सिस्टर की गोरी गांड और गुलाबी चूत 1

सिस्टर की गोरी गांड और गुलाबी चूत 1

दोस्तों यह कहानी आज से तीन साल पहले की है Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories Antarvasna1.com दोस्तों मैंने अपनी इस कहानी को सिस्टर की गोरी गांड और गुलाबी चूत नाम दिया है | जब में 12th में था और मेरी बड़ी बहन संजना उस समय अपनी बी.ए. की पढ़ाई कर रही थी और वो मुझसे दो साल बड़ी है.
हमारे घर में चार लोग रहते है मैं , दीदी, मम्मी और पापा. मेरे पापा एक प्राइवेट कम्पनी में है तो वो सिर्फ़ एक हफ्ते के लिए ही घर पर रहते थे और बाकी दिन कम्पनी के काम से बाहर रहते थे. मेरी माँ एक ग्रहणी है तो वो भी हमेशा अपने घर के काम में व्यस्त रहती है. दोस्तों मेरी दीदी दिखने में कटरीना कैफ़ जैसी है. उसका गोरा रंग, गदराया हुआ बदन और कूल्हे थोड़े बाहर को निकले हुए है और वो दिखने में बहुत सेक्सी लगती है. में और दीदी एक ही रूम में सोते थे. उस समय मेरे पेपर थे और दीदी के भी. हम उन दिनों देर रात तक पढ़ाई करते थे तो दीदी बेड पर और में टेबल कुर्सी पर बैठता था.दोस्तों एक दिन की बात है, जब रात के करीब 1:30 बज रहे थे और उस समय मेरी आँख लग रही थी, तो मैंने अपनी किताब को बंद कर दिया और में सोने के लिए चला गया. फिर मैंने देखा कि मेरी दीदी भी पढ़ाई करते करते बहुत पहले ही सो गई है और वो उस समय उल्टा यानी पेट के बल सोई हुई थी और फिर मैंने देखा कि उनकी फ्रॉक पीछे से उठी हुई थी और उनकी सलवार एलास्टिक वाली होने की वजह से ना जाने कब थोड़ी नीचे सरक गई थी और में यह सब देखते ही बिल्कुल दंग रह गया, क्योंकि दीदी की गांड बहुत उभरी हुई थी. उनके गोरे गोरे मोटे कूल्हों को देखकर मेरे मन में अपनी दीदी के लिए बहुत गलत गलत विचार आने लगे और अब मेरा लंड धीरे धीरे टाईट होने लगा, लेकिन तभी मैंने सोचा कि में अपनी सगी बहन के बारे में यह सब क्या सोच रहा हूँ? आप लोग यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
फिर मैंने दीदी की फ्रॉक, सलवार को ठीक किया और लेट गया, लेकिन मेरा लंड अभी भी जाग रहा था. फिर मैंने अपने लंड की परेशानी को देखकर लंड को पेंट से बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा. तब मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई थी. अब मैंने अपना अंडरवियर को पूरा उतारा और में नंगा होकर दीदी से चिपककर सो गया और अब मैं दीदी की गांड पर अपना लंड रगड़ने लगा, जिसकी वजह से कुछ देर बाद दीदी थोड़ा हिली तो में डर गया, लेकिन वो उठी नहीं तो में डरकर एक बार फिर से लंड को दबाने लगा और में तभी झड़ गया और तब तक ना जाने कब मेरी नींद भी लग गई और सुबह जब मैंने उठकर देखा तो दीदी मुझसे पहले उठ चुकी थी और नीचे के कमरे में भी जा चुकी थी और में उसी नंगी हालत में अभी भी लेटा हुआ था.में अब बहुत डर गया कि दीदी ने शायद मुझे इस हालत में जरुर देख लिया होगा. फिर में जल्दी से उठा और कपड़े लेकर सीधा बाथरूम में घुस गया.
दोस्तों वो रविवार का दिन था, दीदी और में दोनों घर पर थे और में जब नीचे गया तो मैंने देखा कि दीदी मुझे देखकर हंसने लगी. फिर में उनकी हंसी को देखकर समझ गया था कि दीदी ने मुझे देख लिया है.
मैं पूरे दिन भर पहले जैसा रहा और फिर उसी रात को हमारे घर पर कुछ मेहमान आए तो वो सब लोग नीचे हॉल में ही बैठे हुए थे. में और दीदी थोड़ी देर उनके पास बैठकर हमारे कमरे में आ गई और अब एक दूसरे से इधर उधर की बातें करने लगे. तभी दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि तुम बिना कपड़ों के बहुत अच्छे लगते हो.
तो दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से बहुत डर गया और मैंने उनसे कहा कि दीदी प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो, वो कल रात को गरमी बहुत थी ना इसलिए में आपके सो जाने के बाद कपड़ों के बिना लेटा हुआ था, लेकिन मुझे बिल्कुल भी पता नहीं है कि में कब गहरी नींद मैं सो गया…कहानी जारी है … आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे …..
फिर दीदी ने कहा कि हाँ में वो सब समझती हूँ और वो हंसने लगी औरमैं भी हंसने लगा और तभी नीचे से एक आवाज़ आई, शायद कोई गिर गया था तो हम दोनों भागते हुए नीचे चले गये. अब हमने देखा कि हमारी माँ सीढ़ियो से गिर गयी थी. फिर हमने उन्हें उठाकर बेडरूम में बैठाया और पीने को पानी दिया और तब मैंने देखा कि उनके एक पैर में मौच आ गयी थी और अभी तो खाना बनाना भी बाकी था. फिर माँ ने उस दर्द से करहाते हुए दीदी से कहा कि तुम सभी मेहमानों के लिए खाना बना दो.

फिर दीदी ने तुरंत हाँ कहा और वो किचन की तरफ चली गयी और दीदी जब किचन में जा रही थी तो मैंने पीछे से दीदी की हिलती हुई गांड को देखा और मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया, जिसकी वजह से मुझसे अब रहा नहीं गया और में भी माँ को अकेला कमरे में छोड़कर दीदी के पीछे पीछे किचन में चला गया. मेरी माँ उस समय बेडरूम में अकेली लेटी हुई थी और सभी मेहमान हॉल में बैठे हुए बातें कर रहे थे और हम दोनों किचन में और जब में किचन के अंदर गया तो मैंने देखा कि दीदी के हाथ में एक लंबा, मोटा बैंगन था, जिसको देखकर वो बहुत मुस्कुरा रही थी और उनकी हंसी को देखकर मुझे ऐसा लग रहा था कि उनका मूड आज बहुत अच्छा है, लेकिन में जैसे ही दरवाजे के अंदर गया तो दीदी ने तुरंत उस बैंगन को नीचे रख दिया और अब वो प्याज़ काटने लगी और फिर मैंने उनसे कहा.

में : दीदी आप मुझे भी आज प्याज़ काटना सिख़ाओ ना प्लीज.
संजना : क्यों?
में : क्योंकि मुझे वो तुमसे सीखना है.
संजना : ठीक है चलो अब इधर आओ.

दोस्तों दीदी अब मेरे पीछे खड़ी हुई थी और में उनके आगे खड़ा होकर प्याज़ काट रहा था और दीदी ने मेरे दोनों हाथ पकड़े हुए थे और जिसकी वजह से दीदी के बहुत ही मुलायम बूब्स मेरी पीठ से बिल्कुल चिपके हुए थे, लेकिन उनके निप्पल तनकर खड़े हुए थे, जिनको महसूस करके मुझे समझ में आ गया कि दीदी भी अब बहुत गरम हो चुकी है.
में : दीदी मुझे अपनी पीठ पर कुछ चुभ रहा है, देखो ना क्या है?
संजना : कुछ नहीं है तुम चुपचाप बस प्याज़ काटो.

अब दीदी अपने बूब्स को मेरी पीठ पर

अब कुछ ज्यादा ज़ोर से दबाने लगी और फिर मैंने कुछ देर बाद उनसे कहा कि दीदी अब तुम प्याज़ काटो, में आपके पीछे खड़ा हो जाता हूँ. आप लोग यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
संजना : ऐसा क्यों?
में : दीदी प्लीज़ एक बार मेरे लिए.
संजना : चल ठीक है तू इतना कहता है तो में खड़ी हो जाती हूँ.

दोस्तों में अब तुरंत दीदी के पीछे चला गया, मेरा लंड तो पहले से ही टाईट था और में उसे दीदी की गांड पर दबाने लगा, प्याज़ तो हमने नहीं काटी बस हम दोनों तो ऐसे ही मज़े कर रहे थे और कुछ देर मज़े करने के बाद दीदी भी मुझसे कुछ कहने लगी.
संजना : सैफ मुझे भी अब कुछ चुभ रहा है.
में : हाँ वो मेरा लंड है.
संजना : लंड क्या मतलब?
में : दीदी अब आप ज्यादा अंजान मत बनो, लंड वही चीज़ है जिसे आज सुबह आपने देखा था और जिससे में पेशाब करता हूँ.
संजना : सैफ क्या में तुमसे एक बात कहूँ?
में : हाँ वो क्या?
संजना : मुझे तुम्हारा वो लंड बहुत पसंद है.

में : क्या आप एक बार फिर से उसे देखना चाहोगी?
संजना : अभी नहीं, अभी तो मुझे खाना बनाना है और जब सब लोग खाना खा ले, उसके बाद दिखाना.
दोस्तों में अब झड़ने वाला था और फिर मैंने वीर्य की एक पिचकारी दीदी की गांड पर मार दी.
संजना : सैफ मुझे कुछ गरम, गीला सा लग रहा है वो क्या है?

में : दीदी आपको भी बहुत अच्छी तरह से पता है कि यह क्या है? फिर दीदी शरमाकर बोली कि चल हट अब पीछे, मुझे खाना बनाने दे, बाहर सब खाने का इंतजार कर रहे है और जब तक खाना तैयार हुआ तो तब तक माँ का पैर भी थोड़ा थोड़ा ठीक हो गया था. माँ ने ही सब लोगों को खाना परोसा, में और दीदी हम दोनों ने माँ से कहा कि हम अपने पेपर की तैयारी करने के लिए पढ़ने ऊपर के कमरे में जा रहे है और अब हम हमारे बेडरूम में आ गये और जैसे ही हम कमरे में आए तो मैंने दीदी को एक स्मूच किया. फिर करीब दो मिनट तक और अब दीदी शरमाकर फिर से नीचे चली गयी और सभी लोगों के सो जाने के बाद रात को हम पढ़ रहे थे.

मैंने देखा कि दीदी मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई है. फिर तुरंत में दीदी के पास चला गया और उनसे चिपककर सो गया और में अपना लंड उनकी गांड पर घिसने लगा. फिर उन्होंने मुझसे बहुत कम आवाज में कहा कि सैफ अभी नहीं, हम कल करते है, लेकिन मैंने उनकी एक भी बात नहीं मानी, क्योंकि मुझ पर तो उनकी चुदाई करने का भूत सवार था. फिर कुछ देर बाद वो थोड़ा गुस्से में उठ गई और उन्होंने मुझे एक धीरे से थप्पड़ मारा और अब उन्होंने मुझसे कहा कि में यह सब माँ को बता दूँगी, चलो अब दूर हट जाओ मुझसे.

फिर उनके मुहं से यह बात सुनकर मेरी तो गांड फट गई और मैंने उनसे डरते हुए कहा कि प्लीज मत बताओ और में रोने का नाटक करने लगा और अब में उनकी गोद में अपना सर रखकर रोने का नाटक करने लगा.

फिर उन्होंने मुझसे खड़ा होने के लिए कहा और जैसे ही में खड़ा हुआ तो अचानक से मेरे पजामे में बना हुआ लंड का टेंट उनके होंठो से टकराया गया और वो थोड़ा स्माईल करने लगी. फिर मेरे मन में एक विचार आया और में अब रोने के बहाने अपना लंड दीदी के होंठो पर दबाने लगा, मेरे ऐसा करने की वजह से दीदी से अब रहा नहीं गया और उन्होंने मुझसे कहा कि नीचे बैठ और फिर कहा कि चल अब जल्दी से अपना पजामा खोल.

दोस्तों उनके मुहं से यह सब बातें सुनकर में तो बिल्कुल हैरान रह गया. मैंने उनके कहते ही जल्दी से बिना कुछ सोचे समझे अपना पजामा हटाया और वो मेरा लंड देखकर मुस्कुराई और अब वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बहुत ध्यान से उसे देखने लगी, उसकी मोटाई, लम्बाई गरमी को महसूस करने लगी और फिर वो कुछ देर बाद धीरे धीरे मेरे लंड को हिलाने लगी. अब उन्होंने मुझसे मुस्कुराते हुए कहा कि वाह तू तो बहुत बड़ा हो गया है यार.
में : दीदी प्लीज आप इसे एक बार अपने मुहं में लो ना. आप लोग यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

फिर दीदी मुस्कुराई और उन्होंने मेरे लंड के सुपाड़े को अपने होंठो पर रखकर थोड़ा सा सक किया और फिर पूरा लंड मुहं में लेकर धीरे धीरे चूसने लगी और में चिल्ला रहा था, वाह संजना तेरा मुहं कितना गरम है मेरी रंडी दीदी, वो फिर से मुस्कुराई और चूसने लगी और थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा कि अब तेरी बारी. फिर में तुरंत उठा और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *