कापालिनी लोपमुद्रा और राजकुमार अमोध 8

उसने युवक के कान की लौ पर अपनी जीभ फिराते हुए फुसफुसाया ……”बस…….”
Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta युवक ने अपने दांत भींचे और तड़ातड़ स्त्री के विशाल नितम्बो पर तमाचों की झड़ी लगा दी…..हर तमाचा स्त्री के गले से एक सिसकारी निकालता और युवक के गले से एक गुर्राहट.

युवक उत्तेजना को और नही सह पाया और उसने स्त्री के नितम्बो के मांस को अपने हाथों में भींच और उसे अपने लिंग पर दबाने लगा.

उसका विकराल लिंग पहले से ही स्त्री की भट्टी जैसी तपती योनि के मुख पर ही था. इस दबाव से योनि के मुख को खोल कर वो लिंग जो पहले से मदन रस से सराबोर थे…..स्त्री की योनि की गहराइयों में उतार गया.

स्त्री का मुंह आश्चर्य और उत्तेजना से खुल गया…..युवक ने यह देखा तो उसे थोड़ा सुकून मिला की इस गर्दभ लिंग ने इस मादक स्त्री की भी बोलती बंद कर ही दी.

स्त्री ने अपने मुख तो निचे झुकाया और नशीली आँखों से उसे देखते हुए कहा, ” बस………”

युवक ने अपने नितम्बो को सिकोड़ा और लिंग को योनि से पूरा बाहर खिंच कर एक ज़ोरदार धक्का दिया….लिंग सरर से योनि में जड़ तक समा गया……पटाक की आवाज़ कक्षा में गूंज गयी…

स्त्री कुछ प्रतिक्रिया देती उसके पहले ही युवक ने फिर से ज़ोरदार धक्का मारा…..डेढ़ हाथ का गर्दभ लिंग निष्ठुरता से उस स्त्री की योनि में बिना रुके बेतहाशा भड़ाभड़ धक्के पर धक्के दिए जा रहा था.

स्त्री के लंबे काले शा बाल खुल कर उसके बदन पर गिर गए
स्त्री के लंबे काले शा बाल खुल कर उसके बदन पर गिर गए

उसके मुंह से घुटी घुटी सिसकारियां निकलने लगी

युवक खिंच खिंच कर ठाप पर ठाप दिए जा रहा था….स्त्री की उत्तेजना जैसे उसे पागल बना रही थी.

स्त्री ने अपने सर को झटका दिया और अपने लंबे काले बाल पीछे कर लिए

युवक दनादन अपने गर्दभ लिंग को उस स्त्री की योनि में ठोक रहा था….पूरा कक्ष उनके मैथुन की पटाक ध्वनि से और उनके मैथुनरत होने की आवाज़ से गूंज रहा था.

बार बार उत्तेजनावश दोनों के मुंह से कभी सिसकारी तो कभी गुर्राहट निकल रही थी, ऐसा लग रहा था मानो दो पशु कामातुर जग से विमुख सिर्फ एक कार्य के लिए ही पैदा हुए है.

अचानक स्त्री की सिसकारियां आहों में बदल गई……

वो लगातार आह आह करने लगी, युवक मन ही मन प्रसन्न हो गया की अब यह मादक सुंदरी स्खलित होने ही वाली है..उसने असंभव शक्ति दिखाते हुए अपने मैथुन की गति और बड़ा दी और हुमच हुमच कर स्त्री की योनि में अपने लिंग को पेलने लगा…..उनके इस पाशविक मैथुन से जो उनका मदन रस उनके जनांगों में घोटा जा रहा था वह मख्हन जैसा मथ गया था……स्त्री की काम लोलुप योनि से मदन रस पके फल के रस जैसा बून्द बून्द गिर रहा था……युवक का गर्दभ लिंग जब योनि से बाहर आता तो पूरी तरह उनकी कामरस में सना होता.

स्त्री की आवाज़े क्षण प्रति क्षण तेज़ और तीक्ष्ण हो रही थी. युवक इस भाव से भली भांति परिचित था. अंतर सिर्फ इतना था की दूसरी सभी स्त्रियां जिनके साथ उसने मैथुन किया था वो कुछ ही क्षणों में इस स्थति में आ जाती और स्खलित हो जाती मगर इस काम सुंदरी को स्खलन के द्वार तक लाने में उस युवक की पूरी कसरत हो गयी थी. उसकी सांसे धौंकनी की तरह चल रही थी…और वह भी अपने स्खलन की नियंत्रण में बड़ी मुश्किल से रख पा रहा था.

अचानक स्त्री ने जोर से आह भरी, और अपना सर पीछे फ़ेंक दिया….युवक मन ही मन मुस्कुराया और स्त्री की योनि में जड़ तक घुसे अपने लिंग पर स्त्री के स्खलन द्रव्य की बारिश की प्रतीक्षा करने लगा.

मगर कुछ नहीं हुआ…

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