एक अनोखा रिश्ता 2

उस रात गर्मी तो ज्यादा न थी, पर नई बनी दीवार पर पानी की तराई होने की वजह से घर में ऊमस बहुत थी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta ऊपर से संजू ने जाने क्यों खिड़कियां बंद कर रखी थी। प्रिया को तो वैसे भी अपने कमरे के अलावा कहीं नींद नही आती थी। घर में काम लगा होने से सीमेंट, बालू की आवाजाही से पूरा घर खिस खिस कर रहा था, और प्रिया को ऐसा लग रहा था मानो बिस्तर पर बहुत सारा बालू पड़ा हो, जो अब उसके बदन से चिपक गया हो। वह रात तो नहा कर सोई थी, पर फिर भी उसे चैन नहीं मिल रहा था। मन ही मन वह अपने कमरे और अपने बिस्तर को तरस रही थी। कब उसकी तरफ का काम पूरा होगा, कब वह अपने कमरे में वापस जाएगी। मम्मी पापा के कमरे में जगह होती तो उन्ही के पास चली जाती, पर उनके कमरे में स्टोर रूम का सामान पड़ा था।

संजू और प्रिया, यानी संजय और प्रियंका, चचेरे भाई बहन थे। संजू के पापा बड़े थे और प्रिया के पापा छोटे। उनका घर एक संयुक्त परिवार था, जिसमें चार पीढ़ियां एक ही छत के नीचे रहती थीं। उनके दादा दादी भी अभी जिंदा थे, और दीपक भैया की नवजात बेटी गुनगुन भी थी।

संजू और प्रिया में उम्र का बमुश्किल 3 महीने का अतंर होगा। दोनो एक ही कालेज में पढ़ते थे। संजू बी सी ए कर रहा था और प्रिया बी बी ए। यह सेकण्ड इयर की बात है। दोनो 21 के हो चुके थे, और जहां संजय दमदार कदकाठी का मालिक था, वहीं प्रियंका एक छरहरी काया की मालकिन थी। संजय का व्यवहार रौबीला था और प्रियंका बिंदास सी लड़की थी, जो किसी से नहीं डरती थी। पढ़ाई – लिखाई, खेलकूद सबमें दोनो ही अच्छे थे। कालेज में जहां प्रिया की सहेलियां संजू को लेकर हर तरह की बातें करती थीं, वहीं जाने कितने लड़के थे जो प्रिया को पसंद तो करते थे, पर सजूं की वजह से कुछ कहने से डरते थे। प्रिया की लगभग सभी सहेलिया संजू को अच्छे से जानती थीं, संजू भी सबसे अच्छे से पेश आता था, और संजू के दोस्त प्रिया को करीब से जानना तो चाहते थे, पर वे संजू को अच्छी तरह से जानते थे।

ज्यादातर दोनो संग कालेज आते जाते। प्रिया की क्लासेज जल्दी शुरु होतीं और संज़ू की देर से खत्म होतीं, और दोनो को ही लगभग आधे घंटे का इंतजार करना पड़ता। कभी कभार ही ऐसा होता की संजू के न आने पर प्रिया स्कूटी से कालेज जाती, नहीं तो हमेशा संजय की मोटरसाइकिल से ही दोनो आते जाते।

पिछले महीने उन्होने कोई पुराना केस जीता था, जिससे कई बीघा की पुश्तैनी जमीन संजू – प्रिया के दादाजी को मिली थी। बड़े बुजुर्गों ने बातचीत करके उसे बेचने का निर्णय लिया था, क्यूंकि गांव की जमीन की देखभाल करना मुश्किल था। प्रिया के पापा बैंक में थे, और संजू के पापा की कपड़े की दुकान थी। दोनो भाइयों के लिए मुश्किल था की नियमित गांव जाकर जमीन की देखरेख करें। कहीं फिर से कब्जा न हो जाए, इस डर से उन्होने ठीक दाम लगाकर जल्दी ही जमीन बेच दी थी। उसी पैसे में अब घर में रिनोवेशन हो रहा था। पहले प्रिया के तरफ वाले हिस्से का रिनोवेशन हुआ था। अभी उसी के कमरे का काम चल रहा था। यही वजह थी की पिछले पांच – छः दिन से प्रिया संजू के कमरे में ही सो रही थी।

दिन पर सींमेंट, बालू का काम, फिर नई दीवारों पर तराई और पूरा घर अस्त-व्यस्त। उसपर से लखनऊ में अप्रैल के महीने की गर्मी। अपने कमरे में अकेली होती तो प्रिया दरवाजा बंद करके, सारे कपड़े उतार कर कच्छी में ही सो लेती, पर संजू के कमरे में ऐसा करना मुमकिन ही न था। वो भी जब संजू सामने दूसरे बिस्तर पर सोया हो।

कई करवटें बदलने के बाद चाहकर भी प्रिया सो न पाई। प्यास सी लग रही थी उसे। आखें खोली, तो देखा की संजू कंप्यूटर पर काम कर रहा था। पानी की बोतल उसके टेबल पर ही रखी थी। उसने संजू को बोला, “संजू, पानी दे।“

वह आखें बंद किए कुछ पाल इंतजार करती रही – या तो संजू पानी की बोतल ले के आ जाए, या फिर उसे नींद आ जाए। कुछ पल के इंतजार के बाद जब दोनो नहीं आए तो प्रिया ने फिर संजू को पुकारा, इस बार थोड़ी तेज आवाज में, “संजू, पानी दे ना?”

इस बार भी संजू ने न कुछ कहा, न किया। प्रिया झुंझला गई, “ओये बहरे, पानी दे!”

जोर की आवाज पे भी संजू न मुड़ा। प्रिया को खुद उठना ही पड़ा। ध्यान से देखा तो पाया की संजू ने हेडफोन लगा रखा था।

“तभी तो” प्रिया ने सोचा, “भाई साहब को कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा।” उसे पानी खुद ही लेना पड़ेगा। वह उठी, अपने कपड़े व्यवस्थित किए, और संजू की टेबल की ओर बढ़ी।

वह संजू के ठीक पीछे आ गई। संजू अभी भी पूरी तन्मयता से कंप्यूटर की स्क्रीन को ही देख रहा था। कुछ पल तक प्रिया देखती रही की संजू को उसके आने का आभास हुआ या नहीं, पर संजू नहीं मुड़ा।
फिर प्रिया संजू के बगल से आगे बढ़ी, ताकि पानी ले सके।

पहले उसकी नजर कंप्यूटर की स्क्रीन पर पड़ी, जिसमें एक विडियो चल रही थी – जिसमें एक लड़की एक लड़के का लंड चूस रही थी। पल भर में प्रिया समझ गई की संजू इतनी रात में ब्लू फिल्म देख रहा था।

फिर प्रिया को संजू के हाथ दिखे। उसका एक हाथ माउस पर था, दूसरा टेबल से नीचे।

फिर प्रिया को दिखा की संजू के उस हाथ में क्या था हो टेबल के नीचे था।

कंप्यूटर की रौशनी में वो खड़ा लंड चमक सा रहा था। अंधेरे में वह बहुत ही बड़ा और ताकतवर लग रहा था।

इससे पहले की प्रिया को समझ आता की वह क्या करे, संजू भौचक्का सा उठ खड़ा हुआ। उसने दोनो हाथों से लंड को छुपा लिया। दोनो की नज़रे एक दूसरे से मिली और मानो दोनो को ही करंट का झटका लगा हो।

प्रिया तेजी से मुड़ी और बाहर की ओर भागी।

संज़ू ने तुरंत लंड पैंट में वापस डाला, एक झटके से यूपी एसका स्वीच ऑफ कर दिया और कंप्यूटर बंद हो गया।

वह पजामे को ऊपर खींचता प्रिया के पीछे भागा, “प्रिया, सुन तो!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *