चुदाई का सफ़र 1

नमस्कार कामलीला Antarvasna के पाठकों Kamukta आप सभी को यह जानकर बहुत ख़ुशी होगी कि आप सभी के विशेष आग्रह पर हम एकबार फिर से लेकर आये हैं हमारे बहुत ही लोकप्रिय लेखक चोदूराजा की कलम से बहुत ही रोचक और कामरस से भरपूर कहानियाँ हाँ तो कामलीला के प्यारे पाठकों आज से हम शुरू करने जा रहें हैं हमारे सबके प्यारे चोदूराजा की कहानियों की एक नई श्रंखला। तो आप सभी चोदूराजा के इस सेक्स के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार हो जाइये।

तो लीजिये दोस्तों पेश है आपके लिए चोदूराजा का पहला नज़राना..

आप यह कहानी कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे हो।

हाय दोस्तों मेरा नाम अखिल है और मैं नोएडा का रहने वाला हूँ मेरी लम्बाई 5.9 फुट है और मेरे लंड का साइज़ 6”लम्बा और मोटाई 3.5” है, और मैं भी आप सभी की तरह कामलीला का बहुत पुराना पाठक हूँ, मैं इस वेबसाइट की लगभग सारी सेक्स कहानियाँ पढ़ चुका हूँ।

तब मैनें भी सोचा कि मुझे भी अपना सेक्स अनुभव आप सभी के साथ शेयर करना चाहिए तो दोस्तों मेरी कहानी के बहुत सारे भाग होंगे, तो पढ़ते रहिए और लड़के अपने लंड को हिलाते रहो और लड़कियाँ अपनी चूत में ऊँगली करती रहो।

आज की यह कहानी हमारे गाँव से शुरू होती है जहाँ हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता है जिसका मुखिया हमारे गाँव का ज़मींदार है, और उसके परिवार में 2 लड़कियाँ और दो लड़के है, और उसकी एक बीवी थी उसकी दोनों लड़कियाँ बहुत खूबसूरत है।

और यह कहानी शुरू होती है जब मैं केवल 19 साल का था, वैसे तो उनके परिवार से हमारा कोई लेना-देना नहीं था, बस उनका रास्ता हमारी गली से होकर ही जाता था चाहे स्कूल जाना हो या फिर दुकान, पहले मैं आप सभी को उन दोनों लड़कियों का परिचय दे देता हूँ, यह बात आज से 17 साल पहले की है।

रानी भी तब 19 साल की ही थी, उस समय उसके छोटे छोटे बब्स थे, एकदम छोटी-छोटी सी नारंगी के जैसे, और बाकी के अंग भी दिखने में अच्छे थे एकदम गोरा रंग घुंगराले बाल बड़ी-बड़ी आँखे आप सभी कल्पना कर सकते हैं कि वह कैसी होगी मतलब 19 साल की उम्र में भी ऐसा लगता था कि उसे अभी पकड़ के चोद डालूँ, और सोनी की उम्र 18 साल थी लेकिन वह दोनों बिल्कुल जुड़वां ही लगती थी, एक को देखो चाहे दूसरी को देखो दोनों बिल्कुल एक जैसी ही लगती थी, सोनी के बब्स लगभग 34 और कमर 28 की और उसकी गांड का तो पूछो ही मत वह तो 36 के लगभग थी, मुझे उसके बारे में एक बात बाद में पता लगी कि उसके पड़ोस का एक चाचा उसकी गांड मारता था।

अब आगे कि कहानी पर आते हैं एक दिन रानी और उसका भाई दुकान से कुछ सामान लेकर आ रहे थे और मैं अपने घर के बाहर वाले कमरे में बैठा हुआ था, जब वह दोनों मेरे घर से थोड़ी दूरी पर थे तो मैनें देखा कि रानी बहुत मटक-मटक कर चल रही थी, उसने सिर्फ़ सलवार-सूट पहना हुआ था अन्दर समीज़ या ब्रा नहीं पहन रखी थी, वैसे भी उस समय ब्रा का चलन कम ही था, लड़कियाँ शादी के बाद ही ब्रा पहनती थी।

जब वह दोनों मेरे घर के पास आए तो मैनें उसके भाई (नवीन) से पूछा.

अरे भई क्या लाए हो बाजार से?

नवीन :- कुछ नहीं बस घर का कुछ सामान है।

मैं :- ऐसा क्या लाए हो जो बता नहीं सकते हो।

नवीन :- ऐसा कुछ नहीं है, बस किराने का ही कुछ सामान है।

तब रानी बीच में ही बोली कि क्यों तुझे जानकर क्या मतलब है, तो मैनें उससे कहा कि मुझे लेनी है, उसका भाई अभी छोटा था तो वह कुछ समझ नहीं पाया, पर समझी तो वह भी नहीं थी और मुझसे बोली कि चुप करो हम नहीं देंगे तुझे और वह दोनों वहाँ से चले गए।

दरअसल मैं शुरू से ही बहुत शरारती था क्योंकि हम सरकारी स्कूल में पढ़ते थे और इस तरह की छेड़खानी हम आए दिन उसके साथ किया करते थे, लेकिन हमको सेक्स का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था, “क्योंकि आज से 17 साल पहले तो इंटरनेट और मनोरंजन के साधनों का अभाव था” हर शाम को हम सब छुप्पा-छुप्पी खेलते थे तो हमारे मोहल्ले के सभी लड़के और लड़कियाँ साथ ही खेलते थे जो कि ज़्यादातर अपने परिवार से ही थे, हमारा परिवार बहुत बड़ा था और हम अलग ही रहते थे लेकिन हमारे मोहल्ले में सबसे ज़्यादा घर हमारे ही थे।

खेल में मैं और मेरे ताऊजी की लड़की सीमा एकसाथ ही छिपते थे वह मुझसे 3 साल बड़ी थी, हम ज़्यादातर एक पुराने से मकान में खेलते थे, उसमें 10-15 कमरे थे और वह भी बड़े-बड़े, रात में वहाँ जाना नामुमकिन था, इसलिए हम सब शाम को ही खेलते थे अंधेरा होने पर हम अपने-अपने घर चले आते थे, सीमा मेरे साथ इसलिए छिपती थी क्योंकि मैं बहुत ही ज़्यादा गोरा था, और वह बार-बार मेरी चूंटी काट लेती थी और कहती थी कि तू तो मेरा सबसे प्यारा भाई है. एक शाम हम सब छिप रहे थे और मैं सबसे आखरी वाले कमरे में था वहाँ कोई भी नहीं जाता था।

मेरी गांड तो फटी जा रही लेकिन फिर सीमा ने कहा कि कुछ भी नहीं होगा तुम डरो मत सब यहीं तो है, तो फिर मैं उसके पीछे हो गया, वहाँ बिल्कुल घुप अंधेरा था, हाथ को हाथ भी नहीं सूझ रहा था, बस बाहर से थोड़ी सी ही रोशनी अन्दर आ रही थी वह भी हमसे 5-10 फुट दूर, तभी अमित मेरे दूसरे चाचा का लड़का ढूंढते हुए उस कमरे की तरफ आने लगा तो सीमा ने कहा कि तू मेरे पीछे छुप जा, और मैं उसके पीछे छुपकर खड़ा होकर बाहर देखने लगा, तो सीमा की गांड मेरे लंड को जो कि उस समय 5 इंच के लगभग ही होगा छूने लगी थी. जैसा मैनें आपको बताया कि उस कमरे में हमारे अलावा कोई भी नहीं था तो अमित वहाँ से वापस लौट गया, तो फिर मैनें चैन की साँस ली।

पर सीमा ने कहा कि मैं ऐसे ही खड़ा रहूँ अमित फिर से आ सकता है, तो मैं उनसे चिपककर ही खड़ा रहा फिर थोड़ी देर बाद सीमा पीछे की तरफ अपनी गांड का दबाव बनाने लगी, और मैं भी उनसे चिपका ही रहा और मुझे कुछ गरम-गरम सा महसूस हो रहा था जो कि मुझे अच्छा भी लग रहा था लेकिन इसमें मेरी कोई ग़लत ईच्छा नहीं थी, क्योंकि मुझे सेक्स का क भी नहीं आता था फिर कुछ देर के बाद बिल्कुल अंधेरा हो गया, और हम छिपे ही रहे तो सीमा कहने लगी मैं सूसू करूँगी और तू भी करले फिर घर चलेंगे, अंधेरे में ही उन्होनें अपनी सलवार नीचे की और सुर्रर की आवाज़ आने लगी, मैनें भी दीवार पर सूसू किया, फिर मैनें सीमा से पूछा कि तुम सूसू करती हो तो आवाज़ बहुत आती है, तो वह हंसने लगी और कहा कि लड़कियाँ बैठकर सूसू करती है ना इसलिए।

फिर मैनें उससे पूछा कि तुम बैठकर सूसू क्यों करती हो, हमारी तरह खड़े होकर किया करो तो सीमा ने कहा चल हट गंदे।

मैनें फिर से पूछा तो सीमा अपनी सलवार का नाडा बाँधते हुए बोली कि कल बताऊँगी, और फिर हम घर आकर सो गये, फिर अगली दोपहर को स्कूल से आने के बाद मैं सीमा के घर चला गया, ताऊजी और ताईजी दिल्ली गये हुए थे और सीमा का भाई विशाल कॉलेज गया हुआ था घर पर मैं और सीमा ही थे, सीमा तब बाहर बर्तन धो रही थी, और मैं अंदर टीवी देखने लगा टीवी पर उस समय बस दूरदर्शन चेनल ही आता था।

जिसपर एक नाटक आ रहा था, सीमा भी बर्तन धोकर कमरे में आ गई थी और उसने पीले रंग का सूट सलवार पहना हुआ था, मैनें उसको बोला कि सीमा मैं बाथरूम जा रहा क्या तुम भी साथ में चलोगी क्या? तो सीमा बोली कि चल हट पगले अंधेरे की बात अलग थी, और फिर मैनें कहा कि चलो ना मुझे आवाज़ सुननी है, तो वह हँसने लगी और बोली ठीक है चल पगले, फिर मैनें बाथरूम में जाकर अपनी पेन्ट को खोलकर अपना लंड बाहर निकाला तो सीमा उसको घूर-घूरकर देखने लगी, एकदम गोरा लंड था मेरा, फिर सीमा ने भी अपनी सलवार खोली और सूसू करने लगी।

नीचे फर्श होने के कारण सूसू करने की आवाज़ और भी तेज आ रही थी और मैं झुककर नीचे देखने लगा तो सीमा हँसते हुए बोली कि ऐसे क्या देख रहा है? तो मैनें कहा कि आपकी लुल्ली कहाँ है तो सीमा बोली हमारी लुल्ली लड़कों के जैसी नहीं होती है।

फिर मैनें पूछा तो फिर कैसी होती है? तो सीमा बोली कि चल कमरे में चलकर बताती हूँ और फिर मैनें भी हाँ में अपना सिर हिलाया और फिर सीमा बोली कि जा मेन गेट को बंद करके आजा, फिर मैं नीचे जाकर गेट बंद करके वापस कमरे में आ गया, और मैनें देखा कि सीमा अपनी सलवार उतारकर बैठी हुई थी उनके ऊपर बस कुर्ता ही था और नीचे पैन्टी, मैनें कहा कि चलो अब दिखाओ।

मैं देखने के लिए बहुत उत्सुक था।

तो फिर सीमा ने कहा कि पहले अपने भी तो कपड़े उतार तो फिर मैनें अपनी पेंट उतार दी और अंडरवियर में उसके सामने खड़ा हो गया, मुझे उनकी मोटी-मोटी जाँघें देखकर कुछ हो रहा था, फिर सीमा ने अंडरवियर भी उतारने को कहा तो मैनें वह भी उतार दी, अब मेरा लंड खड़ा हुआ था यह देखकर सीमा बोली कि अरे वाह तेरी लुल्ली तो बड़ी कड़क हो रही है दिखा. और यह कहकर उसे अपने हाथ में पकड़ लिया, 5” के मेरे लंड में अजीब सी गुदगुदी सी होने लगी और फिर मैनें सीमा से कहा कि अब आप भी तो दिखाओ तो फिर सीमा ने पहले अपना सूट निकाला तो उनके बब्स समीज़ से बाहर आने को हो रहे थे वह लगभग 34 की साइज़ के होंगे पर मुझे उनसे कोई मतलब नहीं था, फिर उन्होनें अपनी समीज़ को भी निकाल दिया, और अब सीमा केवल पैन्टी में ही थी और किसी कामदेव की मूरत लग रही थी।

फिर मैं उनकी गांड को देखकर मैं बस उनकी गांड को ही देखता रह गया, और मैनें कहा कि सीमा अब तो दिखाओ ना ऐसे मेरे मज़े क्यों ले रही तो फिर सीमा ने थोड़ा मुस्कुराते हुए मेरे लंड को पकड़ा और कहा कि दिखाती हूँ, दिखती हूँ थोड़ा रुक तो जा. और फिर वह मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी तो फिर मैं तो ना जाने कहाँ खो सा गया और सीमा ने मेरी गोलियों को भी सहलाना शुरु कर दिया इस आनन्द को महसूस करके तो मेरी आँखें ही बंद होने लगी थी और फिर सीमा ने पूछा कि अखिल मज़ा आ रहा है ना? और मैनें इसस्ससस्स करते हुए कहा हाँ फिर सीमा ने अपनी पैन्टी खोल दी और मेरी नाक पर लगाकर कहा कि इसे सूँघो जब मैनें उनकी पैन्टी को सुंघा तो मुझे बड़ी ही मदहोश करने वाली खुशबू आ रही थी और फिर सीमा बेड पर लेट गई और कहने लगी कि जैसा मैनें किया तुम भी वही करो।

तो अब मैं भी सीमा की चूत पर हाथ फैरने लगा नीचे से ऊपर तक, उनकी चूत पर भूरे-भूरे बाल थे, और उनकी चूत बिल्कुल फूली हुई थी, फिर सीमा ने कहा कि इसमें अपनी ऊँगली डालो तो फिर मैनें अपनी एक ऊँगली को तेज़ी से डाल दिया तो सीमा ने उईईई कहते हुए कहा कि थोड़ा आराम-आराम से डालो और इधर मुझे भी मज़ा आ रहा था।

मैं अब आराम-आराम से उनकी चूत में ऊँगली करने लगा तो सीमा ने मेरा एक हाथ अपने एक बब्स पर रखवाया और कहा कि साथ-साथ में इसको भी दबाओ, तो मैनें पूछा कि इससे क्या होता है? तो सीमा ने कहा कि तुम बस दबाओ, और फिर मैं एक हाथ से उनके बब्स को दबाता और एक हाथ की ऊँगली से उनकी चूत को चोद रहा था, और सीमा सीईईईईई सीईईईईई कर रही और उनकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और मेरी ऊँगली अब बिल्कुल आराम से अंदर-बाहर होने लगी थी फिर थोड़ी ही देर में सीमा मेरे होठों पर किस करने लगी, और अपनी जीभ को मेरे मुहँ में चलाने लगी, फिर मैं भी उनके होठों को चूसने लगा था, मुझे तो इतना मज़ा आ रहा था कि पूछो ही मत दोस्तों।

मैं अब भी वह सीन सोचता हूँ तो मेरा लंड फटने को होता है, फिर सीमा ने मुझे जोर से खुद से चिपका लिया और कहा कि अब जहाँ चाहो वहां से दबाओ, मेरी निगाह तो बस उनकी फूली हुई गांड पर ही थी और मैं ज़ोर-ज़ोर से उनकी गांड को दबाने लगा, उन्होंने फिर से मुझे उनके बब्स को चूसने को कहा तो मैं उनके बब्स को चूसने लगा बड़ा ही मज़ा आ रहा था सीमा की सिसकारियां अब और भी तेज होने लगी थी, मैं उनके बब्स को चूसते हुए अब उनके निपप्ल को भी चूसने लगा था जो कि बिल्कुल चॉकलेट के रंग जैसे थे और उनको दाँतों से दबाने लगा, मैं थोड़ा अनाड़ी सा था तो उत्सुकता में करने लगा कभी उनकी जाँघ पर कभी उनकी कमर पर तो कभी उनकी चूत पर हाथ फेरने लगा।

सीमा ने अब मुझे सीधा लेटा दिया और मेरे लंड को तेज-तेज मसलने लगी जिससे मेरी तो जैसे हालत ही खराब होने लगी थी, फिर उन्होनें मेरी छाती को चाटा और फिर मेरी कमर और आखिर में मेरे लंड को अपने मुहँ में ले लिया जिससे मेरे तो पाँव ही कांपने लग गए थे, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था उस समय तो, ऐसे ही मेरे लंड को अपने मुहँ में लिए हुए ही सीमा पलटकर मेरे मुहँ के पास अपनी चूत को लाकर बोली कि इसको भी चाटो, मुझे अच्छा तो नहीं लगा लेकिन मज़े के कारण मैं भी उसे चाटने लगा, तो सीमा अब उछलने लगी क्योंकि बिना जानकारी के ही मैं कुछ भी किये जा रहा था तभी सीमा एकदम से अकड़ सी गई और उसकी चूत से गाढ़ा-गाढ़ा सा पानी निकलने लगा था, मैनें वह थोड़ा सा चखकर देखा तो मुझे वह थोड़ा अजीब सा लगा, फिर सीमा ने भी मेरे लंड को चूसने की स्पीड बढ़ा दी और मैं भी अपनी गांड को उछालने लगा, मुझे एकदम से कुछ अजीब सा होकर रह गया और मेरे लंड से भी पानी निकल गया जिसे सीमा ने चाट-चाटकर साफ़ कर दिया था।

और मुझे भी बहुत मज़ा बहुत आया था, तभी बाहर से किसी के दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई, और फिर हम दोनों जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहनने लगे, फिर किसी लड़की की आवाज़ आई, कोई है दरवाज़ा खोलो, मैं तो कपड़े पहन कर वहीं लेटा रहा।

दोस्तों आज की कहानी को यहीं पर विराम देते हैं इसका अगला भाग बहुत ही जल्दी आपके सामने लेकर आऊँगा तब तक पढ़ते रहिये कामलीला डॉट कॉम।

धन्यवाद् मेरे प्यारे दोस्तों !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *