रंडीखाने में ग्रुप चुदाई का मज़ा

रंडीखाने में ग्रुप चुदाई का मज़ा

दोस्तों आज फिर से अपनी कहानी का अगला भाग Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories लिख रहा हु आशा करता हु आप लोग मजे से पढ़ रहे होगे . मेरी पिछली कहानी थी और इसी कहानी को आगे बढ़ाते हुए

अब तक आपने पढ़ा कि कैसे जैनब ने मुझे अपने और रूपा के बदन के भरपूर मजे दिलाए।
अगले दिन जैनब बारह बजे आ गई उसके साथ ऑटो करके मैं धारावी में रेश्मा की खोली पर आ गया। रेश्मा एक 50 साल की औरत थी। अंदर जैस्मिन एक गरीबों जैसी साड़ी पहन कर बैठी थी। रेश्मा चाय बना लाई।
जैनब ने बताया कि रेश्मा इसे अपनी भतीजी बना कर लाई है।
जैस्मिन मुझे देखकर शरमा रही थी।
रेश्मा बोली- इतना क्यों शरमा रही हो? फ़ोन पर तो बात कर चुकी हो ! तुम्हारा पुराना यार है। लो चाय पियो !
जैस्मिन मुझे देखकर अब भी शरमा रही थी, हम चार लोग ही कमरे में थे।
रेश्मा जैस्मिन की तरफ देखते हुए जैनब से बोली- बहुत शरमा रही है, कल 12 बजे से पहले नहीं छोडूंगी तेरी चूत की भोंसड़ी बनवानी है, थोड़ी देर और शरमा ले।
रेश्मा बोली- जैनब, यह बहुत शर्मीली है, इसे सबके सामने नंगा करवाऊँगी और चुदवाऊँगी, नहीं तो कुतिया स्मार्ट नहीं बन पाएगी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
जैस्मिन शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी। अगले दिन जैनब बारह बजे आ गई उसके साथ ऑटो करके मैं धारावी में रेश्मा की खोली पर आ गया। रेश्मा एक 50 साल की औरत थी। अंदर जैस्मिन एक गरीबों जैसी साड़ी पहन कर बैठी थी। रेश्मा चाय बना लाई।
जैनब ने बताया कि रेश्मा इसे अपनी भतीजी बना कर लाई है।
जैस्मिन मुझे देखकर शरमा रही थी।
रेश्मा बोली- इतना क्यों शरमा रही हो? फ़ोन पर तो बात कर चुकी हो ! तुम्हारा पुराना यार है। लो चाय पियो !
जैस्मिन मुझे देखकर अब भी शरमा रही थी, हम चार लोग ही कमरे में थे।
रेश्मा जैस्मिन की तरफ देखते हुए जैनब से बोली- बहुत शरमा रही है, कल 12 बजे से पहले नहीं छोडूंगी तेरी चूत की भोंसड़ी बनवानी है, थोड़ी देर और शरमा ले।
रेश्मा बोली- जैनब, यह बहुत शर्मीली है, इसे सबके सामने नंगा करवाऊँगी और चुदवाऊँगी, नहीं तो कुतिया स्मार्ट नहीं बन पाएगी।
जैस्मिन शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी।
रेश्मा के जाने के बाद जैस्मिन को मैंने अपनी गोद में खींच लिया और उसके होंठों में होंठ डाल कर चूसने लगा। कुछ देर बाद मैंने जब होंठ हटाये तो जैस्मिन बोली- आप से प्यार करने का मन मुझे बहुत दिनों से कर रहा है !
मैंने उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया, उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी थीं। जैस्मिन ने ब्लाउज के बटन खोल कर ब्लाउज उतार दिया, वह ब्रा नहीं पहने थी, उसकी दूधिया चूचियाँ बाहर निकल आईं। जैस्मिन की चूचियाँ किसी को भी पागल करने में समर्थ थीं, गोल-गोल, बड़ी-बड़ी और सामने को तनी हुई थीं। सच, अगर इतनी सुन्दर चूचियाँ देखकर भी किसी का लण्ड खड़ा न हो तो उसे डॉक्टर की जरूरत होगी। मैं एकटक जैस्मिन की चूचियाँ देखने लगा।
जैस्मिन बोली- दबाइए न ! बहुत मन कर रहा है।
यह मेरी खुशकिस्मती थी कि आज जैस्मिन की चूत और चूचियों से मुझे खेलना था। जैस्मिन को मैंने चारपाई पर लिटा दिया और उसकी चूचियों का मर्दन करने लगा।
जैस्मिन गर्म हो गई, उसने मेरा मुँह अपनी चूची की घुण्डी पर लगा दिया। अब मैं एक चूची चूस रहा था और एक का चुचूक मसल रहा था। मेरा लण्ड पैंट में पूरा तना हुआ था। जैस्मिन थोड़ी देर में बहुत गर्म हो गई और आहें भरती हुई बोली- कुछ करो ! मेरी चूत में डालो ! अब नहीं रहा जा रहा है ! चुदने का बहुत मन कर रहा है।
जैस्मिन के पेटीकोट का नाड़ा मैंने ढीला किया और उसे नीचे सरका कर उतार दिया। जैस्मिन की चिकनी चमचमाती ऊपर की तरफ फूली हुई चूत मेरी आँखों के सामने थी। चूत काम-अग्नि के मारे चूत-रस छोड़ रही थी।
जैस्मिन शरमा गई और बोली- ऊहं आपने तो मुझे नंगा कर दिया?
और उसने अपनी टांगें एक-दूसरे से चिपका कर चूत छिपा ली। मैंने अपनी पैंट-शर्ट उतार दी, मेरा लम्बा और मोटा लण्ड चड्डी से बाहर निकल रहा था। मैंने बिना देर किये अपनी चड्डी उतार दी। मेरा लम्बा लण्ड अब जैस्मिन की आँखों के सामने था। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
जैस्मिन अपने मुँह पर हाथ रखते हुआ बोली- ऊहं… इतना लम्बा?
मैंने उसके मुँह के आगे लौड़ा रख दिया और बोला- लो इसे चूस कर देखो !
जैस्मिन बोली- छिः छिः मैं नहीं चूसती।
मैंने कहा- अच्छा, जैसी तेरी मर्ज़ी !
और मैंने उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए उनके बीच में अपना लण्ड फंसा दिया और उसकी चूचियों में दस-बारह धक्के पेल दिए।

कहानी जारी है …. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे |

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