पड़ोसन ने मुझे कुँवारा बाप बनाया

हाय फ्रेंड्स Antarvasna मेरा नाम अनिल Kamukta है और मैं 24 साल का हूँ मैं दिल्ली के पास फिरोजाबाद का रहने वाला हूँ और मैं भी आप सभी की तरह ही कामलीला वेबसाइट पर पिछले कई महीनों से कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मुझे अब तक की इसकी सभी कहानियाँ बहुत ही अच्छी लगी है कामलीला की कहानियों से ही प्रभावित होकर मैनें भी अपने साथ घटी एक घटना को कहानी का रूप दिया है और आप सभी के सामने लेकर आया हूँ मेरे इस प्रयास में अगर मुझसे कोई गलती हो जाए तो मुझे माफ़ कर देना।

तो दोस्तों अब मैं अपनी कहानी को शुरू करता हूँ जो कि इस प्रकार है…

दोस्तों यह बात उस समय की है जब मैं 19 साल का था और हमारे पड़ौस में एक परिवार नया-नया ही रहने आया था कुछ ही दिनों में वह हमारे परिवार से काफी घुल-मिल गए थे क्योंकि उनका व्यवहार बहुत अच्छा था उस परिवार में पति-पत्नी और दो बच्चे थे मैं उनको अंकल-आंटी ही बुलाता था अंकल का नाम रफीक था और उनकी उम्र 35 साल के लगभग थी और आंटी का नाम नाज़िया था और उनकी उम्र 32 साल थी और वह दिखने में भी बहुत ही खूबसूरत लगती थी उनका फिगर 34-30-36 का था और उनके शरीर रंग थोड़ा गेहुँवा था उनके पति की एक फ्रीज, एसी ठीक करने की दुकान थी उनकी दुकान बहुत अच्छी चलती थी उनका बेटा जावेद 7 साल का था और बेटी अमरीन 5 साल की थी।

मैं अक्सर उसके घर जाता था उनके बच्चों के साथ खेलने के बहाने से नाज़िया आंटी के बड़े-बड़े बब्स मुझे बहुत पसंद थे मैं उनकी मस्त गांड और क्लीवेज का दीवाना हो गया था नाज़िया आंटी के बारे में सोचकर रोज बाथरूम में जाकर मूठ मारने लगा था और ज्यादा कुछ करने से मैं डरता था इसलिए उसके नाम पर अपना लंड हिलाकर ही संतोष करना पड़ता था।

एक दिन मैं उनके घर गया…

मैं :- आंटी.. जावेद और अमरीन है क्या?

नाज़िया आंटी :- नहीं वह तो स्कूल में कुछ दिन की छुट्टियां लगी है तो अपने मामा के यहाँ गए हैं।

मैं :- ठीक है तो मैं चलता हूँ।

आंटी :- रूको ना.. चाय का समय हो रहा है मैं अकेली थी तुम्हारे अंकल भी बच्चों को उनके मामा के यहाँ छोड़ने गए है इसलिए नहीं बना रही थी अब तुम आ गये हो तो साथ में बैठकर पीते है।

फिर मैं सोफे पर बैठ गया

फिर वह चाय बनाने किचन में चली गई और मैं सोफे पर बैठकर उनका इंतज़ार करने लगा और टीवी देखने लगा और कुछ देर बाद वह आ गई मेरा लंड तो उनको देखकर ही खड़ा हो गया था और आज मौका भी था और फिर हम चाय पीने के साथ बातें करने लगे थे उनको भी शायद यह पता चल गया था कि मेरा लंड खड़ा हो रहा है और वह बात करते हुए मेरी जाँघ पर हाथ रख रही थी शायद उसने मेरी पेन्ट का तंबू देख लिया था।

नाज़िया :- यहाँ के लड़के मुझको बहुत घूरते रहते है।

मैं उनके मुहँ से यह बात सुनकर चौंक गया।

नाज़िया :- अरे क्या हुआ मैं तुम्हारे बारे में नहीं कह रही हूँ लेकिन यहाँ के और लड़के जब मुझे घूरते है तब उनकी नज़र मुझे बहुत खराब लगती है।

फिर मेरे मुहँ से अचानक ही निकल गया कि आप औरतें ही तो हमको उकसाती हो।

तो वह हँसने लगी..

वह भी अब खुलकर बोल रही थी और मैं भी खुलकर बोल रहा था।

नाज़िया :- मैनें देखा है कि यहाँ के जवान लड़के मेरे जैसी जवान और शादीशुदा औरतों को लाइन मारते रहते है।

मैं :- कुछ औरतें होती ही ऐसी है कि जिनको देखकर किसी का भी खड़ा हो जाए”

नाज़िया :- क्या खड़ा हो जाए?

मैं सहम गया और बोला कि वह आंटी…

वह क्या….बोल ना

मेरी जुबान हड़बड़ाने लगी.. और मैं “वो… वो… करने लगा”

फिर नाज़िया आंटी हँसने लगी और बोली कि “उसे लंड कहते है बुद्धू”

फिर जाकर मेरी सांस में सांस आई और उसने कहा कि “तेरा लंड दिखाएगा क्या?”

मैं समझ गया था कि उसके दिल में भी कुछ तो है और फिर मैं खड़ा हो गया और उसने मेरा लंड पकड़कर देखा और कहा कि “तेरा तो बहुत बड़ा है रे…” फिर उसने मेरी पेन्ट की चेन खोल दी और मैनें भी अपनी पूरी पेन्ट ही उतार दी फिर उसने मेरी अंडरवियर भी उतारी तो मेरा खड़ा लंड एक ही झटके में बाहर निकलकर ऊपर-नीचे होकर आंटी को सलामी देने लगा मेरे खड़े लंड को देखकर वह थोड़ी सहम सी गई थी और कहने लगी कि.. “हाय-रे कितना बड़ा है यह तो.. इस उम्र में ही तेरा इतना बड़ा है तो…”

फिर आंटी ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी और मेरे लंड को आगे-पीछे करके हिलाने लगी और हिलाते हुए ही मुझसे पूछा कि “क्या तुमने कभी किसी को चोदा भी है क्या?”

“नही आंटी”

फिर मुझसे आंटी ने कहा कि “अब मुझे आंटी मत कहो तुम मुझे नाज़िया ही कहो” और वह खड़ी होकर मेरे गले से लग गई अब हम दोनों ही गरम होने लगे थे और पता नहीं कब हमारे होंठ एकदूसरे के होठों से चिपक गए और एक लम्बा सा किस हो गया।

अब मेरी हिम्मत भी पूरी तरह से खुल गई थी।

मैनें अब उनके साथ खुलकर चूमा-चाटी शुरू कर दी थी और उनके बब्स को भी दबाने लग गया था और वह भी मेरे लंड को हिला रही थी अब मैनें उनको सोफे पर ही लेटाकर उनके ऊपर चढ़ गया और हम एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे और दोनों ही पूरे नंगे हो गये थे।

फिर मैनें उनके नंगे बदन को खूब चूमा जिससे वह अब बहुत ज़्यादा गरम हो गई थी और मुझसे कहने लगी थी कि अब और मत तड़पाओ और डाल दो अपना लंड मेरी इस चूत में और चोद डाआल्लो मुझे जल्दी से प्लीज़ लेकिन मैं उसको और तडपाना चाहता था और फिर हम दोनों ही 69 की पोजीशन में आ गये और जब मैनें उसकी चूत को देखा तो मैं उसकी चूत को देखता ही रह गया आंटी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और एकदम फूली हुई चूत थी और मैं फिर आंटी की चूत के पास अपना मुहँ ले जाकर आंटी की चूत को सूंघने लगा तो उसमें से बहुत ही मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी अब मैं आंटी की चूत को चाटने लगा तो मैनें देखा कि आंटी भी अब मजा लेने लगी थी और आंटी भी बोलने लगी कि चाट मेरे राजा चाट मेरी इस चूत को तेरे अंकल ने तो आज तक कभी मेरी चूत को नहीं चाटा आज से पहले मुझे भी नहीं पता था कि चूत को चटवाने में इतना मजा आता है बना ले मुझे अपनी रंडी और चाट मेरी चूत को उहह माहह मज़्ज़ाआआआ आ गया रे…

और आंटी के होठों को चूमने लगा और एक लम्बा सा किस कर दिया जिसमें आंटी ने भी मेरा पूरा साथ दिया मैनें भी फिर जोश में आकर अपना लंड उनकी चूत पर रखा और बोला कि “यह ले मेरा लंड और ज़ोर से उसकी चूत में धक्का मारा और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर घुस गया था जिससे वो चीख पड़ी “हाय.. कितना बड़ा है.. बाहर निकाल इसे फाड़ डाली इसने तो मेरी चूत।

मैं अब और भी ज्यादा जोश में आ गया था क्योंकि एक खूबसूरत हसीना मेरे नीचे नंगी लेटी हुई थी और ऊपर से उसकी प्यारी सी टाईट चूत में मेरा लंड घुसा हुआ था फिर मैं कहाँ रुकने वाला था और मैनें उसकी एक ना सुनी और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में अपने लंड से धक्के लगाने चालू कर दिए।

मेरा लंड लेना था ना तुझको यह ले और ले मेरा लंड लेते ही फट गई ना तेरी चूत हाँ मेरे राजा फट तो गई मेरी चूत तेरे लंड से पर तुमने मेरी मासूम सी चूत को एक रंडी की चूत बना दिया फिर मैनें अपनी “चुदाई एक्सप्रेस” की रफ्तार को थोड़ा और तेज किया तो आंटी को भी मजा आने लगा और वह भी कहने लगी

आहह…आहह… चोदो मेरे राजा ईससस्स… बहुत मज़ा आ रहा है

क्यो साली… तेरा पति नहीं चोदता है क्या तुझको?

चोदता तो है पर अब पहले जैसा मजा कहाँ राजा बस 5 मिनट में निकल जाता है उसका तो साला नामार्द कहीं का ईसस्स… आज से तुम ही मेरे शौहर हो अपनी मर्दानंगी से मुझे अपना गुलाम बना लिया है तुमने मुझे आज तो..

साली रंडी आज से तू मेरी रखैल है हाँ मेरे राजा आज से मैं बस तुम्हारी ही हूँ और मैं दे-दनादन उसको चोदे जा रहा था और वह भी अपनी गांड को ऊपर उछाल उछालकर मेरा पूरा-पूरा साथ दे रही थी मेरे लंड को आंटी बड़े ही मज़े से अपनी चूत में ले रही थी और फचा-फच कि आवाज़ आ रही थीआ

फिर मैनें उसको घोड़ी बनाकर और उसके कंधे पकड़कर लगभग 15 मिनट तक चोदा और वह इस पूरी चुदाई के बीच 3-4 बार झड़ चुकी थी और मुझसे कहने लगी कि अब तो मेरी चूत का सारा पानी ही सूख गया है और मेरी चूत में बहुत जलन हो रही है अब गिरा भी दो ना राजा अपना माल अब मैं थक भी गई हूँ भर दो ना मेरी चूत में अपना पानी और इसकी प्यास को बुझा दो ।

और फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से झटके लगाने लगा और कुछ देर बाद ही उसकी चूत में मेरे लंड ने गरमा-गरम माल की पिचकारी मारी।

तो वह मुझसे आहह…. करती हुई कहने लगी शुक्रिया… मेरी जान

वह इस चुदाई से बहुत खुश लग रही थी फिर मैं उसके ऊपर ऐसे ही 10 मिनट तक लेटा रहा फिर मैं खड़ा हुआ तो उसने अपने मुहँ में मेरा लंड लेकर उसको पूरा ही साफ़ कर दिया और मेरे लंड को सलाम करते हुए बोली कि तुम्हारी अमानत को मैं संभालकर रखूँगी मेरे राजा।

और फिर मैनें उसके होठों पर एक लम्बा किस दिया और अपने कपडे पहने और उसको भी पहनने में मदद करी और फिर वापस अपने घर चला आया।

उसके बाद मैनें उसको 3 साल तक चोदा था और इसी बीच उसने एक बहुत ही खुबसूरत से बेटे को जन्म दिया और उसने मुझे यह भी बताया कि यह तुम्हारा ही खून है फिर मेरी नौकरी एक बड़ी कम्पनी में लग गई तो मैं वहाँ से दिल्ली चला आया और अब तो उससे फ़ोन पर ही बात होती है और वह मुझसे रोते हुए कहती है कि तुम्हारी बहुत याद आ रही है मेरी जान जल्दी से चले आओ ना तो मैनें भी उससे कहा कि छुट्टीयों में आऊँगा मेरी जान…

तो यह थी मेरी एक छोटी सी कहानी।

धन्यवाद प्यारे पाठकों !!

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