माँ की चुदाई और पापा से बे-वफाई

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम हिमांशु है मैं नासिक का रहने वाला हूँ और मैं भी आपकी तरह ही कामलीला एक पाठक हूँ मैनें यहाँ प्रकाशित सभी कहानियाँ पढ़ी है और मुझे वह सभी एक से बढ़कर एक लगी है मुझे इस वेबसाइट का पता इंटरनेट पर ऐसे ही कुछ और तलाश करते हुए आज से 5 महीने पहले लगा था आज मैं भी आपके लिए एक ऐसी घटना लेकर आया हूँ जो बहुत समय पहले की है पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में बता देता हूँ मेरे घर में 4 लोग है मैं, पापा, मम्मी और मेरी एक बहिन मेरी मम्मी का नाम साधना है वह दिखने में बहुत ही सुंदर है मेरी मम्मी बहुत गोरी है और उनका फिगर बहुत ही अच्छा है हम लोग मध्यम वर्ग के परिवार से है तो रहने में मेरी मम्मी बहुत ही साधारण है वह घर में नाइटी और बाहर साड़ी या सलवार सूट ही पहनती है।

मेरी मम्मी के ब्लाउज से उनके बब्स बाहर दिखते रहते है हाँ तो दोस्तों मैं अब अपनी कहानी पर आता हूँ यह कहानी तब की है जब मैं 8 वीं में पढ़ता था उस समय मेरे पापा अपनी कम्पनी के काम से बाहर गए हुए थे और मैं मेरी दीदी और मेरी मम्मी ही घर में थे एक दिन नानी का फ़ोन आया उन्होनें मम्मी से कहा की बहुत दिन हो गए है मिलने आ जाओ मम्मी ने कहा ठीक है और हमने ट्रेन का रिजर्वेशन कराया और हम चल दिए हमारा एसी कोच में रिज़र्वेशन था और भीड़ भी बहुत कम थी।

हम अपने डिब्बे में पहुँचे तो वहाँ एक आदमी पहले से ही बैठा हुआ था उसकी उम्र करीबन 40 साल की होगी और वह बहुत ही लंबा चौड़ा था देखने में भी वह बहुत ही अच्छा था सीट पर पहुँच कर मम्मी ने सारा सामान सेट किया और हम बैठ गये वह आदमी हमको देख रहा था थोड़ी देर बाद ट्रेन चलने लगी और हमलोग बैठकर बातें करने लगे मैं और मेरी दीदी खेल रहे थे और वह हमारी तरफ ही देख रहा था और कभी कभी मम्मी की तरफ भी देखकर मुस्कुरा देता था मम्मी भी उसको ही देख रही थी फिर थोड़ी देर बाद मैं और मेरी दीदी ने मम्मी से कहा कि हम को ऊपर वाली सीट पर जाना है और हम लोग चले गए।

अब मेरी मम्मी ठीक उसके सामने बैठी हुई थी और वह चुपके से मम्मी को देख रहा था बीच-बीच में उठकर वह अपना सामान ठीक करने के बहाने से मम्मी के बब्स की तरफ देखता मम्मी ने जो कुर्ता पहना हुआ था उसमें उनकी क्लीवेज साफ़ दिख रही थी।

और वह बार-बार उनको ही देख रहा था थोड़ी देर तक तो ऐसा ही चलता रहा अब उसने मेरी मम्मी से बात करना शुरू किया तो उसने अपना नाम बताया कहा हैलो मेरा नाम सुनील कुमार है मम्मी ने भी उसको अपना नाम बताया उन्होनें मम्मी से पूछा कि आप लोग कहाँ जा रहे हो? तो मम्मी ने बताया कि वडोदरा जा रहे है फिर उन्होनें मेरी मम्मी से कहा कि आपके बच्चे बहुत प्यारे है।

फिर मम्मी हमारी तरफ देखने लगी और मुस्कुराकर उनसे कहा कि हाँ बहुत प्यारे है पर दोनों बहुत बदमाश भी है फिर उन्होनें मम्मी से पूछा कि आपके पति क्या करते है? मम्मी ने बताया की वह एक बड़ी कम्पनी में काम करते है और कम्पनी के ही काम से बाहर गए हुए है फिर थोड़ी देर तक वह दोनों ऐसे ही बातें करते रहे फिर उन्होनें मम्मी से पूछा की आप भी काम नहीं करती हो क्या? तो मम्मी ने कहा मैं भी अपने पति के ऑफीस में ही काम करती थी पर बच्चों के होने के बाद मैनें काम छोड़ दिया।

फिर उन्होनें कहा पर अब फिर से क्यों नहीं शुरू कर लेती? तो मम्मी ने कहा कि अब कहाँ काम करूँगी? फिर वह अंकल भी चुप हो गये फिर थोड़ी देर बाद अंकल ने बताया कि वह एक बहुत बड़ी कंपनी में मॅनेजर की पोस्ट पर है और उनके पास एक काम है और उन्होनें मम्मी से यह भी कहा कि आपके जैसी कितनी ही शादीशुदा औरतें वहाँ काम करती है अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो आप मेरी कम्पनी में काम कर सकती हो।

फिर मम्मी चुप हो गई और थोड़ी देर बाद अंकल ने कहा कि देखिए आपके बच्चे जब स्कूल चले जाते होंगे तब तो आप घर पर अकेली ही रहती होंगी तो इससे अच्छा है कि कोई काम पकड़ लीजिए आपका समय भी कट जाएगा और घर में कुछ पैसे भी आ जाएँगे यह कहकर उन्होनें अपना विजिटिंग कार्ड मम्मी को दे दिया और मम्मी उनसे नहीं कहने लगी पर उन्होनें कहा कि देखिए मैं आप पर ज़ोर नहीं दे रहा हूँ अगर आपका काम करने का मन करे तो मुझे फ़ोन कर दीजिएगा।

मम्मी ने कहा ठीक है और मम्मी ने कार्ड अपने पर्स में रख लिया और दोनों बातें करने लगे फिर रात का खाना खाकर हम लोग सो गए फिर सुबह जब हमारा स्टेशन आया और हम लोग नानी के घर चले गए 15 दिन तक हम लोग वहीं रहे फिर वापस अपने घर आ गए फिर एक दिन रात में पापा का फ़ोन आया मैनें मम्मी को उनसे वह बात करते हुए सुना जो उन ट्रेन वाले अंकल से हुई थी पापा ने कहा ठीक है कर लो फिर अगले दिन मम्मी ने कार्ड से नंबर निकाला और उन अंकल को फ़ोन किया और उनसे कहा कि मैं काम करने के लिए तैयार हूँ और फिर मम्मी ऑफीस जाने लगी मम्मी ऑफीस में स्कर्ट और शर्ट पहन कर जाती थी मम्मी की जाँघें साफ दिखती थी एक दिन मम्मी ऑफीस से आई और उन्होनें बताया की बच्चों जल्दी से तैयार हो जाओ हमको जाना है तो मैनें पूछा कि कहा जाना है मम्मी? तो मम्मी ने बताया कि उनके बॉस के घर में एक पार्टी है और ऑफीस के सारे लोग जा रहे है और फिर हम लोग भी तैयार होकर पार्टी में चले गए उनका घर बहुत दूर था वह असल में उनका फार्म हाउस था जहाँ उनकी बर्थ-डे पार्टी थी।

ऑफीस के सारे लोग आए हुए थे मम्मी के बॉस आए और मम्मी ने उनको बर्थ-डे की मुबारकबाद दी मैनें देखा कि मम्मी का बॉस और कोई नहीं वही ट्रेन वाले सुनील अंकल थे जो हमको ट्रेन में मिले थे मम्मी ने उनको भी गिफ्ट दिया और थोड़ी देर में पार्टी शुरू हो गई मम्मी के बॉस ने मम्मी को डांस करने के लिए बुलाया और मम्मी चली गई वहाँ पर बहुत सारे लोग डांस कर रहे थे मम्मी अंकल से चिपक-चिपककर डांस कर रही थी।

मैं बार-बार उनकी तरफ देख रहा था अंकल का हाथ मेरी मम्मी की गांड पर चला जाता था मेरी दीदी ने कहा की मैं कुछ मीठा लेकर आती हूँ तो मैनें कहा ठीक है और मैं वहीं कुर्सी पर बैठ गया करीबन 2 घंटे तक पार्टी चली फिर रात के 12 बज गए थे सब लोग जाने लगे तो मम्मी ने भी कहा कि अब हमको भी चलना चाहिए और ऑटो लेने के लिए हम बाहर आने लगे इतने में मम्मी के बॉस आए और उन्होंने कहा कि इतनी रात को आप कहाँ जाओगी बच्चों के साथ आज रात यहीं रुक जाओ मेरे फार्म हाउस पर कल सुबह मैं घर पर छोड़ दूँगा मम्मी नहीं-नहीं करने लगी पर बॉस नहीं माने और मजबूरन हमको वहीं रुकना पड़ा रात भी काफ़ी हो गई थी अंकल ने हमको कमरा दिखाया और कहा कि बच्चों तुम लोग यहीं पर सो जाओ फिर मैनें पूछा और मम्मी कहाँ सोएगी? तो अंकल हँसने लगे और उन्होनें कहा कि अरे तुम मम्मी की चिंता मत करो वह दूसरे कमरे में सो जाएगी और यह कहकर अंकल और मम्मी बाहर चले गये।

करीबन आधा घंटा बीत गया पर मुझे नींद ही नहीं आ रही थी तो मैं उठकर खिड़की के पास आकर बाहर देखने लगा वहाँ से मुझे गार्डन में अंकल और मम्मी बात करते हुए दिखे अंकल मम्मी को कुछ समझाने की कोशिश कर रहे थे और फिर कुछ देर बाद अंकल ने मम्मी को अपनी तरफ खींच लिया और मम्मी के होठों पर एक किस ले लिया मम्मी अंकल की तरफ देखने लगी अंकल कुछ देर तक मम्मी को ऐसे ही देखते रहे और उन्होनें फिर से धीरे से मम्मी के होठों पर एक और किस किया और अब धीरे-धीरे मम्मी के होठों पर किस करने लगे मम्मी भी अब अपने हाथ अंकल के पीछे करके उनका साथ देने लगी।

अंकल ने अब अपने हाथ मम्मी की गांड पर रख दिए और अब धीरे-धीरे मम्मी की गांड को मसलने लगे कुछ देर तक तो ऐसा ही चलता रहा मुझे बहुत अजीब लग रहा था सोचा दीदी को उठा दूँ पर मैनें दीदी को नहीं उठाया और चुपके से उनको देखने लगा और कुछ देर बाद अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और घर के अन्दर आने लगे और मैं भी खिड़की से हट गया नहीं तो वह लोग मुझे देख लेते और मैं कुछ देर तक कमरे में ही बैठा रहा।

अब मैनें दरवाजा खोला और चुपके से बाहर आया मैनें देखा एक कमरे की लाइट जल रही थी मैं उस कमरे के बाहर खड़ा हो गया और दरवाजे के छेद में से अन्दर देखने लगा मम्मी अंकल की गोद में बैठी थी और अंकल मम्मी के होठों पर और गले पर किस कर रहे थे मम्मी आहह इस्स्स्स कर रही थी मम्मी ने अंकल से कहा कि सुनील प्लीज़ आज तो छोड़ दो मेरे बच्चे यहीं पर है तो अंकल ने कहा साधना आज रात को मेरा बिस्तर गरम कर दे तो मम्मी ने कहा प्लीज़ सुनील बच्चे देख लेंगे फिर अंकल ने कहा कि डार्लिंग तुम चिंता मत करो तुम्हारे बच्चो को कुछ पता नहीं चलेगा मैं 6 महीने से तुमको चोद रहा हूँ आज तक किसी को पता चला क्या? फिर अंकल ने मम्मी के गले की चेन खोलकर साइड में टेबल पर रख दी और फिर से मम्मी को किस करने लगे वह अपने एक हाथ से मम्मी के बब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही मसल रहे थे और मम्मी को किस भी कर रहे थे।

उन्होनें मम्मी की जीभ को अपने मुहँ में ले लिया और चूसने लगे कभी मम्मी के गालों पर किस करते अब अंकल ने मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से ही मम्मी के बब्स को चूमने लगे और निपप्ल को भी ब्रा के ऊपर से ही चूसने से मम्मी की ब्रा अंकल के थूक से गीली हो गई थी अंकल ने अब अपना हाथ पीछे करके मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया और उसको भी निकाल दिया अंकल अब मम्मी के बब्स को देखकर पागल हो गए मम्मी के बब्स बहुत ही बड़े थे और गोल-मटोल थे उनकी भूरे रंग की निपप्ल देखकर अंकल अपना होश खो बैठे और उनको अपने मुहँ में लेकर चूसने लगे और दबाने भी लगे मम्मी आअहह ईसस्स्शह कर रही थी।

मम्मी अकड़कर पूरी पीछे की तरफ हो गई थी जिससे उनके बब्स और भी तन गए थे अंकल अब पागलो की तरह मम्मी के बब्स को चूस रहे थे कभी वह मम्मी के निपप्ल को मुहँ में लेकर चूसते तो कभी मम्मी के बब्स के पास किस करते उन्होनें मम्मी से कहा साधना आज मैं तुमको रात भर चोदूंगा दिन में ऑफीस में तो ठीक से टाइम ही नहीं मिल पाता है आज तो तू रात भर मेरे पास रहेगी अब अंकल ने मम्मी को बेड पर लेटा दिया और मम्मी की टाँगों के पास बैठ गए और मम्मी के पैरों पर किस करने लगे अब उन्होनें मम्मी की पायल उतार दी और टेबल पर रख दी और धीरे-धीरे मम्मी के पैरों पर किस करते हुए मम्मी की साड़ी को ऊपर उठाते हुए कमर तक कर दिया अब वह पहले मम्मी की पैन्टी के पास सूंघने लगे और कहने लगे कि बहुत ही नमकीन खुशबू है तेरी चूत की तो और मम्मी बार-बार अपने हाथों से अपनी चूत को छुपाने की कोशिश कर रही थी और अंकल मम्मी की जाँघों को किस कर रहे थे मम्मी आआहह कर रही थी अब अंकल ने मेरी मम्मी की पैन्टी को निकालकर अपने हाथों में ले लिया और उसको सूंघने लगे अंकल को बहुत मज़ा आ रहा था और मम्मी अपने हाथ अपनी चूत पर रखकर उसे छुपा रही थी थोड़ी देर तो ऐसे ही चलता रहा अब अंकल ने मम्मी का हाथ हटा दिया तो मम्मी की चूत दिखने लगी मम्मी की चूत पर थोड़े-थोड़े बाल थे और उनमें से उनकी फूली हुई गुलाबी चूत दिख रही थी अंकल ने अपनी दो उंगलियों से मम्मी की चूत को फैला दिया और मम्मी की चूत को देखकर पागल हो गए अब उन्होनें अपनी एक ऊँगली अन्दर डाल दी और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगे।

मम्मी आह्ह्ह इस्स्स्स उईईई करने लगी और अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी उन्होनें कहा कि सुनील थोड़ा धीरे करो दर्द हो रहा है अंकल ने मम्मी की दोनों टाँगों को फैला दिया और अब मम्मी की चूत को चाटने लगे मम्मी अब अपने सिर को बेड पर इधर-उधर करने लगी और अपने हाथों से अंकल के सिर को पकड़कर उनके बालों को खींचने लगी अंकल ने भी अपने दोनों हाथों से मम्मी की जाँघों को पकड़ रखा था और मम्मी की चूत को चाट रहे थे।

लगभग 10-12 मिनट तक अंकल ऐसे ही मेरी मम्मी की चूत को चाटते रहे फिर अंकल ने जब अपना मुहँ बाहर निकाला तो मैनें देखा की मम्मी चूत से पानी निकल रहा था अब अंकल ने भी अपने कपड़े उतार लिए और मम्मी वहीं बेड पर लेटी रही और ज़ोर-ज़ोर से साँस ले रही थी जिससे उनके बब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे अंकल कुछ देर तक तो मम्मी को घूरकर देखते हुए अपने लंड को हिला रहे थे फिर कुछ देर में उनका लंड पूरा खड़ा हो गया तो उन्होनें अपना लंड मेरी मम्मी के मुहँ के पास लाकर रख दिया और मम्मी अपने हाथ से उनका लंड पकड़कर अपने मुहँ में लेकर चूसने लगी।

अंकल आह्ह्ह ओह्ह्ह साधना चूस और अच्छे से चूस कहकर सिसकारियां ले रहे थे फिर कुछ देर बाद मम्मी ने अपने मुहँ से उनका लंड बाहर निकाला तो अंकल के पूरे लंड पर मम्मी का थूँक लगा हुआ था अब अंकल ने मम्मी की साड़ी भी पूरी खोल दी और पेटीकोट को भी उतारकर मेरी मम्मी को पूरा नंगा कर दिया मम्मी बेड पर अपनी दोनों टाँगों को फैलाकर लेटी हुई थी।

और अंकल अपने लंड को हिलाते हुए मम्मी के ऊपर लेट गए और वह थोड़ी देर तक मम्मी के बब्स को चूसते रहे और फिर एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे मम्मी अपने होठों को अपने दाँतों से दबाते हुए सिसकारियां ले रही थी उफ्फ्फ्फ़ इस्सस अंकल ने अब अपने लंड को पकड़ते हुए एक धक्का दिया तो मम्मी थोड़ी पीछे की तरफ हो गई तो अंकल ने एक और झटका दिया तो मम्मी फिर से और पीछे हो गयी और मम्मी के मुहँ से एक चीख निकल पड़ी आह्ह्ह्हह्ह मैनें देखा कि अंकल रुक गए और उन्होनें मम्मी के गालों को पकड़ लिया और धीरे-धीरे किस करने लगे और जब मैनें नीचे की तरफ देखा तो अंकल का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत में समा चुका था।

अंकल ने मम्मी से पूछा कि दर्द हो रहा है क्या? तो मम्मी ने इशारे में ही बोला हाँ तो फिर अंकल ने एक और किस किया और कहा कि कुछ देर और दर्द होगा फिर कम हो जाएगा अंकल ने अब एक और झटका दिया और अब धीरे-धीरे अपने लंड को मम्मी की चूत में आगे-पीछे करने लगे अंकल के धक्कों से मम्मी के बब्स भी आगे-पीछे हिल रहे थे मम्मी आह्ह ओफफफ्फ़ औहह माआ ईसस्स्स कर रही थी अंकल अपने एक हाथ को नीचे के तरफ ले जाकर मम्मी की चूत के ऊपर वाले हिस्से को रगड़ रहे थे और मम्मी को धीरे-धीरे चोद रहे थे मम्मी भी बुरी तरह से सिसीकरियां ले रही थी उस पूरे कमरे में मम्मी की सिसकारियां और बेड के हिलने की आवाजें आ रही थी अब अंकल ने मम्मी के निपप्ल को अपने मुहँ में ले लिया और उसको चूसते हुए तेज़ी से मम्मी को चोदने लगे मम्मी भी धीरे-धीरे अपनी गांड उठा-उठाकर उनका साथ दे रही थी फिर थोड़ी देर बाद अंकल उठकर बैठ गए और उन्होनें मम्मी की जाँघों को पकड़कर मम्मी की चूत में अपना लंड डाल दिया मम्मी ने भी अपने हाथ पीछे कि तरफ करके बेड को पकड़ लिया मम्मी के बब्स अब पूरी तरह से तन गए थे और अंकल के हर धक्के पर उनके बब्स आगे-पीछे हो रहे थे

कुछ देर तक मम्मी के बॉस ने उनको ऐसे ही चोदा फिर उन्होनें एक ज़ोर का झटका दिया और आह्ह्ह्ह करने लगे जब उन्होनें अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला तो मैनें देखा कि मम्मी की चूत से अंकल का वीर्य बह रहा था दोनों पूरी तरह से पसीने में भीगे हुए थे फिर कुछ देर बाद मम्मी ने अपनी चूत को साफ किया और अंकल और मम्मी नंगे ही एक ही कम्बल में सो गए और मैं भी कमरे में आकर दीदी के पास सो गया फिर सुबह जब मेरी नींद खुली तो मम्मी ने अपनी साड़ी पहन रखी थी और फिर अंकल ने हमको अपनी कार से हमारे घर पर छोड़ दिया।

वह अंकल फिर तो कभी-कभी तो हमारे घर पर भी आकर मेरी मम्मी को चोदते थे हम छोटे थे तो हमारे लिए मिठाई, खिलोने, चोकलेट जैसी चीजें लाकर या हमको घर से बाहर खेलने भेज देते थे कभी-कभी तो हमारे स्कूल जाने के बाद सुबह से ही वह हमारे घर पर ही रहते थे।

मम्मी और उन अंकल की यह कामलीला पूरे 2 साल तक चली जब मेरे पापा अपना काम खत्म करके वापस आए तब जाकर मम्मी ने वह नौकरी छोड़ दी पर उन अंकल से अब भी वह कभी-कभी छुप-छुपकर मिलती है।

प्यारे पाठकों आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी इसके लिए आप मुझे मेल करके अपने जवाब और कोई कमी हो तो सुझाव भी जरूर दें आपके अनमोल सुझावों से हम अपनी कहानियों को आपके लिए और भी बेहतर बनाने की कोशिश कर सकें।

धन्यवाद प्यारे पाठकों !!

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