भाभियों के साथ गाँव में मस्ती 5

रसीला ये सुनकर हँस-हँस के पागल हो गई और मेरी भाभी को बोली Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta “देखो राशि, ये क्या बोल रहा है? उसे मेरी चूत देखनी है, और बोलता है की मुझे वो देखना है जिसमें पूरी दुनियां समा चुकी है…”

ये सुनकर रसीला और दूसरी सब औरतें हँसने लगी।

राशि- “हाँ, तो बता दे ना, वो भी क्या याद करेगा, और रोज तेरे नाम की मूठ मारता रहेगा…”

रसीला- अरे… मेरे होते हुए क्यों मूठ मारेगा बिचारा, कल ले आना मेरे घर, धक्के ही लगवा दूँगी।

राशि- ठीक है, लेकिन अभी का तो कुछ कर।

रसीला- “हाँ… अभी तो मैं उसे मेरी मुनिया के दर्शन करा देती हूँ। ताकि उसके मुन्ने को पता चले की कल उसे कौन से ठिकाने जाना है, और अभी मैं उसका केला चूस के रस पी लेती हूँ, गुफा में कल प्रवेश कराऊँगी…” ऐसा बोलकर उसने अपना पेटीकोट कमर तक ऊंचा कर दिया और अपनी रेड कलर की जलीदार पैंटी उतारने ही वाली थी।

तभी मैंने कहा- रहने दो मैं उतारूँगा।

रसीला- हाँ भाई, तू उतार ले।

उसके ऐसा बोलते ही मैंने अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया और उसकी चूत का उभार महसूस करने लगा। पहली बार मैं किसी औरत की चूत छू रहा था, उसका उभार भी क्या गजब था जैसे वड़ापाओ जैसा, और बीच में एक लकीर जैसी थी और दोनों साइड एकदम चिकना-चिकना गोल था। मुझे तो स्वर्ग जैसा अनुभव लग रहा था। मैंने साइड में से उंगली डालकर उसकी पैंटी को खींचकर उसकी लकीर को महसूस किया। वो तो बस मेरे सामने ही देख रही थी, और मैं उसकी चूत की दुनियां में जैसे डूब गया था।

रसीला बोली- ऐसे ही चड्डी के ऊपर से ही देखोगे, या उतारकर भी देखना है?

मैं जैसे होश में आता हूँ- “हाँ भाभीजी…” और ऐसा बोलकर मैंने उनकी पैंटी नीचे सरकाई, और उतार फेंकी,
ओह्ह… माई गोड… भगवान्… अब समझ में आया की सभी मर्द चूत के पीछे क्यों भागते है, शायद मैं भी उन लोगों की दुनियां में आ गया था।

उसकी चूत एकदम साफ थी, मुझे मालूम था की औरतों को भी झांटें होती हैं, लेकिन फिर भी मैंने भोला बनकर रसीला को पूछि- “भाभीजी, मैंने तो सुना था की औरतों की भी झांटें होती हैं, लेकिन आपको तो नहीं है…”

रसीला हँसकर बोली- “हाँ होती है ना… लेकिन मैंने आज ही साफ की थी, शायद मेरे पति से ज्यादा लकी तुम हो जो उससे पहले तुमने मेरी बिना झांटों वाली चूत देख ली…”

बस मैं तो उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा और देखने लगा। हर एक कोना देखना चाहता था मैं, तो मैंने उनकी टाप से लेकर बाटम तक चूत को महसूस किया, जैसे मैंने चूत की दोनों गोलाईया खोली, बीच में दो होंठ जैसा लगा। मैंने अंजान बनकर रसीला को पूछा- भाभीजी, ये बीच में लटकता हुआ क्या है?

रसीला- उसे चूत के होंठ कहते हैं।

मैं आश्चर्य से- क्या इसे भी होंठ कहते हैं?

रसीला- हाँ मेरे राजा, इसको चूसने से औरत को इस होंठ से भी ज्यादा मजा आता है।

मैं- तो क्या मैं इसे अभी चूस लूँ?

रसीला- नहीं, अभी सिर्फ देखो। कल घर आकर जो करना है करना, मैं मना नहीं करूँगी, इधर सब आते-जाते रहते हैं।

मैं- ठीक है, लेकिन मेरे इस केले का तो कुछ कर दो।

रसीला- ठीक है, मैं अभी ही इसका रस निकाल देती हूँ।

मैं- “तो देर किस बात की है, ले लो तुम मेरा केला…”

ऐसा बोलते ही उसने मेरी निक्कर नीचे उतार दी और मेरा फड़फड़ाता हुआ लण्ड हाथ में पकड़ लिया। ये मेरा पहली बार था इसलिए बहुत गुदगुदी हो रही थी। उसने मेरे टोपे की चमड़ी को ऊपर-नीचे किया। पहली बार मैं किसी और से मूठ मरवा रहा था, वो भी किसी औरत से, मेरा लण्ड काबू में नहीं था।

मैंने उसे बोला- “जल्दी करो, मुझसे रहा नहीं जाता है…”

रसीला बोली- रुको, इतनी भी क्या जल्दी है? अभी तो सिर्फ हाथ ही लगाया है, जब मुँह लगाऊँगी तो क्या होगा?

मैं अंजान बनते हुए- क्या इसे भी मुँह में लिया जाता है?

रसीला- “हाँ…” और ऐसा बोलकर वो मेरे लण्ड की चमड़ी ऊपर-नीचे करने लगी और मूठ मारने लगी।

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