कापालिनी लोपमुद्रा और राजकुमार अमोध 9

युवक ने अपने लिंग को बाहर निकलने की कोशिश की ताकि वह और ज़ोर से ठाप मार सके पर वह उस स्त्री के निचे था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta हिलना भी संभव नहीं थी.

अचानक उसे लगा की कक्ष के बाहर कोई है…..एक दो नहीं ऐसा लगा जैसे कई लोग खड़े हो.

मशाल की फड़फड़ाती रौशनी में उसे कुछ आकृतिया दिखी…..वो लडकिया था ….काले चोगे में…

युवक थोड़ा असहज हुआ मगर उसे ऐसे दर्शको से भी कोई आपत्ति कहा थी…..गांव की लड़कियों और महिलाओ को उसने कई बार अपने छुपे हुए मित्रों के सामने ही तो…..

युवक के विकराल लिंग पर बैठी स्त्री ने अपने निचे लेते युवक को देखा….

दोनों की ऑंखें मिली……स्त्री फुसफुसाई……”बस……….”

युवक ने दांत भींच कर अपने नितम्ब सिकोड़े और स्त्री की योनि में अपने लिंग को पेलने के लिए खींचने लगा.
तभी स्त्री ने फुर्ती दिखाई और अपनी मांसल जांघो को युवक के चारो और कस लिया

अब युवक हिल भी नहीं सकता था…..युवक को क्रोध आया और उसने अपने शरीर को एक झटका दिया.

६ फ़ीट का बलिष्ठ युवक बित्ता भर भी नहीं हिल पाया.

स्त्री ने ना मैं अपनी गर्दन हिलाई और अपने दोनों हाथ युवक की चौड़ी छाती पर रख दिए और अपनी योनि को इस विकराल गर्दभ लिंग पर पूरी तरह दबा दिया.

युवक कुछ समझ पता तभी उसे ऐसा लगा मानों स्त्री की योनि में असंख्य मथनिया उसके लिंग की मथ रही है.

स्त्री बिलकुल नही हिल रही थी मगर उसकी योनि मानों अंदर से ही युवक के लिंग को घोट रही थी.

सेकड़ो बार मैथुन के बाद भी युवक को कभी ऐसा आनंद नहीं आया था….

आश्चर्य और आनंद के अतिरेक से उसकी कराह निकल गयी

स्त्री की योनि बिना रुके युवक के लिंग को मथे ही जा रही थी. उसकी आंखे युवक की आँखों को अपलक देख रही थी.

बिच बिच में स्त्री भी बिना आवाज़ की कराहे ले रही थी.

दोनों के मुख जल बिन मछली जैसे खुल बंद हो रहे थे.

युवक समझ ही नहीं पर रहा था की स्त्री की योनि ऐसे उसके विकराल लिंग को ऐसे मथ रही थी.

शीघ्र ही आनंद उत्तेजना में बदल गया.

युवक के अंडकोष में भरा वीर्य मानों उबलने लगा…..युवक समझ गया की आज भी वो इस स्त्री को स्खलित किये बिना ही स्खलित हो जायेगा. मगर ….

अचानक स्त्री के योनि में उसका लिंग खींचने लगा, मथना तो निरंतर था ही सही….

युवक के अंडकोष कड़क हुए और उसके विकराल लिंग ने वीर्यपात प्रारम्भ कर दिया. स्खलन की अद्भुत आनंद लहरें उसके पुरे शरीर में दौड़ने लगी…..वो एक सांड के सामान हुंकारने लगा.

स्त्री झुक कर ने उसे अपने आप से चिपका लिया.

युवक की आंखे आनंद के अतिरेक से बंद हो गयी थी मगर अचानक ही उसे लगा की इतने क्षण बीतने पर भी उसका वीर्यपात बंद नहीं हुआ था…..उसके लिंग से वीर्य निरंतर निकल ही रहा था..

वीर्यपात की अद्भुत अनुभूति भय में बदल गयी…..उसके अंडकोष में तीखा दर्द उठा ….उसने स्त्री को हटाने का प्रयत्न किया मगर वो तो जोंक के सामान उस से चिपकी हुयी थी…

अब युवक की आँखों के आगे तारे नाच गए….उसने अपने प्राण बचने हेतु और ज़ोर लगाए मगर बेकार.

युवक की आंखे उलट गयी और एक भयानक हुंकार के साथ उसकी गर्दन लुढक गयी.

वो स्त्री कुछ देर युवक से चिपकी रही और फिर धीरे से उठ गयी.

उसकी जांघो के बिच मदन रस की धार से बह रही थी…..और उस सफ़ेद वीर्य और मदन रस में लाल रंग के धार भी सम्मिलित हो गयी.

वो धीरे धीरे चलती हुयी कक्ष के द्वार तक आयी और रुक गयी…..

उसने बिस्तर पर पड़े निर्जीव शरीर को निहारा, उसके चेहरे पर संतुष्टि और दुःख दोनों भाव थे.

बाहर खड़ी परछाईयो से एक बोली,

“तुमने इस युवक के भी प्राण ले लिए …..लोपमुद्रा…..”

स्त्री ने झटके से उस आवाज़ को देखा और क्रोध से बोली, ” तो क्या करु मैं

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