मैंने चुदाई की सुरुवात मुंबई 2

मैंने चुदाई की सुरुवात मुंबई 2

दोस्तों सौरभ का आप सब लोगो को प्रणाम आज फिर मै अपनी कहानी को आगे बढ़ा रहा हूँ अभी तक आपने पढ़ा Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories मैं चूमता हुआ एन कोने तक पहुँच गया. फिर थोड़ा चड्डी में मुंह घुसा कर उसकी जांघ के मुलायम और संवेदी खांचे पर भी जुबान फेरने लगा. चड्डी खींच कर मुंह घुसाने के प्रयास में मेरे एक हाथ की मुठ्ठी उसके गीले धब्बे को टच करने लगी. वो लगातार दूसरी टांग को खींच कर दोनों टांगो को मिलाने का प्रयास कर रही थी ताकि वहाँ हो रही असहनीय सरसराहट से कुछ राहत मिले परन्तु मैंने उसकी दूसरी जांघ पर अपनी पीठ और कोहनी फंसा रखी थी…….. और आगे .. फिर मैं जैसे ऊपर तक चढ़ा था वैसे ही वापिस नीचे चूमते हुए आने लगा. घुटने तक आकर अब इस टाँग को छोड़ा और दूसरी टाँग को पकड़ लिया. अब एक और चिकनी और गोरी-गट जांघ मेरे सामने थी. पहले मैंने अपने होंठ और नाक उस पर टिकाई और लंबी सांस खींचता हुआ जल्दी से चड्डी तक मसलता हुआ पहुंचा और सांस छोड़ता हुआ वापिस नीचे तक रगड़ दिया. उसके बदन की महक ने जहाँ एक ओर मुझे मस्त कर दिया वहीँ दूसरी ओर मेरी साँसों, नाक और होंठों की तेज़ रगड़ से उसको भी इतनी सनसनाहट हुई के उसके सारे रोयें खड़े हो गए हालांकि त्वचा वेक्स की हुई थी. अब फिर वही चूमने का एक्शन रिप्ले दूसरी टाँग पर भी करने लगा. वही चड्डी को ऊपर करना, फिर चड्डी को खींच कर उसमें मुंह घुसाना. इस बार मैंने काफी ज्यादा खींच दी थी चड्डी सो मुझे उसके झांटों वाला हिस्सा भी दिखाई देने लगा जो की एकदम सफाचट था. चूमते हुए मैंने अपनी जुबान उधर भी घुमा दी. मेरी पहुँच उसके भगोष्ठ से मात्र आधे इंच दूर रह गई. फिर रिवर्स गियर और चूमते चूमते वापिस नीचे आया. जाँघों को चूमने का भी अपना ही मज़ा है. वो तो अच्छा हुआ कि अजय ने उसके मुंह और हाथों को अपने में व्यस्त करवा रखा था वरना वो गुदगुदाहट और सनसनाहट की अतिरेक के कारण मुझे इतने इत्मीनान से अपनी जांघे चूमने नहीं देती. या तो वो मुझे अपने ऊपर खींच लेती या फिर मेरे मुंह को अपनी योनी में ही घुसा देती. जैसे ही मैं थोड़ा सुस्ताया उसने अपनी दोनों टाँगे जकड कर बंद कर ली और आपस में मसलने लगी. मैंने फिर उसके दोनों घुटनों को पकड़ा तो वो कड़क हो गई और मुंह से उन्हूँ उन्हूँ की आवाजे निकल रही थी. मैंने उसके घुटनों पर जोर लगा कर फैलाया और जांघों को फिर से पूरा फैला दिया. अब मैं चड्डी पर मौजूद गीले धब्बे के सामने अपना मुंह लाया. वो अब काफी फैल चूका था. मैंने झुकते हुए उसकी दोनों जांघों को अपनी बाँहों में कस के लपेटते हुए बीचों बीच अपना मुंह घुसा मारा. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उसने एक जोर का झटका खाया और अपने दोनों पैरों को दबाते हुए मेरे सर को जकड लिया. मैंने धब्बे वाली जगह पर अपना पूरा मुंह चौड़ा किया और दबाते हुए उसके नरम, गरम और गीले गोश्त को अपने होंठो से इस तरह कसते हुए मुंह में भरने लगा जैसे एक बड़ा सा लड्डू मुंह में भरने का प्रयास कर रहा हूँ. ५-६ बार इस तरह मेरे मुंह से पम्पिंग इफेक्ट पाकर वो सिसकने लगी. वो तडपते हुए अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे मुंह में घुसेड़ने लगी. उसकी योनी के कुछ उभरे हिस्से मेरे मुंह में जाने लगे. अब मैं उस धब्बे पर से उसके रस को चुसक चुसक करके चूसने लगा. (बर्फ के गोले को जैसे चूसते हैं न उस तरह). उसे गुदगुदी भी हो रही थी और मज़ा भी आ रहा था. इस बीच अजय ने अपने पुठ्ठे उसके बब्बू पर इस तरह टिकाये कि सुगंधा का कड़ा निप्प्ल उसके गुदा छिद्र तक पहुँच गया. उसने अपने हाथों से गुदा को फैलाया और यथासंभव उस निप्पल को ऊँगली से दबाते हुए उसके छेद में फंसा दिया. थोड़ी सी कोशिश में उसने उस निप्पल को गुदा में खींच लिया और अब वो उस पर बैठ कर गुदा सिकोड़ने और छोड़ने लगा. अपने निप्पल पर इतनी तेज़ी से होते अजीब से सेंसेशन से वो पगलाने लगी. और उसने काली चड्डी में एक बार फिर नए सिरे से धार छोड़ दी. मुझे फिर से ताज़ा रस पीने को मिलने लगा. अब मैं थोड़ा उठा और अपने दोनों हाथ उसकी जांघों पर कसी चड्डी की लाइनिंग में से अंदर घुसाये. तुरंत ही वो उसकी रिसती हुई चिकनी योनी पर पहुँच गए. सफाचट योनी थी. मैं अपने हाथों से उसकी मालिश करने लगा. फिर दायें हाथ के अंगूठे से उसके दाने को रगड़ने लगा और बाएं हाथ से पूरी योनी को गूंधने लगा. फिर जैसे ही एक ऊँगली उसकी रस की कटोरी में डुबोई वो फडफडाने लगी. कुछ देर यूँ ही हाथों से उसकी जवानी से खिलवाड़ करता रहा. अब अपने गीले हाथों को उसकी काली चड्डी के सूखे भाग से रगड़ रगड़ कर सुखाया. अब तक वो इतनी तड़पने लगी थी कि दोनों टांगो को फिर से एक करके ऊपर नीचे करते हुए योनी को मसलने लगी. ऊपर अजय ने उसके मुंह में अपना डंडा ऐसा ठूंस रखा था कि उसकी हर चीख गले में ही फँस कर रह जाती थी. अब मैंने एक बार फिर उसकी टांगो को खोला और झटके से जांघों के बीच अपना मुंह घुसा दिया. क्या करूँ, काली चड्डी मेरी कमजोरी है और मुझे लगता है बस उसी में घुसे रहो. अब अपनी नाक उसके दाने पर टिकाई और होंठ योनी के खांचे में घुसा दिए. अब धीरे धीरे मैंने अपने मुंह को वहाँ पर वायब्रेट करना शुरू किया. उसके मुंह में अजय का हथियार होने की वजह से उसके चीखने की आवाज़ बस गूं गूं होकर रह गई. फिर वाइब्रेशन में तेज़ी लाते हुए रुक रुक कर घसा-घसी करने लगा. एक बार में तीन-चार सेकेंड के लिए जोर से हिनहिनाता और फिर रुक जाता. मैं अपने हिनहिनाने की स्पीड बढ़ाते ही जा रहा था. झकोलता फिर रुक जाता. ऐसे रुक रुक कर उसकी योनी का मर्दन कर था. अब मैं रुकने का समय बदलने लगा. कभी तीन-चार सेकण्ड की मोहलत देता, कभी १० सेकण्ड और कभी और ज्यादा. अभी वो समझ ही नहीं पा रही थी कि कब मैं आक्रमण करूँगा और कब रुकूँगा. इसके चलते उसकी पूरी कांशियसनेस उसकी योनी पर सिमट आई और उसके मज़े में कई गुना बढोतरी हो गई थी. रुक रुक कर होने वाले योनी मर्दन पर उसे जोर जोर के झटके लगने लगे थे. फिर अचानक ही मैंने एक बार जो हिनहिनाना शुरू किया तो बस मसलता ही चला गया. तेज़ से भी तेज़. वो पागल होने लगी. बहुत जोर जोर से गूं गूं की आवाजें निकालने लगी. अब वो अपने बस में नहीं थी और अपने पैर मेरी पीठ पर जोर जोर से पटकने लगी. मैंने उसके दोनों पैर ही दबा लिए. अब वो फिक्स हो गई और बस हलक में ही चीख पा रही थी. मेरी नाक में तीखी गंध घुस रही थी और पूरा का पूरा मुंह उसकी चिकनाई से सराबोर हो चूका था पर मैं अपने नाक और मुंह से उसकी योनी की घिसाई करता ही चला गया. और अब उसका रुकना मुश्किल था. वो थर्थार्राने लगी और फिर झटके मार मार के झड़ने लगी. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | बड़ी देर तक वो झडती रही. फिर वो धीरे धीरे ढीली पड़ गई. अब मैं हटा और फिर उसकी गीली चड्डी को नीचे खींचा. ये उसकी योनी के प्रथम दर्शन थे. उसकी चिकनी-चपाट योनी अभी भी रह रहकर रस उगल रही थी. इतनी गोरी योनी मैंने पहली बार देखी थी. अब मैं उसके मुंह की तरफ चला गया. उसने जैसे ही मेरे पप्पू को देखा वो उस पर टूट पड़ी. अब अजय ने सुझाव दिया कि आगे की कार्यवाही अंदर बेड पर चल कर करते हैं. सुगंधा ने मेरा पप्पू छोड़ा और अपने दोनों हाथ बिलकुल छोटे बच्चे की तरह मेरे सामने फैला दिए. मैंने उसे बिलकुल फूल की तरह अपनी बाँहों में उठा लिया. वो मुझ से कसकर चिपक गई. उसने अपने पैर मेरी कमर पर इस तरह डाल दिए कि उसकी योनी दरार ठीक मेरे तने पप्पू पर चिपक गई. मेरे चलने से वो उस पर ऊपर नीचे फिसल फिसल कर मज़े लेने लगी.

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