लेने के देने पड़ गये 1

लेने के देने पड़ गये 1

दोस्तों मेरा नाम गौरव है Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories Antarvasna1.com मेरे पिता एक बिजनेस मेन है जिनकी मोबाइल शॉप की दुकान है मै अपने माता पिता का एकलोता लड़का हूँ मेरे कोई भाई बहन नहीं है ये कहानी जब शुरू हुई तब मेरी उम्र 20 साल थी
मेरा रंग गोरा है हाइट पांच फुट छे इंच शरीर सामान्य है 20 साल की उम्र में मै एक चिकना और मस्त लड़का हुआ करता था
मै अपने घर से करीब 100 k .m . दूर शहर में पढने आया था और एक बॉयज होस्ट्रल में रहता था जैसा की होस्ट्रल का माहोल था लड़के सिगरेट पीना, शराब पीना … ब्लू फिल्म देखना आदि सब करते थे
जब कोई लड़की नहीं मिलती तो मार मर लेते थे
इस दौरान साथ में सोने और साथ में ब्लू फिल्म देखने के कारण उनमे सम्लेंगिक सम्बन्ध भी बनजाते है इन सम्बन्धो के चलते लड़के लोग एक दूसरे का लण्ड पकड़ कर मुठियाते है, एक दूसरे का लण्ड मुह में लेकर चूसते है यंहा तक की एक दूसरे की गांड भी मारते है
मै भी इन सब चीजो से बच नहीं सका सबसे पहले रूम पाटनर फिर कॉलेज के दूसरे लड़को से मेरे सम्बन्ध बनते गए मै चिकना और मध्यम कद था इसलिए सब मुझसे जयादा आकर्षित होते थे सीनियर लोगो को जब पता चला तो अक्क्सर मेरे रूम पर आते अपना लण्ड मुहसे चुसवाते और मेरी गांड मार् लेते
मुझे भी गांड मारने से ज्यादा मजा गांड मराने में आता था
धीरे धीरे कॉलेज में मेरी इमेज एक बॉटम गे के रूप में हो गयी बहुत लोग इस बात को जानते थे बहुत सारे लड़के मेरी गांड मार् चुके थे और अपना लण्ड चुसवा चुके थे
पर इसका ये मतलब नहीं है की मेरी लड़कियों में दिलचस्पी नहीं थी मेरी इच्छा भी लड़कियों को चोदने की होती थी. पर इस इमेज के साथ कौन लड़की मुझसे सम्बन्ध रखती .
एक दिन मै कॉलेज से घर लोट रहा था की मुझे एक सीनियर लड़की मिली उसने मुझे बुलाया और कहा की तुम घर जा रहे हो ..
यस मेम ……..
जाते जाते मेरे मोबाइल में बैलेंस डलवा देना जी मेम मैंने जवाब दिया
उसने 200 रूपए और अपना नंबर मुझे दे दिया
दूसरे दिन जब मैंने उसे चेंज वापस किये तो बोली थैंक्स
इसके बाद वो मुझसे छोटे मोटे काम करवाती कभी कोई बुक बुलवती या स्टेशनरी खरीदने का काम देती
मै जूनियर होने के नाते सब करता था धीरे धीरे वो मुझसे घुल मिल गयी वो मुझे कैंटीन में चाय भी पिलाती थी और नाश्ता भी कराती थी अक्कसर बोलती थी तुम बड़े सीधे हो … आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
इस लड़की का नाम शीतल दिक्षित था ये गेहुंए रंग की ऊँची पूरी मजबूत कद काठी की लड़की थी इसके बोबे बड़े बड़े थे कमर पतली और कूल्हे चौड़े थे इसमें लड़कियों जैसे शर्माना या नजाकत नही थी.
लड़के लोग मुझे शीतल का नौकर कह कर चिड़ाते थे
वो मुझे कुछ ज्यादा लिफ्ट देने लगी थी मेरे कंधे पर हाथ रख देती अकेले में मुझसे सट कर बैठती थी बाइक पर भी चिपक कर बैठती थी मै सोच रहा था की किस्मत तेज हो तो मुझ जैसे गे वाली इमेज के लड़के को भी गर्ल फ्रेंड मिल सकती है |

मै भी मोैका मिलने पर उससे सट जाता था उसके हाथ और शरीर के दूसरेहिस्सों को टच करता था उसने कभी विरोध नहीं किया मेरी हिम्मत बढ़ गयी थी मै मोैके की तलाश में था | एक दिन शीतल मुझे अपने घर ले गयी
उसके पिता इस दुनिया में नहीं थे उसकी मम्मी थी उन्होंने जब उसके साथ मुझे देखा तो उन्हें आश्चार्य हुआ फिर वो शीतल से बोली बेटा……… और कुछ परेशान हो गयी शीतल बोली मम्मी तुम परेशान मत हो ये तो बड़ा ही सीधा लड़का है और मेरा मेरा जूनियर है आपको कभी शिकायत नहीं होगी ये बस मेरा दोस्त है मेरी मदद करता है बस …….
उस दिन के बाद मै उसके घर जाने लगा था उसकी मुम्मी मुझ पर विस्वास करने लगी थी |

इधर शीतल और मेरे बीच में दूरिया काम होने लगी थी हम साथ में मूवी भी देख लेते थे एक दूसरे को छूते थे बाइक पर वो अपनी चूजिया मेरी पीठ पर टिकाती थी एक दिन उसने मुझे किस भी कर लिया अब चिपका चिपकी और किसिंग होने लगी मै बहुत खुश था बस कभी कभी न कभी मै उसे चोदने में सफल हो जाउगा |

एक दिन वो दिन भी आ ही गया शीतल ने मुझे कहा आज हमरे दूर के मामा जी की डेथ हो गयी है इसलिए मम्मी वंहा गयी है , मै प्रैक्टिकल एग्जाम होने का बहाना बना कर रुक गयी वरना वो मुझे भी साथ ले जाती |

आज तुम रात 8 के बाद मेरे घर आ जाना तब वंहा पर कोई नहीं होगा मेरा दिल खुशी से पागल हो गया मै अब बड़ी बेसब्री से 8 बजने का इन्जार कर रह था मै ठीक टाइम पर पंहुच गया मुझे अंदर लेकर उसने दरवाजा बंद कर लिया मै उससे चिपक गया और किश किया वो बोली रुको तुमने खाना खा लिया है की नहीं, मै कहा खा लिया है, तो वो बोली मैंने नहीं वो तुम भी मेरे साथ दो पराठे और खालो मै कहा ठीक है |

उसके बाद उसने मेरा हाथ पकड़ा और बैडरूम में ले गयी हम दोनों के फेस पर वासना का बुखार था मैंने उसके होंटो पर किस किया और लिपटा उसके बड़ी और हार्ड चूजिया दब गयी थोड़ी देर बाद मैंने शरीर अपर हाथ घुमला चालू कर दिया और उसका कुरता उत्तार दिया अब वो ब्रा और सलवार पर थी उसने मुझे भी कपडे उअतर्ने को कहा थोड़ी देर बाद मै सिर्फ अंडरवियर पर हो गया मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोला और निपका कर सलवार उसस्के जिस्म से अगल कर दी वो अंदर पेंटी नहीं पहनी थी बल्कि लड़को जैसा बड़ा अंडरवियर पहने थी जब मैंने उसे खींचा ……….. हे मेरे भगवान ………ये क्या मै क्या देख रहा था उसका लड़को के जैसा अच्छा खासा लण्ड था ………..|

मेरे मुह से निकला ओ ओ ओ ……. मै फटी फटी आँखों से उसे देखने लगा कुछ सेकण्ड दोनों कुछ नहीं बोले
फिर वो बोली मै एबनार्मल सेक्सुअल कैरेक्ट्र्र रखती हूँ ये बात मेरी मम्मी, जन्हा मेरा जन्म हुआ वंहा के डॉक्टर नर्स और कुछ ही लोग जानते है पर तुम मेरे साथ सेक्स कर सकते हो मझे मालूम है की तुम लड़को के साथ भी सेक्स कर सकते हो ……….अब मेरी समझ में आ रहा था की उसमे मुझे क्यों पसंद किया और इसकी मम्मी मुझे इसके साथ देख कर कुछ परेशान और उदास हो गयी थी | आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

मै कुछ देर सोचता रहा फिर उसका लण्ड हाथ में लेकर देखा वो सामान्य था उस पर हलके हलके बाल भी आने लगे थे ……. उसने भी मेरा अंडरवियर उत्तर कर मेरा लण्ड पकड़ लिया …….

कहानी जारी है …. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे …

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