहो तो मैं अपने पापा से बात करके उनके गेस्ट हाउस पर तुमको रुकवा सकती हूँ।

मैं :- ओह थेंक्यू मेडम, लेकिन आप रहने दो।

शिवानी :- अरे मैं अपने दोस्त के लिए इतना भी नहीं कर सकती क्या? नहीं तुम एक काम करो मैं अपने पापा से कह देती हूँ वह तुम्हारी ज़रूर कुछ मदद करेंगे।

और इसके बाद वो, अपने पापा से बात करने लगी फिर उसने मुझे अपना फोन दिया और कहने लगी कि तुम मेरे पापा से बात कर लो और मैं उसकी बात को नहीं काट सका. मेरे बात करने के तरीके से उसके पापा को अच्छा लगा और उन्होनें मुझे अपने गेस्ट हाउस में रहने की अनुमति दे दी।

मैं :- शिवानी, मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा कैसे करूँ?

शिवानी :- अरे अभी ही जान लोगे क्या? आगे देखते है।

दोस्तो उसके कहने के लहज़े में कुछ नटखट सा राज़ छुपा था जो मैं समझकर भी समझ नहीं पाया. खैर अब हमारी ट्रैनिंग को 1 महीना हो गया हमारी दोस्ती भी बहुत अच्छी हो गई थी और मैं उनके गेस्ट हाउस पर अच्छे से रह रहा था लेकिन ऊपर वाला शायद कुछ और ही चाह रहा था एक दिन की बात थी बारिश ने कुछ अलग ही जादू करना शुरू कर दिया था सुबह 9 बजे शिवानी का फोन आया कि?

आज बारिश बहुत ज्यादा है इसलिए पापा चाहते है कि मैं तुमको भी अपनी कार से ही ट्रैनिंग सेंटर तक ले जाऊं. और उसने मुझसे कहा कि अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ. 1 घंटे में, मेरे दरवाजे की घंटी बजने लगी और मैं उठकर निकलने को तैयार ही हो रहा था कि शिवानी ने ज़ोर से कहना शुरू कर दिया कि इरफान जल्दी से गेट खोलो और मैं डर गया कि इसे यह क्या हुआ है? जब मैनें बाहर देखा तो बहुत तेज आँधी और तेज़ बारिश हो रही थी।

और वह पूरी ही भीग गई थी फिर मैनें उससे कहा कि शिवानी, अब हम कैसे जाएँगे? तो वह भी सोच में पड़ गई और कुछ देर में उसने कहा कि आज हम ट्रैनिंग पर नहीं जाए तो? मैं तो खुश हो गया और मैनें कहा कि वाह क्या प्लान है अच्छा है तो आज हम दिनभर यहीं कुछ काम कर लेंगे फिर उसने भी हाँ कर दी और ड्राइवर को बुलाकर कहा कि मैं यहाँ कुछ काम से रुकूंगी तुम चले जाओ उसने अपने पापा को भी यह बात बता दी क्योंकि वह लोग बहुत मॉडर्न थे इसलिए उसके घर वालों ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।

शिवानी :- तो, अब हम क्या करने वाले है?

मैं :- और मैनें उससे कहा कि, आप क्या करवाना चाहते हो मेडम?

शिवानी :- तुम तो बहुत शैतान हो, पर शकल से तो नहीं लगता।

मैं :- शकल से तो तुम भी वैसी नहीं लगती हो, जैसी तुम हो।

शिवानी :- आखिर तुम कहना क्या चाहते हो? और वह मुझे घूरने लगी।

मैं :- प्लीज़ ऐसे मत देखो, कोई घटना हो गई तो, उसके ज़िम्मेदार हम नहीं होंगे।

शिवानी :- डर तो उनको लगता है जो कुछ ग़लत करते है और मैं ग़लत नहीं हूँ मैनें कहा कि रहने दो इन सब बातों को तुम बताओ क्या लेना पसंद करोगी? और उसने व उतने ही मादक तरीके से मुझे जवाब दिया तुम जो दे दो हम उसमें ही खुश रहेंगे दोस्तो उस बारिश ने शायद उस दिन हमारे अंदर एक अजीब सी आग लगा दी थी जो जल तो दोनों तरफ रही थी लेकिन उसे बुझा कोई नहीं पा रहा था।

फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ मैंने उससे कहा कि क्या मैं तुम्हे एकबार किस कर सकता हूँ? तो वह शर्म से लाल हो गई और मैं उसकी तरफ बढ़ने लगा और मैं उसकी गरम सांसों को महसूस कर पा रहा था लेकिन मैनें जैसे ही उसके होठों को छूआ तो वह मुझसे दूर हो गई और कहने लगी कि “नहीं इरफान यह सही नहीं है और वह वहाँ से चली गई उस दिन मैं बहुत डर भी गया था लेकिन मेरे अंदर एक आग भी जल रही थी।

उसके जाने के बाद मैनें उसे याद करके उस दिन दो बार मूठ भी मारी और ठीक दो दिन बाद शिवानी का बर्थ-डे था तो उसने मुझे भी बुलाया था शाम को जब मैं उसके घर पार्टी में गया तो उसके और भी दोस्त आए थे लेकिन वहाँ वह मुझसे ज़्यादा बात नहीं कर पा रही थी पार्टी खत्म होते-होते बहुत देर हो गई थी और रात में जब सब जाने लगे तो उसने मुझसे कहा की मम्मी पापा चाहते है कि तुम हमारे साथ ही डिन्नर करो।

मैं ना भी नहीं कह पाया डिन्नर के बाद उसके मम्मी-पापा को किसी और प्रोग्राम में भी जाना था तो उन्होनें हमें कहा कि ठीक है तुम लोग अपनी पार्टी जारी रखो हम कहीं और जा रहे है उनका स्वभाव बहुत ही अच्छा था उसके बाद शिवानी मुझे अपने कमरे में ले गई मैं तो बस देखता ही रह गया वह एक महल जैसा लग रहा था और शिवानी भी किसी परी से कम नहीं थी फिर मैनें उससे कहा कि सॉरी शिवानी लेकिन मैं तुम्हारे लिए कुछ ला नहीं सका मुझे माफ़ कर दो और वह हँसने लगी।

मैनें पूछा, क्यूँ क्या हुआ? तो उसने हँसते हुए ही कहा कि तुम मेरे साथ हो यह क्या कोई कम गिफ्ट है मेरे लिए? मैं तो बस एक नज़र भरकर उसे ही देखता रह गया हम अपने सारे होश हवास भूलकर एकदूसरे की आँखों में ही डूब गए मैं फिर अचानक से उसकी तरफ बढ़ने लगा और उस दिन ना जाने उसे भी क्या हुआ और वह भी मेरी तरफ बढ़ने लगी मेरे हाथ उसकी कमर को जकड़ चुके थे और मेरे होंठ उसके जिस्म के पास थे।

वह अपनी गर्म सांसों से मुझे पागल बना रही थी अब हमारे बीच बहुत कम फासला रह गया था मैं अब प्यार से उसे किस करने लग गया और वह भी मेरे होठों को चूमें जा रही थी दोस्तों वह क्या गजब का अहसास था शायद मैं आपको कभी ना बता सकूँ. धीरे-धीरे मेरे हाथ अब उसके बब्स तक जाने लगे और उसने भी अपने हाथ मेरे सीने पर रख दिए उसके बब्स तो ऐसे थे कि मेरा तो दिल कर रहा था कि बस उनको ऐसे ही चूसता रहूँ, एकदम रसीले आम के जैसे, पूरे रस से भरे हुए मैं तो पागल हो रहा था अब हम एक दूसरे को नोच रहे थे उसने मेरी शर्ट के बटन को तोड़ डाला और मैं उसकी टी-शर्ट को खोल रहा था अब हम दोनों खड़े हो गये थे और एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे थे ना जाने कब मेरा हाथ उसकी जीन्स पर चला गया और उसे जैसे कोई झटका लग गया हो वह मुझसे पल भर में ही दूर हो गई और कहने लगी कि आई.एम्.सॉरी इरफान तुम अभी यहाँ से चले जाओ नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी।

मैनें कहा, तो हो जाने दो ना शिवानी वैसे भी हमारे अंदर आग भी बहुत जली हुई है और शायद मैं तुमसे प्यार भी करने लगा हूँ उसने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा रहने दो इरफान ऐसा सभी लड़के कहते है कि वह अब प्यार करने लगे है प्लीज़ तुम चले जाओ मैं अब इस दर्द को और नहीं सहना चाहती लेकिन दोस्तों उसकी आँखों में वह नशा अभी तक था वह भी मेरे जिस्म की आग में जलना चाहती थी लेकिन पता नहीं उसे किस बात का डर लग रहा था।

मैनें भी सोचा कि ठीक है मैं यहाँ से चला ही जाता हूँ शायद ऊपर वाला ही नहीं चाहता था लेकिन दोस्तों उस वक़्त कुछ ऐसा हुआ जो शायद आप भी सुनकर अपने लंड को पकड़ लोगे मैनें अपने कपड़े ठीक किए और अपने बैग को लेकर वहाँ से निकलने ही वाला था कि मैनें शिवानी की आवाज़ सुनी।

शिवानी :- इरफान, ज़रा अंदर आना प्लीज़.

इरफान :- नहीं शिवानी, मैं जा रहा हूँ।

शिवानी :- तुमको मेरी कसम, प्लीज़ एक बार तो अंदर आ जाओ।

और मैं जैसे ही अंदर गया तो वह अपने बेड पर पूरी नंगी लेटी हुई थी, मेरी तो आँखें फटी की फटी ही रह गई मेरे हाथ से मेरा बैग भी छूट गया और मेरा मुहँ भी खुला ही रह गया।

शिवानी :- इस जिस्म को अब तुम्हारी ज़रूरत है क्या तुम मुझे एक औरत नहीं बनाओगे? मैं कब से तड़प रही हूँ।

दोस्तों उसकी बात को सुनते ही मेरा लंड एक गरम लोहे की रोड के जैसा हो गया और बाहर आने को तड़पने लगा पर मैनें कुछ नहीं बोला मैं सिर्फ़ कमरे के अंदर गया और अन्दर से उसके कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया उसके बेड तक पहुँचने तक मैनें भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और वह बेड पर एक बेबस की तरह मेरे जिस्म को देख रही थी कि कब मैं उसकी प्यास को बुझाऊ. बेड पर गिरते ही मैं उसके पूरे जिस्म को चूमने लगा और मेरे हाथ उसके बब्स को सहलाने लगे।

मैनें उसके माथे पर एक किस दिया और फिर उसके होठों को छूने लगा उसका बदन इतना गरम था कि कोई भी उसके जिस्म की गर्मी में जल जाए वह मेरे लंड को हाथ में पकड़े हुए थी और उसने एक ही धक्के में मुझे बेड पर गिरा दिया उसने एक भूखी बिल्ली की तरह मेरे लंड को चूसने लगी वह ऐसे चूस रही थी कि मुझे लगा कि मैं तो उसके मुहँ में ही झड़ जाऊँगा और ऐसा हुआ भी मैनें अपना सारा माल उसके मुहँ में ही गिरा दिया और उसने एक भी बूँद को नीचे गिरने नहीं दिया वह सारा का सारा चाट गई और वह इतनी खुश थी की मैं उसे देखकर हँसने लगा।

मैनें उससे पूछा कि शिवानी क्या हुआ? तो उसने कहा कि मुझे लग रहा है आज बरसो की मेरे जिस्म की भूख शांत होने वाली है उसकी बात को सुनते ही मैनें उसे बेड पर पटक दिया और उसके पैरों को धीरे-धीरे सहलाने लगा और अब मैनें उसकी आँखों पर एक पट्टी बाँध दी थी और जिससे वह डर गई और कहने लगी कि इरफान तुम ये क्या कर रहे हो?

मैनें उससे बोला की मेरी जान आज तुमको मैं जन्नत की सैर करवाऊँगा और मैं एक बर्फ का टुकड़ा लेकर उसको शिवानी की चूत पर सहलाने लगा तो वह सिसकारियाँ भरने लगी, इस्स्स्सस्स्स यह क्या कर रहे हो? उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया और मैं बर्फ के साथ-साथ उसकी चूत को चाटने भी लगा उसकी चूत पूरी तरह पानी-पानी हो गई थी वह अब बस झड़ने ही वाली थी इर्फ़ाआन्न्न अब मुझसे नहीं होगा, मैं झड़ने वाली हूँ।

और मैनें भी उसको झड़ने दिया और मैं उसकी चूत का सारा पानी पी गया दोस्तों अब मैं आपको कैसे बताऊं कि एक गरम चूत का रस पीने में जो मज़ा है वह किसी भी शराब में नहीं है उसके बाद 10 मिनट तक वह मेरे सीने से चिपकी रही और मैं उसको सहलाते हुए उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा और वह फिर से सिहरने लगी।

शिवानी :- इरफान, अब बस मुझे वह खुशी दे दो, जो मेरे जिस्म को चाहिए।

मैं :- ठीक है मेरी जान और फिर मैनें उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और उसकी चूत को थोड़ा ऊपर उठाया. दोस्तों उसकी चूत एकदम फूली हुई थी एकदम एक पावरोटी की तरह जिसमें पानी तो इतना था कि बस पीता ही रहूँ फिर मैनें अपने लंड पर थोड़ा सा थूँक लगाया और उसकी चूत के पानी में अपने लंड को भिगोने लगा उसका चेहरा यह बता रहा था कि अब अगर उसे लंड ना मिले तो वह पल भर भी बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।

इरफान, क्यूँ इस बेजान शरीर को और दर्द दे रहे हो चोदो ना मुझे, प्लीज़ चोदो ना. मैं उसकी इस बात को सुनते ही पागल हो गया और अपने लंड को उसकी चूत के मुहँ पर रख के अंदर डालने लगा तो उसके मुहँ से सिसकारियाँ निकलने लगी ओह जान यह मुझे क्या हो रहा है? मैनें अपने लंड को थोड़ा और अंदर डाला और साथ ही मेरे हाथ के अंगूठे को वह लंड के जैसे चूस रही थी अब मेरा लंड भी अपनी हदें तोड़ना चाहता था और फिर मैनें एक ज़ोर का झटका मारा कि मेरा लंड शिवानी की चूत के अंदर था वह एकदम कुँवारी तो नहीं थी फिर भी उसकी चूत एकदम टाइट थी जब भी लंड अंदर होता है तो तब जिस्म में क्या हलचल होती है यह जब आप किसी को चोदोगे या किसी से चुद्वाओगे तभी आपको पता चल पाएगा हमारे बीच अब बस चुदाई का खेल हो रहा था वह भी अब बस चुदाई का मज़ा ले रही थी उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी और मैं भी उसकी चूत की गर्मी को अपने लंड पर महसूस कर रहा था फिर 15 मिनट तक जोरदार चुदाई हुई उसके बाद मैं झड़ने वाला था इस बात को शिवानी समझने लगी थी मैं अपने लंड को अब बाहर निकालने वाला ही था कि उसने मना कर दिया।

मैं :- यह तुम क्या कर रही हो?

शिवानी :- इरफान, मैं इस प्यार के किसी भी पल को बर्बाद नहीं होने देना चाहती मेरी चूत की गर्मी को शायद कोई और ना शांत कर पाए।

तुम प्लीज़ इसे मेरे अंदर ही गिरा दो मैं बाद में गोली ले लूँगी इस बात को सुनते ही मैं भी अपने अंतिम पलों में आ गया था और मैं ज़ोर से करहाने लगा था और देखते ही देखते मेरा सारा का सारा वीर्य मैनें शिवानी की चूत में ही छोड़ दिया और इस पल को वह भी महसूस कर रही थी और उसने मुझे चूमते हुए मुझे अपने सीने से लगा लिया और उसकी आँखों से आँसू की बूँदें मोतियों की तरह गिरने लगी थी और वह कहने लगी की इरफान आज यह जिस्म पूरा हो गया है बस ऐसे ही मुझे हमेशा प्यार देते रहना आज से शिवानी सिर्फ़ तुम्हारी है और उसके बाद मैं वहाँ से निकल आया।

आज मैं एक बहुत बड़ी कंपनी में सीनियर इंजीनियर की पोस्ट पर काम कर रहा हूँ, लेकिन सच्चा प्यार और विश्वास मुझे शिवानी से ही मिला था और आज वह मेरी बीवी बनकर मेरे साथ ही है।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे ज़रूर बताए

धन्यवाद मेरे प्यारे दोस्तों !!

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