मेरी अनचाही चुदाई बनी मनचाही

हाय फ्रेंड्स, मेरा Antarvasna नाम प्रीती है और Kamukta मेरी शादी को 2 साल हो गए है मेरे पति का नाम सुनील है और वह एक बहुत बड़ी कम्पनी में काम करते है और वह मुझे बहुत प्यार करते है हम सब इंदौर में रहते है मैं अपनी इस ज़िंदगी से बहुत खुश हूँ अपनी पढ़ाई पूरी करते ही मेरे मम्मी-पापा ने मेरी शादी कर दी मैं एक बहुत ही सीधी साधी औरत हूँ मैं अभी 26 साल की हूँ अब मैं अपने साथ हुई घटना को आपको बताती हूँ जो कि मैनें बहुत ही हिम्मत करके लिखी है यह एक शादी की कहानी है इसके बारे मैं मेरे घर मैं किसी को भी पता नहीं है।

जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब बहुत से लड़के मूझे घूर-घूर कर देखते थे, यहाँ तक कि सर और प्रिन्सिपल भी. क्योंकि मैं बहुत सेक्सी दिखती थी और उस समय मेरे फिगर का साइज़ भी 34-28-36 का था. मुझे उन सबका मेरी तरफ गंदी नज़र से देखना बहुत खराब लगता था पर मैनें जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई पूरी कर ली और अब मेरी शादी को 2 साल भी हो गए थे।

17 मई को हमको एक रिश्तेदार की शादी में जाना था इसलिए मैं वहाँ जाने के लिए बहुत ही उत्सुक थी हम 5 दिन पहले ही वहाँ जाने वाले थे पर मेरे पति को अचानक अपने ऑफिस की तरफ से काम के सिलसिले में अहमदाबाद जाना था इसलिए मेरे पति तो वहाँ जाने वाले थे अब करीबी रिश्तेदार की शादी है तो किसी को तो वहाँ जाना ही था तो अब मैं ही शादी मैं जाने वाली थी मेरी सास तो ज़्यादातर बीमार ही रहती है तो वह कहीं पर भी आ-जा नहीं सकती थी और मेरे ससुर जी भी उनकी देखभाल के लिए घर पर ही रुक गये थे इसलिए मैं ही जा रही थी और मैनें अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया था जिसमें मैनें मेरे कपड़े और कुछ जरूरी सामान रख लिया था 11 मई को मेरे पति तो अहमदाबाद चले गये थे और 12 मई को सुबह 7 बजे मेरी ट्रेन थी लखनऊ के लिए फिर सुबह हुई और मैं एक ऑटो करके स्टेशन पहुँच गई और ट्रेन का इन्तजार करने लगी फिर थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई और मैं उसमें चढ़ने लगी पर मेरा बैग बहुत भारी था तो वह मुझसे उठाया नहीं जा रहा था अचानक ट्रेन के अंदर से किसी ने मेरा बैग ऊपर रख दिया और मैं भी ट्रेन में चढ गई थी मैं अपनी सीट पर जाकर बैठी और उस आदमी को भी धन्यवाद बोला और सुबह जल्दी उठकर आने के कारण मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी तो मैं थोड़ी देर बाद ही सो गई।

और दोपहर को करीब 12 बजे तक सोकर उठी और अपना मुहँ धोया और बाल ठीक किए और वापस सीट पर आकर बैठ गई. वह आदमी जिसने मेरी मदद करी थी वह मेरे ही सामने वाली सीट पर बैठा था हमारे बीच थोड़ी बातें हुई उसका नाम दीपक था वह करीब 30-32 साल का था फिर शाम हुई और मैनें चाय पी हम दोनों बातें तो कर ही रहे थे फिर रात को 11.30 बजे के करीब लखनऊ आया उस आदमी ने मेरा बैग ट्रेन से नीचे उतारा और मैं एक टेक्सी में बैठकर शादी वाले घर पर चली गई जिसमें मुझे 1 घंटा लगा था अब मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी क्योंकि सफ़र बहुत लम्बा था इसलिए घर में घुसी तो सब सो रहे थे और रात के 1 बज चुके थे फिर मैनें सोचा कि रात को क्यों किसी को परेशान करूं जहाँ भी जगह मिलती है वहीं सो जाती हूँ फिर थोड़ी देर बाद मुझे एक बड़ा सा कमरा दिखा जो कि एक हॉल जितना बड़ा था. सोते हुए लोगों को परेशानी ना हो इसलिए मैनें उस हॉल की लाइट नहीं जलाई और अपने फोन की लाइट से जगह देखी और पास में ही बिस्तर पड़े थे तो उनको बिछाकर सो गई सभी लोग ज़मीन पर ही गद्दे, चादर और तकिये लगाकर सो रहे थे इसलिए मैं भी सो गई।

थोड़ी देर में ही मुझे गहरी नींद आ गई थी क्योंकि मैं सफ़र से बहुत थकी हुई थी मेरे पास ही में एक आदमी सो रहा था और यह बात मुझे भी नहीं पता थी मैनें सोचा कि इस हॉल मैं सभी औरतें और आदमी सब साथ ही सो रहे होंगे पर वह सिर्फ़ आदमियों का ही कमरा था मैं तो गहरी नींद में सो रही थी और पीछे से वह आदमी मेरे ब्लाउज के हुक खोल रहा था और धीरे-धीरे उसने मेरे ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और फिर उसने मेरी ब्रा के हुक भी खोल दिए और थोड़ी देर में जब मैं नींद में उसकी तरफ घूमी तब वह आदमी मेरे सामने ही था उसको यह पता नहीं था कि मैं कौन हूँ और कैसी दिखती हूँ फिर भी वह यह सब कर रहा था वह भी यही सोच रहा था कि इस कमरे में यह औरत कहाँ से आकर सो गई है और जब मैं उसके सामने की ओर अपना मुहँ करके सो रही थी तब उसने धीरे से मेरा ब्लाउज भी उतार दिया था अब मैनें सिर्फ़ ब्रा ही पहन रखी थी। सफर की थकान की वजह से मुझे तो बहुत ज्यादा नींद आ रही थी और मेरे साथ अभी तक जो यह सब हो रहा था वह सब मेरा पति मेरे साथ कर रहा है ऐसा मैं नींद में ही सोच रही थी।

फिर अचानक से लाइट जली और एक आदमी उस कमरे में आ गया उसने मुझे देखा तो वह हैरान हो गया और सोचने लगा कि यह औरत कौन है और इस तरह से इस कमरे में कैसे सो रही है मुझे देखकर शायद उसकी भी नीयत अब बदल गई थी और वह भी लाइट बन्द करके अपने बिस्तर लेकर मेरे ही पास आकर सो गया फिर पहले वाले ने धीरे से मेरी ब्रा को भी उतार दिया अब मैं ऊपर से बिना कपड़ो के थी पर नीचे मैनें साड़ी पहनी हुई थी पीछे वाले ने मेरे ऊपर अपनी टांग रख दी और सामने वाला मेरे बब्स को दबा रहा था उसने भी शायद इतने बड़े बब्स कभी नहीं देखे होंगे फिर उनमें से एक ने अपने फोन से फ्लश चालू करके मेरी फोटो खींच ली तभी अचानक मेरी नींद खुली और मेरी हालत देखकर तो मैं भी हैरान ही रह गई और सोचा कि यह मेरे साथ क्या हो गया फिर मैं अँधेरे में ही अपनी ब्रा और ब्लाउज को ढूँढने लगी तभी उनमें से एक ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचा और बोला कि तेरा ब्लाउज अब तुझे नहीं मिलेगा और दूसरे ने मुझे अपने मोबाइल में मेरी नंगी फोटो दिखाई मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था मैनें उनसे बोला कि मुझे मेरे कपड़े दे दो वरना मैं सबको बता दूँगी तब उनमें से एक ने कहा कि तेरी यह फोटो भी हम सबको दिखा देंगे।

फिर मैं यह सोचने लगी कि आख़िर मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और यह कहाँ आकर फँस गई थी मैं तो अब मज़बूर थी तब उनमें से एक ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और मुझे किस करने लगा था और दूसरे ने मेरी साड़ी उतार कर पास ही में रख दी और मेरा पेटीकोट और पैन्टी भी उतार दी अब मैं एक औरत दो अंजान मर्दों के बीच नंगी सोई हुई थी एक मुझे किस करके मेरे बब्स को चूसने लगा और दूसरे ने मेरे मुहँ में अपना लंड डाल दिया वह लंड बहुत छोटा सा था और उसमें से बदबू भी आ रही थी अब धीरे-धीरे उसका लंड टाइट होने लगा और मैं मज़बूरी में उस लंड को चूस रही थी फिर दूसरे ने अपना लंड मेरी चूत में डाला और मुझे चोदने लगा काफ़ी देर तक वह दोनों बारी-बारी से मुझे चोद रहे थे।

वह मुझे थोड़े बूढ़े लग रहे थे और मैं मज़बूरी में उनसे चुद रही थी तभी अचानक कमरे की लाईट फिर से जली और वह दोनों तो डरकर अपनी-अपनी चादर में घुस गए पर मुझे चादर अंधेरे में नहीं मिली तो मैनें अपनी साड़ी ही ओढ़ ली उस आदमी ने जैसे ही लाइट जलाई और उसने मेरी तरफ देखा लाइट की वजह से मेरा बदन साड़ी में से भी साफ-साफ दिख रहा था फिर उसने लाइट बन्द करी और सीधा मेरे ऊपर आकर सो गया मैनें सोचा कि अब तो मैं और मरी यह तीसरा और कहाँ से आ गया अब मैनें भी अपने बदन से साड़ी हटा ली और सोचा कि यह तीनों तो मुझे अब मार ही देंगे और फिर एक ने मेरे मुहँ में अपना लंड डाला और एक ने मेरी चूत में और एक ने मेरी गांड में अपना लंड डाला मेरी हालत तो बहुत बुरी हो रही थी पर अब धीरे-धीरे मुझे भी उनकी चुदाई से मजा आने लगा था और मेरे मुहँ से सिसकारियाँ निकल रही थी बारी-बारी से वह 2 घंटे तक मुझे चोदते रहे और इस बीच मैं भी 2 बार झड़ चुकी थी उनके चोदने की स्पीड बहुत ही तेज़ थी वह मुझे इतने ज़ोर-ज़ोर से ठोक रहे थे की अब मेरी चीख निकलने वाली थी लेकिन किसी के उठने के डर से अपने मुहँ में ही दबा ली. उनके लम्बे और मोटे लंड मुझे अपनी चुत के अंदर बहुत गहराई तक महसूस हो रहे थे यह मेरे लिए बहुत ही ग़ज़ब का एहसास था।

अब वह भी अपना माल भी मेरी चूत में ही छोड़ रहे थे इसके लिए मैनें उनसे बहुत मना भी किया पर उन्होनें मेरी एक भी बात नहीं सुनी और तीनों ने मेरी जमकर चुदाई की कभी मेरे मुहँ में तो कभी मेरी चूत में अपना माल छोड़ रहे थे आख़िर में वह सब थक गये तो जाकर सो गये मैं भी अब बहुत बुरी तरह से थक गई थी तो वहाँ रखी चादर से अपने शरीर को साफ़ करके अपने कपड़े पहनकर सो गई फिर सुबह जब मैं उठी तो मुझे पता लगा कि वह सब तो टेन्ट और लाईट लगाने वाले मजदूर थे।

मुझे रात की बात सोचकर खुद पर बहुत शर्म आई पर उनकी चुदाई से मजा भी बहुत आया था।

धन्यवाद् मेरे प्यारे दोस्तों !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *