मेरे लंड की किस्मत खुल गयी

मेरे लंड की किस्मत खुल गयी

दोस्तों मै उत्तराखंड के एक छोटे से गावं का रहने वाला हूँ Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories मेरी उम्र २२ साल है और मेरी माँ की उम्र ४० साल है उसकी हाईट ४.९ होगी उनका छोटा कद है.. लेकिन उनके बूब्स ३८ से तो कम नहीं है हाँ एक विशेष चीज़ जो उसकी गांड है वो ४२ इंच की है जिसे नंगा देखकर मेरे दिल में माँ के बारे में धीरे धीरे बुरे ख्याल आने लगे। फिर एक बार मेरी नौकरी ओरिशा में लगी और मेरे वहाँ पर जाने के बाद एक दिन मेरी माँ वहाँ पर मेरा सामान सेट करने के लिए आई। फिर जब वो आई मेरे दिल में अजीब सी ख़ुशी होने लगी और मुझे लगा कि आज में सारी कहानियाँ जो पढ़ी है वो खुद आजमा कर देखूँगा और इस ख्याल से ही लंड उछाले मारने लगा। फिर में ऑटो से माँ को स्टेशन से घर पर लाने गया.. वो साड़ी पहने हुई थी और बहुत सुंदर लग रही थी और में उसे देखकर अपने पुराने ख़यालो में खो गया.. जब पहली बार मैंने उनकी गांड देखी थी अपने गावं में छत पर से वो सुबह सुबह का समय था और जब वो संडास के लिए आई थी और उसकी बड़ी, गोरी गांड मेरे सामने थी और उसने अपनी साड़ी को कमर से ऊपर उठाकर मुझे गांड दिखा दी और जब वो झुककर लोटे से गांड धो रही थी तो उतना ही देखकर मैंने वहीं पर मुठ मार लिया.. लेकिन वो सपना सच करने का सुनहरा मौका अब आ गया था। मैंने दो रूम का घर लिया था जो कि बहुत सुनसान जगह पर था.. फिर मेरी माँ नहाने बाथरूम में चली गई और फिर बाहर आकर उन्होंने दोपहर का खाना बनाया और फिर हम दोनों खाना खाकर अपने अपने कमरे में सो गये। फिर उसे रात मैंने कम से कम चार बार मुठ मारी तब जाकर मुझे नींद आई और फिर मैंने प्लान भी बना लिया भोसड़ी की चूत को चोदने का। तो सुबह होते ही में झट से उठा और मैंने एक पतला टावल अपने मुहं पर रख लिया और कंप्यूटर की तरफ़ पैर रखा जिससे कंप्यूटर के ऊपर बनने वाली इमेज से मुझे पता चल जाए कि कोई आ गया है या आ रहा है और फिर लंड को पूरा खड़ा करके सो गया और बाहर सलामी देने लगा.. लेकिन मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी कड़ी क्योंकि एक तो यह खुद ही माँ के ख्याल से ही खड़ा हो जाता है और दूसरा सुबह का टाईम भी था अपने आप भी खड़ा रहता है। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | फिर मेरा लंड माँ की शान में खड़ा होकर सलामी दे रहा था और फिर माँ मेरे पास आई और जैसे ही उसकी नज़र मेरे खड़े लंड पर पड़ी तो वो हड़बड़ा गई और जल्दी से कमरे का झाड़ू मारा और बाहर निकली.. लेकिन वो दरवाज़े के पास से मेरे खड़े लंड को देख रही थी.. जो मुझे कंप्यूटर की बंद स्क्रीन पर पता चल रहा था। तो में मन ही मन बहुत खुश था कि शायद मेरे लंड की अब किस्मत खुलने वाली है.. फिर क्या मैंने दो दिन तक बहुत लंड दिखाया और एक बार तो मुठ भी मारते हुए अपनी दोनों आंखे बंद किए चोरी चोरी देखता रहा.. जैसे कि में किसी सपने में हूँ उसने मेरा पूरा काम देखा जब तक कि मेरा माल बाहर ना निकल गया। फिर तीन दिन के बाद अचानक से मुझे सर में बहुत दर्द होने लगा.. शायद मुझे बुखार आने वाला था। माँ बोली कि में तेरे सारे बदन पर तेल लगा देती हूँ और तेल गरम करके लाने चली गई। फिर जब वो आई तब में लूँगी में था और मेरे लंड ने लूँगी का टेंट बना दिया था। फिर वो जैसे तैसे नीचे तक तेल लगाती गई और फिर पेट पर आ चुकी थी उसकी हाईट कम थी और जब उसने खड़ी होकर मेरे सर पर तेल लगाया तो मेरा सर उसकी गद्देदार बूब्स से दबने लगा और लंड झटके देने लगा.. जो माँ एक दो बार पहले ही देखते हुए तेल लगा रही थी और फिर तेल लगाने के बाद वो मुझसे बोली कि में एक सप्ताह तक लगातार तेल लगा दूँगी.. तो सब ठीक हो ज़ायगा। तो में ख़ुशी से पागल होकर उछलकर बाथरूम में गया और सारी भड़ास निकाल दी। फिर दूसरे दिन मैंने लूँगी के अंदर अंडरवियर पहना था.. तो मैंने बोला कि में लूँगी हटा देता हूँ.. यह तेल की मालिश से गंदी हो ज़ायगी और मैंने उसे हटा दिया तो मेरा लंड अंडरवियर में तना हुआ था और झांटे साईड से दिख रही थी। माँ ने उसे देखा और तेल लगाने लगी और आज वो मालिश करते करते मेरी जाँघ तक गई.. बस फिर क्या था तीसरे दिन मेरी हिम्मत बढ़ते हुए मैंने माँ से कहा कि माँ आप को बुरा तो नहीं लगता कि मेरा लंड ऐसे खड़ा रहता है में इसका क्या करूं यह रोज सुबह ऐसे ही खड़ा रहता है। तो वो बोली कि इस उम्र में अक्सर ऐसा होता है.. कोई बात नहीं। तभी में झट से बोला कि मुझे दर्द हो रहा है क्या में इसे अंडरवियर से बाहर निकाल दूँ और वैसे भी आपने बचपन से मुझे पाला है और आपने ना जाने कितनी बार देखा होगा? तो वो कुछ ना बोल पाई और मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया और मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक धक करने लगा। लंड पूरे जोश में सांप की तरह खड़ा होकर डोल रहा था। वो आज लंड के बहुत करीब तक तेल लगाने लगी.. मैंने माँ से फिर कहा कि क्या में एक बात कहूँ आप बुरा तो नहीं मनोगी? तो वो बोली कि अब क्या है? फिर में बोला प्लीज इस पर भी थोड़ा तेल लगा दो ना मुझे अंडरवियर की वजह से बहुत दर्द हो रहा है। तभी वो बहुत हैरान थी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर लंड पर रख दिए तो वो बोली कि तुझे क्या हो गया है? तो मैंने कहा कि प्लीज़ माँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है और उसने अपने हाथ से लंड को ऊपर नीचे कर दिया और फिर वो मालिश करती ही गई और में धीरे धीरे जन्नत में जाता ही गया और जब मेरा वीर्य निकलने वाला था तो उसने लंड को पकड़कर तिरछा कर दिया और पूरा वीर्य नीचे जमीन पर गिरा दिया। में तो ख़ुशी से झूम उठा। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | तभी वो बोली कि में तेरी परेशानी को समझ गई हूँ और अब में रोज तेरा जब जब यह खड़ा होगा में इसका वीर्य निकाल दूँगी। में तो ख़ुशी से झूम उठा और अगला दिन शनिवार रविवार का था और दोनों दिन छुट्टी में पूरे दिन में घर में नंगा घूमने लगा और मेरा लंड खड़ा होते ही वो तेल लगाकर मेरा वीर्य निकाल देती। अब माँ के किचन में बर्तन धोते वक़्त पीछे से गांड में लंड सटा देता हूँ और फिर एक बार जब वो लंड से माल निकाल रही थी तो मैंने उससे उसके बूब्स से दूध आने की बात पूछी। तो वो बोली कि इस उम्र में दूध थोड़े ही आता है.. वो तो जब बच्चा होता है तब आता है। तो मैंने कहा कि में देखूँगा और मैंने अपने हाथ से बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया.. लेकिन उसने ज्यादा विरोध नहीं किया और में ज़ोर ज़ोर से बूब्स को दबाने लगा और दबाते दबाते ब्लाउज में हाथ डाल दिया और वो मुठ मार रही थी और में उसके बूब्स दबा रहा था। तभी मेरे लंड से एक जोरदार पिचकारी निकली और दरवाज़े तक गई। तो वो बोली कि वाह यह तो बंदूक की तरह गोली चल रहा है। फिर में जब भी जहाँ भी रहता उसके बूब्स दबा देता और किचन में तो गांड पर लंड सटाकर बहुत बूब्स दबाता और मज़े लेता। तो वो बोलती कि चल रूम पर.. में तेरा वीर्य निकाल देती हूँ। फिर एक दिन मैंने भांग खाई और उसे गोद में उठाया और उसे किचन से रूम पर ले आया और मेरा लंड उसकी गांड को उसकी साड़ी के ऊपर से छू रहा था और उसे दीवार की तरफ़ मुहं करके खड़ा कर दिया और लंड रगड़ने लगा.. वो गर्म होने लगी में बूब्स को मसले जा रहा था और पीछे से साड़ी को उठाने लगा तो वो बोली कि क्या कर रहा है.. लेकिन उसकी आवाज़ में कोई जान नहीं थी और उसने कोई विरोध नहीं किया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | तो मैंने उसकी साड़ी को पूरी कमर तक उठा दिया और नीचे बैठकर गांड में मुहं डालकर जीभ से चाटने लगा। तो वो बोली कि रूको.. लेकिन में नहीं माना और चाटने लगा। फिर चूत में उंगली भी डाल दी.. अब वो पूरा मजा कर रही थी और वो कुछ नहीं बोल रही थी। फिर में उसे बेड पर लाया और पैर फैलाकर चूत पर लंड सटाकर एक झटका मारा और चूत में लंड डाल दिया और चुदाई चालू कर दी और उस रात हमने बहुत देर तक सेक्स किया और फिर मैंने पूरे 34 दिन तक मेरी माँ के साथ सेक्स किया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *