पड़ोसन की गोद में मेरा बच्चा

हाय दोस्तों, Antarvasna कैसे हो आप सभी लोग मैं दीपक आपका दोस्त आपके सामने एकबार फिर से हाज़िर हूँ अपने एक और नये सेक्स अनुभव के साथ मुझे बहुत अच्छा लगा की आप सभी ने मेरी पिछली कहानियों को बहुत पसंद किया और मुझे यह सब आप सभी के भेजे बहुत सारे ईमेलों से पता लगा है।

मैं इस बात के लिये आप से माँफी चाहूँगा कि मैं आप सभी लोगों से पिछले समय से दूर रहा क्योंकि इस बीच मुझे एक बहुत बड़ी विदेशी कम्पनी में नौकरी मिल गई थी अब मैं वापस अपने देश आ गया हूँ क्योंकि उस कम्पनी वालों ने मेरा तबादला यही के ऑफिस में कर दिया है तो मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन का एक और सच्चा सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ जो कि मेरे साथ पिछले दिनों ही घटी घटना पर आधारित है मुझे उमीद है की आप सभी को मेरा यह सेक्स अनुभव जरूर पसंद आएगा।

दोस्तों आप यह कहाँनी कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दोस्तों यह बात आज से करीब करीब 3 महीने पुरानी है। मैं एक बहुमंज़िला इमारत में रहता हूँ वहाँ मैंने एक कमरा किराए पर लिया हुआ था वहाँ पर तीन और परिवार नीचे वाली मंज़िल पर रहते थे और तीन ही परिवार ऊपर वाली मंज़िल पर भी रहते थे और जिनके साथ मेरी यह घटना हुई थी।

वह मेरे बगल वाले कमरे में रहती थी और हमारे कमरों के ठीक सामने एक बड़ी बाल्कनी भी थी और हम सब एक परिवार की तरह ही रहते थे जब भी कोई त्यौहार होता था तो हम सब उसको एक साथ ही मिलकर मनाते थे मेरे साथ वाले कमरे में एक बहुत ही खूबसूरत सी एक भाभी भी रहती थी उसका नाम है वर्षा था और वह उत्तराखंड की रहने वाली थी और उनके कोई बच्चे भी नहीं थे।

उसका पति सुबह जल्दी ही काम पर चला जाता था और देर रात को घर वापस आता था। हम अक्सर एक दूसरे को देखते रहते थे और एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते भी थे जब भी वह मेरे पास से गुजरती थी तो उसके बदन की महक मुझे पागल बना देती थी मैं तो उसे कब से चोदना चाहता था मगर कैसे चोदूं? यह समझ में नहीं आ रहा था वह मुझे जिस नज़र से देखती थी उससे तो लगता था कि वह भी वही चाहती है जो मैं चाहता था फिर एक दिन उसने बातों–बातों में मुझ से पूछा कि तुम क्या करते हो? तो मैंने बोला कि मैं एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ। उस दिन बाद मैं जब भी अपने कमरे पर आता–जाता तो वह मुझे अजीब सी नज़रों से देखती और मुस्कुरा देती थी मैं भी मुस्कुराकर उनको जवाब दे देता था।

फिर एक दिन की बात है जब मैं अपने कमरे में भाभी के नाम की मूठ मार रहा था तो मेरी नज़र सामने बाल्कनी में लगे तार पर कपड़े डालती हुई भाभी पर पड़ी भाभी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था और वह अपने काम में मस्त थी उसके ब्लाउज में से उसकी चूचियां साफ़ दिख रही थी वह इतना उत्तेजित कर देने वाला नज़ारा था कि मैं चाहकर भी भाभी की चूचियों से अपनी नज़र नहीं हटा पा रहा था और मेरा दिमाग़ सोच रहा था कि यहाँ कौन देख रहा है केवल मैं ही तो देख रहा हूँ हाथ थोड़े ही लगा रहा हूँ मैं लगातार भाभी की उभरी हुई छाती को देख रहा था और मुझे इसमें बहुत मज़ा आने लगा था मुझे इस बात का पता ही नहीं चला कि भाभी मेरी इस हरकत को कब से नोटीस कर रही थी।

फिर जब वह अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करके आगे बढ़ी तो मैं एकदम से डर गया और अब मेरी गांड भी फटने लगी थी खैर उस दिन तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अब वह मुझे और भी अजीब नज़रों से देखने लग गई थी और फिर एक दिन मुस्कुराते हुए उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया तो मैंने उसको कहा कि शाम तक आऊँगा और फिर शाम को जब मैं उसके कमरे पर पहुँचा तो वह मेरा ही इंतज़ार कर रही थी उसने मुझे बताया कि उसके पति अपने ऑफिस के किसी काम से बाहर गए हुए थे तो जब मैंने उससे पूछा कि वह इतनी परेशान क्यूँ है? तो वह गुमसुम सी हो गई थी और जब मैंने उससे पूछा कि आखिर बात क्या है? तो वह एकदम से रोने लगी शायद उसकी अपने पति से कुछ कहा सुनी हो गई थी जब मैंने उसको चुप होने के लिए कहा और कहा कि चलो कहीं बाहर घूमने के लिए चलते है तो वह एकदम से मुझसे लिपट गई।

तो फिर मैंने उससे कहा कि अरे-क्या हुआ? और तुम यह क्या कर रही हो? तो वह एकदम से बोली कि मेरे पति मुझको किसी भी तरह से खुश नहीं कर पाते है मैं भी इतनी खूबसूरत हसीना को अपनी बाँहों में पहली बार लेकर बहक सा गया था और मैंने प्यार से उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया जिससे अब वह भी बहक सी गई थी।

फिर कुछ देर तक तो हम चूमा चाटी ही करते रहे कभी मैं उसके नीचे के होंठ को चूसता और कभी ऊपर वाले को और कभी मैं उसके गालों को तो कभी उसके गले को चूमता उसके कोमल और मुलायम, रसीले होंठ मेरे हठीले होठों के बीच में पिस रहे थे। वह तो बस हुम्म्म… ह्म्‍म्म्म… ही करती जा रही थी अब मेरा एक हाथ उसके बड़े-बड़े बब्स पर भी घूमने लगा था। और अब मैं थोड़ा सा नीचे होकर उसके बब्स की गहराइयों में अपना मुहँ लगाकर उसको चूमने लगा था।

मेरे लिए वह पल किसी जन्नत से कम नहीं था फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ पर लगाया और फिर उसके कुर्ते के अन्दर अपना हाथ डालकर उसकी नर्म और कोमल पीठ को सहलाने लगा मुझे लगा की यह तंग कुर्ता और ब्रा अब हमारे प्रेम में बाधक बन रही है तो मैंने वर्षा को उसका कुर्ता उतारने को कहा तो उसने मुझसे कहा कि तुम खुद ही उतार दो ना तो फिर मैंने झट से उसके कुर्ते और सलवार को एक ही पल में उतार दिया था अब उसकी भरी हुई जाँघो के बीच में मात्र छोटी सी पैन्टी और छाती पर ब्रा ही रह गई थी।

फिर उसने मुझे भी मेरे कपड़े उतारने को भी कहा तो मैंने भी उसको कह दिया अब मेरे कपड़े तुम खुद ही उतार दो तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा फिर उसने एक कातिलाना मुस्कान देते हुए अपने कोमल हाथों से मेरे भी कपड़े उतार दिए मैं अब सिर्फ़ एक अंडरवियर में ही था और फिर हम अब एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे थे कभी मैं उसके गले को चूमता और कभी उसके कान को काट देता वह भी ऐसा ही कर रही थी उसके बगलों में से एक मादक सी गंध निकल रही थी जो मुझे बहुत ज्यादा मदहोश करते हुए चुदाई के लिए प्रेरित और आकर्षित कर रही थी फिर हमने अपने बचे हुए कपड़े भी उतार दिए।

अब हम दोनों ही पूरे नंगे थे मैं उसको लगातार चूमें जा रहा था कभी उसके एक बब्स को अपने मुहँ में भर लेता और कभी दूसरे को अपने हाथ से मसलता और फिर दूसरे को मुहँ में लेकर चूसने लग जाता और फिर अब मैं धीरे-धीरे नीचे सरकने लगा पहले तो मैंने उसकी नाभि को चूमा और फिर पैरों को वह भी उत्तेजना में आकर मेरी पीठ में अपने नाख़ून मारने लगी थी जो हम दोनों को ही और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसकी गरम सांसो का आभास पाते ही मेरा लंड अकड़ गया।

और फिर हम दोनों ही 69 की अवस्था में आ गये और वह धीरे–धीरे मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उसकी चूत को चाट रहा था अब धीरे–धीरे उसका सारा शरीर अकड़ने लगा तो मैं समझ गया था कि अब वह झड़ने वाली है। तो मैं ज़ोर–ज़ोर से उसकी चूत के दाने को चाटने लगा था तो उसने अपनी दोनों जाँघों के बीच में मेरे सिर को दबाकर मेरे मुहँ को भी जोर से अपनी चूत में दबाया तभी एकदम से उसकी चूत से उसका माल निकला और मैं उसका सारा माल चाट गया फिर मैंने उठकर अपने लंड को उसकी चूत के मुहँ पर लगाया और उसको चूमने लगा मैं अपने दोनों हाथों से उसके बब्स को दबाने लगा ताकि उसका ध्यान चुदाई पर ना जाए जो कि अब शुरू होने वाली थी और फिर मैंने मौका देखकर एक ज़ोर का झटका लगा दिया जिससे मेरा लंड उसकी चूत में थोड़ा सा ही अन्दर चला गया तो सही पर फिर से बाहर आ गया फिर भी मैंने दूसरी बार फिर से अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रखा और उसके होठों को ज़ोर–ज़ोर से चूमने लगा।

और नीचे से एक और जोरदार झटका लगाया जिससे अबकी बार मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया था मुझे लगा कि उसकी चुदाई काफ़ी कम हुई थी इसलिए उसकी चूत इतनी टाईट थी और मुझे ऐसा भी लग रहा था कि मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ और मैंने उसके दर्द को थोड़ा कम करने के लिए उसको अपनी बाँहों में ले लिया और उसको चूमने और चाटने लगा तो थोड़ी ही देर बाद उसका दर्द कुछ हद तक तो कम हो ही गया था अब वह आहहह… अहहह… उफ्फ्फ… करके चिल्लाने लगी और फिर करीब 10-15 धक्कों के बाद वह भी अपनी गांड को उठा-उठाकर चुदवाने लगी तो मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार को थोड़ा और बढ़ा दिया मेरा लंड लेकर उसको भी बड़ा ही मज़ा आ रहा था और मुझे उसकी चूत में अपना लंड डालकर जन्नत का अहसास हो रहा था अब करीब 10-15 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था मैं अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था तो मैंने उसको कहा कि वर्षा जान, अब मेरा निकलने वाला है तो उसने कहा कि तुम मेरी चूत के अन्दर ही निकालना मेरे राजा और मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो प्लीज़-प्लीज़ मुझे कब से इंतज़ार था इस पल का प्लीज़ आज मेरे अन्दर ही अपने बीज को छोड़ दो और मुझे माँ बना दो।

फिर मैंने उसके कहने पर वैसा ही किया और अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया उस समय मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई जवालामुखी फट गया हो और मैं उसके ऊपर वैसे ही ढेर हो गया था अब हम दोनों पास–पास लेट गये थे और वर्षा मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर बहुत खुश लग रही थी शायद वह बहुत दिनों के बाद इतनी संतुष्टि से चुदी थी।

उसकी आँखो से अब आँसू निकलने लगे थे उसने मुझे धन्यवाद देते हुए कहा कि आज तुमने मेरी माँ बनने में मदद करी है अब मेरी जिंदगी का सूनापन भी दूर हो जाएगा उसके बाद उसे जब भी मुझसे चुदवाना होता था तो वह मुझे फोन करके बुला लेती है और मैं वर्षा की प्यास को बुझाने पहुँच जाता हूँ और फिर जब भी हमको मौका मिला हमने हमारा चुदाई का खेल खेला अब हमने चुदाई को रोक दिया है क्यूंकि अब वह माँ बनने वाली है।

धन्यवाद प्यारे पाठकों !!

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