दोस्ती और राखी दोनो का फ़र्ज़ निभाया 3

हाय फ्रेंड्स Antarvasna मैं अमन आप सभी Kamukta का कामलीला डॉट कॉम पर एकबार फिर से स्वागत करता हूँ और आप पढ़ रहे हो आज की कहानी का तीसरा और अंतिम भाग अब तक आपने इसमें पढ़ा कि कैसे मेरे एक दोस्त बुत्तन ने मेरी बहिन को मेरे ही सामने पटाया और चुदाई के लिए तैयार किया।

अब आगे…

तो फिर मैनें देखा कि दीदी ने अपनी ऊँगलियों से मुझे अपनी ओर आने का इशारा किया तो मैं घबराते हुए उनके पास गया तो बुत्तन मेरी बहिन के बब्स को छोडकर मेरी ओर देख रहा था।

दीदी :- आओ मेरे भाई तुम दुखी मत हो तुमने ही तो हमको मिलाया है यह लो यह तुम्हारे लिए है तुम्हारा राखी का तोहफा।

दीदी अपने एक बब्स को अपने हाथ से उठाकर मुझे बुला रही थी मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था मेरी आँखे चमक उठी।

मैं :- दीदी यह मेरे लिये ही है क्या मैं इसे चूस सकता हूँ?

दीदी :- हँसते हुए हा हा… हाँ इसको चूसो, चाटो या फिर काटो, जो तुम्हारी मर्ज़ी हो वह कर लो अब से यह तुम्हारी ही अमानत है।

मेरी धड़कने और तेज़ बढ़ने लगी मैं झट से दीदी के बब्स पर जा चिपका मैं अपनी साँसे रोककर पागलों की तरह उसे चूसने लगा था अब हम दोनों ही दीदी के बब्स पर टूट पड़े थे और दीदी के हाथ हम दोनों के सिरों को प्यार से सहला रहे थे और दीदी के मुहँ से हल्की-हल्की आवाजें भी निकल रही थी हमको आज कोई जल्दी नहीं थी कल की तरह तो पूरे 15 मिनट तक दीदी के बब्स को हम दोनों दोस्तो ने खूब चूसा, काटा और दबाया फिर बुत्तन दीदी की चूत में अपनी थूँक से भरी ऊँगली डालने लगा दीदी ने उसके हाथ रोके और जाकर नीचे बिछे हुए कपड़ो पर लेट गई और कहा कि आज मेरी चूत को मेरा भाई खाएगा।

ये सुनकर बुत्तन को बहुत गुस्सा आया।

बुत्तन :- अरे यह क्या? वह तो तुम्हारा भाई है।

दीदी :- इसीलिए तो, वह बेचारा मुझे चोद तो नहीं पाएगा तो थोड़ा चाटकर ही मन भर लेगा।

बस फिर क्या था मैनें भी देर नहीं की और जाकर सीधे ही उनकी मोटी गदराई जाँघों के बीच में मुहँ लगा दिया दीदी अब सिसकारियां लेने लगी मैं उनकी चूत को चूसता और फिर दोनों मुलायम जाँघो को चूमता और काटता. उधर बुत्तन पूरा नंगा होकर दीदी के बब्स को फिर से चूम रहा था लगभग 10 मिनट बाद दीदी ने मुझे धक्का देकर, बुत्तन को बुलाया तो मैं समझ गया कि अब असली खेल शुरू होने वाला है तो मैं वहाँ से बाहर आ गया और झाड़ी के चारों तरफ फिर से देखा कि कोई इधर आ तो नहीं रहा जब तक मैं वापस आया तो बुत्तन अपना लंड दीदी की चूत के मुहँ पर रख चुका था दीदी के बदन में तो मानों जैसे कोई करंट दौड़ रहा हो वह थर-थर कांप रही थी…

दीदी :- बुत्तन, ज़रा धीरे बाबू मैं पहली बार चुद रही हूँ।

मैं डर गया कि तभी बुत्तन बोला मैनें कौनसा पहले कभी चोदा है चलो दोनों मिलकर पहली चुदाई की शुरुआत करते है इतना कहकर अपनी कमर को ढाप्प से हिलाया और बुत्तन के लंड का सुपाड़ा दीदी की चूत में घुसकर के अंदर जाम हो गया।

दीदी :- आअहह… ईस्शस्श … अरे… बहुत मोटा… है… जरा सा बाहर निकालो

बुत्तन :- कील दीवार में सेट हो चुकी है, अब तो बस हथौड़ा ज़ोर से मारना है।

फिर वह सच में ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगा ठप्प… ठप्प… की आवाज आ रही थी उन दोनों की कमर की टक्कर से।

दीदी चिल्ला उठी आह्ह्ह्ह… नहीं… मेरी सीईईल टूऊऊट… गईई…

मुझे लगा इससे कोई ख़तरा है तो मैं जाकर दीदी के मुहँ में अपना मुहँ लगाकर चूमने लगा दीदी अब चुप हो गई थी पर साला बुत्तन मुफ्त की चूत को पाकर दीदी को ऐसे चोद रहा था मानों यह उसकी आखरी चुदाई हो जिंदगी की. चोदते-चोदते वह दीदी के निपप्ल को मसल देता फिर दीदी कुछ ही देर में खुद ही शांत हो गई और मैं खड़ा होकर बस उनको देखने लगा दीदी ने अब अपने दोनों पैर लेकर उसकी कमर पर कस दिए और उसके हर धक्के पर नीचे से उल्टा वार करने लगी मुझे पता था कि दीदी अब जन्नत की सैर कर रही है मैं भी अपने लंड को निकालकर उनकी चुदाई को देखते हुए हिलाने लगा।

दीदी :- आह्ह्ह… इस्सस… ओह्ह्ह

फिर कुछ ही देर में दीदी कल की तरह ही झड़ गई और फिर मेरी ओर देखकर हँसी मुझे शरम आई कि शायद वह मेरे छोटे लंड पर हँस रही है पर उसने मुझे अपने पास बुलाया और खुद लेटे हुए ही मेरा लंड हिलाने लगी उसने कुछ देर तक हिलाया और फिर बोली कि रुक जाओ भाई मैनें तुम्हारे लिए एक और तोहफा रखा है वह मैं तुमको थोड़ी देर में दूँगी।

फिर दीदी ने बुत्तन को नीचे लेटा दिया और वह उसके ऊपर बैठ गई तकलीफ़ तो दीदी को बहुत हो रही थी पर दीदी का जोश उनको रोक ना पाया और वह बुत्तन के पूरे लंड को मगरमच्छ की तरह अपनी चूत में निगलकर ऊपर-नीचे होने लगी।

दीदी :-उउउह … ईसशह… अयाया… अहहह… म्‍मह… आआआ… अयाह्ह्ह…

बुत्तन :- सस्स्सह… आहह… हाँ… और ज़ोर… और ज़ोर से उछलो मेरी जान।

दीदी को तो मानो जैसे पूरी रंडी ही बनना था वह और ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगी फिर दीदी रुक गई और मुझे बुलाया और कहा कि चलो अब अपनी पेन्ट खोलकर मेरे पीछे बैठो।

मैं दीदी के पीछे बुत्तन के पैरों पर बैठ गया फिर क्या दीदी अपने हाथ को पीछे लेकर गई और मेरे लंड को अपने दोनों कूल्हों के बीच में रखकर बैठ गई आआहह… क्या नरम गांड थी वह. मुझे तो लगा कि मानों मेरा लंड उनकी चूत में ही है।

दीदी :- तू अपनी दीदी को चोद नहीं सकता तो क्या हुआ, मैं तेरा माल बिना चोदे भी निकाल सकती हूँ।

दीदी फिर आगे-पीछे होने लगी, अयाहह… और मेरी सिसकारियां निकलने लगी और मैं ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाया दीदी के गांड घिसाई के आगे. और मेरा माल निकलकर बुत्तन के पैरों पर गिर गया तभी बुत्तन ने दीदी को पकड़कर अपनी ओर खींचा और उसके बब्स को अपने मुहँ में ले लिया दीदी के बदन में आग सी लगी हुई थी वह मज़े से सिसकारियां लेते हुए, बुत्तन के कान में कुछ कह रही थी फिर दीदी अपने घुटनों के बल आ गई, और

दीदी :- अबे बुत्तन हरामखोर, कुत्ते कहिंके अपनी कुतिया को चोद साले।

फिर तो क्या था वह मानों अपने आपको कुत्ता ही समझ बैठा, वह उठा और भौ-भौ की आवाज़ निकालकर दीदी के पीछे से उनकी चूत में लंड घुसेड दिया इसके साथ ही दीदी भी अपनी गांड हिलाने लगी आगे-पीछे करके, जैसे मानो वह चुदाई के लिए बहुत तड़प रही हो वह हरामी भी दीदी की कमर को पकड़कर दे दना-दन ठप्प-ठप्प करके चोदने लगा उनकी चुदाई अब धीरे-धीरे से लेकर तेज हो गई अब तो बस बुत्तन का लंड निकलता और फिर अपनी चमक दिखाकर फिर से दीदी की चूत के अंदर समा जाता।

दीदी :- आअहह… आहह… आअहह एम्म्म… उउफ़फ्फ़.. फक.. मी ईईई …

बुत्तन :- अयाया… साली… उउउहह… दीदी… मई… झडने… अयाया…

दीदी :- अबे चूतिये अकेला ही झड़ा तो मार दूँगी तुझे आआहह… हहाहह… और 10-15 धक्के लगा, मैं भी तेरे साथ ही झ्डूंगी फिर… ईसस्स्स…

फिर बुत्तन ने 10-15 जोरदार धक्के लगाए और तब दीदी ने उसके लंड को खीचकर बाहर निकाला तो बुत्तन ने अपना सारा माल दीदी की गांड पर ही छोड़ दिया दोनों उस जबरदस्त चुदाई से अधमरे से हो गये थे फिर मैनें उन दोनों पर पानी मार-मार के जगाया और उनसे घर चलने को कहा।

फिर उन दोनों ने अपने कपड़े पहने और बुत्तन ने मुझसे कहा कि यार, मैं तेरा यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा तूने दोस्ती की खातिर अपनी जवान सेक्सी और कुँवारी बहिन को मुझसे चुदवाया।

दीदी यह सुनकर हँस दी, पर मुझे अफ़सोस हुआ कि काश मैं भी एक ऐसी लड़की को चोद पाता।

धन्यवाद मेरे प्यारे दोस्तों !!

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