काली दुनिया का भगबान 5

“वो तो मैं देख सा हू। मैंने तुम्हारा नाम पूछा है
।” “डियाना ।” “इस तरह आर्मी एरिया में विमान से कूदने
का तुम्हारा क्या मकसद है?” उसने सवाल
किया । “भला एक लड़की का इतनी रात में आर्मी
एरिया में कूदने का क्या मकसद हो सकता है?”
मैं पूरी दिठाई से बोली । “सवाल मैंने क्रिया है । जवाब दो ।” “बात दरअसल ये है कमाण्डर कि मैं विमान
से पैराशूट से जमीन पर कूदने का प्रशिक्षण
ले रहीँ हूं । मेरा विमान भटककर इस तरफ आ
गया और मुझे नहीं मालूम था कि मैं जिस
जगह कूद रही हू । बो आर्मी का एरिया है,
वरना मुझसे ये गलती कभी नहीं होती ।” मैंने पहले से गढ़कर तैयार की गई कहानी कमाण्डर
को सुना दी । इस वक्त मैं मेकअप में थी और
एक विदेशी बाला नजर आ रही थी । कमाण्डर की ब्लेड की धार जैसी पैनी
निगाहें मेरे सुखे-श्वेत चेहरे पर फिक्स होकर
रह गई । उसके देखने का अंदाज बता रहा था
कि मानो वह मेरे चेहरे से सच जानने का
प्रयास का रहा हो । किन्तु मैं शर्त लगाकर कह सकती हूं कि उसे
मेरे चेहरे पर ऐसा कोई भाव नजर नहीं आया
होगा । ” तुम कहानी तो अच्छी गढ लेती हो लड़की
।” एकाएक उसके होठों पर जहरीली मुस्कान
नाच उठी । ” ये कहानी नहीं है कमाण्डर, बल्कि
हकीकत है ।” मैंने एकएक शब्द पर जोर देते हुए
कहा । मेरे होठों से निकला ही था कि
कमाण्डर का भारी-भरकम हाथ तेजी से हवा में
घूमा और उसकी चौडी हथेली झन्नाटेदार
थप्पड़ की शक्ल मैं मेरे कोमल गाल से टकराई । “तड़ाक… !” थप्पड़ इतना ताकतवर था कि मेरा समूचा
चेहरा झनझना उठा और मेरा सिर फिरकनी
की मानिन्द गर्दन पर घूम गया । आंखों से
आँसू उबल पड़े । यकीनन मैं बेहोश होते-हीते बची थी । “कमाण्डर ।” मेरे होठों से निकला । “खामोश.” वो दहाड़ा । मैंने अपने होंठ र्मीच लिये । चारों सैनिक अजीब निगाहों से मुझे देख रहे
थे । “तुम क्या समझती हो कि मैं तुम्हारी इस
बकवास पर यकीन कर लूंगा !” उसने गुस्से से
दांत पीसे ।

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