वासना की कहानी बस से शुरू हुई 2

वासना की कहानी बस से शुरू हुई 2

दोस्तों मै वंदना आपको वासना की कहानी बस से शुरू हुई का अगला भाग बताने आई हु उम्मीद करती हु की आपको पसंद आये.आपने पिछले भाग में पढ़ा था…मेरा दिल धक् कर गया और पकड़े जाने के डर से मै उससे आगे खिसक के आगयी….अब आगे.,

वह बात को समझ गया और उसने अपने हाथ मेरे चूतरो पर रख दिए और जब तक उसका स्टॉप नहीं आया वह मेरे चूतरो को दबाता रहा और मेरी नंगी कमर को हथेली से सहलाता रहा. उसके स्टॉप आने पर हमेशा कि तरह वह मुझसे रगड़ता हुआ आगे जाकर उतरने लगा लेकिन इसी दौरान उसने मेरे हाथ को नीचे थपथपाया और एक छोटी सी कागज़ कि चिट मेरी हथेली में डाल दी.

मैंने उस चिट को अपनी मुठ्ठी में कस के दबा लिया और यह जानते हुए भी उस चिट में क्या होगा मै उसे पढ़ने कि हिम्मत न कर सकी .मै भौचक्की और एक अनजाने डर से डरी होयी थी. बस में मै उसके छूने का मज़ा तो ले रही थी लेकिन मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसी कोई हरकत करेगा.

मैंने उस चिट को अपने पर्स में डाल दिया. घर में, मै पुरे समय उस लड़के के बारे में ही सोचती रही, उसका छूना, उसका मुझे दबाना उसका मेरी चूची पर हाथ रखना, सब कुछ मुझे अंदर से जलाता रहा. उस रात मेरे पति जब बिस्तर पर आये. तो मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उनसे लिपट गयी.

उन्होंने चौक्ते हुए मुझे देखा और मुस्कराते हुए मुझे बाँहों में जकड लिया. उनके हाथ मेरी नाईटी को खिसकते हुए मेरी चून्चियों पर पहुच गए और उसे दबाने लगे, उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह लड़का मेरी चून्चियों को दबा रहा है.

जब वह मेरी नाईटी ऊपर कर रहे थे तो मैंने अपने आप ही उसको पूरी तरह से अपने से अलग कर दिया और बहुत दिनों बाद मै नंगी उनसे चिपट गयी. मै बहुत ही गर्म थी. मैंने आँख बंद कर रक्खी थी और मुझे उनकी हर हरकत में उस लड़के का होने का एहसास हो रहा था.

उन्होंने जैसे ही मेरी टंगे फैला कर मेरी चूत में अपना लंड डाला वो फचाक से मेरी चूत में घूस गया. उनको मेरी चूत का गीलेपन का एहसास होगया था, वह मुझे चोद रहे थे और कह रहे थे “वंदना, आज तो बिलकुल ही तुम गर्मायी हुई लग रही हो, इतनी जल्दी चूत ने पानी छोड़ रक्खा” है?”

उनका हर धक्का मुझे उस लड़के के लंड का धक्का लग रहा था और मै तेजी से कमर उठा उठा कर उनके लंड से चुद रही थी. मैंने उनसे कस के धक्के मारने को कहा और वह भी गरमा कर तेजी से मुझे चोदने लगे. वह थोड़ी देर में झड़ भी गये, लेकिन मै बहुत दिनों बाद चुदाई के दौरान झड़ी थी.

मुझे चोदने के बाद वह अपने हिस्से पर जाकर सो गये, लेकिन खूब चुदने कि बाद भी मेरे आँखों मै नींद नहीं थी. मुझे तो सिर्फ उस लड़के कि शकल सामने घूमती नज़र आरही थी. एक बरगी उठ कर अपने पर्स से उस चिट को निकल कर देखने कि इच्छा भी हुयी, लेकिन मै अपने से बार बार पूछ रही थी, “वंदना उस चिट में लड़के ने अपना नंबर दिया है. क्या तू उसे कॉल करेगी”?

लेकिन मेरी अंतरात्मा ने मुझे रोक दिया, “यह सही नहीं है, एक सीमा के बाद बात बिगड़ सकती है”.

अगले दिन रोजाना कि तरह मैं बस स्टैंड पहुची , लेकिन वहाँ वह लड़का नहीं दिख रहा था.थोड़ी देर में बस आयी और चली गयी लेकिन वह नहीं आया और मैं उसके इंतज़ार में में खड़ी रही. दूसरी बस भी आकर चली गयी लेकिन मैं बस पर नहीं बैठी, मैंने ऑटो रिक्शा किया और घर चल दी. आप ये कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मुझे बिना उस लड़के के बस में चढ़ने कि कोई इच्छा नहीं थी. मैं रास्ते भर परेशान रही कि आज क्या होगया ?, आज वह क्यों नहीं आया? उसका न होना ऐसा लग रहा था जैसे मेरी ज़िन्दगी से कुछ चला गया हो. उस लड़के के साथ बस का सफ़र मेरी रोजाना कि ज़िन्दगी में इस तरह शामिल हो चूका था कि उसके आज न होने से सब कुछ खाली खाली लग रहा था और परेशान भी हो रही थी कि क्या हुआ उसको.

मेरी इतनी बैचैनी बढ़ गयी कि मैंने अपना पर्स खोल के उस चिट को ढून्ढ निकला जो उस लड़के ने मुझे दी थी. उस पर मोबाइल नंबर लिखा था. एक बार मन आया कि उसको कॉल करू और पता करू कि क्यों नहीं आया , लेकिन हिम्मत नहीं हुयी.

घर आकर मैं सुस्त सी कमरे में लेट गयी. ध्यान बटाने के लिए मैंने टी वी चालू कर दिया लेकिन मेरा दिमाग उस लड़के में ही लगा हुआ था. इसी उलझन में मैंने अपना मोबाइल हाथ में ले लिया और उस लड़के का नंबर मिला दिया. काल जाती देख मेरी हिम्मत जवाब दे गयी और मैंने झट से मोबाइल काट दिया.

मेरे हाथ कॉप रहे थे, मैंने मोबाइल सामने बिस्तर पर फेक दिया. मेरे मोबाइल फेकते ही मेरा मोबाइल बज उठा, मैंने उसको उठा कर देखा तो काल उसी लड़के की थी, उसने काल बैक कि थी. मैंने काल बजने दी, अजीब दुविधा में थी. सोचती रही कि क्या करू कि क्या न करू तब तक मेरा मोबाइल अपने आप बजना बंद हो गया. मोबाइल मेरे हाथ में ही था कि उसने दोबारा काल किया, इस बार मैंने धड़कते दिल से कॉल उठा ली.

मैंने मोबाइल कान पर लगा लिया और उधर से ‘हाय’ कि आवाज़ आयी, आवाज़ बड़ी खुश्की भरी थी. मैं चुप रही.फिर उसने कहा,’ मैं जानता हूँ कि यह काल अपने की है’.
मैंने रुक कर पुछा,’कौन है’?
उसने हलके हॅसते हुये कहा,’ आपको मालूम है की मैं कौन हूँ.’

उसकी आवाज़ में शरारत थी. अब तक मैंने अपनी बदहवासी पर काबू कर लिया था, मैंने सपाट और तलक लहजे में कहा,’ क्या चाहिए मुझ से? मैं एक औरत हूँ और तुमसे बहुत बड़ी. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या’?

उसने तपाक से कहा,’ आप मेरी गर्लफ्रेंड हो ऑंटी जी.’
मैंने भी तुरंत उसे डपटते कहा,’ मुझे आंटी वांटी मत कहो’.
उस पर उसने कहा,’ आप, अपने आप को बड़ी समझती हो इसलिए आपको आदर में मैंने आपको आंटी कहा.’

लड़का तेज था, तपाक से जवाब दे रहा था, मैंने उसको छेड़ते हुए कहा,
‘तुमको आदर यही दिखाना था, बस में आदर नहीं दिखा सकते थे ‘?
‘आप जो है और मुझे जो लगती है मैं उसका आदर करता हूँ, आपकी उम्र का नहीं’.

‘मैं क्या हूँ? मैं क्या लगती हूँ?’
‘आप में एक सेक्स अपील है. जो मुझे और किसी औरत में नहीं दिखाई देता’.
मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उससे कहा, ‘तुम मेरी सेक्स अपील के बारे में क्या जानते हो? तुमने तो सिर्फ मेरे बम्स को ही नोचा है’?
‘आपकी गदराई चूतरो को छु कर ही मुझे बाकि सबका अंदाज़ा लगा गया है’. इसके साथ ही मुझे चूमने की आवाज़

सुनायी दी.
मैंने पूछा, ‘ यह क्या है’?
उसने कहा, ‘ किस था मेरी नयी गर्लफ्रेंड के लिए.’

मैंने हॅसते हुए कहा, ‘ तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड कह रहे हो! मैं एक शादी शुदा १३ साल की बच्ची की माँ हूँ!’
उस पर उसने बेफिक्री से कहा,’ छोड़िये इन बातो को , आप मेरी दिलरुबा हो’. आप ये कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैंने बात टालते हुये उससे पुछा, ‘आज तुम क्यों नहीं आये’?
उसने सवाल मुझ पर ही दाग दिया ‘आपने मुझे मिस किया’?
मैंने तेजी से जवाब दिया,’नहीं! पागल हो क्या?’
उधर से उसने तंज लेते हुये कहा, ‘ अच्छा? फिर मुझे काल क्यों किया’?

मैंने भी कह दिया, ‘तुमने नंबर दिया था इसलिए काल मैंने किया था’.
मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं.

मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं. मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.
अब आगे –

मैं बात कर रही थी और बात किस तरफ जा रही है मुझे कोई भी ख्याल नहीं था, मैं बस उससे बात कर के मस्ती लेने लगी थी. हमारी आगे को बात चीत कुछ इस तरह से हुयी.

मैं: ‘तुम क्या करना चाहते हो’?

वोह: ‘मैं मिलना चाहता हूँ और आपको बाँहों में लेना चाहता हूँ’.

मैं: ‘ तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुमको तो मुझे ज्यादा सेक्सी और जवान लड़की मिल जायेगी’.

वोह: ‘मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती मुझे मैच्योर औरते पसंद है’.

मैं: ‘कितनी मैच्योर औरतो को अब तक जानते हो’?

वोह: ‘ किसी भी को नहीं , केवल फंतासी में महसूस किया है. आज तक मैं इतने करीब से किसी को भी नहीं जाना है , जितना मैंने आपको जाना है और किया है’

मैं: ‘सुनो, मैं तुमसे नहीं मिलूंगी, समझे? मेरी खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी है और उसको मैं तुम्हारे लिए ख़राब नहीं करूंगी’.

वोह: ‘ठीक है. मैं आपके हाँ का इंतज़ार करूंगा’.

मैं: ‘कोई बात नहीं, तुम काल आ रहे हो’?

वोह: ‘कहाँ? तुम्हारे घर’?

मैं: ‘ नहीं बेवकूफ! बस पर’.

वोह: ‘ बिलकुल! चूतरो की मालिश के लिए तैयार रहना’.

हम दोनों ही इस बात पर हॅसने लगे.

वोह: ‘ सुनो कल पैंटी मत पहनना’.

मैं: ‘क्या’!!!

वोह: ‘ ओह हो! कल साडी के अंदर पैंटी मत पहनना’!

मैं: ‘पागल हो क्या’!

यह कह कर मैंने मोबाइल काट दिया.

जब मैंने मोबाइल बिस्तर पर फेका तब तक मैं इतनी गीली हो चुकी थी की अनायास मेरा हाथ चूत पर चला गया और उसी हालत में मेरी उसकी हुयी बात को याद करते हुये मैं मास्टरबेट करने लगी. मेरी उंगलियां मेरी गीली चूत के अंदर बहार हो रही थी और मैं अपनी क्लिट को भी बेरहमी से रगड़ रही थी. आप ये कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मैं लड़के की हिम्मत के बारे में सोंच रही थी, जो मुझसे २० साल छोटा था लेकिन बड़े अधिकार से मुझ से बिना पैंटी के साडी पहनने के लिए कह रहा था ताकि वोह भरी बस में खुले आम मेरे चूतरो से और मस्ती ले सके. सेक्स की इस असीम चाहत से मैं रोमांचित हो उठी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

मैं बिस्तर पर पड़े पड़े उसी के बारे में और उससे हुयी बातो के बारे में सोचती रही. मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में, एक लड़की के नाम सेव कर लिया. तब मुझे ध्यान आया की अभी तक न मैंने अपना नाम उसे बताया था न उसने ही अपना नाम मुझे बताया था.

अगले दिन जब मैं अपनी बेटी को छोड़ने के लिए तैयार हुयी तब मुझे कल वाली उसकी बात ध्यान में आयी. मैंने शीशे में अपने आपको घूरा और मैंने अपनी साडी पेटीकोट उठा कर एक झटके में पैंटी उतार दी. मैं जब बाहर निकली तो बिना पैंटी के मुझे बड़ा अजीब लग रहा था.

लग रहा था मेरी चूत भरे बाज़ार नंगी होगयी है और मेरी झांघो के बीच वोह रगड़ी जा रही है.मैं अंदर ही अंदर बहुत उतेजित भी थी और सोंच भी रही थी, हे भगवान! मैं यह क्या कर रही हूँ! वह भी एक २० साल के प्रेमी के लिए! मैं जब बस स्टॉप पर पहुँची वह लड़का वहाँ पहले से ही खड़ा था.

उसने जीन्स और टी शर्ट पहने हुयी थी, हमारी आँखे मिली और हमने नज़र घुमा ली, जैसे हम दोनों एक दुसरे को नहीं जानते .

हमेशा की तरह मैं हैंडल पकड़ कर खड़ी होगयी और वोह लड़का धक्का देता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया. उसने फ़ौरन मेरी कमर के नीचे हाथ रख कर मेरी पैंटी को महसूस करने की कोशिश की. जब उसको इसका एहसास हो गया की आज मैंने उसके कहने पर पैंटी नहीं पहनी है तब उसने मेरे चूतरो को थप थपा दिया, जैसे वोह मुझे धन्यवाद दे रहा हो.

बिना पैंटी के जब उसके हाथ मेरे चूतरो के ऊपर पड़े मैं बिना दांत भीचे नहीं रह पायी. आज पहली बार उसके उद्वेलित हाथो की गर्मी मेरे चूतरो पर सिर्फ साडी के ऊपर से महसूस कर रही थी. मैंने थोड़े पैर और फैला दिया और जैस मुझे उम्मीद थी उसका कड़ा लंड मेरे चूतरो की दरार से रगड़ खाने लगा.

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