नई भाभी की चूत का उद्घाटन किया

हाय दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम दीपेश है Kamukta और मेरी उम्र 26 साल है और मैं भी कामलीला डॉट कॉम का आप सभी की तरह एक नियमित पाठक हूँ और मुझे इसकी सभी कहानियां बहुत ही अच्छी लगती है मेरी लम्बाई 6.5 फुट है और मेरा शरीर एकदम फिट है और मैं दिखने में भी बहुत आकर्षक हूँ मैं दिल्ली में एक किराए का एक कमरा लेकर रहता था क्योंकि वहाँ मेरी पढ़ाई चल रही थी। और छुट्टियों में, मैं अपने घर चल गया था।

इस बार जब मैं छुट्टियों के बाद दिल्ली वापस आया तो मेरे मकान मालकिन आंटी ने मुझे बताया कि उन्होंने मेरे कमरे के पास वाला बड़ा हिस्सा भी किराये पर दे दिया है यह मुझे अच्छा नहीं लगा। क्यूंकि मैं और ख़ुशी जो कि मेरे मकान-मालकिन की बेटी थी हम दोनों ही साथ में वहाँ मस्ती किया करते थे पर अब क्या कर सकते थे।

अगले दिन नये किरायदार का सामान आ गया था और एक ही हफ्ते में, उन्होंने सब कुछ ठीक कर लिया था वह बस दो ही लोग थे और वह दोनों पति-पत्नी ही थे उसका नाम विकास था और वह यहाँ एक कम्पनी में काम करता था और उसकी पत्नी यानी भाभी एक स्कूल में टीचर थी मैं विकास को भैया कहने लगा था उसकी अभी दो-तीन महीने पहले ही शादी हुई थी भैया सुबह 8-9 बजे जाते थे और देर रात को वापस घर आते थे और भाभी भी सुबह 7 बजे स्कूल जाकर दोपहर को 2 बजे तक वापस घर आती थी।

एक दिन सुबह के समय मैं छत पर कसरत कर रहा था तो भाभी अचानक कपड़े सुखाने के लिए छत पर आ गई थी और मैं अपनी कसरत करता रहा और मैंने देखा कि कपड़े सुखाते-सुखाते भाभी अपनी चोर निगाहों से मुझे और मेरी बॉडी को देख रही थी फिर वह कपड़े सुखने के लिये डालकर चली गई थी उनके जाने के बाद मैंने देखा कि उन कपड़ों में गुलाबी रंग की एक सेक्सी ब्रा और पेंटी भी थी।

उनके जाने के बाद मैंने वह ब्रा-पैन्टी उठा ली और अपने कमरे में अपने साथ ले आया और कमरे में आकर उसे सूंघने लगा भाभी की चूत की भीनी-भीनी महक अब भी उस पैन्टी में से आ रही थी तो फिर मैंने उनको सूंघते हुए भाभी के नाम की मूठ मारी और अपना सारा माल उस ब्रा-पैन्टी में ही छोड़ दिया।

फिर कुछ देर बाद मैंने उनको धोकर वापस सूखने के लिए वहीं डाल दिया जहाँ से उनको उठाया था उस दिन मेरी छुट्टी थी तो मैं दिन में सो गया था और फिर दोपहर को अचानक मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी तो मैंने सोचा इस वक्त कौन आया होगा फिर मैंने सोचा कि इस वक्त तो खुशी अपनी थकान मिटाने के लिए आती थी तो मैंने बिना ध्यान दिये ही दरवाजा खोल दिया और सामने देखा, तो वहाँ भाभी खड़ी थी नींद से उठने की वजह से मेरा लंड खड़ा था और उनकी नज़र एकदम से मेरे लंड पर पड़ी तो फिर इस वजह से वह इधर-उधर देखने लगी फिर मुझे अचानक से होश आया तो मैंने झट से टावल उठाकर बांध लिया लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ ही था।

मैंने उन्हें नमस्ते कहा और पूछा कि क्या काम है?

तो वह बोली कि मेरे बेड को थोड़ा एक तरफ़ सरकाना है तो क्या आप मेरी मदद कर सकते हो? फिर मैंने उनको बोला क्यों नहीं मैं बस अभी 10-15 मिनट में आता हूँ आप चलो।

फिर 15 मिनट के बाद मैं अपनी बनियान और टी-शर्ट पहनकर उनके कमरे में चला गया इस बीच उन्होंने भी अपने कपड़े बदल लिए थे अब वह एक पीले रंग की लेगिंग और उसी रंग की एक ढीली सी टी-शर्ट में थी मेरा तो मन कर रहा था कि अभी उनकी टी-शर्ट के नीचे से अपना हाथ डालकर उनके बब्स को मसल दूँ लेकिन मैंने थोड़ा सब्र से काम लिया और उनके बेड को उनके मुताबिक ठीक करते समय हम दोनों ही झुके हुए थे मुझे भाभी के मोटे-मोटे बब्स उनकी टी-शर्ट में से दिख रहे थे। और फिर मैंने ध्यान दिया तो देखा की जिस गुलाबी ब्रा में मैंने अपनी मूठ मारी थी वह अब भाभी के गोरे-गोरे बब्स को संभाल रही थी वह नज़ारा देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था भाभी भी यह सब देख रही थी और धीरे-धीरे से एक कातिल सी मुस्कान बिखेर रही थी।

जब मैं उनका बेड ठीक करवाकर वापस जाने लगा तो भाभी ने मुझे धन्यवाद बोला और कहा रुको ना चाय पीकर जाना।

मैंने उनको कहा कि मैं चाय नहीं पीता भाभी।

तो फिर वह शरारती मुस्कान से हँसते हुए मुझसे कहने लगी तो क्या दूध पियोगे?

फिर मैंने भी उनके बब्स की तरफ़ देखते हुए उनसे कह दिया हाँ भाभी, दूध के लिए तो मैं कभी मना नहीं करता हूँ।

तो फिर वह थोड़ा शरमाते हुए मुझसे बोली कि ठण्डा पियोगे या गरम।

तो फिर मैंने उनको कहा कि गरम हो तो अच्छा है।

फिर हम दोनों ही समझ गये थे कि आग अब दोनों तरफ़ ही बराबर की लगी हुई है लेकिन हम दोनों अभी तक एकदूसरे से ज्यादा खुल नहीं पा रहे थे इसलिये फिर वह किचन में से जाकर दूध गरम करके ले आई थी और दूध पीते हुए भी मेरा ध्यान टीवी से ज़्यादा उनके बब्स पर ही था अब भाभी ने फिर से मुझसे बात करनी शुरू कर दी और मेरे शरीर की तारीफ़ करने लगी वह मेरे पास आकर बिल्कुल चिपककर बैठ गई थी फिर मैंने भी अपना एक हाथ उनकी जाँघ पर रखा तो वह अचानक से बोलते-बोलते चुप हो गई और फिर एक हल्की सी “आह” करके सिसकने लगी और उनकी साँस भी फूलने लगी।

अब मैं समझ गया था कि भाभी अब गरम हो रही है।

फिर मैंने कहा कि भाभी यह दूध तो मैंने पी लिया लेकिन मैं और भी दूध पीना चाहता हूँ। तो अब भाभी ने अपनी आँखे बंद करते हुए मुझसे कहा कि दीपेश… जो पीना है पी लो… अब सब कुछ तुम्हारा ही है लेकिन ध्यान रखना कि मुझे भी अच्छी मलाई मिलनी चाहिये।

अब सब कुछ साफ हो गया था। और मैंने भाभी को कहा कि जान मैं आपको ऐसी मलाई खिलाऊँगा कि आपको बहुत मज़ा आएगा। अब मैं उनको किस करने लगा और अब वह भी मदमस्त सी हो गई थी और मेरी टी-शर्ट को फाड़ने लगी तो मैंने उनको रोका और अपनी टी-शर्ट मैंने खुद ने ही उतार दी उसने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी गुलाबी ब्रा में उसके गोरे-गोरे बब्स आहहह… क्या कहर ढा रहे थे मेरा लंड तो उनके मस्त फिगर को ठोककर सलामी दिये जा रहा था।

फिर उसने मुझसे कहा कि मेरी ब्रा में से जो वीर्य की गंध आ रही है क्या वह तुम्हारी है? तो मैंने हाँ में अपना सिर हिला दिया। तो उसने कहा कि यार, जब मेरी चूत तुम्हारे लिए खुली पड़ी है तो तुम मूठ क्यूँ मारते हो? तो मैंने कहा कि अब नहीं मारूँगा अब तो मेरा लंड सिर्फ़ तुम्हारा ही है। यह कहते हुए अब मैंने अपने अंडरवियर को भी उतार दिया मेरे अंडरवियर को उतारते ही वह एक पागल औरत की तरह मेरे लंड की तरफ लपकी और झट से मेरे लंड को अपने मुहँ में भरकर चूसने लगी और मैं ओह…. करते हुए कहने लगा कि यह तो ख़ुशी से भी अच्छा लंड को चूसती है मेरा पूरा लंड अब उसके थूक से गीला हो चुका था और मैंने अब उसकी ब्रा को भी उतार दिया था मेरा लंड चूसते हुए उसके 34 इंच के बब्स आगे-पीछे हो रहे थे उसके बब्स इतने मुलायम थे कि उनको दबाने भर से ही मेरे लंड में हरकत और तेज हो रही थी।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और उसी बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी पीले रंग की लेगिंग को उतारकर देखा तो उसने उसके नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था फिर मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ फेरा तो मैं हैरान रह गया था कि 3 महीने हो गये थे उसकी शादी को लेकिन अभी भी उसकी चूत एकदम टाईट लग रही थी अब मैंने उसकी टाँगें फैलाकर उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया और उसकी चूत की चटाई शुरू कर दी।

फिर कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उससे उसकी चूत के कुंवारेपन के बारे में पूछा तो उसने कहा कि अभी इसके बारे में बात मत करो तुम बस इसको चाटते रहो मेरे चाटते रहने से उसकी चूत अब गुलाबी से लाल हो गई थी मैंने चाटते हुए उसे कहीं काटा नहीं था नहीं तो उसके पति को पता चल सकता था अब वह उसकी चूत की जबरदस्त चुसाई से बहुत ही ज़्यादा उतेज़ित हो चुकी थी और अपने नाख़ूनों को मेरी पीठ पर गढ़ा रही थी।

वह उत्तेजना की मस्ती में एक अजीब से नशे में बोल रही थी ओह… दीपेश यह तो मेरी चूत को कभी चाटते ही नहीं है और ना ही मुझे अपने लंड को चूसने देते है मैं बहुत प्यासी हूँ प्लीज़ अपनी जीभ को घुसा दो ना थोड़ा और अन्दर… आहहह… उफ्फ्फ… इस्स्स्स… और ज़ोर से… रूको मत… और ज़ोर से… और इस लम्बी सिसकारी के साथ ही उसने अपना सारा पानी मेरे मुहँ पर ही छोड़ दिया और निढाल होकर लेट गई थी।

अब मैंने उसको पलटकर उसके उभरे हुए नितम्बों पर 3-4 थप्पड़ मारे और कहा कि उठ साली कुतिया खुद तो ठंडी होकर सो गई और यह जो मैंने अपना लंड खड़ा किया है उसका क्या अब इसकी प्यास को कौन बुझाएगा।

फिर वह हँसने लगी और मुझसे बोली कि अच्छा जी अब तो मैं भाभी से कुतिया हो गई खेर कोई बात नहीं चल जाने दे भाभी चोद बोल ले तूने मुझे वह दिया है जिसके लिए मैं बहुत दिनों से तड़प रही थी इतने दिनों बाद आज बहुत मज़ा आया है तू फिकर मत कर तेरे इस लंड की प्यास मैं ही मिटाऊँगी बस एक बार मुझे मूत लेने दे।

फिर वह मूतने के लिए बाथरूम में चली गई और इधर मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था तो मैं भी उठकर उसके पीछे से बाथरूम में ही चला गया और वहाँ खड़ा होकर उसे देखने लगा और जैसे ही उसने अपने हाथ धोए मैंने उसे झट से पकड़ लिया और उसके बब्स को दबाने लगा अब वह वापस से मूड में आ रही थी और मेरे बालो में अपना हाथ फेरने लग गई थी। और फिर वह अचानक से बाथरूम से भागकर गई और बिस्तर पर जाकर लेट गई और उसने अपनी दोनों टांगे ऊपर हवा में उठा ली और मैंने भी उसके पीछे से आकर उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया।

और वह बोली कि अब आजा कुत्ते… तेरी इस कुत्तिया की चूत तेरे लंड को लेने के लिए कब से तरस रही है। अब मैं भी उसके मुहँ से ऐसी गालियाँ सुनकर हैरान हो गया था लेकिन मुझे भी चुदाई करते वक्त गालियाँ देना अच्छा लगता है तो मुझे इतना बुरा नहीं लगा।

फिर मैंने उससे पूछा कि कंडोम कहाँ है? तो उसने कहा कि बेड की दराज में पड़ा है निकालकर ले लो।

उसकी टाँगे अब भी हवा में ही थी और मैंने अपने लंड पर बेड की दराज में से कंडोम को निकालकर चढ़ा लिया था और अब अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया था मैं साथ ही उसके बब्स को भी दबा रहा था और नीचे से मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के मुहँ पर रग़ड खा रहा था जिससे उसका शरीर काँप रहा था और उसने मुझसे कहा कि जान अब और मत तड़पाओ अपनी भाभी को बस डाल दो अब तो यह तड़प बर्दाश्त नहीं हो रही है मुझसे तो अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रखकर निशाना लगाया और एक जोर का धक्का मारा तो मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के अन्दर चला गया था और उसने बेड की चादर को कसकर पकड़ लिया था और अपने होठों को भी कसकर बंद कर लिया था।

तो मैं समझ गया था कि उसको दर्द हो रहा है लेकिन मैंने एक और तेज झटका मारा और अपना सारा का सारा लंड उसकी चूत की हर दीवार को तोड़ते हुए अन्दर घुसाता ही चला गया अब मैं तो मानो किसी जन्नत में पहुँच गया था उसकी चूत बहुत ज्यादा कसी हुई थी और मेरा लंड भी कम नहीं था जिसके कारण उसको भी बहुत दर्द हो रहा था लेकिन वह उस चुदाई का भरपूर मज़ा लेने के लिए हर दर्द को झेलने के लिये तैयार थी अब मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया था और फिर कुछ देर के बाद वह भी मेरा साथ देने लगी थी और आहहह… उफ़्फफ… इस्सस की आवाजें निकालने लगी थी।

मैंने भी अब अपनी चोदने की रफ़्तार को और भी बढ़ा दिया था और वह भी अब अपनी गांड को ऊपर उठा-उठाकर उस चुदाई में मेरा साथ दे रही थी मैंने अब उसकी गांड के साथ भी खेलना शुरू कर दिया था मैं अब उसकी गांड में अपनी ऊँगली कर रहा था लेकिन उसकी गांड तो हद से भी ज़्यादा टाईट थी मैंने उससे पहले इतनी टाईट गांड का छेद नहीं देखा था दोस्तों गांड तो मैंने ख़ुशी की भी बहुत बार मारी थी लेकिन उसकी गांड भी भाभी जितनी टाईट नहीं थी मैं भाभी की गांड को भी एकबार मारना चाहता था लेकिन फिर कुछ सोचकर चुप रह गया।

अब मैंने वापस से भाभी की चूत को ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया था। तो वह मुझसे बोली कि दीपेश चूत को चोद रहा है या उसको खोद रहा है मैं कोई रंडी नहीं हूँ तेरी भाभी हूँ इसलिये थोड़ा आराम से कर ना रात को तेरे भैया को भी मेरी चुदाई करनी है मैं तो मर ही जाऊँगी।

फिर मैंने उसको कहा कि चुप कर साली तू तो मेरे लिए रंडी ही है अब से तू मेरी रंडी ही रहेगी जब मेरे मन में आएगा तब तुझे मैं रंडी की तरह चोदने आ जाया करूँगा वैसे भी ख़ुशी से मेरा मन अब भरने लगा है।

फिर उसने कहा कि इसका मतलब तुम ख़ुशी के साथ भी मज़े करते हो।

फिर मैंने उसको डाँटते हुए कहा कि चुपकर साली रंडी ज़्यादा दिमाग़ मत लगा चुपचाप अपनी गांड ऊपर उठा अब मैं झड़ने वाला हूँ बोल कहाँ लेगी मेरी मलाई को तो उसने कहा कि यह मलाई तो मेरी है तो इसको मेरे मुहँ में ही आने दे मेरे राजा। अब मैं बहुत तेज रफ़्तार से उसे चोद रहा था इस बीच वह एकबार और भी झड़ चुकी थी और उसकी चूत की चिकनाई से पूरे कमरे छप-छप, छप-छप की आवाजें गूँज रही थी।

मैंने अब अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला तो उसकी चूत एकदम से फूल गई थी और उसकी चूत के होठं एकदम खुले पड़े थे अब मैंने अपने लंड से कंडोम को उतारा और उसके मुहँ में अपने लंड को घुसाने लगा तो वह भी पूरी मस्ती में मेरे लंड को चूस रही थी फिर मेरा शरीर अब अकड़ने लगा और मैंने उसका सिर अपने लंड पर तेजी से खींच लिया और मैं अपनी गांड पर अपना एक हाथ रखे हुए अपनी गांड को ज़ोर-जोर से हिला रहा था और अपने लंड को जितना हो सके उतना उसके मुहँ के अन्दर घुसाने की कोशिश कर रहा था मेरे मुहँ से आहहह… ह्म्‍म्मम.. उफ्ऊफ़… करके उत्तेजक आवाजें निकल रही थी और उसके मुहँ से घूं… घूं… की आवाज़ भी पूरे कमरे में ही गूँज रही थी और फिर एक जोरदार धक्के के साथ मैंने अपनी सारी मलाई उसके मुहँ में डाल दी और उसने एक बूँद भी बाहर नहीं छोड़ी और सारी मलाई पी गई उसके बाद भी उसने मेरे लंड को तब तक चाटना बंद नहीं किया था जब तक की वह वापस खड़ा नहीं हो गया फिर मैंने एक बार और नई भाभी की चूत का उद्घाटन किया और इस बार तो उसकी आँखों से आँसू ही आ गये थे और तब तक मैंने उसकी अलग-अलग तरीके से जमकर चुदाई करी और इस बीच वह भी 2 बार झड़ चुकी थी और अंत में मैं भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ चुका था फिर हम दोनों ही कुछ देर के लिए नंगे ही वहीं एक-दूसरे से चिपककर सो गये थे।

उसके बाद में मैं उठकर अपने कमरे में चला गया और अब वह नई भाभी मेरे लंड के लिए एक जरूरत बन गई थी।

धन्यवाद मेरे प्यारे दोस्तों !!

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