भूत प्रेत की कुछ सच्ची कहानियाँ 3

मेरा नाम बाबुल घोष है, और में कोलकाता से हूँ। मैंने लगभग हर तरह की नौकरी आजमाई है। और अनगिनत नौकरियों से निकाला जा चुका हूँ। पढ़ाई में मै हमेशा अंडे ही उबालता था, इस लिए दस्वी कक्षा की अंतिम परीक्षा में आए स्पीडब्रेकर नें स्कूल से मेरा नाता हमेशा के लिए तौड दिया था। इस समय मै पच्चीस का हो चला हूँ। अब तो पिताजी भी गुस्से मै बोलते रहते हैं की… बेटा तू शायद जिंदगी भर मेरे टुकड़ों पर ही पलेगा। मुर्दाखोर चुड़ैल से जब मेरा सामना हुआ तो मै लगभग अपनी जान गवा ही चुका था।
पिछले महीने के एक दिन की बात है जब, हमेशा की तरह पिताजी मुजे काम ना मिलने के कारण जली-कटी सुना रहे थे, तब गुस्से में आ कर मेंने भी उन्हे बोल दिया की आज शाम तक अगर मै नौकरी नहीं ढूंढ पाया तो रात को घर वापिस नहीं आऊँगा। ऐसा बोल कर मै काम ढूँढने की खोज में लग गया। रात के बारह बजे तक भटका, पर कोई काम ना मिला। अंत में निराश हो कर एक वीरान कब्रिस्तान के पास पैड के नीचे बैंच पर सो गया। अभी मेरी आँख लगी ही थी की कब्रिस्तान में से…फावड़े और कुल्हाड़ी ज़मीन पर फटकने की आवाज़ आने लगी। में जाग गया तो देखा की काले कपड़े वाली कोई जवान गोरी औरत कबर खौद रही है। मेरे तो हौश उड़ गए। मै चुप कर देखने लगा। तो थोड़ी देर में उसने कब्र से मुर्दा बाहर निकाल लिया। और भूखे जंगली जानवरों की तरह उस मुर्दे को काँट नौच कर खाने लगी। वह एक दिल दहला देने वाला नज़ारा था। उस वैहशी मंज़र को देख कर डर से मेरे हाथ पाँव फूल गए थे। और धड़कने बेहद तेज़ हो गयी थीं। करीब आधे घंटे तक उसने वह मुर्दा खाया। और फिर वह उसे फिरसे कब्र में गाड़ने लगी।
तभी अचानक एक दुर्घटना हुई जिसके कारण उस वक्त मेरी जिंदगी जहन्नुम बन गयी थी…आप सौच भी नहीं सकते की किसी की किस्मत इतनी खराब कैसे हो सकती है…वह मुर्दा खा कर जाने ही वाली थी की…. मेरे मोबाइल की रिंग बज उठी… और उस काले कपड़ों वाली जवान मुर्दाखोर भयानक औरत ने मेरी और पलटी मारी। वह इधर उधर जांकने लगी। में दीवार के पीछे जड़ियों में छुपा था। मुजे लगा वह मुजे नहीं देख पाएगी। पर वह मेरी सब से बड़ी भूल थी। पलक जपकते ही वह भयानक औरत वहाँ से गायब हो गयी और मेरे पीछे आ कर खड़ी हो गयी। दिखने में वह किसी अप्सरा से कम नहीं थी। पर उसके मुह पर मुर्दे का गोश्त और खून लगा था। जिसे देख कर अच्छे अच्छों की बोलती बंद हो सकती है। उसे अपने सामने देख कर मै बर्फ की तरह जम गया… उसने एक हाथ से मेरा गिरहबान पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ किया। फिर उसने मुजे ऐसे गले लगा लिया जैसे की वह मेरी गर्ल फ्रेंड हो। करीब पाँच मिनट तक उसने मुजे वहीं गले लगाए खड़े रखा। और फिर वह मुजे कब्रिस्तान के अंदर ले जाने लगी। मै हौश में था। पर पता नहीं क्यूँ उसका विरोध नहीं कर पा रहा था। बस उसके साथ चले जा रहा था। एक कब्र के पास आ कर वह भयानक औरत रुक गयी। और उस कब्र को खोदने लगीं। कब्र में से आधा खाया हुआ मुर्दा उसने बाहर निकाला और उसे उछाल कर जाड़ियों में फेंक दिया। फिर उसने मेरी और देखा

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