तितली-Titlee(incest)

नई सुबह की कीरण से खिल उठी मासुम कली,

दुनिया से बेखबर अपनी धुंध मे सुगंध बरसाने लगी,

कजरीबाई- अरी ओ सरीता वो सुधीया को निपटाने को बोल और ग्राहक आते होंगे ।

दरवाजे पर दस्तक हुई….

नीता- क्यूं कजरीदीदी कैसे चल रहा है सबकुछ

कजरीबाई- अरे नीता आओ आओ बैठो कहो कैसे आना हुआ, कुछ खास काम मेरे लायक

नीता- अरे कजरीदीदी वैसे काम तो खास है पर यहां नही बता सकती

कजरीबाई- अरे नीता एसा कौनसा खास काम है ।

नीता- दीदी जरा उपरवाले कमरे मे चलो ना

कजरीबाई- चलो फीर

नीता फोन लगाती है ।

नीता- हां साहब उपर कमरे मे आ जाईए

नीता और कजरी कमरे मे बैठते है । दरवाजे पे ठकठक होती है ।

नीता दरवाजा खोलती है ।

दरवाजे मे बलवान बदन वाला गले मे सोने की ८ तोले की चैन और तरह तरह की सोने की अंगुठीया पहना हुआ

शक्स खडा था ।

कजरी उसके ओर आंखे फाडे घुरने लगती है ।

नीता- आओ साहब कजरीदीदी ये हमारे कांतीलाल साहब है । बडे व्यापारी है । साहब ये कजरीदीदी है ।

कजरीबाई- अरे नीता तू भी ना साहब के बारे मे पहले बता देती तो रात तक का अच्छा बंदोबस्त कर देती

नीता- दीदी बात ही कुछ एसी है की बता नही सकती थी

कजरीबाई- मतलब

नीता- वो दीदी साहब को एक लडकी चाहीए

कजरीबाई- अरी नीता मै क्या यहां पान का ठेला नही लगाती, साहब आप बताओ कैसी लडकी चाहीए आपको,

टंच माल है मेरे पास आप हुकुम करो हाजीर हो जाएंगी लडकीयां

नीता- अरे दीदी आप समझ नही रही हो

कजरीबाई- अरी नीता देख कर पहचानती हूं की मर्द को क्या चाहीए

नीता- अरे दीदी आप समझी नही साहब की बीवी कुछ साल पहले गुजर गई है साहब को लडकी खरीदनी है और

उससे शादी बनानी है ।

कजरीबाई- नीता तेरा दीमाग तो ठीकाने है लगता है तू साहब को गलत जगह ले आई है मै लडकीयां बेचती नही

नीता- अरे दीदी बात को समझो कई जगह देख चुके है हम, पर ना उम्मीद हासील हुई हमें

कजरीबाई- तो यह क्या दुकान लगी तुझे यह नही हो सकता

नीता- अरे दीदी साहब जीतना कहो उतना पैसा देने को तैयार है । कीसी की जिन्दगी बन जाएगी तो दुवांए

मिलेंगी । सोच लो ।

कजरीबाई- पर मेरा धंधा खराब होगा उसका क्या.. नही नही यह नही हो सकता..

नीता- दीदी पर मुह मांगी रक्कम भी तो मील रही है ना आपको

कजरीबाई कुछ देर सोचने लगी….

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