मेरी जिंदगी की दर्दभरी कहानी-1

मेरी जिंदगी की दर्दभरी कहानी-1

दोस्तों मै आज एक सच्चाई अपनी डायरी से निकल Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories कर लिख रहा हूँ वैसे मस्ताराम को तो सभी जानते होगे या सुने होगे मस्ताराम की किताबे आपको कही भी मिल जाती है मै भी कभी मस्ताराम की किताबे खरीद कर पढ़ा करता था पर ज़माने के साथ सब कुछ ऑनलाइन होता जा रहा है आज मै भी अपलोगो के लिए मस्ताराम ही बन गया हूँ जो की अपनी कहानी पेश कर रहा हूँ दोस्तों मैं एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ. उम्र 32 साल, कद 5.9 रंग हल्का गोरा . शक्ल-सूरत ठीक ठाक. वैसे आदमियों कि शक्ल-ओ-सूरत पर जयादा ध्यान नहीं दिया जाता ख़ास बात उसका स्टेटस होता है और दूसरा उसकी सेक्स पॉवर. भगवान् ने मुझे इन दोनों चीजों में मालामाल रखा है. मेरे लिंग का साइज़ 7 है और मोटाई 2 इंच. मेरा सुपाडा आगे से कुछ पतला है. आप सोच रहे होंगे फिर पतले सुपाडे से चुदाई का मज़ा ज्यादा नहीं आता होगा तो आप गलत सोच रहे है. यह तो भगवान् का आशीर्वाद और नियामत समझिये. गांड मरवाने वाली औरतें ऐसे सुपाडे को बहुत पसंद करती है. आदमियों को भी अपना लुंड अन्दर डालने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती. जिन आदमियों के लिंग पर तिल होता है वो बड़े चुद्दकड़ होते है फिर मेरे तो सुपाडे पर तिल है आप अंदाजा लगा सकते है मैं कितना बड़ा चुद्दकड़ और गांड का दीवाना हूँ. मेरी पत्नी प्रियदर्शिनी ३८-२८-३८, उम्र २७ साल बहुत खूबसूरत है. उसे गांड मरवाने के लिए मनाने में मुझे बहुत मिन्नत करनी पड़ती है. लेकिन दोस्तों ये फिर कभी. क्यों कि ये कहानी तो अनुष्का के बारे में है. | वैसे तो ये कहानी नहीं बल्कि मेरे अपने जीवन कि सच्ची घटना है. दरअसल मैं अपने अनुभव एक डायरी में लिखता था. ये सब उसी में से लिया गया है. हाँ मुख्य पात्रों के नाम और स्थान जरूर बदल दिए हैं. मैं अपनी उसको ( ? ) बदनाम कैसे कर सकता हूँ जो अब इस दुनिया में नहीं है जिसे मैं प्रेम करता हूँ और जन्म जन्मान्तर तक करता रहूँगा. इसे पढ़कर आपको मेरी सच्चाई का अंदाजा हो जायेगा. मेरा दावा है कि ये मेरी ये आप बीती आपको गुदगुदाएगी, हँसाएगी, रोमांच से भर देगी और अंत में आपकी आँखे भी जरूर छलछला जायेंगी.

मेरी एक इच्छा थी. किसी नाज़ुक कमसिन कली को फूल बनाने की. पिछले ११-१२ सालो में मैं लगभग १५-२० लड़कियों और औरतों को चोद चूका हूँ पर अब मैं इन मोटे मोटे नितम्बो और भारी भारी जाँघों वाली औरतों को चोदते चोदते बोर हो गया हूँ. मैंने अपने साथ पढ़ने वाली कई लड़कियों को चोदा है पर वो भी उस समय २०-२१ की तो जरूर रही होंगी. हाँ अपने कामवाली बाई गुलाबो की लड़की अनारकली जरूर १८ के आस पास रही होगी पर वो भी मुझे तब मिली जब उसकी बुर चूत में बदल चुकी थी. सच मनो तो पिछले 3-4 सालों से तो मैं किसी कमसिन लड़की को
चोदने के चक्कर में मरा ही जा रहा था.

शायद आपको मेरी ये बातें अजीब सी लगे नाजुक नासमझ कच्ची कलियों के प्रति मेरी दीवानगी. हमारे गुरूजी कहते है चुदी चुदाई लड़कियों/औरतों को चोदने में ज्यादा मुश्किल नहीं होती क्योंकि वे ज्यादा नखरे नहीं करती और चुदवाने में पूरा सहयोग करती है. इन छोटी छोटी नाज़ुक सी लड़कियों को पटाना और चुदाई के लिए तैयार करना सचमुच हिमालय पर्वत पर चढ़ने से भी ज्यादा खतरनाक और मुश्किल काम है.
कहते है भगवान् के घर देर है पर अंधेर नहीं है. मेरा साला किसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर है. वो अपने काम के चक्कर में हर जगह घूमता रहता है. इस बार वो यहाँ टूर पर आने वाला था. अंजली ने उसे अपनी भाभी और अनुष्का को भी साथ लाने को मना लिया. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
सुबह सुबह जब में उन्हें लेने स्टेशन पर गया तो अनुष्का को देख कर मेरा दिल इतना जोर से धड़कने लगा जैसे रेल का इंजन. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते बाहर आ जायेगा. मैंने अपने आप पर बड़ी मुश्किल से काबू किया. सामने एक परी जैसी बिल्ली जैसी आँखों वाली नाज़ुक सी लड़की कन्धों पर बेबी डोल लटकाए मेरे सामने खड़ी थी – नीले रंग का टॉप और काले रंग की जीन पहने, सिर पर सफ़ेद कैप, स्पोर्ट्स शूज, कानों में छोटी छोटी सोने की बालियाँ, आँखों पर रंगीन चश्मा ? ऊउफ्फ्फ़ … मुझे कत्ल करने का पूरा इरादा लिए हुए.
दोनों जाँघों के बीच जीन पैंट के अन्दर फसी हुई उसकी उभरी हुई बुर किसी फ़रिश्ते का भी ईमान खराब करदे. मुझे लगा कि मेरा पप्पू अपनी निद्रा से जाग कर अंगडाई लेने लगा है. मैं भी कितना उल्लू का पट्ठा हूँ अनुष्का को पहचान ही नहीं पाया. मेरी शादी के समय तो ये बहुत छोटी थी. पिछली बार अपनी ससुराल के किसी फंक्शन में जब मैंने उसे देखा था. मैं भी कितना गधा था इतनी ख़ूबसूरत बला की ओर मेरा ध्यान पहले नहीं गया. मैं तो उसे एक अंगूठा चूसने वाली, इक्कड़ -दुक्कड़, छुपम-छुपाई खेलने वाली साधारण सी लड़की ही समझ रहा था.

गतांग से आगे ….

कितनी जल्दी ये लड़की जवानी की और बढ़ रही है अगर यही रफ़्तार रही तो 2-3 सालों में ये पूरी बोम्ब बन जायेगी. मैं उसे ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया. उसका बदन कितना निखर सा गया था. मैं अभी सोच ही रहा था की उसकी पिक्की की साइज़ कितनी बड़ी हो गयी होगी और उसकी केशर क्यारी बननी शुरू हुयी या नहीं मेरा मतलब है की वो अभी पिक्की ही है या बुर बन गयी है. पता नहीं उसने अभी तक अपनी पिक्की या बुर से मूतने का ही काम लिया है या कुछ और भी, अचानक मेरे साले की आवाज मेरे कानो में पड़ी.
अरे प्रेम कहाँ खो गए भई ?
मैं अपने ख़्वाबों से जैसे जागा. आइये आइये भाई साहब रास्ते में कोई परेशानी तो नहीं हुई मैंने उनका अभिवादन करते हुए पूछा. उन्होंने क्या जवाब दिया मुझे कहाँ ध्यान था मेरी आँखें तो बस अनुष्का पर से हटाने का नाम ही नहीं ले रही थी. ऐसे खूबसूरत मौके का फायदा कौन कम्बख्त नहीं उठाएगा. आप समझ ही गए होंगे मैंने आगे बढ़ते हुए अनुष्का को अपनी बाहों में भरते हुए कहा अरे अनुष्का तू तो बहुत बड़ी हो गयी है.
अपने सीने से लगाए मैंने उसकी गालों और सिर के बालों पर हाथ फिराया. उसके छोटे छोटे अमरुद मेरे सीने से दब रहे थे. उसके नाज़ुक कमसिन बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे नथुनों में समां गयी. मुझे लगा की मेरे ख़्वाबों की मंजिल मेरे सामने खड़ी है. मेरा दिल तो कर रहा था कि उसका प्यार से एक चुम्बन ले लूँ पर स्टेशन पर उसके माता-पिता के सामने ऐसा करना कहाँ संभव था. न चाहते हुए भी मुझे उस से अलग होना पड़ा लेकिन अलग होते होते मैंने उसके गालों पर एक प्यारी सी थप्पी तो लगा ही दी. फिर मैंने उसका हाथ पकडा और हम सभी स्टेशन से बाहर अपनी कार की ओर आ गए. घर पहुँचने पर अंजली ने अपने भैय्या, भाभी और अनुष्का का गरमजोशी से स्वागत किया और फिर अनुष्का की और बढ़ते हुए कहा अरे मोना तू ? अंजली अनुष्का को मोना ही बुलाती है वो उसे अपनी बाहों में लेते हुए बोली नमस्ते बुआजी शायद कहीं सितार बजी हो, जलतरंग छिडी हो या किसी अमराई में कोयल कूकी हो इतनी मीठी और सुरीली आवाज अनुष्का के सिवा किसकी हो सकती थी.
अरे ये तो मुझसे भी एक इंच बड़ी हो गयी है. अंजली ने कहा.
हाँ लम्बी तो बहुत हो गयी है पर पढाई लिखाई में अभी भी मन नहीं लगाती सुषमा ने बुरा सा मुंह बनाते हुए हुए कहा.
अरे तुम क्यों चिंता करती हो अंजली बोली आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
उसके बूब्स नितम्ब तो कहर बरपाने वाले बन चुके हैं.
फूफाजी बाथरूम किधर है ? अनुष्का ने पूछा
आ…न.. हाँ आओ इधर है मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम से लगे बाथरूम की ओर ले गया.
मैं साथ आऊँ क्या ? मैंने मुस्कुराते हुए पूछा
नहीं .. क्यों ?
क्या पेंटी नीचे नहीं करवानी ?
ओह.. हटो आप भी…. वो शर्माते हुए बाथरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद कर लिया. और मैं बाहर खडा उसके सु सु की आवाज का इन्तजार करने लगा ….
बाहर खडा मैं अपने सपनो में खोया हुआ था. आज से कोई 4-5 साल पहले जब मैं अपनी ससुराल किसी फंक्शन में गया था तब की एक घटना मेरी आँखों में फिर से घूम गयी.
शायद उस दिन गणगोर उत्सव था. सभी ने मेहंदी लगा राखी थी. मैं संयोगवश बाथरूम से बाहर निकल कर आ रहा था कि अनुष्का दोड़ती हुई मेरी तरफ आई और बोली फूफाजी मेरी मेहंदी कैसी लग रही है ? उसने अपने दोनों मेहंदी लगे हाथ मेरे सामने फैला दिए. बहुत खूबसूरत बिलकुल तुम्हारी नाक कि तरह मैंने उसकी नाक पकड़ते हुए कहा.
अईई… अनुष्का थोडा सा चिहुंकी क्या हुआ ? मैंने पुछा
जोरों से सु सु आ रहा है अनुष्का ने आँखे बंद करते हुए कहा
तो बाथरूम चली जाओ न ?
पर मेरे दोनों हाथों में तो मेहंदी लगी है. मैं अपनी कच्छी कैसे खोलूंगी अनुष्का ने अपनी परेशानी बताई.
चलो मैं खोल देता हूँ | आप ?
हाँ मैं अ….आप मेरी शेम शेम तो नहीं करोगे न ?
अरे नहीं बाबा अच्छा तो फिर ठीक है मैं तो ख़ुशी से झूम ही उठा. मैंने इधर उधर देखा आस पास कोई नहीं था. मेरा दिल धड़क रहा था. किसी ने देख लिया तो क्या समझेगा. कहीं अनुष्का ने अगर बाद में किसी को बता दिया तो ? पर फिर मैंने सोचा अगर कोई देख भी लेगा या अनुष्का ने कुछ बता भी दिया तो क्या हुआ मैं उसके एक बाजु को पकड़ कर बाथरूम के अन्दर ले गया. लाईट ओन करके मैंने बाथरूम का दरवाजा जानबूझकर आधा ही बंद किया.
ओफोः फूफाजी दरवाजा छोडो जल्दी करो मेरा सु सु निकल जायेगा | ओह हाँ मेरे मुंह से केवल इतना ही निकला.
आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते हैं. मैं अपने पंजो के बल बैठ गया और धड़कते दिल से उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया और उसकी गुलाबी काछी के इलास्टिक को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे से नीचे सरकाया ….
आईला….. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | मेरे जीवन का ये सबसे खूबसूरत नजारा था. उसकी नाभि के नीचे का भाग (पेडू) थोडा सा उभरा हुआ और उसके नीचे डबल रोटी के तिकोने टुकड़े कि तरह एक छोटी सी गुलाबी रंग कि पिक्की रोम विहीन. चुकंदर सी रक्तिम पिक्की के बीच का चीरा 2.5 इंच से ज्यादा बड़ा नहीं था. पिक्की के ठीक बीच में दो पतली सी भूरे रंग की खड़ी लाइन आपस में चिपकी हुई. मदन-मणि अभी बनी ही नहीं होगी या बहुत छोटी होगी. पतली पतली जांघें और दाहिनी जांघ पर एक काला तिल. हे भगवान् मैं तो बस मंत्रमुग्ध सा देखता ही रह गया. केवल कुछ पलों की इस झलक में तो बस इतना ही देखा जा सकता ता पर ये हसीं नजारा तो मेरे जीवन का सबसे कीमती और अनमोल नजारा था | अनुष्का एक झटके के साथ नीचे बैठ गयी. उसकी नाजुक गुलाबी फांके थोडी सी चोदी हुई और उसमे से कलकल करती हुई सु सु की एक पतली सी धार….. फिच्च्च्च…… सीईई… पिस्स्स्स.. करती लगभग डेढ़ या दो फ़ुट तो जरूर लम्बी होगी. कम से कम दो मिनिट तक वो सु सु करती रही. पिस्स्स्स….. का प्रियदर्शिनी संगीत मेरे कानो में गूंजता रहा. शायद पिक्की या बुर को पुस्सी इसी लिए कहा जाता है कि उसमे से पिस्स्स्स… का प्रियदर्शिनी संगीत बजता है. छुर्रर…. या फल्ल्ल्ल्ल…. की आवाज तो चूत या फिर फुद्दी से ही निकलती है. अब तक अनुष्का ने कम से कम एक लीटर सु सु तो जरूर कर लिया होगा. पता नहीं कितनी देर से वो उसे रोके हुए थी. धीरे धीरे उसके धार पतली होती गयी और अंत में उसने एक जोर की धार मारी जो थोडी सी ऊपर उठी और फिर नीचे होती हुई बंद हो गई. ऐसे लगा जैसे उसने मुझे सलामी दी हो. दो चार बूंदें तो अभी भी उसकी पिक्की के गुलाबी होंठों पर लगी रह गयी थी.

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे ..

गतांग से आगे ….

मेरा पप्पू तो अकड़ कर तूफ़ान मचाने लगा. मैंने इतना ज्यादा तनाव आज से पहले कभी नहीं महसूस किया था. मुझे लगा कि अगर मैंने जल्दी ही कुछ नहीं किया तो मेरा पप्पू पेंट फाड़ कर बाहर आ जायेगा या मैं पेंट में ही झड़ जाऊँगा.

अनुष्का अब उठ कर थोडा आगे आ गयी. मैंने उसकी पेंटी को फिर से पकडा और धीरे धीरे ऊपर सरकाने लगा. वो जरा सा मचली. मैंने देखा उसकी पेंटी का आगे का भाग पिक्की के छेद वाली जगह पर थोडा सा गीला हो गया है. मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी पिक्की पर एक चुम्बन ले लिया. वाह क्या सुगंध थी बिलकुल कच्चे नारियल और पेशाब की मिलीजुली खुशबू मैं आज तक याद करके रोमांचित हो उठता हूँ.
फूफाजी क्या करते हो ? अनुष्का कमर को थोडा सा पीछे करती हुई बोली
क्यों क्या हुआ ?
छी… छी… कोई इतनी गन्दी जगह की भी पप्पी लेता है ?
अरे… मेरी बिल्लो गन्दी कहाँ है. ये तो बहुत सुन्दर और प्यारी है.
उसने मेरे और आश्चर्य से देखा तो मैंने कहा अच्छा तो कौन सी जगह पप्पी लेते है ?
‘पप्पी तो गालों पर ली जाती है वो मासूमियत से बोली
अच्छा तो लाओ फिर गालों पर भी ले लेते है
मैं आगे बढा और उसके नरम मुलायम गुलाबी होंटों पर अपने होंठ रख दिए. नीचे पिक्की की फांके और उसके गुलाबी होंठ लगभग एक जैसे ही तो थे. मैंने धीरे धीरे उसके होंठो को चूमा और फिर अपनी जीभ उन पर फिराने लगा जैसे सावन का प्यासा बारिश की हर बूँद को पी जाना चाहता है, मैं उसके होंठों को चूसने लगा. वह पूरा साथ दे रही थी उसके लिए तो मानो ये एक खेल ही था. मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डालने की कोशिश की तो वो हँसाने लगी. मेरा दिल धड़क रहा था. हमारा यह चुम्बन कोई तीन चार मिनट तो जरूर चला होगा. फिर हम अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए अलग हो गए. अनुष्का भाग गयी. अब मेरे पास मुठ मारने के अलावा और क्या रास्ता बचा था. मैंने बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया……… और ????
दोस्तों अनुष्का और मेरा यह पहला चुम्बन था. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

बाथरूम के बाहर खडा मैं आज घटी उस घटना के बारे में सोच ही रहा था कि अनुष्का की आवाज मेरे कानो के बिलकुल पास में गूंजी.
फूफाजी कहाँ खोये हुए हो ? अनुष्का शरारत भरी मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी.
मैंने उसके हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा क्यों आज पप्पी नहीं देनी ?
वो शर्म से लाल हो गयी और मैं रोमांच से लबालब भर गया. मैं उसके गालों पर एक चिकोटी काटी और उसे अपनी और खीचने लगा. वो कुनमुनाती हुई सी बोली हटो
मैंने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठते हुए कहा. उसकी आंके बंद थी. मैंने धीरे से एक चुम्बन उसके गालों पर ले ही लिया.
मेरी आँखें उसकी छोटी छोटी गोलाईयों पर थी जो अब अमरुद बन रहे थे. आगे से तीखे नुकीले जैसे पेंसिल की टिप. जीन पेंट में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लग रहे थे मानो दो छोटे छोटे खरबूजे हो उनके बीच की गहरी दरार साफ़ नजर आ रही थी. अनुष्का के होंठ तो इतने गुलाबी और रशीले हैं जैसे कि कोई संतरे की फांकें हों.

किसी जवान लड़की या औरत की बुर या चूत का अंदाजा उसके होंठो को देख कर लगाया जा सकता है. इस हिसाब से तो उसके निचले होंठ भी अब क़यामत बन गए होंगे. क्या मैं कभी उनको देख पाऊंगा और… और… खैर ये तो अन्दर की नहीं बाद की बात है. अनुष्का हाल में चली गयी और मैं बाथरूम में उसकी वोही पुरानी खुशबू लेने अन्दर चला गया. मेरे नथुनों में उसके जवान होते जिस्म की खुशबू भर गयी. मैं कोई 4-5 मिनिट तक आँखें बंद किये पुरानी यादों और नए चुम्बन के ख्यालों में खोया रहा. मैं सोच रहा था इस लड़की को कैसे पटाया जाए. मुझे कुछ कुछ अंदाजा तो हो ही गया था की वो हमारे पहले चुम्बन को नहीं भूली है. मैं भी कितना गाउदी हूँ इतने दिनों तक मुझे ये ख़याल ही नहीं आया की राधा डार्लिंग अब इतनी बड़ी और रस भरी हो गयी है. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | इतनी छोटी उम्र में ही वो इतनी गदरा जायेगी मुझे अंदाजा नहीं था. मैं शर्त लगा सकता हूँ की अगर वो अपने होंठो पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा ले तो ऐसा लगेगा जैसे वो किसी का खून पीकर आई हो. उसके सुन्दर अमृत कलश हालांकि अभी छोटे ही है पर बिजलियाँ गिराने के लिए काफी है. अब ये नीबू की जगह अमरूदों की साइज़ के तो हो ही गए है. उसकी बिल्लोरी आँखें तो ऐसी है जैसे नशे में पुरखुमार मस्त हिरनी हो. आप अंदाजा लगा सकते है उसकी पिक्की बुर बनने के लिए तड़प रही होगी. अब तो उसने रस बनाना भी शुरू कर दिया होगा. जिस तरह से मेरे चुम्बन लेने के बाद वो शरमाई थी मुझे पूरा यकीन है की उसका किसी हम उम्र सहेली या मैडम के साथ जरूर कोई चक्कर होगा. और अगर ऐसा है तो मेरे लिए तो ये और भी ख़ुशी की बात होगी कि मेरा प्यार वो जल्दी ही स्वीकार कर लेगी. दोस्तों कहानी जारी रहेगी अगले भाग में पढ़े अधूरी कहानी और भी ज्यादा रोमास दर्द और प्यास .. और कहानी पढ़ के कमेंट करना ना भूले |

धन्यवाद |

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