होता है जो! वो हो जाने दो 6

राहुल: चल अब रहने दे। ज्यादा फेक मत। बेवकूफ बनाता है। तु कब देख लिया।
वीनीत; हां यार सच कह रहा हूं तुझे विश्वास होता है की नही ये तो मैं नहीं जानता। लेकिन जो कह रहा हूं बिल्कुल सच है। ( राहुल के पेंट में तंबू बन चुका था और वह बार बार नीचे हाथ ले जाकर अपने तंबू को एडजस्ट कर रहा था।)

राहुल; अच्छा यह बता तू कैसे देख लिया।
( इन सब बातों से विनीत का खुद का लंड खड़ा हो चुका था और वह भी बार बार अपने हाथ से अपने लंड को एडजस्ट कर रहा था।)

वीनीत; देख आज मै तुझे सब सच सच बताता हुँ। नीलू मेरी गर्लफ्रेंड जैसी है। और और। नीलू के साथ मेरा सब कुछ हो चुका है।

राहुल; सब कुछ मतलब।
वीनीत; सब कुछ मतलब वही जो एक लड़का और लड़की के बीच होता है। मतलब यही कि नीलू मुझसे चुदवा चकी है।
( यह सुनते ही राहुल हक्का बक्का रह गया। राहुल को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वीनीत जो कह रहा था वो सच है। उसका मुंह खुला का खुला रह गया और लंड एकदम सें अकड़ गया। उसकी आँखो के सामने तुरंत नीलू का चेहरा तैरने लगा।वीनीत के मुँह से बुर चुची और चुदाई शब्द सुनकर पुरा बदन गनगना गया था। यह सब बातें। उसने पहले ना किसी से कही थी और ना ही सुनी थी क्योंकि यह सब बातों में उसे पहले से रुचि नहीं रखता था लेकिन आज हालात ही कुछ इस तरह से हो गए थे कि उसे यह सब बातें करनी पड़ रही थी। राहुल विनीत की तरफ देखा तो वह बहुत खुश हो कर बता रहा था हां उसे इस बात की कोई भी शर्मिंदगी नहीं हो रही थी।

राहुल; यह सब मतलब। हुआ कैसे।
( राहुल की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। राहुल के सवालों का जवाब देते हुए विनीत बोला।)

वीनीत: यार वो मेरे घर नोट्स लेने ही हीं आई थी। और जब मैं दरवाजा खोला उस समय में टावल लपेटा हुआ था। दरवाजे पर नीलूं को देखते हैं मैं हड़बड़ा गया और मेरी टावल छूट कर नीचे गिर गई। मुझे क्या पता था कि दरवाजे पर नीलूं है। मैंने तो उस समय टावल के नीचे और कुछ पहना भी नहीं था। नीलू की नज़र सीधे मेरी जानू के बीच लटक रहे हथीयार पर पड़ी। और नीलू मेरे लंड को देख कर भौंचक्की रह गई। मैं इससे पहले कि नीचे गिरी टॉवल उठाता नीलू अंदर आकर दरवाजे को लॉक कर दि। और तुरंत मेरे टनटनाए लंड को अपने हाथ में ले ली। और ऐसे हालात में जो होता है हम दोनों के बीच वही हुआ। तब से हम दोनों जब भी मौका मिलता है यह सब करने से बिल्कुल नहीं चूकते। और हां यह जो अभी नोट्स मांग के गई येउसका इशारा था ।
अगली चुदाई के लिए। यह नोट्स मांगना उसका कोड वर्ड हे। जब भी उसका मन करता है करवाने का वह मुझे कोड वर्ड बोल कर इशारा कर देती है और मैं समझ जाता हूं।
( विनीत की बात सुनकर राहुल एक दम गन गना गया।)
राहुल; इसका मतलब अब तु फिर से।

वीनीत; हाँ तो ऐसा मौका भला कोई छोड़ता है।
अच्छा अब बहुत समय हो गया है। हमें चलना चाहिए।
( राहुल वीनीत से बहुत कुछ जानना चाहता था। लेकिन विनीत के कहने पर उसे उठना ही पड़ा। विनीत काउंटर पर जाकर बिल पे किया। राहुल पहले से ही बाइक के पास जाकर खड़ा हो गया था। विनीत काउंटर पर से वापस लौटा तो उसकी नजर सीधे राहुल के पेंट के आगे वाले भाग पर गई। य देखकर वीनीत हँसने लगा। विनीत को हंसता हुआ देखकर राहुल बोला।

राहुल; क्या हुआ ऐसे क्यों हंस रहा है।

वीनीत: तेरे लंड महाराज को देख कैसे खड़ा हो गया। ( बाइक पर बैठते हुए) लगता है तेरा भी सेटिंग नीलू के साथ करना पड़ेगा। अब बैठ बाईक मिली हैं तो क्यों ना आज कहीं घूम लिया जाए।

राहुल बाइक पर बैठते हुए) तेरी मर्जी चल जहां चलना
हो।

( विनीत भी घर जाने की वजाय गाड़ी को दूसरी तरफ घुमा लिया। अक्सर जब ईन लोगों के पास बाइक होती है तो दिन भर यहां-वहां घूमते रहते हैं। सारा दिन सैर-सपाटा करते करते कब शाम हो गई पता ही नहीं चला शाम ढलने वाली थी। और अंधेरा छाने लगा था तब राहुल बोला अब हमें घर चलना चाहिए। विनीत भी गाड़ी को घर की तरफ मुड़ा लीया। और उसे उसी चौराहे पर छोड़ कर अपने घर की तरफ चल दिया।
राहुल घर पहुंचा तो काफी समय हो चुका था। राहुल का छोटा भाई सोनू पढ़ाई कर रहा था। वो सोनु से बिना कुछ बोले ही कीचन की तरफ चल दीया। जेसे ही राहुल कीचन मे पाँव रखा ही थी की राहुल की मां की आवाज आई।

राहुल की माँ: आज बहुत देर लगा दी बेटा।

राहुल: मम्मी आपको कैसे पता चल जाता है कि मैं आया हूं।
( राहुल की आटा गूँथते हूए।)

राहुल की माँ; तेरी मां हूं बेटा। तेरी रग रग से वाकिफ हूं मैं तेरे कदमों की आहट को पहचानती हुँ। ( राहुल अपनी मां की बातो से खुश होकर अपनी मां से जाकर लीपट गया। और बोला।)

राहुल: ओह मम्मी तुम बहुत अच्छी हो।

राहुल की माँ: अच्छा जाकर तू हाथ मुंह धो ले तब तक में खाना तैयार कर देतीे हुँ।
( राहुल अपनी मां से अलग होता हुआ बोला।)

राहुल: ठीक है मम्मी।( इतना कहकर राहुल रसोई घर से बाहर आ गया।)

( राहुल की मां सुबह वाली साड़ी पहनी हुई थी जब वह आटे को गुंथ रही थी। तब उसके हाथ के साथ-साथ की बड़ी बड़ी गांड भी थीरक रही थी। जिसे देख कर किसी का भी लंड तंग टनटना कर खड़ा हो जाए। राहुल की मां को किचन में काम करते हुए भी देखने मे भी अपना एक अलग मजा था। उसके बदन की मांसल बनावट ही ऐैसी थी की जब वो काम करती थी तब उसके बदन का कटाव मरोड देख देख कर ही लंड से पानी चूना शुरू हो जाए।
राहुल दिनभर घूमकर क्लास वाली बात को भूल चुका था के मन से सारी बातें मिट चुकी थी। इसीलिए तो वो हाँथ पाँव धोकर सीधे पढ़ने बैठ गया।
कुछ देर बाद खाना तैयार हो चुका था और उसकी मम्मी खाना लगा कर सोनू और राहुल को आवाज लगाई वे दोनों भी किताबें छोड़कर सीधे अपनी मम्मी के पास पहुंच गए। जहां पर वह खाना लगा कर बैठी थी। तीनो वहीं बैठ कर खाना खाए और खाना खाने के बाद राहुल की मम्मी बर्तन साफ करने लगी और वह दोनों भी जब तक उसकी मम्मी नहीं आई तब तक पढ़ते रहे।
कुछ देर बाद जब की मम्मी बर्तन साफ कर के आई तब वह राहुल और सोनू को बोली।)

राहुल की माँ: जा बेटा आप जा कर सो जाओ सुबह जल्दी उठना भी तो है न।
( वह दोनों भी अपनी मां की आज्ञा मानते हुए अपने अपने कमरे में चले गए और जाते-जाते गुड नाइट भी बोलते गए। जवाब मे वह भी गुड नाइट बोली।
अलका के पति ने ये एक काम अच्छा किए थे जो यह मकान अलका के नाम कर गए थे। जिसमें पांच कमरे थे। जिससे इन लोगों के पास सिर छुपाने की जगह तो थी। इसलिए तीनों अपने अलग-अलग कमरे में सोते थे सोनू को भी अलग कमरे में सोने की आदत पड़ गई थी
तीनों अपने अलग-अलग कमरे में चले गए।
राहुल अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा ही था कि उसे याद आया कि अलार्म लगाना भूल गया है। अक्सर वह सुबह 5:00 बजे का अलार्म लगा देता था। जिससे सुबह मे नींद जल्दी खुले। डिम लाइट के उजाले में वह बगल में रखे टेबल की तरफ देखा तो वहां पर दारु नहीं था उसे याद आया कि अलार्म तो मम्मी ले गई है। वह बिस्तर से उठा और सीधे मम्मी के कमरे की तरफ चल दिया। दरवाजा बंद था लेकिन अंदर जल रही ट्यूबलाइट की हल्की रोशनी दरवाजे के नीचे से आ रही थी ईसका मतलब ये था की अभी वह जग रही थी वर्ना लाइट बंद हो चुकी होती। राहुल सोचा की दरवाजा अंदर से लोक होगा। इसलिए जैसे ही वह दरवाजा खटखटाने के लिए ना हाथ दरवाजे पर रखा ही था की दरवाजा अपने आप खुलने लगा। राहुल समझ गया कि मम्मी दरवाजा लॉक नहीं कि है। इसलिए वह दरवाजे को खोलते खुलते बोला।
राहुल; कल आप अलार्म लाई थी ना मम्मी।( इतना बोलते ही दरवाजा पूरा खुला और राहुल ने जो सामने का नजारा देखा उससे तो उसका होश ही उड़ गया। उसकी मम्मी दीवार की तरफ मुंह किए हुए खड़ी थी।और उसकी पीठ राहुल के सामने थी। और वह गाउन पहन रही थी। उसकी मां गाऊन को कमर तक पहन चुकी थी लेकिन इससे पहले की वो गाऊन को नीचे सरकाती राहुल की नजर सीधे उसकी कमर के नीचे वाले भाग पर पड़ी। बस एक झलक भर ही देख पाया था की राहुल की बात खत्म होते-होते गाउन सरक के सीधे पांव तक चली गई। और उसकी मम्मी उसकी तरफ मोड़ कर जवाब देते हुए बोली।

राहुल की माँ; हां बेटा वो रहा अलार्म सामने टेबल पर ही पड़ा जा कर ले लो। ( राहुल भी बिना कुछ बोले सामने टेबल पर पड़ा अलार्म उठा लिया और जाते-जाते अपनी मम्मी को थैंक यू बोलते हुए दरवाजा बंद कर के चला गया। उसकी मम्मी भी नॉर्मल तरीके से बिस्तर पर लेट गई। )

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