होता है जो! वो हो जाने दो 7

राहुल अपने कमरे में आते ही झट से दरवाजा बंद कर लिया। उसकी साँसे बहुत ही तेज चल रही थी। जो उसने देखा था उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। दरवाजा बंद करने के बाद वह तुरंत आ कर बिस्तर पर बैठ गया। उसका दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था।
उसका ध्यान जब उसकी जाँघो के बीच गया तो… उसका दिमाग संन्न हो गया। उसकी जाँघो के बीच में तंबू बना हुआ था। उसको यकीन नहीं आ रहा था कि खुद की मां को नंगी देख कर उसका लंड टनटना कर खड़ा हो गया है। उसको आज अजीब सा लग रहा था उसका मन ना जाने क्यों मचल रहा था। ऐसा उसके साथ पहले कभी भी नहीं हुआ।
आज ही के दिन उसके साथ घटी दो घटनाएं उसका जीवन बदलने वाली थी।
राहुल अपने दिमाग से अभी अभी घटि उस घटना को निकाल देना चाह रहा था। लेकिन चाह कर भी वो उस पल को भूल नहीं पा रहा था। बार बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी और बिल्कुल गोल गोल एकदम गोरी गांड तैर जा रही थी। राहुल के लिए उसकी मां की नंगी गांड को देख पाना बहुत बड़ी बात थी।
क्योंकि आज तक वो अपनी मां को इस हाल में ना देखा था और ना ही कभी देख पाया था। पल भर के लिए ही तो देख पाया था उसने अपनी मां की गांड को उसकी चिकनी मांसल जांगो को। और पलक झपकते ही गाऊन सीधे उस अनुपम और अतुल्य दृश्य को ढँकते हुए उसकी मम्मी के पैरों में जा गिरा।
बस इतना सा ही नजारा उसके दिलो-दिमाग पर पूरी तरह से छाया हुआ था। आज जो उसके साथ हो रहा था ऐसा कभी भी नहीं हुआ। सुबह सुबह क्लास में नीलू की सेक्सी अदाओं के दर्शन हुए और यहां कमरे में अपनी मम्मी की नंगी गांड को देखकर मचल उठा था उसका तनबदन।
एक तो नीलू की उफान मारती जवानी देख कर उसका कोमल मन सुलग ही रहा था कि उसकी मां की सुडोल और बड़ी बड़ी गोरी गांड ने आग में घी का काम कर दीया। उसकी सांसे तेज चल रही थी और साथ ही पजामे में तना हुआ उसका हथियार उसे और परेशान कर रहा था। उसका गला सूखने लगा था और वह बिस्तर पर लेट गया। बार बार अपना ध्यान वहाँ से हटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन बार-बार उसकी आंखों के सामने सुबह क्लास में अपनी शर्ट की बटन खोलती हुई नीलु … उस की चुचीयाँ दबाता हुआ विनीत और अभी अभी कुछ देर पहले। उसकी मम्मी की बड़ी बड़ी गांड दीखाई दे रही थी। इसलिए वह अपना ध्यान चाह कर भी नहीं ह टा पा रहा था।
वह क्या उसकी जगह कोई भी उसकी हम उम्र का होता तो वह भी इतना गरम और कामुक नजारा देखकर
सन्न हो जाता। और राहुल तो देख भी पहली बार ही रहा था। इसलिए तो उसका और भी ज्यादा बुरा हाल था उसका टनटनाया हुआ लंड तनकर लोहे का रॉड हो चुका था बार बार उसे ऐसा लग रहा था कि उसे पेशाब लगी है। उसका हाथ बार बार उस के तने हुए लंड पर चला जा रहा था।
एक तो उसकी माँ की नंगी गांड उसकी आंखों के सामने तेर जा रही थी। और जब भी वो उसकी माँ की नंगी गांड के बारे में सोचते हुए अपने लंड को पजामे के ऊपर से दबाता तो उसे एक अजीब सी सुख की अनुभूति होती । उसका मन उससे ज्यादा सुख पाने के लिए मचल उठता। लेकिन वह ये नहीं जानता था की इससे ज्यादा सुख क्या करने से हासिल हो सकता है।
किताबों की जानकारी उसे बहुत थी लेकिन सेक्स की एबीसीडी से अभी वह अज्ञान था ।
उसकी जगह दूसरा कोई लड़का होता तो मे लंड की गर्मी शांत करने के लिए अपने हाथों से ही मुठ मारकर
अपने लंड का पानी निकाल दिया होता। लेकिन राहुल को तो मुठ मारना भी नहीं आता था। उसने आज तक अपने लंड को सिर्फ पेशाब करने के लिए ही हाथों में पकड़ा था। इससे ज्यादा उसने अपने लंड के साथ कुछ किया नहीं था। और यह भी नहीं जानता था कि अपने आप को कैसे शांत किया जाता है।
यही सब सोचते सोचते जब उसके लंड की खुजली और ज्यादा बढ़ गई तो उसका हाथ अपने आप ही पजामे के अंदर चला गया। अपने ही अंगुलियों का स्पर्श खुद के लंड पर पड़ते हैं वह पूरी तरह से गनगना गया। अंगुलियों का स्पर्श लंड के सुपाड़े पर पड़ते हैं। अजीब से सुख का अहसास उसके रोम रोम को पुलकित करने लगा लेकिन उसकी अंगूलीयाँ भी लंड से निकले चिपचिपे पदार्थ से गीली हो गई। लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि उसके के लंड से निकला ये चिपचिपा पदार्थ क्या है उसे तो यह लग रहा था कि ज्यादा तेज पेशाब लगने की वजह से उसकी 2 4 बूंदे अपने आप टपक रही हैँ। लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि इतना चिपचिपा क्यों है। जैसे जैसे वो अपने लंड को अपनी मुट्ठी में कसता उस का रोमांच बढ़ता जाता।
ल** को मुट्ठी में दबाने से जो मजा मिल रहा था उससे उसके पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ जा रही थी। उसे अगर इतना भी पता होता की लको मुट्ठी में भर कर आगे पीछे हिलाने से मजा दोगुना हो जाता है तो वह जरूर इस समय ऐसा ही करता। लेकिन उसे इस बारे में जरा भी ज्ञान नहीं था। मुठ मारने के बारे में दोस्तों से सुना जरूर था लेकिन कैसे मारा जाता है उसको नहीं मालूम था।
लंड को दबाने मात्र से ही उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो गया उसकी सांसे तेज चलने लगी थी । उसने जब अपनी हालत पर गौर किया तो घबरा गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है उस तुंरत बिस्तर से उठ कर बैठ गया और टेबल पर पड़ा हुआ पानी का गिलास उठाया और एक झटके में पी गया। कुछ देर यूं ही बैठ कर अपने उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त होने दिया। जब नॉर्मल हुआ तो उसे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि वह अपनी मां के बारे में सोच कर कितना गंदा कर रहा था। उसका मन ग्लानी से भर गया। और मन ही मन में अपनी मां की माफी मांग कर बिस्तर पर लेट गया। उसके मन में ढेर सारे सवालों का भूचाल में मचा हुआ था। उन्ही सवालों के जवाब ढूंढते-ढूंढते व कब नींद की आगोश में चला गया उसे पता ही नहीं चला।
सुबह जब नींद खुली तो उसने देखा कि उसका पजामा के आगे वाला भाग गीला हो चुका था। अक्सर पंद्रह-बीस दिनों में उसका पजामा आगे से गीला ही मिलता था लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा है गिला क्यों हो जाता है उसे तो ऐसा ही लगता था कि शायद उसकी पैसाब छूट जाती है।
बीते हुए कल की बात को भूल कर वो उठा और सीधे बाथरूम में घुस गया । कुछ ही देर में वह नहा कर तैयार हो चुका था। उसकी मम्मी नाश्ता तैयार कर चुकी थी।

अपनी मम्मी को रसोईघर में देखते ही उसे कल की बात याद आ गई और कल की बात याद करके उसे अपने आप पर गुस्सा भी आने लगा अपनी मम्मी से नजरें नहीं मिला पा रहा था। वह चुप-चाप नाश्ता किया और मम्मी को बाय बोल कर स्कूल की तरफ चल दिया

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