ससुर जी से चुद कर गर्भवती हुयी

ससुर जी से चुद कर गर्भवती हुयी

नमस्ते, मै अनुष्का सेठ अपनी दास्तान आपको सुना रही हूँ. Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories ये मेरी पहली कहानी होने के कारण काफ़ी ग़लतियाँ हो सकती है, पर उसे छोड़ कर भावनाओ को समझो मेरी यही गुज़ारिश है आप सभी से.
फिलहाल मेरी उमर 31 साल है पर देखकर यकीन नही होगा आपको, क्यूंकी मैने अपनी देखभाल बहुत अच्छी तरह से की है. इस उमर में भी मैं 25-28 की ही लगती हूँ, हां तोड़ा सा मोटापा ज़रूर आया है पर सही जगह पर चर्बी जमी है इसलिए मुझे उसपर नाज़ है. मेरा फिगर अभी 38सी-28-40 है, है कि नही लाजवाब???????
मेरी ७ साल पहले शादी हुई मिस्टर. आकाश सेठ से और में इस घर मे आई. घर मे आकाश, उसके पापा मिस्टर.घनस्याम और मेरी सास राधा इतने ही लोग थे. मेरी सास बीमार थी, उन्हे परॅलिसिस हुआ था. हमारी शादी के 2 साल पहले उनको ये बीमारी हुई तब से वो बिस्तार से हिल भी नही सकती यही बस यही एक तकलीफ़ थी. आकाश काफ़ी अच्छे थे दिखने में इस लिए मैने ये रिश्ता ठुकराया नही (वैसे मैने 5-6 लड़को को ना करदी थी उनके पहले).
हमारी शादी से मैं काफ़ी खुश थी, और यही लगता था कि आकाश भी मुझसे संतुष्ट था. हमने अपनी सुहाग रात शिमला की हसीन वादियों में मनाई, और खुश होकर घर लौटे. घर आने पर आकाश काफ़ी चुप-चुप्से रहने लगे, थोड़े ही दिनो में मैने उसे सुहाग रात की मेहनत रंग लाई और मैं मा बनने वाली हूँ ये खबर उसे बताई. तब वो खुश हुआ और उसने मुझे एक हीरे का पेंडेंट तोहफे में दिया. पर फाइयर्स उसकी खामोशी और सूना पन दिखाई देने लगा. पूछने पर वो कुछ बताता नही था, घर में उसका बर्ताव भी कुछ ठीक नही था. ससुर जी (मिस्टर.घनस्याम) और सासूजी से बात बात पर झगड़ा मोल लेता था वो.
बात यहा तक आ गयी थी कि बाप बेटे में बातचीत बंद हो गयी. दिन बीतते गये, महीने गुज़रे अब मैं 4मैने पेट से थी तब अचानक आकाश ने मुझसे कहा कि उसे ऑफीस के काम से दुबई जाना पड़ेगा वहाँ का प्रॉजेक्ट उसके अंडर होने के कारण वो उसे टाल नही सकता ऐसे बॉस की ऑर्डर है. मैं ने कहाँ ठीक है सास-ससुर जी को कहकर जाते हैं हम दुबई, तब वो बोला कि मैं उसके साथ नही आ सकती क्यूँ कि वहाँ औरतो के लिए सेफ नही. उपर से वो 6 महीने में लौट आएगा, और उसके जाने के बारे में सासुमा और ससुर जी को ना बताया जाए. दस दिन बाद की उसकी फ्लाइट थी, उसके जाने के दो दिन पहले मैने उसके माता-पिता को ये खबर सुनाई. उन्होने उसे रोकने के लिए कहा पर खुद उससे बात नही की. उनकी और मेरी बात थोड़े ही वो मानने वाला था, दो दिन बाद वो चला गया. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | जाने से पहले उसने मुझसे एक चेक़ और एक डॉक्युमेंट पर साइन ली थी, कहाँ की दुबई में उसकी ज़रूरत है. वहाँ से उसने मुझे दो तीन बार फोन किया, अब मैं 6 महीने पेट से थी. तब अचानक से मेरे पेट में दरद चालू हुआ और मुझे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा, डॉक्टर ने कहा की अबॉर्षन करना पड़ेगा वरना जान को ख़तरा है. इस लिए मेरा बच्चा गिराना पड़ा. ये दुख था ही और उसमे मुझे एक खत मिला, वो भी दुबई से आकाश का. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | खत देख कर मैं खुश हुई थोड़ी सी, पर उसे खोलते ही मेरी जिंदगी तबाह हो गयी. उसमे आकाश ने लिखा था “मैं तुम में कोई रूचि नही रखता, मेरी तुम्हारे साथ शादी मजबूरी थी. अब मुझे मेरा प्यार मिल गया है और मैं उसके साथ खुश हूँ. तुम्हारा बच्चा गिरा ये सुनके दुख हुआ पर यही मंजूर था लगता है. तुम चाहो तो दूसरी शादी करो या मत करो पर अबसे अपना रिश्ता ख़तम. साथ में डाइवोर्स के पेपर भेज रहा हूँ जिस पर मैने तुम्हारे हस्ताक्षार पहले ही लिए थे उस चेक़ के साथ जो ,मैने जाने की पहले साइन करवाया था.”
यह देखकर मेरे पैरो तले ज़मीन खिसक गई. कोख उजाड़ जाने का गम और उसमे ये डाइवोर्स. अब जाऊ तो कहाँ? क्यूँ कि मैके वाले भी कोई नही था, शादी के पहले मेरी मा गुजर गयी थी 2 साल पहले और शादी के बाद कुछ ही महीनो मैं पिताजी का देहांत हो गया और उनकी मैं एकलौती बेटी थी. इस समय मुझे मेरे सास –ससूरने काफ़ी आसरा दिया, सारी परेशानियों में उन्होने मुझे होसला दिया. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं तो स्यूयिसाइड करने जा रही थी पर ससुर जी ने मेरी जान बचाई. अब घर मे मैं उनका और वो दोनो मेरा ऐसा हम एक- दूसरे का ख़याल रखने लगे. मैं विधवा की सफेद साडी पहनने लगी, मन्गल्सुत्र कब का उतार कर फेंक दिया और सूनी माँग के साथ मैं घर मे रहती थी. बाबूजी की पेन्षन पर हमारा घर चल रहा था, मैं जॉब करना चाहती थी पर उन दोंनो का इनकार था, इसलिए घर ही बैठी रहती थी. घर बैठे-बैठे, खाना पीना, टीवी देखना और आराम करना यही मेरा और ससुर जी का काम था. माजी तो अपने बिस्तार पर पड़ी रहती थी इसलिए वो ना के बराबर ही थी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | आकाश के साथ डाइवोर्स होने पर अब 2 साल गुजर गये, ये दिन कैसे गये कुछ पता ही नही चला. इस दौरान मैं अपने ससुर के साथ काफ़ी खुल गयी, वो भी मुझसे ज़्यादा खुलकर बाते करने लगे. हम साथ बैठ कर मूवीस देखते थे, कभी कॉमेडी, तो कभी आक्षन, तो कभी थ्रिलर और कभी रोमॅंटिक. बहू-ससुर जैसा नाता नही अब तो हम दोनो दोस्तों जैसा बर्ताव एक-दूसरे से करते. थ्रिलर मोविए देखकर मैं डर जाती और उनसे लिपट जाती थी कभी कभी. बाद में हमे अपने रिश्ते का अहसास होते और हम थोड़े दूर बैठते थे.
मैं उनके साथ हसी-मज़ाक करती ये सासू मा को अच्छा नही लगता था, वो मुझे इनडाइरेक्ट्ली अपना गुस्सा जाहिर करती थी. पर ससुर जी को कहती थी, “ये उनका और बहू का बर्ताव ठीक नही.” इस पर ससुर जी उन्हे कहते कि “तुम व्यर्थ ही शक़ करती हो, वो तो मेरी बेटी समान है.” आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | जैसे जैसे समय बीतता गया, वैसे मैने कुछ चेंजस ससुर जी में नोटीस किए, एक तो वो मुझसे ज़्यादा बाते करने लगे, बार बार मुझ से बात करने का मौका ढूँढने लगे, मेरे सहवास में ज़्यादा रहने का मौका छोड़ते नही थे, ना जाने क्यों मुझे लगता की वो मुझे चोरी चोरी देखने लगे (उन्हे लगता होगा की मेरी उनपर नज़र नही पर ये मैने नोटीस किया). ख़ासकर वो मेरे स्तानो और नितंबों पर ज़्यादा लक्ष्य केंद्रित करते थे ऐसा मुझे लगता था. पहले तो उनके ये अंदाज़ मुझसे छुपाते हुआ चलता था पर धीरे धीरे उनकी ये गतिविधियों को जैसे मैं पुष्टि दे रही हूँ ऐसा जब उन्हे लगने लगा तब वो मुझे बींदास होकर देखने लगे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं नहाने जाते वक़्त पहले अपने ब्रा और पॅंटी अंदर जा कर रखती थी और फिर टवल लेजाकर बाथरूम में घुसती थी. पर वो जानबूझकर कुछ बहाना कर के खुद बाथरूम हो आते मुझसे पहले, अंदर जाकर क्या पता कुछ ढूनडते और फिर मुझे बाथरूम में घुसने देते. उनकी ये बाथरूम यात्रा मैने ब्रा-पॅंटी रखने के बाद और टवल लाने के बीच ही होती थी. मुझे थोड़ा ऑड लगता था पर जैसे की हमारे बीच दोती का रिश्ता संपन्न हुआ था इसलिए मैने ये बात अपने तक ही सीमित रखी. अंदर जाकर मैं अपनी पीठ दरवाजे की ओर करके एक एक करके अपने कपड़े उतार देती थी. अपने नंगे बदन को बाथरूम के फुल मिरर में देखकर अपने बूब्स को मसल्ति थी, कमरको सहलाती थी, नंगी चूत में उंगली डालकर कुछ समय सिसकारी निकालती थी और अपनी गांडपर एक फाटका मारते हुए शवर ऑन करती थी. ये तो मेरा रेग्युलर रुटीन ही था समझो.
नहाते वक़्त मुझे क्यों पता नही पर ऐसे लगता था कि कोई बाथरूम के बाहर से, की होल में से मुझे देख रहा है. पर ठंडा पानी शरीर पर गिरने पर एक अलग ही बिजली सी मेरे शरीर में दौड़ती थी जो मुझे बाहर कोई है कि नही इसे भूलने को मजबूर करती थी. मेरा शक़ कि मुझे कोई देख रहा है, ये सच था. क्योंकि बाहर से की होल से मेरे ससुर जी मेरी ये सारी हरकते देखते थे, और मेरे नाम से शायद हिलाते भी होंगे?????? पर ये सब मुझे पता नही था. जैसे ही मेरा स्नान पूरा होता (जिस्मी मुझे मिनिमम 30-45मिन्स लगते हैं), ससुर जी हॉल में लौट जाते और टीवी देखने में मग्न है ऐसा दिखावा करते पर उनकी नज़र मेरे गीले बदन को बाथरूम से निकलते देखने के लिए तरस जाती. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैं भी अपने गीले बदन को लपेटे हुए टवल जिसके अंदर केवल ब्रा-पॅंटी से ढका मेरा बदन लेकर अपने बालों को झाड़ते हुए बेडरूम की ओर शरम से भागती थी. भागते समय मेरे बूब्स उछलते थे और गांड और यहाँ से वहाँ हिलते देख उनकी हालत और भी खराब होती होगी इसका अंदाज़ा मैं लगा सकती थी. बेडरूम का दरवाजा बंद कर के में टवल खोल देती थी और अपना पूरा शरीर सुखती थी. बाद में केवल ब्रा-पॅंटी में रह कर आज क्या पहनु इसमे कुछ मिनट गुज़रते, तब तक ससुर जी की के होल फीस्ट जारी रहती.
साड़ी तो मैं सफेद ही पहनती थी पर ब्लाउस अलग अलग फॅसन के मैने सिल्वा लिए थे उसलिए वैसे मैने सफेद सादियों को रंग रखा था. ज़्यादा तर मेरी साड़ियाँ ट्रॅन्स्परेंट रहती और ब्ल्काउसस डीप यू-नेक के रहते थे. उन्हे पहेनकर मैं एक बार ही बाहर निकलती थी और मेरी नज़र ना जाने क्यों ससुर जी क्या कर रहे हैं इस पर जाती, नज़रे मिलने पर वो एक स्माइल देते थे और मैं शर्मा कर किचन में काम करने जाती. ये रोज होने लगा था. अब उनकी हिम्मत और भी बढ़ने लगी, चान्स मिलने पर वो मुझे टच करने लगे. मौका ना मिले तो वो मौका बना लेते पर टच ज़रूर करते थे, पूरे दिन में 5-6 बार तो उनका स्पर्श मुझे होता ही था. मुझे भी उनका ये ‘स्पर्श’ अच्छा लगता था इस लिए मैने कभी उन्हे मौका हाथ से जाने का चान्स नही दिया.

कहानी जारी है…. आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गये पेज नंबर को क्लिक करे …..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *