मेरी चूत में सरिया जैसा लौड़ा

मेरी चूत में सरिया जैसा लौड़ा

मेरे जीवन में भी ऐसी ही एक Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories सुखद और यादगार घटना हुई थी, जिसकी यादें आज भी ताज़ा हैं और उनकी याद आते ही मैं रोमांचित हो जाती हूँ। मेरा नाम संगीता है, मैं तेईस वर्ष की हूँ और जालंधर में रहती हूँ। लगभग 4 वर्ष पहले मेरी शादी हुई थी। शादी से पहले भी मैं बहुत ही सुन्दर दिखती थी, लेकिन शादी के बाद मेरा रंग रूप और भी ज्यादा निखर आया है, अब तो मैं एक अप्सरा से कम नहीं लगती हूँ |
मेरे पैमाने हैं ३६-२८-३६, कद पांच फुट छह इंच, रंग बहुत गोरा, छाती उठी हुई और उस पर दो कसी हुई चूचियाँ, जिनके ऊपर मोटे काले अंगूरों जैसी घुन्डियाँ, बल खाती हुई कमर पतली, चौड़े नितम्ब, सुडौल जांघें और लंबी तथा पतली टाँगें ! नाभि के नीचे और टांगों के बीच में काले रंग के बालों के बीच में विराजमान मेरी संकरी सी गोरी चूत !
तीन वर्ष की शादी के बाद भी कोई बच्चा ना होने की वजह से अभी तक इस चूत में कोई बदलाव नहीं आया, अभी भी वह तीन वर्ष पहले जैसी कुंवारी और संकरी दीखती है ! आज भी जब मैं चुदती हूँ तो वही पहली रात जैसा ही आनन्द आता है | दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | यह घटना लगभग एक वर्ष पहले की है जब मेरी २० साल छोटी बहन उन्निता की शादी, पंजाब में रहने वाले परिवार के तेईस वर्षीय कमल से हुई थी। कमल आगरा में एक कंपनी में इंजिनियर है और उन्निता के साथ आगरा में ही रहतें हैं। मेरी छोटी बहन भी मेरे तरह बहुत सुंदर है और उसका शरीर भी बहुत मादक है | हम दोनों बिल्कुल जुड़वाँ लगती हैं। कमल का कद छह फुट है, चौड़ी छाती है और वह स्वस्थ तथा बलिष्ठ पुरुष है ! नियमित योग और व्यायाम के कारण उसका सिक्स-पैक शरीर अत्यंत ही आकर्षक है !
शादी के तुरंत बाद कमल और उन्निता जब मेरे घर जालंधर में दो दिन के लिए रहने आये थे, तब मैंने उन्हें अपने साथ वाले बेडरूम में ही ठहराया था। दोनों बेडरूम के बीच में एक दरवाज़ा था, जिस में से एक दूसरे कमरे में हो रही आवाजें सुनाई देती थी और उस दरवाज़े के की-होल में से उस कमरे के अंदर का नज़ारा भी दिखाई देता था !
रात को जब मेरे पति सो गए, तब मैं उठ कर उस दरवाज़े के पास खड़े होकर दूसरे कमरे की आवाजें सुनने लगी। अंदर कमल उन्निता को चुदाई के लिए मना रहा था और वह कुछ नखरे दिखा रही थी !
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने की-होल में से देखा तो पाया कि कमरे की लाईट जल रही थी तथा कमल अर्धनग्न खड़ा था और उन्निता के कपड़े उतार रहा था। जब उसने उन्निता को पूरा नग्न कर दिया तब वह सीधा खड़ा हो कर उन्निता से उसका जांघिया उतारने को कहा।
उन्निता उठ कर बेड पर बैठ गई और उसका जांघिया नीचे करके उसमें से कैद लौड़े को आज़ाद कर दिया।
मैं तो उस लौड़े को देख कर दंग रह गई, कमल का लौड़ा आठ इंच लंबा और दो इंच मोटा था तथा उसका सुपारा तो ढाई इंच मोटा था ! लौड़ा एकदम तना हुआ था, उसके ऊपर की नसें फूली हुई थीं और उसका सुपारा बाहर निकला हुआ था। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उन्निता पहले उस लौड़े को बड़े प्यार से अपने हाथों से मसलती रही, फिर उसने उसको अपने मुँह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया। उधर कमल उन्निता की चूचियाँ दबा रहा था और उसकी घुंडियों को मसल रहा था।
कुछ देर के बाद कमल ने उन्निता को उठा कर बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में मुँह डाल कर उसकी चूत को चूसने तथा चाटने लगा। लगभग पांच मिनट के बाद उन्निता चिल्लाने लगी और कमल को चुदाई के लिए कहने लगी। कमल उन्निता की दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और उसने अपना लौड़ा उसकी चूत के मुँह पर रख कर एक धक्का दिया तथा आधा लौड़ा उन्निता की चूत के अंदर कर दिया। फिर उसने दूसरा धक्का लगाया और पूरा लौड़ा चूत में धकेल दिया | दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
उन्निता ने हल्की सी चीख मारी और कमल से लिपट गई ! इसके बाद अगले दस मिनट तक कमल उछल उछल अपना लौड़ा उन्निता की चूत के अंदर बाहर करता रहा और उन्निता भी उछल उछल कर कमल का साथ देती रही। दस मिनट के बाद अचानक कमल ने तेज़ी से चुदाई करने लगा और फिर दोनों ही चीखने चिल्लाने लगे तथा एकदम से अकड़ कर एक दूसरे पर ढेर हो गए। फिर दोनों अलग हुए, लाईट बंद कर दी और सो गए।
मैं भी अपने बिस्तर पर आकर लेट गई और अभी अभी देखे नज़ारे के बारे में सोचने लगी !
मेरी चूत में खुजली शुरू गई थी, मैं भी चुदना चाहती थी, इसलिए मैं अपने पति से चिपट गई और उनके लौड़े को पकड़ कर मसलने लगी। मेरे पति का लौड़ा कमल के लौड़े के सामने कुछ भी नहीं था, मेरे पति का लौड़ा सिर्फ छह इंच लंबा और सवा इंच मोटा था और सुपारा तो डेढ़ इंच मोटा ही था तथा टोपी के अंदर ही रहता था !
मुझे उन्निता से ईर्ष्या हो रही थी, मैं भी कमल का लौड़ा अपनी चूत में डलवाना चाहती थी लेकिन उस समय के हालात और चूत की खुजली से मजबूर मैं अपने पति के लौड़े को ही जगाने लगी थी। मेरे मसलने पर लौड़ा तन गया और मेरे पति भी जाग गए | दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | मेरी चुदाई की इच्छा को समझते हुए उन्होंने अपने और मेरे कपड़े उतार दिए तथा अपने लौड़े को मेरे मुँह में देकर मेरी चूत को चूसने लगे। मैं तो पहले से ही गर्म थी इसलिए दो मिनट में ही मैंने पानी छोड़ दिया !
मेरी यह हालत देख मेरे पति ने मुझे सीधा लिटाया और अपने लौड़े को एक ही झटके में मेरी चूत में धकेल दिया और मेरी चुदाई शुरू कर दी। अगले दस मिनट में मैंने दो बार पानी छोड़ा और फिर जाकर मेरे पति ने अपने पिचकारी छोड़ी और मेरी आग शांत की।

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