भाभियों के साथ गाँव में मस्ती 8

अब तक आपने पढ़ा…

मैं- तो आप क्या करती हैं, अपनी जवानी को शांत करने के लिए?
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प्रीति- “और क्या? कभी कभी हम तीनों मिलके एक दूसरे की चाट देते हैं, कभी गाजर तो, कभी मूली डालकर अपनी आग शांत करती हैं। वैसे आपको पता नहीं होगा, मेरे पति नमार्द हैं, राशि को और सोनिया को बच्चा हुआ लेकिन मुझे नहीं हो रहा…”

अब आगे… …

मैं- क्यों, किसमें प्राब्लम है?

प्रीति- मैंने चोरी छुपे मेरा चेकप कराया, वो नार्मल आया। वो अपनी चेकप के लिए राजी ही नहीं हैं।

मैं- भाभी उससे बच्चा नहीं होता, लेकिन चुदाई तो हो ही सकती है ना?

प्रीति- “हाँ, लेकिन ऐसा होने के बाद हमारे संबंध में वो मिठास नहीं रही, जो पहले थी। वो भी उसकी चिंता में दुबले होते जा रहे हैं। और जब महीने में एकाध बार चोदते भी हैं तो बस दो मिनट में झड़ जाते हैं। और दोनों भाई भी तुम्हारी और भाभियों की चुदाई कभी-कभी ही करते हैं, क्योंकी उनको उसमें दिलचस्पी नहीं, और ऐसे ही बातों बातों में हम सभी देवरानी-जेठानी को एक दूसरे की हालत पता चली और धीरे-धीरे हम मिलकर आनंद उठती हैं। जब तुम घर आए तो हमें थोड़ी आशा की किरण दिखी की शायद हम तुमसे चुद जाएं…”

मैं- “भाभी, आप फिकर नहीं करना, अब मैं आ गया हूँ और सबको चोदकर रख दूँगा…”

मेरी इस बात पे प्रीति की हँसी निकल गई।

मैं- भाभी, एक सवाल पूछूं आपसे? ये एम॰सी॰ क्या होता है?

प्रीति- “वो हर एक औरत को होता है। जब एक महीना होता है तो औरत का बीज बनता है, और अगर बच्चा नहीं ठहरता है, तो एम॰सी॰ में निकल जाता है। लेकिन अगर बच्चा रह गया तो एम॰सी॰ नहीं आता है…”

मैं- वो दिखने में कैसा होता है?

प्रीति- बस लाल रंग का खून ही होता है, लेकिन उस टाइम औरत को पेड़ू (पेट का नीचे का और चूत के ऊपर का हिस्सा) में दुखता है,

मैं- भाभी, भगवान ने ये स्तन बहुत अच्छे बनाए हैं, मर्दों के लिए। दिल करता है की बस दबाते ही रहें और उसमें से दूध पीते ही रहें।

प्रीति हँसते हुये- “हाँ वो तो है ही, सभी मर्दो को वही पसंद होता है, औरतों में। वैसे क्या तुमने राशि का दूध पिया?”

मैं- हाँ।

प्रीति- कैसा लगा?

मैं- बहुत मीठा, भाभी क्या आप मुझे अपना दूध पिलाओगी?

प्रीति- धत्त… पागल कहीं का, दूध ऐसे थोड़े ही आता है?

मैं-तो?

प्रीति- अरे वो तो बच्चा पैदा होने के बाद आता है।

मुझे ये मालूम नहीं था। सोचा आज ये नया जानने को मिला। मैंने कहा- “तो आप भी माँ बन जाओ ना?”

प्रीति- “मैं तो तैयार ही हूँ, लेकिन तुम्हारे भैया…”

मैं- लेकिन मैं तो हूँ ना?

प्रीति- वो तो मैं भूल ही गई, लेकिन कहीं उनको शक पड़ा तो?

मैं- शक कैसे पड़ेगा? क्योंकी उन्होंने खुद की चेकप कराई नहीं है और अपने को बराबर ही मान रहे हैं।

प्रीति- “हाँ वो सही है। मैं तुम्हारा बच्चा पैदा करूँगी और आपको दूध भी पिलाऊँगी…”

मैंने रास्ते में कई बार उनकी चूचियों को भी दबा दिया था, होंठ भी छुआ और गाण्ड पे भी हाथ फिराया। वो नाराज होने वाली तो थी नहीं, और बातों बातों में खेत भी आ गया। तभी भाभी ने सबको खाना खिलाया, और सब फिर से काम में लग गये। तीनों भाई में से बड़े भाई को खाने के बाद तुरंत शहर जाना था, किसी काम से तो वो निकल गये। बीच वाले भाई यानी की प्रीति के पति खेत में चले गये काम करने क लिए, और सबसे छोटे ट्रैक्टर रिपेयर कराने के लिए चले गए।

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