माँ के अरमान को बेटे ने चढ़ाया परवान

हाय दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम विभा है और मेरी Kamukta उम्र 38 साल है और इस वेबसाइट पर यह मेरी पहली सेक्स कहानी है मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और मैं पानीपत (हरियाणा) की रहने वाली हूँ हमारे घर में मैं मेरे पति और हमारे दो बच्चे है मेरे एक लड़का और एक लड़की है मेरे पति कि उम्र 40 साल है और मेरे लड़के की उम्र 19 साल और लड़की की उम्र 18 साल की है मेरे पति एक ट्रक ड्राइवर है और वह अपने काम के सिलसिले में ज्यादातर घर से दूर ही रहते है और वह घर पर कभी-कभी ही आते है मेरे पति एक अय्याश किस्म के आदमी है।

मेरे पति के घर से बाहर रहने की वजह से वह जहाँ-जहाँ भी जाते है वहाँ पर उन्होंने एक ना एक लड़की या औरत को जरूर पटा रखा है मुझे भी उनमें से दो तीन लडकियों के तो नाम भी पता है और उनके बारे में मुझे यह सब तब पता चला जब वह एक बार घर आए थे तब उनके मोबाइल पर एक-दो लड़कियों के फ़ोन आये थे और वह फ़ोन मैंने ही उठाए थे और दूसरी तरफ से कोई लड़की या औरत यह कह रही थी कि अब कब आ रहे हो अबकी बार तो बहुत दिन हो गए तुमको इधर आए फिर मैंने बिना कुछ कहे ही फ़ोन काट दिया था और फिर मैं सोचने लगी कि वह खुद तो बाहर मज़ा कर लेते है और घर में मेरा बिल्कुल भी साथ नहीं देते और मुझे तो वह अपने हाथों की कटपुतली ही समझते है जैसे चाहो वैसे नचा लेते है और कभी-कभी तो मारते भी है वह बहुत शक करने वाले और गुस्सा करने वाले आदमी है इसलिए मैंने कभी घर से बाहर किसी के साथ चक्कर चलाने की कोशिश भी नहीं करी क्योंकि मुझे उनका बहुत डर लगता था कि कहीं वह उस आदमी को जान से ना मार डाले उनकी इन हरकतों की वजह से ही मुझे अब तक पूरा शारीरिक सुख भी नहीं मिला था एक तो वह कई दिनों तक घर पर नहीं आते और ऊपर से आने के बाद भी अगर उनका मूड हो तो ही वह मुझसे सेक्स करते है जिससे मैं बहुत प्यासी हो गई हूँ जब वह घर पर नहीं रहते तो मुझे सेक्स की बहुत याद आती है तो मैं अपनी ऊँगलियो से ही अपनी चूत की आग को ठंडा करती हूँ।

हाँ तो दोस्तों अब मैं शुरू करती हूँ अपनी कहानी जो कि इस प्रकार से है…

एक बार जब मेरे पति घर से बाहर काम से गये थे और उनको इस बार 2 महीने से ऊपर हो गये थे पर वह घर पर नहीं आए थे और इधर मेरी चूत की प्यास भी बहुत बढ़ रही थी और फिर एक दिन मैं बाज़ार गई थी और वह बारिश के दिनों की शुरुआत थी मैं बाजार से वापस आ रही थी तभी जोरों से बारिश शुरू हो गई थी मैं छतरी लाना भूल गई थी और बारिश के कारण मैं पूरी ही भीग गई थी और मेरे सारे कपड़े भी पूरे ही भीग गए थे और मेरे सारे कपड़े मेरे शरीर से एकदम चिपक गये थे मैं भीगी हुई हालत में ही घर पर आई तो मेरा बेटा घर पर अकेला ही था और उस समय मेरी बेटी स्कूल गई हुई थी और जब उसने दरवाजा खोला तो मैं उसके सामने पूरी ही भीगी हुई खड़ी थी मैंने हल्के हरे रंग की साड़ी पहन रखी थी और भीगने की वजह से मेरे ब्लाउज में से भी मेरे निप्पल साफ दिख रहे थे और मेरा बेटा मेरी छाती को देख रहा था उसने उस समय नेकर पहना हुआ था और उसमें से उसके तने हुए लंड ने उसके नेकर में तंबू बनाया हुआ था दोस्तों मैं थी ही इतनी खूबसूरत कि मुझे देखकर कोई भी एकबार तो पागल जरूर हो जाए आपको लगेगा की मैं अपनी तारीफ खुद ही कर रही हूँ पर मैं सच में बहुत खूबसूरत हूँ मेरा बेटा मेरे बब्स को बिना पलक झपकाए निहार रहा था फिर मुझे शर्म आने लगी थी इसलिए में जल्दी से बाथरूम में चली गई लेकिन मेरा बेटा मेरे शरीर को पीछे से मेरे बाथरूम में जाने तक निहार रहा था।

फिर मैं जब बाथरूम से बाहर आई और मैंने मेरे बेटे से भी चाय के लिए पूछा जिससे शरीर में थोड़ी गर्मी आ जाए क्योंकि मैं भी बारिश में गीली होने की वजह से ठण्ड से बहुत काँप रही थी और फिर मैं चाय बनाने के लिए चली गई चाय बनाते-बनाते ही मेरे दिमाग में मेरे बेटे के मुझे देखकर खड़े हुए लंड का ख्याल आया और मैंने सोचा कि अगर मुझे मेरी चूत कि प्यास ही बुझानी है तो मैं बाहर कहीं और क्यों जाऊ मेरे तो घर में ही एक लंड तैयार जो हो गया है और अगर मैं घर के ही आदमी से चुदवाऊँगी तो घर की बात भी घर में ही रहेगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा फिर मैं मन ही मन में सोचने लगी कि मैं अब मेरे बेटे को कैसे मनाऊँ तभी मेरे दिमाग़ की बत्ती जली और मैंने सोच लिया कि मैं कैसे उसको अपने जाल में फंसाऊंगी।

मेरे पति के जाने के बाद घर में हम तीनों ही रहते थे और रात को भी हम तीनों एक ही बेड पर सोते थे मैं बीच में सोती थी और मेरा बेटा मेरी एक तरफ और मेरी बेटी मेरी दूसरी तरफ सोती थी।

हम उस रात भी ऐसे ही सो रहे थे और रात को 1 बजे जब मैं नींद से जागी तो मेरा बेटा और बेटी दोनों ही गहरी नींद में सो रहे थे मैं रात को भी साड़ी पहनकर ही सोती हूँ तो मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोले और अपनी साड़ी के पल्लू को भी अपने शरीर से दूर किया और वैसे ही सो गई और मैंने मेरे बेटे की तरफ अपना मुहँ कर लिया था और उसकी टाँगों के ऊपर मैंने मेरी एक टांग डाल ली और सोने का झूंठा नाटक करने लगी फिर मेरे पैर की वजह से उसकी नींद टूट गई और उसकी आँख खुल गई फिर मैंने अपनी आँखे बंद कर ली और उसके बाद मैंने आँख नहीं खोली शायद वह मेरे नंगे बब्स को देख रहा था फिर थोड़ी देर बाद उसका एक हाथ मेरे बब्स पर आया और वह भी मेरे बब्स पर हाथ रखकर सो गया और फिर मैंने अपनी आँख खोली तो वह अपनी आँखें बंद करके सोया हुआ था फिर मैंने उसका हाथ अपने बब्स के ऊपर से हटाया और उससे थोड़ी दूर हो गई और सो गई थी और मैंने ब्लाउज खुला ही छोड़ रखा था फिर थोड़ी देर बाद मेरे शरीर पर फिर से एक हाथ आया लेकिन फिर थोड़ी देर में मेरे दूसरी तरफ से भी एक हाथ आया और शायद वह हाथ मेरी बेटी का था फिर मैंने उसके बाद रातभर अपनी आँखे नहीं खोली और रातभर उन दोनों के हाथ मेरे शरीर पर ही थे फिर दूसरे दिन सुबह जब में नींद से उठी तो मैंने देखा कि मेरा बेटा आधा नंगा था और मेरी बेटी की सलवार भी नीचे सरकी हुई थी तब मुझे पता चला कि मेरी बेटी तो मुझसे भी तेज़ थी वह तो अपने भाई के साथ ही चुदाई करती थी उस दिन दोनों की छुट्टी थी इसलिए कुछ काम भी नहीं था तो मैं फिर से बिस्तर पर सो गई और जब तक वह दोनों सोकर नहीं उठे तब तक मैं भी नहीं उठी उनके उठने के बाद में मैं उठी और अपने कपड़े ठीक किए और उठकर बाहर आ गई।

और फिर मैंने अब अपने बच्चों पर नज़र रखना शुरू कर दिया था 6-7 दिन हो गये थे लेकिन मुझे कुछ भी गड़बड़ नज़र नहीं आई लेकिन एक दिन दोपहर में जब मैं सोई हुई थी तब मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दी तो मैंने सोचा कि क्या हो रहा है यह और देखने के लिए उठकर बाहर आई तो मैंने देखा कि मेरे सामने ही मेरे दोनों बच्चे एक दूसरे से आपस में ऐसे लिपटे हुए थे जैसे कि वह दोनों पति पत्नी हो मैं यह सब चुपके से देख रही थी मेरा लड़का तो मेरी बेटी को मेरे पति से भी अच्छा चोद रहा था और वह मेरी बेटी को कुतिया बनाकर चोद रहा था फिर लगभग 15-20 मिनट तक उनका वह चुदाई का खेल चला और फिर मेरे बेटे ने मेरी बेटी के बब्स पर अपना वीर्य निकाल दिया था और फिर दोनों अलग हो गये तभी मैं उस कमरे में आई और दोनों के सामने आकर खड़ी हो गई तो वह दोनों ही मुझे वहाँ देखकर एकदम से चौक गये थे और वह दोनों बहुत डर भी गये थे फिर मैं उनके पास गई और उनसे कहा कि तुम दोनों यह क्या कर रहे थे? यह सब करते समय तुमको मेरा जरा सा भी ख्याल नहीं आया कि तुम्हारी माँ का क्या होगा वह तो अकेली ही है ना तो पति साथ देता है और बच्चे है जो अकेले ही मज़े ले रहे है कम से कम मेरे बारे में एकबार तो सोचा होता और राजवीर तुमको देखकर तो ऐसा लगता है कि तुम तो बस अपनी बहन को ही प्यार दोगे और मुझे कुछ भी नहीं।

मेरे मुहँ से ऐसी बात सुनकर उनका डर अब कुछ कम हुआ और फिर मैं अपने बेटे के पास गई और उसका लंड अपने हाथ में लिया जो कि अभी ताज़ा चुदाई से निकले वीर्य की वजह से चिपचिपा हो रहा था तो मैंने उसके लंड को अपने मुहँ में ले लिया और उसको आइसक्रीम की तरह से चूसने लगी और वह दोनों ही मेरी तरफ देख रहे थे क्योंकि शायद मेरा बेटा तो इसके लिए तैयार भी नहीं था और उसने मुझसे कहा कि मम्मी यह काम हम आज रात को करते है ना क्योंकि अभी में बहुत थक गया हूँ और मुझे मेरी कोचिंग पर भी जाना है लेकीन मैं तो बहुत दिनों से प्यासी थी तो मुझसे तो रहा ही नहीं जा रहा था लेकिन फिर भी मजबूरी में मुझे वह काम बीच में ही अधूरा छोड़ना पड़ा और फिर मैं रात होने का इंतज़ार करने लगी थी और मेरी बेचैनी भी हद से बाहर होती जा रही थी तो मैंने रात के 8.30 बजे ही खाना खा लिया था और बिस्तर लगा दिया था बाहर बहुत जोरों से बारिश हो रही थी और जब राजवीर कोचिंग से घर वापस आया तो वह पूरी तरह से भीगा हुआ था तो मैंने उसको टावल दिया और दूसरे कपड़े भी दिये फिर मैंने उसको खाना परोसा और उसके खाना खाने के बाद उसको मैं बेडरूम में ले गई और हमारे पीछे-पीछे मेरी बेटी भी आ गई थी मैंने बेडरूम का दरवाजा बंद किया और राजवीर से लिपट गई और मैं उसे एकदम से चूमने और चाटने लगी तो उसने भी मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और वह मेरी गांड को भी दबाने लगा वह मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरी गांड को भी सहला रहा था फिर उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रखे और मुझे किस करने लगा मैं भी किस करने में उसका पूरा साथ देने लगी थी और 5-7 मिनट तक हमारे होंठ जैसे एक दूसरे से चिपक से गये थे इस बीच में मेरी बेटी भी हम दोनों का साथ देने के लिये हमारे साथ आ गई थी और उसने मेरी पीठ पर किस करना शुरु कर दिया अब हम तीनों ही सेक्स के सागर में डूबकर गोते लगा रहे थे राजवीर ने अब मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ा और उसे खींचते हुए मेरी साड़ी उतार दी और मेरी बेटी ने मुझे पीछे से पकड़ा और वह मेरे बब्स को दबाने लगी और उसने मेरा ब्लाउज खोला और मेरे दोनों बब्स को बाहर निकाला और उनको फिर से दबाने लगी अब मैं सिर्फ़ पेटीकोट में ही थी जिसे भी मेरे बेटे ने उतार दिया और निकालकर फेंक दिया अब मेरे शरीर पर एक भी कपडा नहीं था मैं मेरे ही बच्चों के सामने पूरी तरह से नंगी होकर खड़ी थी और मुझे शर्म भी नहीं आ रही थी मैं जैसे उन दोनों की क़ैद में थी वह दोनों मुझसे जैसे चाहे वैसे सलूक कर रहे थे अब उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और राजवीर ने तो मेरी कमर के नीचे वाले हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया था और मेरी बेटी ने मेरी कमर के ऊपर के हिस्से पर राजवीर तो मेरी गोरी-गोरी जाँघों को देखकर एकदम पागल सा हो गया था और वह मेरी जाँघों को बड़े ही प्यार से सहलाने लगा और उनको चूमने लगा था।

मेरी बेटी तो एक छोटे बच्चे की तरह मेरे बब्स को चूस रही थी वह तो मुझे एक औरत कम और मर्द ज्यादा लग रही थी मैं भी उन दोनों की हरकतों से एकदम पागल सी हो उठी थी और मेरे मुहँ से सिसकियाँ निकलने लगी और मेरी चूत भी गीली हो गई थी और मेरे निप्पल खड़े हो गये अब मैंने भी मेरे बेटे की पेन्ट में हाथ डाला और उसकी पेंट को खोलकर उसको भी पूरा ही नंगा कर दिया अब उसका लंड मेरे सामने किसी साँप की तरह खड़ा था फिर मैंने उसको अपने हाथ में थामा और उसको अपने मुहँ में डालकर चूसने लगी मैंने उसका लंड पूरा ही अपने मुहँ में घुसाया और फिर बाहर निकाला फिर मैंने उसके लंड को अपने मुहँ में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया तो कुछ देर के बाद मेरे बेटी ने भी उसके सब कपड़े उतार दिए और वह मेरी चूत में अपनी ऊँगली डालने लगी मेरी चूत गीली थी और उसके ऊँगली डालने की वजह से मेरी चूत में फिर से चिपचिपाहट सी हो गई थी मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था तो मैंने राजवीर से कहा कि अब मुझे सहा नहीं जा रहा है मैं बहुत दिनों से प्यासी हूँ अब मुझे और ज़्यादा मत तड़पाओ अब डाल भी दो यह तुम्हारा मोटा लंड मेरी इस चूत में और बन जाओ मेरे पति फिर राजवीर ने मुझे ज़मीन पर लेटा दिया और मेरी दोनों टाँगे हवा में फैलाई और मेरी चूत पर अपना लंड रखा और मुझसे कहा कि मम्मी अब तैयार हो जाओ जन्नत की सैर करने के लिए और फिर उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया जिससे मुझे थोड़ा दर्द हुआ और मेरे मुहँ से एक दबी हुई चीख निकल गई राजवीर का लंड थोड़ा बड़ा था इसलिए उसे मेरी चूत में जाने के लिए थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ी थी पर एक ही धक्के से उसका लंड मेरी चूत में पूरा चला गया था अब राजवीर उसे मेरी चूत में अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे भी अब मज़ा आने लगा था पर राजवीर ज़रा जोर से कर रहा था इसलिए थोड़ा दर्द भी हो रहा था और मैं सिसकियां भर रही थी वह तो बड़ी ही तेज़-तेज मुझे चोद रहा था मेरा सारा शरीर ही हिल रहा था मुझे भी उसके लंड को अपनी चूत में पाकर बहुत मज़ा आ रहा था वह मुझे किसी जंगली जानवर की तरह चोद रहा था उधर मेरी बेटी भी अब अपनी चूत में ऊँगलिया डालकर मज़े ले रही थी अब वह रसोईघर में से जाकर एक खीरा-ककड़ी लाई थी वह लम्बी और मोटी थी उसने वह ककड़ी अब उसकी चूत में डाली और उसे अन्दर बाहर करने लगी इधर राजवीर भी मेरी चूत को पूरी गति से चोद रहा था राजवीर का लंड मेरी चूत में खूब खलबली मचा रहा था और मेरी चूत में से छप-छप की आवाजें आ रही थी अब राजवीर के चोदने की स्पीड थोड़ी और बढ़ गई और मेरा शरीर भी अब अकड़ सा गया था और मेरी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया और मैं एकदम से शांत हो गई।

पर राजवीर मुझे चोदता ही जा रहा था अब राजवीर ने मुझे घोड़ी बनने के लिए कहा और उसने पीछे से मेरी चूत में अपने लंड को डाला और आगे-पीछे करना शुरू किया तो मेरी बेटी भी अब मेरे पास आई और मेरी गांड को चाटने लगी और मेरी गांड में अपनी ऊँगली को डालने लगी राजवीर अब थक गया था और उसके शरीर से पसीना बह रहा था तो वह रुक गया था अब मेरी बेटी ने उसके पास की खीरा-ककड़ी निकाली और मेरी चूत पर रख दी और उसको मेरी चूत में धकेलने लगी मेरे चूत में पहले से ही एक लंड था और ऊपर से मेरी बेटी भी खीरा-ककड़ी को डाल रही थी इसलिए मेरी चूत में अब बहुत दर्द होने लगा तो मेरे मुहँ से भी अब चीख निकलने लगी तो मैंने मेरी बेटी को रोका पर वह नहीं मानी मेरी चूत में अब बहुत तेज दर्द होने लगा और दर्द के मारे मेरी आँखो से आँसू निकलने लगे पर मेरी बेटी ने वह पूरी खीरा-ककड़ी ही मेरी चूत में डाल दी थी और राजवीर भी अब उसके लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लग गया था मेरी चूत तो अब फट ही गई थी और मेरी आँखो से भी आँसूओ की धारा बह रही थी फिर थोड़ी देर के बाद राजवीर भी अकड़कर झड़ गया और उसने मेरी चूत में ही उसका सारा माल छोड़कर मेरी चूत में ही अपने लंड को घुसाए रखा।

और बाद में हम तीनों ही नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर सो गए थे

हाँ तो दोस्तों अब जब भी मेरे पति घर पर नहीं रहते तब हम लोग हमेशा चुदाई का खेल खेलते है।

धन्यवाद मेरे प्यारे दोस्तों !!

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