यार से मिला प्यार

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम पलक है Kamukta और मेरी उम्र 28 साल है, मेरा रंग गोरा और मैं दिखने में बहुत खूबसूरत लगती हूँ मेरे फिगर का साइज़ 34-28-36 है अब मैं सीधे अपनी आज की कहानी पर आती हूँ मेरी यह सेक्सी कहानी मेरी जिंदगी और मेरे सम्बन्धों के बारे में है।

दोस्तों मेरी शादी आज से 5 साल पहले हो गई थी और मेरे पति का नाम अनिल है मेरे ससुराल में हमारे घर के पास ही में एक साड़ी की दुकान है जिसके ऊपर एक घर बना हुआ है जिसमें हम दोनों ही रहते है वह घर भी हमारा ही था और वह थोड़ा छोटा पड़ता था इसलिए हम साड़ी की दुकान के ऊपर वाले घर में रहते थे मेरे पति देखने में ठीक-ठाक थे और हम एक-दूसरे से बहुत प्यार भी करते थे हमारे दूसरे घर में मेरे सास-ससुर और मेरे पति के बड़े भाई जो नौकरी करते है और उनकी बीवी रहते है।

हम दोनों का शादीशुदा जीवन बहुत अच्छा चल रहा था वह रोज दोपहर में दुकान बन्द करके ऊपर खाना खाने और मुझसे बातेँ करने आ जाते थे और खाना पूरा होने के बाद मेरे पति मुझे छेड़ते और मज़े से चोदते थे जिसमें मुझे भी बहुत मज़ा आता था वह मेरे सारे कपड़े उतारकर मेरे सारे बदन को चूमते और सहलाते हुए खूब चोदते थे और मैं भी उनका पूरा साथ देती थी और फिर रात में भी हम एक दूसरे को खूब खुश करते थे।

हम एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे हमारी शादी को 3 साल बीत गये थे और फिर आज से लगभग 2 साल पहले उनकी एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी जब वह अपनी दुकान का माल लेने के लिये सूरत गए हुए थे मेरी तो सारी दुनिया ही उजड़ गई थी और मैं अब अपना सूनापन खत्म करने और अपना मन लगाने के लिए दुकान पर बैठने लगी और ऐसे ही साल भर बीत गया था और अब मैं ज़्यादातर हमारी दुकान के ऊपर वाले घर में ही रहती थी और अपने उन चुदाई के दिनो को याद करके अपनी चूत को अपने हाथ से ही संतुष्ट करती थी और मैं सेक्सी कहानियाँ भी पढ़ती थी हमारी दुकान पर एक ग्राहक अक्सर आते थे जिनका नाम दीपक था वह अपनी पत्नी और भाभी के साथ कभी-कभी अपनी मम्मी के साथ आते थे उनसे मेरी अच्छी जान-पहचान हो गई थी जब भी वह हमारी दुकान पर आते थे तो हमारे बीच काफ़ी बातें होती थे वह मेरे बारे में बहुत कुछ जानते थे।

पर अब दिन ब दिन उनके सम्बन्ध उनकी पत्नी के साथ खराब होते जा रहे थे इसकी वजह थी उनकी पत्नी के किसी दूसरे आदमी के साथ सम्बन्ध और जल्द ही उन दोनों का तलाक़ भी हो गया और दीपक जी अब काफ़ी उदास से रहने लग गए थे पर कुछ दिनों के बाद उनका झुकाव मेरी तरफ बढ़ सा गया था और अब वह हमारी दुकान पर फिर से आने लगे थे कभी कुछ खरीदने के लिए और कई बार तो ऐसे ही दोपहर के समय चले आते थे जब दुकान पर कोई नहीं होता था और उनका आना मुझे भी अच्छा लगता था क्योंकि मुझे भी कोई मिल जाता था और मुझे उनसे बात करना भी बहुत अच्छा लगता था।

अब वह मेरे और भी करीब आ गए थे और अब हम फोन पर भी बात करने लग गए थे और मैं कभी-कभी उनके साथ घूमने या फिल्म देखने भी चली जाती थी हम दोनों का एक-दूसरे के साथ समय बिताना अब बहुत अच्छा लगने लगा था शायद मुझे उनसे प्यार सा होने लगा था पर मुझे यह सब अब ग़लत भी लगने लगा था तो मैं अपने मन को समझाकर उनसे दूरी बनाने की कोशिश करने लगी और मेरे ससुराल वाले भी इस रिश्ते को ग़लत कह रहे थे।

अब मैं उनसे दूरी बढ़ाने लगी पर उनको शायद यह सब मंजूर नहीं था और वह मुझसे मिलने की और बात करने की पूरी कोशिश करते रहते थे इसके बाद कुछ दिन तक तो सब ठीक रहा सब फिर से पहले जैसा सामान्य हो गया था और फिर अचानक से एक रात को 9-10 बजे के करीब उनका फोन आया और उन्होंने मुझसे कहा कि उनकी भाभी और मम्मी गाँव में किसी शादी में गई है पर किसी ने रास्ते में उनका कपड़ों का बैग चोरी कर लिया है इसलिए उनको नई साड़ियाँ चाहिये और वह वापस आ रही है पर उनको आने में थोड़ी देर और लगेगी और उनको सुबह भी जल्दी निकलना है तो इसलिए साड़ियाँ अभी चाहिये तो मैंने हाँ कह दिया और दुकान सामने से बंद करके ऊपर उनका इन्तजार करने लगी और लगभग 11 बजे तक वह आए इस समय तक सारी दुकाने भी बन्द हो चुकी थी।

फिर मैंने उनको दुकान के अन्दर बुला लिया और साड़ियाँ दिखाई उन्होंने जल्दी ही साड़ी पसंद कर ली वह थोड़ी महंगी साड़ी थी तो उन्होंने मुझसे कहा कि एकबार आप इसको पहनकर तो दिखा दो पहले तो मैंने उनको मना किया पर फिर मैं मान भी गई और फिर मैंने अपनी बेरंग साड़ी की जगह वह साड़ी पहनी और उनके सामने गई मुझे उस साड़ी में देखकर उनके हाव-भाव ही बदल गये और वह मेरी तरफ बढ़े और मुझे बैठाकर मेरा हाथ पकड़कर उन्होंने मुझसे कहा कि मैं तुमको हमेशा ऐसे ही देखना चाहता हूँ आई.लव.यू. और फिर मैं भी अपने आप को रोक ना सकी और उनके गले लग गई और फिर हम दोनों ही थोड़ी देर तक ऐसे ही एकदूसरे के गले लगे रहे।

फिर कुछ देर बाद उन्होंने मुझे खुद से अलग किया और मेरे गालों पर किस करना शुरू कर दिया और वह मेरे होठों पर गाल पर और गले पर किस करने लगे और मैं भी उनका साथ दे रही थी और फिर उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और वह मेरे ब्लाउज के ऊपर और पेट पर किस करने लगे और फिर उन्होंने मेरी साड़ी को भी उतार दिया और वह मेरे बब्स और गांड को दबाने लगे तो मैं भी उनकी पीठ पर हाथ फेरने लगी थी फिर मैंने भी उनकी शर्ट को उतार दिया और उनकी छाती पर काटने और किस करने लगी और उनके खड़े लंड को उनकी पेन्ट के ऊपर से ही मसलने लगी और फिर मैंने उनकी पेन्ट को भी उतार दिया अब वह मेरे सामने अपनी अंडरवियर में ही थे।

और फिर वह मेरे पीछे आकर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ने लगे और मेरे ब्लाउज और पेटीकोट को उतारने लगे अब मैं भी उनके सामने अपनी ब्रा-पैन्टी में आ चुकी थी तो वह मेरी ब्रा-पैन्टी के ऊपर से ही मेरे बब्स और मेरी चूत से खेलने लग गए थे और फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया था और उन्होंने मुझे ऐसे ही ऊपर ले जाकर बेड पर लेटा दिया था और मेरी ब्रा को उतारकर मेरे बब्स को चूसने लगे जिससे मैं भी गरम होने लगी थी और वह भी और फिर मैं उठी और उनकी अंडरवियर उतारकर उनके लंड को अपने हाथ से रगड़ने लगी और अपने मुहँ में लेकर चूसने लगी मुझे उनका लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और फिर थोड़ी देर तक उनका चूसने के बाद उन्होंने मुझे फिर से बेड पर लेटा दिया और मेरी पैन्टी को उतारकर मेरी चूत को चाटने लगे और मैं जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थी।

अब हम दोनों ही नंगे थे फिर मैंने उनसे कहा कि मेरी जान अब और मत तड़पाओ और अपने लंड को डाल दो मेरी चूत में और फिर दीपक ने मेरी टाँगों को फैलाकर अपना लंड मेरी बहुत दिनों से प्यासी चूत में डाल दिया आह… वह क्या अहसास था इतने लंबे समय बाद किसी का लंड मेरी चूत में गया था और फिर उन्होंने मुझे चोदना शुरू किया और मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी और फिर उसके बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर चोदा इस बीच मैं भी 2 बार झड़ चुकी थी और कुछ देर की चुदाई के बाद जब वह भी झड़ने वाला था तो दीपक ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और अपना सारा माल मेरी गांड पर ही झाड़ दिया और हम दोनों ऐसे ही नंगे ही सो गये और फिर कुछ देर बाद वह अपने घर चले गए थे क्यूंकि उनकी माँ और भाभी आने वाले थे।

अब हम दोनों को जब भी मौका मिलता था सेक्स करते थे।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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