वासना की कहानी बस से शुरू हुई 3

वासना की कहानी बस से शुरू हुई 3

दोस्तों मै वंदना आपको वासना की कहानी बस से शुरू हुई का अगला Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories Antarvasna1.com और अंतिम भाग बताने आई हु उम्मीद करती हु की आपको पसंद आये.आपने पिछले भाग में पढ़ा था….मैंने थोड़े पैर और फैला दिया और जैस मुझे उम्मीद थी उसका कड़ा लंड मेरे चूतरो की दरार से रगड़ खाने लगा….अब आगे.,

आज वह अपना लंड वही रगड़ रहा था और मेरे चूतरो को मसल भी रहा था,मैं बिलकुल अलग दुनिया में पहुँच गयी थी, उस भीड़ भरी बस में मैं वासना के उस सागर का सुख ले रही थी जो मेरी शादी के १८ साल बाद भी अभी तक मुझसे महरूम था.

पुरे रास्ते उसका लंड मेरे चूतरो पर रगड़ता रहा और मेरी चूत भी आज कुछ ज्यादा गीली हो गयी थी. आज मैं पैंटी नहीं पहने थी , मेरी चूत का पानी बहकर मेरी जांघो पर आगया था. जब उसका स्टॉप आया वोह उतरने के लिए आगे आया और जाते जाते धीरे से मुझे ‘थैंक्स , कॉल मी’ कहते हुये आगे बढ़ गया. मैं मूर्ति की तरह वैसे ही वैसे खड़ी रही.

मैं जैसे तैसे घर पहुँची और घुसते ही रुमाल से मैंने अपनी बहती हुयी चूत को पोंछा और उसको मोबाइल लगा दिया.

वोह: ‘हाय दिलरुबा!’

मैं: ‘हम्म्म’.

वोह: ‘थैंक्स, मेरी इच्छा पूरी करने के लिए’.

मैं: ‘ हाँ, मैं बच्चो को निराश नहीं करती’.

यह कह कर हॅसने लगी और वह भी हॅसने लगा.

वोह: ‘हम कब मिल सकते है?’

मैं चुप हो गयी. मिलने की इच्छा मुझे भी होने लगी थी और मन मानने लगा था की उससे मिलने में कोई बुराई और खतरा नहीं है. लेकिन परेशानी थी की मैं उससे कहाँ मिल सकती हूँ?

मैं: ‘मुझको नहीं पता. कोई ऐसी जगह नहीं समझ में आती जहाँ मैं तुमसे मिल सकू’.

वोह: ‘मैं आपको अपने घर नहीं ले जा सकता, मेरी माँ हमेशा घर रहती है. आपका घर कैसा रहेगा?’

मैं: ‘मेरा घर?’

उसने जब मेरे घर की बात की तब मैं सोचने लगी की बात सो सही है, मेरी नौकरानी १२ बजे चली जाती थी और ४ बजे मैं अपनी बेटी को लेने स्कूल के लिए निकलती थी. १२ से ४ के बीच मैं घर पर बिलकुल ही अकेली रहती थी. मैंने बिना हिचके उसको १२:३० बजे का समय दे दिया और अपने मकान का पता बता दिया.

अगले दिन वह बस स्टॉप पर नहीं दिखा , मैं घर ऑटो रिक्शॉ पकड़ कर जल्दी आगयी. नौकरानी को भी मैंने जल्दी कम ख़तम करने को कहा और १२ से पहले ही उसे भी घर के बाहर कर के दरवाज़ा बंद कर दिया. उसके जेन के बाद मैं बिलकुल एक कामातुर प्रेमिका की तरह कपडे निकलने लगी.

मैंने अब स्लीवलेस काले रंग का ब्लाउज पहन लिया जिसकी बैक खुली थी और उसके साथ सफ़ेद रंग की साडी जिस पर काले पोल्का डॉट पड़े थे पहन ली. बड़ी अजीब बात थी, यह साडी मेरे पति की पसंदीदा साडी थी , जो उन्होंने मुझे शादी की १५ वीं वर्ष गांठ पर दी थी.

जब मैंने पहली बार इस साडी को पहना तो उन्होंने मुझसे कहा था, की मैं बहुत सेक्सी लग रही हूँ और उन्होने वही साडी उठा कर मुझे जल्दी से चोदा और उसके बाद ही हम लोग बाहर खाने पर गए थे. मैंने साडी पहन कर अपने आप को शीशे में निहारा और अपने पर रश्क कर बैठी, मैं आज भी इस साडी में बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी.

मैं अपने को निहार ही रही थी कि तभी बाहर दरवाज़े पर घंटी बजी. मैं एक बार ठिठकी , एक बार और अपने को देखा और फिर दरवाजा खोलने चली गई.

मैंने दरवाज़ा खोला, वोह सामने खड़ा हुआ था, मै बाहर निकली , इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है और इत्मीनान होने के बाद उसको अंदर आने का इशारा किया. आप ये कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

वह तेजी से अंदर आगया और मैंने तुरंत दरवाज़ा बंद कर के डबल लॉक कर दिया, मै अब उस वक्त बेहद घबड़ायी होयी थी और साथ मै अंजाने पल के लिए उतावली भी हो रही थी.मै जब दरवाज़ा बंद कर के मुड़ी तो मुझे मंत्रमुग्ध देख रहा था और वह मेरे पास आया और मेरे कंधो को पकड़ के अपने पास खीच लिया और कहा, ‘बहुत खूबसूरत लग रही है’.

जब उसने मुझे अपने से चिपकाया , तब उसका कड़ा लंड मेरी जांघो से टकरा गया. उसके लंड का मेरे जांघो को छूने से मेरे बदन में सनसनी सी दौड़ गयी. मैंने अपने आप को उससे अलग किया और उसको अंदर ड्राइंग रूम में सोफे पर बढ़ने को कहा और खुद किचन में उसके लिए पानी लेने को चली गयी.

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