ट्रक ड्राइवर और खल्लासी ने लिफ्ट

हाय दोस्तों, मेरा Antarvasna नाम सुषमा है Kamukta और मैं एक 34 साल की बहुत गोरी और सेक्सी औरत हूँ मुझे देखकर अच्छे-अच्छे लोग अपने पैंट में ही अपने लंड से पानी निकाल देते है तो दोस्तों सोचो कि मैं कैसी दिखती होंगी दोस्तों मैं कामलीला डॉट कॉम की नियमित पढ़ने वाली पाठक हूँ मुझे इस साईट की सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगती है और मैं रोज़ अपने ऑफिस में खाली समय में बैठकर इसकी कहानियाँ पढ़ती हूँ और जो घटना मैं आज आपको बताने जा रही हूँ वह 2 साल पुरानी है और वह मेरे साथ ही घटी थी।

अब मैं वह घटना आप सभी को विस्तार से बताने जा रही हूँ जो कि इस प्रकार से है…

मैं अपने ऑफिस की छुट्टियों में अपने गाँव गई हुई थी और वहाँ से 4 दिन बाद अपने घर वापिस आना था क्योंकि अगले दिन से मुझे ऑफीस भी जाना था अगर मैं समय पर नहीं पहुँचती तो मेरी नौकरी भी जा सकती थी क्योंकि मैं एक प्राइवेट कम्पनी में काम करती हूँ।

मेरे गाँव के बस स्टैंड से मुझे रात को आखरी वाली बस पकड़नी थी जो कि 8.30 बजे आती थी पर मैं लेट हो गई और मेरी बस छूट गई थी और फिर मैंने पता किया कि बस स्टैंड पर अगली सुबह तक और कोई बस नहीं थी और मैं बस स्टैंड पर ही फँस गई जब मैं बस स्टैंड के बाबू से बात कर रही थी तो वहाँ पर एक आदमी हमारी बातें सुन रहा था वह एक ट्रक ड्राइवर था जो वहाँ पास ही के एक होटल में खाना खाने के लिये रुका हुआ था।

फिर मैं निराश होकर वहीं एक बेंच पर बैठ गई मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ और मैं यहाँ कहाँ पर आकर फंस गई हूँ और फिर वह ट्रक ड्राइवर थोड़ी देर बाद मेरे पास आया और उसने मुझसे कहा कि मैं भी शहर की तरफ ही जा रहा हूँ और मैं आपको वहाँ पहुँचा दूँगा तो मैं एक पल के लिये तो डर गई थी फिर मुझे डरता हुआ देखकर वह बोला कि आप अच्छे से सोच लो मैं अभी 10-15 मिनट बाद निकलने वाला हूँ आपको चलना हो तो बता देना और फिर वह वहाँ से चला गया और फिर मैंने भी सोचा कि उसके साथ जाना ठीक रहेगा या नहीं और मेरा जाना भी ज़रूरी था और वह बस स्टैंड भी सुनसान था और वहाँ मैं एक अकेली ही औरत थी।

और फिर मैंने सोचा कि रास्ता तो हाइवे का है जहाँ हमेशा गाड़ियाँ तो चलती ही रहती है ऐसे रास्ते में वह मेरे साथ कुछ भी नहीं कर सकेगा और फिर 15 मिनट के बाद जब वह वापस आया तो मैंने उससे हाँ कर दी। उस रात मैंने एक लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी और फिर वह मुझे अपने ट्रक तक ले गया मैं उसके ट्रक में बैठ गई उसके साथ उसका एक खल्लासी भी था जो पीछे की सीट पर बैठा था थोड़ी देर में वह ट्रक ड्राइवर होटल वाले को खाने के पैसे देकर आ गया उसने बस लूँगी और बनियान ही पहना हुआ था और फिर हम वहाँ से चल पड़े करीब 30-40 किलोमीटर तक जाने के बाद उसने ट्रक एक कच्चे रास्ते पर उतार दिया।

मैं थोड़ी घबरा गई और उससे पूछा तुम यह कहाँ लेकर जा रहे हो? तो उसने कहा कि मैडम यह दूसरा रास्ता है और यहाँ से हम टोल टेक्स देने से बच सकते है और यह एक सीधा रास्ता भी है और फिर थोड़ी दूर जाने के बाद जंगल जैसा सुनसान रास्ता आ गया मेरा डर अब और भी बढ़ने लगा था और फिर थोड़ी दूर जाने के बाद उसने उस जंगल में ट्रक को रोक दिया और कहा कि मुझे पैशाब करना है और आपको भी करना हो तो कर लो और फिर वह दोनों नीचे उतर गये और एक तरफ जाकर पैशाब करने लगे मुझे भी पैशाब आ रहा था तो मैं भी नीचे उतर गई और ट्रक के पीछे जाकर मैंने भी पैशाब कर लिया और जब मैं वापस लौटी तो वह दोनों ट्रक के बाहर ही खड़े थे उस ट्रक ड्राइवर ने मुझसे अब आगे ले जाने के लिए पैसे माँगे तो मैंने उससे कहा कि हमारे बीच में पैसे की तो कोई बात ही नहीं हुई थी।

अब मैं डर के मारे बुरी तरह से काँपने लगी पर वह नहीं माना तो मैंने उससे पूछा कि कितने पैसे चाहिए?

ड्राईवर :- 500 रुपये।

मैं :- यह तो बहुत ज़्यादा है।

ड्राईवर :- आगे चलना है तो पैसे दो।

मैं :- यह तो बहुत ज्यादा है

और फिर मैनें उसको 100 रुपये दे दिये और कहा कि?

मैं :- बस में इतना ही लगता है।

ड्राइवर :- पूरे 500 रूपये दो नहीं तो मैं अपना ट्रक लेकर यहाँ से जा रहा हूँ।

मैं :- मेरे पास और पैसे नहीं है।

ड्राईवर :- ठीक है तो आप एकबार अपना जिस्म दिखा दो तो सब बराबर हो जाएगा।

मैं अब बहुत डर गई थी और मैंने ना कहा तो वह मुझे वहीं उस सुनसान जंगल के बीच में छोड़कर जाने लगा तो मैं सोचने लगी कि अब तो मैं फँस गई हूँ और फिर मुझे मजबूरी में उसकी बात को मानना ही पड़ा।

मैं बोली ठीक है मैं अपना जिस्म तुमको दिखा दूँगी तो उसने मुझे ट्रक के सामने जाने को कहा और मुझसे अपने कपड़े उतारने को कहा और फिर मैं ट्रक के सामने चली गई मुझे ट्रक की हेडलाइट की रोशनी के कारण कुछ नहीं दिख रहा था वह दोनों भी नहीं दिख रहे थे जो ट्रक के साइड में खड़े थे फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतारी और एक तरफ रख दी फिर अपना ब्लाउज और फिर पेटीकोट भी उतार दिया अब मैं उस सुनसान जंगल में अपनी ब्रा और पैन्टी ही में खड़ी थी और मेरा गोरा बदन उस ट्रक की हेडलाइट की रोशनी में चमक रहा था

अब मैंने उनसे कहा कि?

मैं :- हो गया ना बस अब यहाँ से चलें?

ड्राईवर :- अभी नहीं थोड़ा और रूको।

मुझे वह दोनों नहीं दिख रहे थे फिर वह दोनों ही धीरे-धीरे मेरे करीब आने लगे तो मैंने देखा कि वह दोनों भी पूरे ही नंगे थे उनके 7-7 इंच के लगभग के लंड पूरी तरह से खड़े थे फिर उस ट्रक ड्राइवर ने मुझे पकड़ लिया और मेरी चूचियों को मेरी ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा और वह खल्लासी नीचे मेरे घुटनों के पास बैठ गया और मेरी गोरी टाईट जांघों को चाटने लगा और मैं कुछ भी नहीं कर सकी मैं अकेली उन दोनों के सामने कर भी क्या सकती थी।

यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर उन दोनों ने मेरी ब्रा और पैन्टी को भी उतार दिया अब मैं उन दो मर्दों के सामने पूरी नंगी थी फिर वह ट्रक ड्राइवर नीचे बैठकर मेरे पीछे से मेरी मस्त गोरी बड़ी गांड को चाटने लगा। तभी वह खल्लासी खड़ा हुआ और उसने अपने होंठ मेरे होठों से लगा दिए और मुझे किस करने लगा वह अपनी जीभ से मेरी जीभ को छूने लगा और अपने थूक को मेरे मुँह में डालने लगा फिर थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा और फिर वह ट्रक ड्राइवर उस खल्लासी से बोला कि चल अब इसको नीचे लेटा दे अब इसको चोदते है साली बहुत गरम माल है अब उन्होंने मुझसे घोड़ी बनने को कहा और फिर उस ट्रक ड्राइवर ने मेरे पीछे से आकर 5 मिनट तक मेरी चूत को खूब चाट-चाटकर चिकना किया मेरी चूत को ट्रक ड्राईवर ऐसे चाट रहा था जैसे बहुत दिनों का भूखा हो और फिर अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और रगड़ने लगा और फिर अपना 7 इंच का काला लंड मेरी चूत में डाल दिया मेरी चूत में मोटा लंड डालते ही मेरी तो आहह… सी निकल गई थी फिर वह ड्राइवर उस खल्लासी से बोला कि अबे चुप करा इस रंडी को नहीं तो कोई आ जाएगा और फिर उस खल्लासी ने उसके लंड को मेरे मुँह में डाल दिया और मेरे पीछे से वह ड्राईवर मेरी चूत में अपने लंड से धकाधक चुदाई कर रहा था

और इतनी जल्दी-जल्दी मेरी चूत में लंड डाल रहा था जैसे उसको बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली हो और फिर 10 मिनट की चुदाई के बाद मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया था और वह दोनों उसी पोजीशन में अपनी जगह बदल-बदल के मेरी खूब चुदाई करते रहे और आख़िर में वह दोनों ही बारी-बारी से मेरी चूत में ही झड़ गये और मैं थोड़ी देर तक वहीं उसी हालत में नंगी ही पड़ी रही और फिर मैं खड़े होकर अपने कपड़े उठाने लगी तो उस ट्रक ड्राइवर ने मुझे फिर से पकड़ लिया और कहा कि तू हमारे साथ ऐसे ही नंगी ही बैठेगी और फिर हम सब नंगे ही ट्रक में बैठ गये मैं दो नंगे मर्दों के बीच में नंगी बैठी थी और ट्रक फिर चलने लगा फिर आधे घंटे के बाद उस खल्लासी ने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपनी गोद में बैठा लिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा।

खल्लासी :- उस्ताद जी इस नंगी रंडी को देखकर मेरा लंड तो फिर से खड़ा हो रहा है।

ड्राईवर :- ठीक है तो एक और राउंड और हो जाए।

मैं :- नहीं अब नहीं वरना मैं तो मर ही जाऊँगी।

पर वह दोनों ही नहीं माने और खल्लासी फिर से मुझे किस करने लगा और मुझे अपने ऊपर बैठाकर मेरी चूत में अपना लंड फँसाकर मुझे ऊपर-नीचे करने लगा और फिर उन दोनों ने चलते ट्रक में ही मेरी चुदाई की और जब शहर पास आने लगा तो उस ट्रक ड्राइवर ने फिर से ट्रक को एक साइड में रोककर एकबार और मेरी चुदाई की और इस बार उन्होंने मेरे मुँह में ही अपना माल झाड़ दिया और फिर मैंने खुद को साफ किया और अपने कपड़े पहन लिए।

उस ट्रक ड्राइवर ने मेरी पैन्टी अपने पास रख ली और मुझे शहर के बाहर ही उतार दिया और मैं वहाँ से एक टैक्सी लेकर अपने घर गई अब मैं सोचती हूँ कि उस रात जो भी हुआ वह अच्छा तो नहीं हुआ पर चुदाई का मज़ा तो मुझे भी बहुत आया था एक साथ दो-दो लंड लेकर।

धन्यवाद प्यारे पाठकों !!

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