कापालिनी लोपमुद्रा और राजकुमार अमोध 5

अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा फैला कर उसने अपनी लार से भीगी उंगलिया को अपनी योनि जो की उत्तेजना Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta से फूल गयी थी पर सहलाना शुरू कर दिया. उसके मुख पर अब भी कुटिल मुस्कान थी.

स्त्री की उंगलिया को उस मदमस्त तरीके से योनि पर चलते देख युवक अत्यधिक उत्तेजित हो गया और अपने लिंग को अपने हाथ में ले कर उसका मर्दन करने लगा. युवक का लिंग काफी बड़ा और कड़क था. दीवार पर लगी मशाल के फड़फड़ाते प्रकाश में युवक के लिंग पर आ टिकी वीर्य की कुछ बूंदें मोती जैसे चमक रही थी.

स्त्री की निगाहें युवक के विकराल लिंग पर थी और युवक की ऑंखें स्त्री की योनि पर टिकी थी.

लार से भीगी उंगलिया स्त्री की योनि पर चलते हुए चप-चप की आवाज़ निकल रही थी और उसका दूसरा हाथ अपने स्तनों का निर्लज्जता से कड़ा मर्दन कर रहा था.

उस स्त्री में अप्सरा जैसे शरीर के अतिरिक्त कुछ भी स्त्रियोचित नहीं था, उसे लज्जा छू भी नहीं गयी थी. वो जिस तरह अपनी टाँगे फैलाये अपनी उँगलियों को अपनी योनि में भोंके हुयी थी इसमें कुछ भी संदेह नहीं था की उस की वासना का स्तर मानवीय नहीं था.

युवक उत्तेजना के उस पड़ाव तक आ चूका था की उसे अब किसी बात की परवाह नहीं था.

शायद अपने प्राण की भी नहीं.

पिछले ४ दिन से ये गडरिया जो जंगल में अपने गाय भेड़ो को चराने आया था. इस स्त्री के साथ कई बार सम्भोग कर चूका था. यहाँ तक की अब वह जान चूका था की यह कोई साधारण स्त्री नही है मगर आज अपने सामने उस स्त्री के नग्न मादक शरीर को देख उसका अपनी वासना पर कोई काबू नहीं था.

यह स्त्री कोई साधारण स्त्री नही थी. गडरिया अपने गांव में कई लडकिया और महिलाओ से सम्भोग कर चूका था उसका यह कीर्तिमान था की मात्र लिंग योनि में प्रविष्ट कराते ही कई खेली खाई स्त्रियां भी तुरंत स्खलित हो जाती थी और वह घंटो बिना स्खलित हुए काम क्रीड़ा कर सकता था. कई बार उसने खेतो, पनघटों और जंगलों में एक ही दिन में १० बार सम्भोग भी किया था और थकान उसे छू भी नहीं गयी थी. मगर इस स्त्री से सम्भोग के बाद तो मानो उसे दिन meतारे दिख गए थे. पिछले सम्भोग के बाद तो वो शायद अपने होश ही खो बैठा था.

उसे विश्वास ही नहीं होता था की यह स्त्री जो इतनी कमनीय काया की है किस तरह उसके गर्दभ लिंग को अपने अंदर इतनी आसानी से ले लती है. न ही वो यह समझ पाया था की उसके पूर्ण प्रयास के बाद भी वो स्त्री एक बार भी स्खलित नही हुयी.

गडरिया चिंतित था पर अपने सामने इस दृश्य को देख उसकी चिंता हिरन हो गयी और काम वासना के तंतु उसकी आँखों में वासना के डोरे बन तैरने लगे.

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