पहली रात को मिला किसी दूसरे का साथ

हाय दोस्तों, Antarvasna मेरा नाम वैशाली Kamukta है और मैं भी आप ही की तरह कामलीला डॉट कॉम की एक नियमित पाठिका हूँ मुझे इस वेबसाईट का पता तब चला था जब मैं बाजार में अपने लिये साड़ी लेने गई थी उस समय वहाँ पर वह दुकानदार अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था लेकिन यह सब तो सामान्य बात थी और फिर वह मुझे साड़ियाँ दिखाने लगा पर मुझे उनमें से कोई भी साड़ी पसंद नहीं आई तो फिर वह दुकानदार अपना मोबाइल जल्दीबाज़ी में काउंटर के ऊपर ही छोड़कर चला गया और फिर अंदर जाकर और भी साड़ियाँ निकालने लगा तब मेरी नज़र काऊंटर पर रखे उसके मोबाइल पर पड़ी तो मैनें उसमें देखा तो उसमें कामलीला डॉट कॉम की सेक्स कहानियाँ थी दुकानदार जब तक वापस नहीं आया तब तक मैनें उसमें खुली हुई कहानी थोड़ी सी पढ़ी तो वह मुझे बहुत अच्छी लगी और तब से लेकर आज तक मैं भी रोज़ ही इसकी सारी कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ और मुझे इसकी सारी ही सेक्स कहानियाँ बहुत ही अच्छी लगती है।

तो मेरे प्यारे दोस्तों मैं अब आपका ज्यादा कीमती समय ना लेते हुए अपनी एक आप बीती आप सभी को बताने जा रही हूँ।

मेरे प्यारे दोस्तों यह उन दिनों की बात है जब मैं 23 साल की थी और मेरे मम्मी पापा ने मेरी शादी करके मुझे विदा किया था वह समय बहुत ही खुशनुमा था क्यूंकि उस समय में एक महकती हुई गुलाब की कली के समान थी और मैं अपने दिल में बहुत से अरमान लेकर अपने पिया के घर पर आई थी।

मेरे अपने पिया के घर पहुँचने के कुछ ही देर बाद वह रात भी आई जिसका मैंने बड़ी ही बेसब्री से इंतज़ार किया था और जिसके लिए मैंने अपनी जवानी बचाकर रखी हुई थी।

मैं घूँघट ओढ़कर पलंग पर बैठी हुई थी कि फिर अचानक से दरवाजा खुला और मैं डर के मारे सहम गई थी और मेरी तो साँसे भी तेज होने लगी थी फिर उन्होंने अन्दर आकर दरवाजा बंद कर दिया तो मेरी तो इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी की मैं एक नज़र तक उठाकर उन्हें निहार सकूं। फिर वह कमरे में आकर के अपने कपड़े उतारने लगे मैं उनका चेहरा भी नहीं देख पाई थी कि उन्होंने कमरे की बत्ती बुझा दी और मेरे पास पलंग पर आकर बैठ गये।

अब मेरी साँसे और भी तेज होने लगी थी कि उन्होंने अचानक से अपना एक हाथ मेरे लहँगे में घुसा दिया और धीरे-धीरे ऊपर की और बढते गये और फिर अचानक से ही उनका हाथ मेरी मुनिया पर लगा तो मैं सिहर उठी।

और वह उनके पहले शब्द थे, जो उन्होंने उस रात मुझसे बोले थे कि क्या बात है? तुम तो पहले ही अपनी मुनिया को तैयार करके बैठी हुई हो

फिर मैंने सहमते हुए जवाब में सिर्फ़ अपना सिर हिला दिया।

और फिर, उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और मेरा घूँघट खोल दिया और उसके बाद उन्होंने एक-एक करके मेरे सारे गहने उतार दिए।

उसके बाद उन्होंने मेरे पीछे आकर मेरे ब्लाउज की डोरी खोल दी और जिससे मेरे दोनों संतरे बाहर निकल गये थे।

फिर तो क्या था वह एक भूखे शेर की तरफ मुझ पर टूट पड़े और मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे एक बब्स को अपने मुहँ में ले लिया और दूसरे वाले को अपने दूसरे हाथ से मसलने लगे उनके इस काम में मैंने भी उनका पूरा साथ दिया और फिर उन्होंने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया उनका वह पहला चुंबन कुछ ऐसा था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती हूँ।

और फिर वह मेरे बदन को निहारने लगे और उन्होंने मेरा लहंगा भी उतार दिया और फिर वह पल भी आ गया जिसका मुझे बड़ी बेसब्री से इंतजार था जब उन्होंने पहली बार मेरी मुनिया के दर्शन किए और फिर उन्होंने मेरी मुनिया के अन्दर अपनी जीभ डाल दी उस रात उस पल मैं तब तक तड़पी जब तक कि मैं पहली बार झड़ ना गई थी।

फिर उन्होंने मुझसे कहा कि मैं चाहता हूँ कि अब मेरे कपड़े तुम उतारो।

मैंने बिल्कुल वैसा ही किया उन्होंने बाकी कपड़े तो पहले ही खोल रखे थे वह सिर्फ बनियान और अंडरवियर में ही थे जो कि मैंने उतार दिए थे और फिर मैंने उनका लंड अपने हाथ में लिया तो मैं दंग रह गई।

मैं उनसे बोली कि आपका यह तो बहुत बड़ा है? और मेरी मुनिया तो इसके सामने बहुत छोटी सी है अब इसका क्या हाल होगा?

तो वह बोले कि तुम बस वैसा ही करती जाओ जैसा मैं बोलता जाऊँ और फिर देखना, तुमको मैंने जन्नत की सैर ना कराई, तो बोलना। उनके कहने पर मैंने उनका लंड अपने मुहँ में लेकर खूब चूसा और फिर जब वह झड़ गये तो उनका सारा वीर्य मेरे मुहँ में आ गया था।

और फिर दोबारा मैंने उनका लंड चूस-चूसकर फिर से खड़ा कर दिया था और इस बार मेरी मुनिया की बारी थी तो फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे पीछे आकर मेरी गांड को कसकर पकड़ा ताकि मैं हिल ना सकूँ। और फिर उन्होंने मेरी मुनिया के अन्दर कम से कम 15 मिनट तक अपनी ऊँगली करी जिससे मेरा बदन एकदम से टूट गया और मैं झड़ गई थी और मेरा सारा रस उन्होंने एक ही बार मैं पी लिया था।

अब उन्होंने अपना बहुत सारा थूक मेरी मुनिया में डाला और उसे अपनी उँगली से अन्दर तक पहुँचा दिया।

अब फिर क्या था, एक ही झटके में उन्होंने अपना लंड सेट करके मेरी मुनिया में आधा घुसा दिया और मैं ज़ोर से चीख पड़ी। हाय मैं मर गई, फाड़ डाली मेरी चूत मेरी आँखों में से आँसू आ गए थे तो फिर उन्होंने मेरे बब्स को धीरे-धीरे दबाया और मेरे होठों को अपने होठों में लेकर मुझे किस करने लगे और फिर कुछ देर बाद जब मैं थोड़ी सामान्य हुई और अपनी कमर को आगे-पीछे करके उनका साथ देने लगी और कहने लगी कि और तेज करो… और तेज… मेरे मुहँ से यह बात सुनकर उन्होंने भी अपनी गति को और बढ़ा दिया और अपना मोटा लंड पूरा का पूरा ही मेरी चूत में घुसा दिया और फिर 15-20 मिनट की धका-धक चुदाई के बाद हम दोनों ही बिस्तर पर चित हो गये और फिर हम दोनों की ही आँख लग गई।

सुहागरात के बाद जब मेरी आँख सुबह लगभग चार बजे खुली तो मैंने देखा कि वह मेरे साथ बिस्तर पर नहीं थे।

तभी किसी के दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई, तो मैंने फटाफट से साड़ी पहनी और दरवाजे पर पहुँचकर दरवाजा खोला।

और मैं क्या देखती हूँ, कि वह आए है।

तो मैंने उनसे पूछा आप सुबह-सुबह ही कहाँ चले गये थे? मैं तो डर ही गई थी।

तो उन्होंने कहा कि अरे यार क्या बताऊँ तुमको, कल रात को जैसे ही मैं घर पहुँचा, तो अचानक ही मेरे एक दोस्त का फोन आया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है तो मुझे वहाँ जाना पड़ा। और मैंने हमारी सुहागरात भी खराब कर दी पर मुझे लगता है कि तुम समझ सकती हो।

उनके मुहँ से यह बात सुनकर मेरे तो होश ही उड़ गये थे।

और फिर मैंने मन ही मन सोचा, कि अगर कल रात को यह बाहर थे तो मेरे साथ कमरे में वह कौन था?

कुछ देर तक तो मैं कुछ बोल ही नहीं पाई और फिर सोचा, कि इनको बता देती हूँ लेकिन मैंने फिर सोचा कि अगर इन्होनें मुझे छोड़ दिया तो मैं किसी को भी मुहँ दिखाने के काबिल ही नहीं रह जाऊँगी और सब मुझे ही गलत नज़र से देखेंगे यह सब सोचकर मैं चुप ही रही।

और फिर जब रात हुई और आज की रात मैंने अपने असली पति के साथ सुहागरात मनाई तो आज की रात में वह बात ही नहीं थी जो पहली रात में थी।

और मैं अपने पति से चुदी तो ज़रूर थी पर मेरा दिल तो कहीं और ही था ऐसा लग रहा था कि मैं तो बस अपना पत्नी धर्म ही निभा रही हूँ पर मैं उनसे प्यार नहीं कर पा रही हूँ।

इसी तरह 2 साल बीत गये और एक दिन इन्होंने मुझसे बोला कि मेरा चचेरा भाई विक्की अपनी पढ़ाई के सिलसिले में यहाँ आ रहा है और वह यहीं पर रहेगा जब तक उसकी पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती।

शुरूआत में तो सब कुछ ठीक चल रहा था पर एक दिन हुआ यह कि मैं छत पर कपड़े सुखा रही थी और मेरे पीरियड भी चल रहे थे और मेरी मुनिया में से पानी भी बह रहा था और वह रिस रही थी।

मेरी यह बात विक्की की नज़र मैं आ गई और उसने मुझसे कहा कि क्या बात है तुम तो पहले से ही अपनी मुनिया को तैयार करके बैठी हो?

जैसे ही मैंने उसके मुहँ से यह शब्द सुने तो मुझे अपनी सुहागरात वाली रात याद आ गई जो मेरे जीवन की सबसे यादगार रात थी और फिर मैं उसकी तरफ बढ़ी।

तो विक्की मेरी तरफ़ हँसते हुए देख रहा था और मैंने उसकी ओर इशारा करते हुए उससे पूछा कि क्या उस रात तुम थे?

तो उसने जवाब में अपना सिर हिला दिया।

मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं खुश होऊँ या फिर उसकी शिकायत अपने पति से कर दूँ?

फिर मेरे मन में उस रात के ख्याल आने लगे और फिर मैं उसकी ओर बढ़ी और उससे पूछा कि तुम कहाँ चले गये थे मुझे छोड़कर?

विक्की :– भाभी, मैं तो बस उस रात ही रुक सकता था उसके बाद वक्त ने कभी मौका ही नहीं दिया पर आज फिर से मौका दिया है मुझे उस मुनिया के दर्शन फिर से करने का।

अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपने गले से लगा लिया और हम दोनों ने पूरे दिन खूब चुदाई की। हमारा यह सिलसिला आज भी चल रहा है और अब तो मैं विक्की के बच्चे की माँ भी बनने वाली हूँ और मेरे पति समझते है कि यह बच्चा उनका ही है।

धन्यवाद मेरे प्यारे पाठकों !!

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