विधवा बुआ और मेरा नाजायज़ रिश्ता

नमस्कार कामलीला Antarvasna के प्यारे पाठकों मेरा नाम संदीप है और मैं 24 साल का एक जवान और सेक्स का शौकीन लड़का हूँ और मैं भी आप सभी की तरह ही कामलीला वेबसाइट पर सेक्सी कहानियाँ पढ़कर अपना यह शौक पूरा करता हूँ और मैं आज आप सभी के सामने मेरा एक नया सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ यह कहानी कोई कल्पना नहीं है यह एक सच्ची कहानी है जो मेरी और मेरी रश्मि (बदला हुआ नाम) बुआ की है जो की एक 34 साल की एक मस्त बदन की औरत है उसकी लम्बाई करीब 5.6 फुट की होगी उसके मम्मे काफ़ी बड़े-बड़े और गांड उभरी हुई है वह इतनी सेक्सी औरत है कि उनको देखकर किसी मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाए उनका एक लड़का भी है जो कि 10 साल का है मेरी बुआ के पति की मौत 5 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी पहले तो मैं अपनी बुआ के बारे मे कोई गंदी सोच नहीं रखता था पर क्या करूं जवान हूँ ना तो सब्र ही नहीं होता है अगर मेरे सामने एक जवान औरत होगी तो मैं यह सुनहरा मौका अपने हाथ से कैसे जाने दे सकता था।

तो दोस्तों अब मैं अपनी कहानी को शुरू करता हूँ…

यह कहानी आज से 2 साल पहले की है मेरी बुआ जब मैं छोटा था तब से ही मुझे बहुत प्यार करती थी और मैं भी उसके साथ बहुत खुश रहता था फूफाजी की मौत के बाद मेरी बुआ के ससुराल वालों ने उसको परेशान करना शुरू कर दिया था क्योंकि वह मेरी बुआ को अपनी जायदाद में से हिस्सा नहीं देना चाहते थे।

फिर बुआ ने उनसे अलग होकर हमारे गाँव के घर पर मेरे दादा-दादी के साथ ही रहना शुरू कर दिया उसके ससुराल वालों ने उनके बच्चे को तो अपने पास ही रख लिया था बुआ अपना गुज़ारा चलाने के लिए एक स्कूल में छोटी कक्षा के बच्चों को पढ़ाने लगी थी हम भी कभी-कभी गाँव जाते थे और एक बार जब हम गाँव गये तो मेरे परिवार के सब लोग तो मेरे नाना जी के घर पर ठहर गए थे और वहाँ से मेरे दादा जी के गाँव चला गया जो कि पास ही में था तो मैं वहाँ से बुआ को मिलने के बहाने कुछ दिन के लिए मम्मी पापा को बोलकर बुआ के पास चला गया था वह मुझे वहाँ देखकर बहुत खुश हुई थी और उसने मुझे अपने गले से लगा लिया था तो मेरे बदन में अचानक से करंट आया पर उस समय तो मैनें कुछ नहीं किया इस तरह बातों ही बातों में 2-3 दिन तो बीत गए थे फिर एक दिन मैं और बुआ कमरे में अकेले थे क्योंकि मेरे दादा और दादी अपने अलग कमरे में सोते थे।

मुझे तो रात होने का इंतजार था उस रात बुआ मेरे साथ बिस्तर पर सो रही थी और मैं जानबूझकर सोते समय बुआ के नज़दीक होकर सो गया और धीरे-धीरे मैं और भी उनके पास सोते हुए बढ़ने लगा और फिर मैनें सोने का नाटक करते हुए अपना एक हाथ बुआ के ऊपर रख दिया बुआ को मेरी इस हरकत का कुछ पता नहीं लगा क्योंकि वह उस समय सो रही थी मुझे उनको छूने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैं इस मज़े को और भी बढ़ाना चाहता था मैं अपने हाथ को जानबूझकर उनके शरीर पर इधर-उधर फैर रहा था।

अचानक अब मेरा हाथ उनकी जाँघों पर आ गया उनकी भरी हुई जाँघों और उभरी हुई गांड पर मेरा हाथ पड़ते ही मेरा लंड खड़ा हो गया वह मेरी तरफ अपना मुँह करके सोई हुई थी और मैनें अपने एक हाथ को उनकी जाँघों पर रखा था मैनें उससे पहले कभी किसी औरत को इस तरह से छुआ नहीं था मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मैं जानबूझकर अपनी एक ऊँगली को बुआ की गांड के छेद में घुसाने की कोशिश कर रहा था ताकि मैं उनकी गांड का होल कितना बड़ा है यह पता लगा सकूँ पर मुझे डर भी बहुत लग रहा था कि बुआ कहीं जाग ना जाए पर फिर भी मैनें हिम्मत करके अपनी ऊँगली को सरकाते हुए बुआ की गांड के छेद पर रख दिया तो मेरे तो होश ही उड़ गए थे क्योंकि बुआ की गांड का छेद बहुत बड़ा था फिर शायद बुआ को कुछ एहसास हुआ और उसने नींद में ही मेरा हाथ झट से हटा दिया उनके ऐसा करने से मैं तो डर ही गया था और फिर मैनें उस रात आगे कुछ भी नहीं किया।

फिर अगले दिन सुबह मैं उठा तो सब कुछ वैसा ही सामान्य था और बुआ ने भी मुझसे किसी बात का जिक्र नहीं किया था शायद उसने सोचा होगा कि मेरा हाथ उसकी गांड पर नींद में रखने में आ गया होगा इस तरह अब मैं हर रात को बुआ के कभी कमर पर तो कभी गांड पर और कभी उनके मम्मों पर अपना हाथ रखने लगा था और धीरे-धीरे मेरी हिम्मत भी अब बढ़ने लगी थी अब मैं अपनी बुआ को चोदने का कोई पक्का प्लान बनाने लगा और मुझे यह भी पता लगा था कि बुआ को पैसों की जरूरत थी और मैं उनकी इस जरूरत को अपना हथियार बनाना चाहता था और मुझे बुआ की इसी कमज़ोरी का फायदा उठाना था इसलिए मैं कई बार अपने पैसे पर्स के बाहर ही निकालकर रख देता था जब बुआ की नज़र उन पर पड़ती तो वह मुझसे कहती थी कि है इतने सारे पैसे मैं तो ग़रीब हूँ और मेरी किस्मत में तो लक्ष्मी है ही नहीं और मैनें ऐसा 3-4 बार किया था ताकि बुआ को पता लग जाए कि मैं उनके पैसों की इस समस्या को दूर कर सकता हूँ मैं बुआ के घर कई बार अपने पैसों से ही खाने-पीने का सामान ले जाता और उनको खिलाता-पिलाता जिससे बुआ बहुत खुश होती थी इस तरह पैसों को देखकर बुआ मुझसे बहुत घुल मिल गई।

एक रात सोते समय मैं वैसे ही जानबूझकर अपना एक हाथ बुआ के मम्मों पर रख दिया और सोने का झूंठा नाटक करने लगा जब मैनें देखा कि बुआ सो रही है तो मैनें उनके बब्स को धीरे-धीरे सहलाने लगा मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था पर मैं उस वक्त बहुत जोश में आ गया था और हिम्मतकर के उनके बब्स दबाने लगा करीब 10-12 मिनट तक मैनें धीरे-धीरे उसके बब्स खूब सहलाए और अब मैं भी पागल हो रहा था तो मैं अचानक से उनके बब्स को थोड़ी ज़ोर-जोर से दबाने लगा शायद अब बुआ भी यह महसूस कर रही थी कि मेरा हाथ उनके मम्मों पर है अब मैनें आव देखा ना ताव और सोते-सोते ही अपना मुँह उसके बब्स पर रख दिया और बस सोने का झूंठा नाटक करता रहा बुआ अब शायद नींद से जागने वाली थी और जैसे ही मैनें देखा कि बुआ मेरे मुँह को अपने मम्मों से दूर कर रही है तो मैं उठ गया और ज़ोर-जोर से बुआ की चूचियों पर अपना मुहँ रगड़ने लगा तो बुआ के तो जैसे होश ही उड़ गये थे और सोचने लगी कि मुझे यह क्या हो गया है उसने मुझे डांटते हुए कहा कि “यह क्या कर रहे हो” तो मैनें कहा कि बुआ मुझे कुछ नहीं पता पर मैं आज तुमको नहीं छोड़ूँगा चाहे तो हल्ला करो या ना करो।

मुझ पर सेक्स का भूत सवार हो गया था इसलिये मैनें उनसे कहा कि देख बुआ तुम मुझे बहुत अच्छी और सेक्सी लगती हो और मैं हर वक्त तेरे ही बारे में सोचकर अपना लंड हिलाता रहता हूँ प्लीज तुम आज मेरा वह अधूरा सपना पूरा कर दो वैसे भी इस समय हम दोनों ही इस कमरे में हैं दादा-दादी तो सो रहे है और मैं तुमको पैसे भी दे दिया करूँगा मैं तुम्हारी पैसों की जरूरत को पूरी कर दूँगा और तुम मेरी जरूरत को पूरा कर दो और किसी को पता भी नहीं चलेगा आज कल तो सब चलता है फूफा जी तो है नहीं तो तुम मेरे साथ ही बड़े आराम से सेक्स करके अपनी जिंदगी काट सकती हो यह कहकर मैनें बुआ को ज़ोर से जकड़ लिया और बुआ को भी यह थोड़ा फ़ायदे का सौदा लगा पर उसने फिर भी थोड़ी ना नुकर की पर आखिर में मैनें बुआ को नंगा कर ही दिया अब बुआ पूरी नंगी थी और दादा-दादी को शक ना हो इसलिए मैनें कमरे की लाइट भी बंद कर दी थी मैं पूरी तरह से तो नहीं देख पा रहा था पर इतनी रोशनी काफ़ी थी अब मैनें बुआ को थोड़ा सा ऊपर किया और मैं नीचे झुककर उसकी चूत को चाटने लगा बुआ भी उत्तेजना से पागल हो रही थी और उसने मेरा सिर ज़ोर से अपनी चूत पर दबाकर रखा था करीब 10 मिनट तक मैं यही सब करता रहा।

अब बुआ के अन्दर की सेक्स की आग पूरी तरह से भड़क चुकी थी और मैं वह महसूस कर सकता था वह मुझसे बुरी तरह से चुदना चाहती थी उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझसे लिपट गई और कहने लगी “वाह आज तुम्हे तुम्हारी इस हिम्मत का इनाम मिलेगा” फिर उसने मुझे एक तरफ किया और झुककर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी मैनें उनसे कहा कि बुआ तुम भी चूसती हो मैनें तो सोचा था कि तुम तो शरीफ हो तो बुआ ने कहा “शरीफ तो सब होते है, तेरी माँ भी तो शरीफ है पर तूँ कैसे पैदा हुआ भौसड़ी के” यह सुनकर मैं और भी जोश में आ गया और मैनें बुआ को उसी बीच अपने हाथों से उठा लिया और बेड पर पटक दिया मैनें उनको कुतिया बनने को कहा और वह कुतिया की तरह सो गई अब मैनें अपना 6.5 इंच का लंड उसकी चूत में झट से घुसा दिया तो वह दर्द से चिल्ला उठी आहह.. अहाह… मैनें काफ़ी देर तक ज़ोर-ज़ोर के झटकों से उसकी चूत में अपने लंड को आगे-पीछे किया और फिर मैनें उसको अलग-अलग पोजीशन में खूब चोदा इस बीच वह दो बार झड़ भी गई थी और मैनें भी उसकी गांड पर ही अपना सारा माल गिरा दिया।

उसके बाद बुआ ने कहा कि चल अब तो यह काम हमको अब सारी जिंदगी ही करना है बाकी कल करेंगे अब सो जा और फिर हम दोनों ऐसे ही नंगे ही एक-दूसरे से चिपककर सो गये और तब से अब तक मैं बुआ को कई बार चोद चुका हूँ।

धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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