कापालिनी लोपमुद्रा और राजकुमार अमोध 2

राजगुरु के प्रश्न का उत्तर देने के लिए नकुल देव ने मुँह खोला और उन्हे खाँसी चल पड़ी. Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta वो खाँसते खाँसते दोहरे हो गये. राजगुरु ने तुरंत आगे बढ़ कर उनकी तर्जनी उंगली को ज़ोर से दबा दिया. खाँसी कम होकर रुक गयी. महाराज सीधे हुए और गहरी गहरी साँसे लेने लगे. रक्त की एक पतली रेखा उनके मुँह से ठोडी तक आ गयी थी.

राजगुरु ने चिंतित स्वर मे कहा, “राजन यह खाँसी कब से है”

नकुल देव लंबी लंबी साँसे लेते हुए धीरे से बोले, “गुरुदेव कुछ ही दिन से, किंचित शीत प्रभाव है . आप थे तो तुरंत नियंत्रण मे आ गयी अन्यथा कल पूरी रात्रि ऐसे ही निकली”

राजगुरु सोच मे थे.

उनकी अनुपस्थिति में राज्य में बाहर कुछ ऐसा हुआ था जो समझ से परे था.

नकुल देव का इस अवस्था में विवाह, उनका गिरता स्वास्थ्य.

“क्या हुआ गुरुदेव”, नकुल देव ने चिंतित स्वर मे पूछा.

राजगुरु जैसे किसी निर्णय पर पहुँचे. उन्होने कहा, “कुछ नही राजन, आपने विवाह किया है, पटरानी को बुलवाए हिमालय से कुछ आशीर्वाद स्वरूप लाया हूँ”

नकुल देव ने तुरंत पटरानी को बुला भिजवाया.

पटरानी रक्तमणी ने द्वार पर आकर दासी से पुछवाया” यह पुरुष कौन है”

नकुल देव ने मुस्कुरा कर ज़ोर से कहा, “अरे रक्तमणी ये तो राजगुरु है, तुम्हारे पितातुल्य, आओ आशीर्वाद लो”

रक्तमणी……

दूध मे सिंदूर मिलने पर जो रंग बनता है उस रंग की त्वचा….मानो अंदर से प्रकाशित हो. हिरण जैसी आँखे और भरे नितंबो मे गजगमिनी के समान उतार चढ़ाव. तीखे नैन नक्श और कमनिय काया.

राजगुरु ने स्नेह से रक्तमणी की और देखा और उनके तेज़ास्वी मुख पर अचानक चिंता के बादल छा गये.

रक्तमणी ने थोड़ा सा मुड कर राजगुरु को पालगान किया. राजगुरु ने मानो यंत्रवत ही आशीवाद दिया.

उनकी तीक्ष दृष्टि ने नकुल देव को पत्रनी को अतृप्त वासना से देखते हुए ताड़ लिया.

एक ही क्षण मे वो समझ गये.

रक्तमणी एक मायवी रचना थी..एक कठपुतली….मगर इसकी डोर किसके हाथ मे थी…

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