मेरी अप्सरा जैसी नौकरानी चुद गयी 2

मेरी अप्सरा जैसी नौकरानी चुद गयी 2

मैंने उसे सीधा लेटा दिया और उसकी चूत में लण्ड घुसा दिया Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories अब मैं जैनब के ऊपर चढ़ा हुआ था। आज सच में लण्ड में एक अजीब सी ताकत दिख रही थी। चूची दबाते हुए मैंने उसकी चूत चोदना शुरू कर दी। 2-3 मिनट चोदने के बाद जैनब ने मुझे हटा दिया और बोली- राजा, अब 5 मिनट आराम करो, फिर नई ताकत से चोदना !
उसने मुझे सीधा लेटा दिया और धीरे धीरे मेरी छाती की घुन्डियाँ काटने लगी और बीच बीच में मेरा लण्ड सहला देती।
मुझसे बात करते हुए बोली- आपकी बीवी आपको ठीक से चूत मारने नहीं देती अगर औरत की चूत रोज चोदोगे तो तीन महीने बाद एक घंटे तक चूत बीच बीच मैं 4-5 बार 2-3 मिनट का आराम लेते हुए चोद सकते हो। आपने मैडम की कभी गाण्ड मारी है या नहीं?
मैं मुस्कुराते हुए बोला- तू मजाक बहुत करती है ! मैंने आज तक पीछे से चूत नहीं चोदी, तू गाण्ड की बात करती है। तीन महीने में एक बार चोदता हूँ वो भी लाइट बंद करने के बाद और 5 मिनट से कम में ही खेल ख़त्म हो जाता है।
जैनब बोली- आपको चूत चोदने में तो माहिर करूँगी ही, साथ में गाण्ड का भी मज़ा दिलाऊँगी। आप जितना गोरा और लम्बा लण्ड कम ही लोगों का होता है !
उसने मेरा लण्ड एक बार और सहला दिया जो अब सीधा छत को छूने की कोशिश कर रहा था।
जैनब उठी, उसने मेरे लण्ड के सुपाड़े पर अपनी चूत छुलाई और टाँगें चौड़ी करके पूरा लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया। अब जैनब मेरे लण्ड पर बैठी थी। उसने मेरे हाथ उठाकर अपनी चूचियों पर रख दिए और बोली- लो राजा, इन्हें दबाओ जितनी जोर से दबाओगे उतना ही उछल उछल कर चुदूँगी।
मैं कभी धीरे, कभी तेज उसकी संतरे जैसे चूचियाँ दबाने लगा। वाकई वो भी कभी धीरे कभी तेज मेरे लण्ड पर उछल कर मुझे मजा दे रही थी, ओह आह से कमरा गूंजने लगा। दो मिनट के बाद शांत होकर जैनब मेरे लण्ड पर बैठ गई और बोली- राजा थक गई ! अब तुम जरा अपने चूतड़ हिला हिला कर मेरी भोंसड़ी को चोद दो।
मैं लेटे लेटे ही अपने लण्ड को उसकी चूत में गाण्ड उठा के पेलने लगा। जैनब चिल्ला रही थी- वाह कुत्ते ! क्या चोद रहा है, मज़ा आ गया ! फाड़ इसे फाड़ हरामजादे ! बहुत मजा आ रहा है ! चोद दे, बना दे इसकी महा भोंसड़ी !
जैनब चुदने में पूरा साथ दे रही थी। थोड़ी देर में मेरे लण्ड की पिचकारी छूट गई और वो मुझ पर झुक कर चिपक गई मेरा लण्ड उसकी चूत में ख़ाली हो गया था। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
अब हम दोनों चिपके हुए थे।
जैनब आठ बजे तक काम करके चली जाती थी, आज नौ बज रहे थे। तभी फ़ोन की घंटी बजी !
जैनब आठ बजे तक काम करके चली जाती थी, आज नौ बज रहे थे। तभी फ़ोन की घंटी बजी, उधर से एक सुरीली सी आवाज़ आई- भाई साहब, मैं जैस्मिन बोल रही हूँ आपकी पुरानी पड़ोसन !
मैंने अपना नंगा लण्ड सहलाते हुए कहा- जैस्मिन जी, आप कैसी हैं? कहाँ से बोल रही हैं?
जैस्मिन हँसते हुए बोली- अब हम नालंदा अपार्टमेन्ट में रहते हैं आपके यहाँ से थोड़ी दूर ही हैं, भाभीजी नहीं हैं क्या?
मैंने कहा- नहीं वो तो नहीं है !
जैस्मिन बोली- मैं भी अकेली हूँ ! अच्छा, जैनब आपके यहाँ हो तो भाईसाहब बात करा दीजिए न ! कुछ बड़ा काम तो नहीं कर रही है क्या ?
मैं झेंपता हुआ बोला- अभो कराता हूँ !
जैनब पीछे आकर मुझसे चिपक गई थी, मैंने जैनब को फ़ोन दे दिया। जैनब की आवाज़ मुझे सुनाई दी, जैनब बोल रही थी- अच्छा मेमसाहब तो आज नहीं आना है? ठीक है, शाम को दे दूँगी !
फ़ोन रखने के बाद जैनब मुस्कुरा रही थी। मैं बोला- यह जैस्मिन जी वही हैं न जो हमारे सामने रहती थीं और आशा की दोस्त भी थी?
जैनब आँखे मटका कर बोली- हाँ जी, यह वही हैं, जब यह अपनी बालकनी में कुछ उठाने आती थीं तो आप छुपकर देखा करते थे और जब कभी आपके घर आती थीं तो आप इनकी चूचियाँ घूर घूर कर देखते थे। आजकल सामने वाली बिल्डिंग में रहती हैं। शाम को इनकी झांटे साफ़ करने वाली क्रीम वापस करनी है।
मेरा लण्ड झुका हुआ था, जैनब ने उसे हिलाया और बोली- आपकी वो किताब कहाँ है जिसमें सुन्दर सुन्दर नंगी लड़कियों की चुदती हुई फोटो लगा रखी हैं?
मैं चौंकते हुए बोला- तुझे कैसे पता? यह बात तो मेरी बीवी को भी नहीं पता !
साहबजी, आपकी बीवी को तो यह भी नहीं पता कि आप मेरी चूत का रस चख रहे हैं, आप एक दिन बस स्टैंड के पास फ़ुटपाथ की जिस दुकान से नंगी फोटो खरीद रहे थे वो मेरे पड़ोसी की दुकान है, उसी ने बताया था कि आपको नंगी जवान लड़कियों की सेक्सी फोटो खरीदने का शौक है, अब नखरे न करो, मुझे दिखा दो, नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगी।
मैंने कहा- ठीक है, मैं दिखाता हूँ। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
“यह हुई न बात !” जैनब बोली और उसने मेरे ठन्डे पड़े लण्ड को मुँह में लेकर दो तीन बार चूस लिया, बोली- आप किताब लाओ तब तक मैं आपके लिए गरम दूध बनाकर लाती हूँ।
मैं अपनी दो सौ पन्नों की फाइल ले आया जिसमें नंगी लड़कियों की हसीन फोटो थीं। उन्हें मैं एक बार देखने लगा जिससे मेरे लण्ड में थोड़ा सा उफान आ गया। जैनब दो ग्लास दूध ले आई थी। मेरी तरफ ग्लास बढ़ाकर बोली- लो साहब दूध पियो !
मैं बोला- मैं ठंडा दूध पीता हूँ !
उसने मेरा दूध मेज पर रख दिया और अपना ग्लास खाली कर दिया, मेरा लौड़ा सहलाते हुए बोली- राजा, अभी तो एक पारी और हो जाएगी, यह मियां तो फुदकी मार रहें हैं।
मैं बोला- तू ग्लास दे।
उसने ग्लास मेरी ओर बढ़ा दिया। ग्लास में बहुत मलाई थी, मैं उसे निकालने लगा तो जैनब बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैं बोला- रानी, मैं मलाई नहीं खाता !
जैनब बोली- लाओ, मलाई मुझे दो ! आप कोई अच्छा काम करते भी हो?
मैंने मलाई उसके हाथ में दे दी उसने मलाई लेकर मेरे लण्ड पर गिरा दी।
मैं बोला- अरे, यह क्या कर रही हो जैनब?वह मेरे गाल पर चुटकी काटते हुए बोली- आप अब दूध पियो और मुझे मलाई खाने दो !
उसने दूध की मलाई से मेरे लण्ड की मालिश की और लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और उसे चूसने लगी। थोड़ी देर में लण्ड पूरा तन गया, मैं मस्त हो गया।
पूरा लण्ड तनते ही मेरा मन दुबारा चोदने को करने लगा।
जैनब बोली- राजा, पहले जाकर दूध के ग्लास रख कर आओ फिर तुम्हें चुदाई का दूसरा पाठ पढ़ाती हूँ।

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गतांग से आगे ….

मैं ग्लास रखने गया, तभी मेरे ऑफिस से फ़ोन आ गया। मैंने फ़ोन पर बता दिया- आज नहीं आऊँगा।
जब मैं कमरे में घुसा तो जैनब उलटी घुटनों के बल लेटकर नंगी लड़कियों की फोटो देख रही थी, मैं उसकी गाण्ड से चिपक कर चूची दबाने लगा तो जैनब बोली- लड़कियां तो बहुत सुन्दर हैं ! दो-दो लण्डों से भी चुदवा रही हैं।
मैं बोला- जैनब जान, मेरा लण्ड तुम्हारी चूत के लिए पागल हो रहा है, जरा सीधी हो जा, एक बार चूत की सैर और करा दे ! दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
जैनब बोली- चोद दो ! पीछे से चोद दो ! लो मैं चूत ढीली छोड़ती हूँ ! तुम घुसाओ !
जैनब थोड़ी उचक गई और उसने टाँगे फ़ैला दीं, बोली- चूत दिख रही है?
मैंने कहा- दिख तो रही है !
“तो घुसाओ ना ! चूतिया क्यों बने हुए हो?”
मैं लण्ड उसकी चूत में लगाने लगा लेकिन लण्ड घुस ही नहीं रहा था। जैनब बनावटी गुस्से से बोली- मादरचोद, भगवान अगले जन्म में लण्ड बिना पैदा करेगा। आठ इंच का रख कर भी चूत में नहीं घुसा पा रहा गाण्डू ? कमर पकड़ !
मैंने जैनब की कमर पकड़ ली, जैनब ने हाथ से लण्ड अपनी चूत के मुँह पर लगा लिया और बोली- अब तेजी से धक्का मार !
मैंने बिना देर किये उसकी कमर पकड़ कर उठाया और एक तेज झटके में लण्ड को चूत में मारा, सफलता मिली और लण्ड चूत में था। वाकई एक अनोखा मज़ा था ! उसकी चूचियां मैंने पकड़ ली।
जैनब बोली- ज्यादा शरीफ मत बनो, गालियाँ बकते हुए चोदो, वर्ना मेरे आलावा किसी की चोद भी नहीं पाओगे।
मैंने जैनब को गुरु मान लिया था, लण्ड को पेलते हुए मैंने गालियाँ बकनी शुरू कर दीं। थोड़ी देर में हम दोनों पूरे मज़े ले रहे थे, जैनब चिल्ला रही थी- ऊह आह ! मज़ा आ गया ! क्या मारी है बहन चोद ! तू तो आज से चूत का राजा बन गया है ! मार साली की भोंसड़ी बना ! सच अब तुझसे चुदने का मज़ा आ रहा है ! कुत्ते मार इस हरामिन चूत को ! साली बहुत तंग करती है। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
मैं भी कुतिया, रंडी, साली, रंडी की औलाद, तेरी भोंसरी की मारूँ, लोंडी बकता हुआ जैनब को चोदने में लगा हुआ था। 5 मिनट की चुदाई के बाद मैं निढाल होकर लेट गया, जैनब भी मुझसे चिपक गई। चिपके चिपके हम एक दूसरे की चूची, चूत चुचकों और लण्ड से खेल रहे थे।
करीब एक घंटे बाद उठे तो मैं चौंकते हुए बोला- अरे बारह बज गए? कोई क्या सोचेगा?
जैनब मेरे गालों की पप्पी लेते हुए बोली- कोई कुछ नहीं सोचेगा ! सुबह वाले गार्ड की ड्यूटी नौ बजे बदल जाती है और किसी के पास इस मुंबई में इतना समय नहीं है कि हमारे बारे में सोचेगा।
मैं जैनब को चिपकाते हुए बोला- रानी, तुमने मस्त कर दिया ! अब यह बताओ कि क्या सरप्राइज़ दे रही हो?
जैनब बोली- इतनी मारी है मेरी ! कुछ इनाम तो दो !
मैंने बिना देखे हुए कल शाम को एक ठेकेदार जो लिफाफा दे गया था, वो पूरा उसे दे दिया।
उसने खोल कर देखा तो उसमें दस हजार थे, वो बोली- राजा, आपने मुझे खुश कर दिया ! सच राजा, मज़ा आ गया !
और उसने मेरे गालों पर 5-6 पप्पी दे डाली।
मैं बोला- सरप्राइज़ तो बता दो?
वो मेरे कान के पास मुँह लाकर बोली- दो दिन बाद मैं आपके लण्ड राजा को जैस्मिन जी की चूत में घुमा कर लाऊँगी।
“सच रानी? मुझे विश्वास नहीं हो रहा है !”
जैनब बोली- दो दिन बाद हो जायेगा ! लेकिन मर्द बनकर चोदना, शरीफ बनकर नहीं ! कल मैं तुम्हें पूरा प्रोग्राम बताऊँगी। दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
उसके बाद जैनब चली गई। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस जैस्मिन की सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मार दी और जिसकी चूची तक मैंने नहीं दबाई, उसकी चूत में मेरा लण्ड दो दिन बाद सैर करेगा।
मैं सोचते सोचते नहाने चला गया और नहाते हुए सरसों के तेल से जैनब के कहे अनुसार लण्ड पर मालिश करने लगा।
अगले दिन जैनब फिर छः बजे आ गई। मैंने उससे प्रोग्राम पूछा, लेकिन उसने कहा- पहले आप मुझे आठ बजे तक चोदो बिना लण्ड झड़े ! तब मैं जैस्मिन जी की चूत दिलवाऊँगी। मैंने रूचिजी को बता दिया है कि तुम दो घंटे तक चूत चोदोगे उनकी। उनके पति उन्हें दस मिनट से ज्यादा चोद नहीं पाते और चार महीने में एक बार मारते हैं, महीने में बीस दिन बाहर रहते हैं। मेरी चाल में तो 9-10 इंच लम्बे लण्ड वाले लोंडे हैं जो 6-6 घंटे तक चूत फाड़े रखते हैं लेकिन जैस्मिन जी तुम्हें पसंद करती हैं और तुमसे ही चुदना चाहती हैं। अब तुम उन्हें एक घंटा भी नहीं चोद पाए तो मेरी इज्ज़त मिटटी में मिल जाएगी।
मैंने उसकी बात मान ली और चुदाई शुरू कर दी। जैनब ने मुझे पूरा सहयोग किया और 5-6 आसनों से मेरा लण्ड चूत में डलवाया। डेढ़ घंटे बाद मेरा लण्ड पहली बार झड़ा, इतनी देर तक मैं जैनब को इसलिए चोद पाया क्योंकि जैनब ने हर आसन के बाद मेरे लण्ड को 2-3 मिनट का आराम दिया और इस समय मैं मुझसे अपने संतरे और होंटों को चुसवाया।
इसके बाद जैनब ने लण्ड चूसा और उसे दुबारा खड़ा किया। एक बार फिर एक घंटे तक मेरे लण्ड ने उसकी चूत को बजाया।
जैनब मुस्कुराते हुए बोली- साहब, वाकई अब आप चोदना सीख गए हो ! अब दो दिन बाद जैस्मिन जी की चूत पर आपका राज रहेगा और आप उनकी चूत जम कर बजाना।
जैनब ने अपना प्रोग्राम बताया। उसने बताया कि कल शाम दो बजे को दीना नाम के एक सज्जन अपनी पड़ोसन रूपा के साथ आपके घर आयेंगे। जिसे वो 2 से 5 बजे आपके यहाँ चोदेंगे। .मैं भी 2बजे काम करने आऊँगी और आपके साथ रहूँगी। दो दिन बाद अँधेरी में उनके फ्लैट में आप जैस्मिन जी के साथ अपनी कार से जायेंगे, जहाँ जैस्मिन जी को आप चोदेंगे। जैस्मिन जी अँधेरी के बाहर आपको मिल जाएँगी। लोकल स्टेशन से अपनी कार में जैस्मिन को लेकर आप दीना जी के यहाँ जायेंगे, वहाँ आपको मेरी सहेली रेश्मा मिलेगी जो दीना के यहाँ काम करती है। रेश्मा ने ही दीना को उनकी पड़ोसन की चूत दिलाई है। कोई दिक्कत होगी तो रेश्मा मदद कर देगी। अब मैं जैस्मिन जी के यहाँ काम करने जा रही हूँ, वहाँ फ़ोन से आपकी बात जैस्मिन से कराऊँगी। जरा रंगीन बनकर बात करना, बड़ा मज़ा आएगा।
जैनब के जाने के थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर घंटी आई, जैनब बोल रही थी- लो जैस्मिन जी से बात करो !
मेरे दिल की धड़कन जोरों पर थी, उधर से जैस्मिन बोली- नमस्ते सुमित जी, जैनब बता रही थी आप मुझे बहुत पसंद करते हैं? दोस्तों आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
मैं बोला- सच जैस्मिन जी, आप बहुत सुन्दर हैं और आपकी आवाज़ भी बहुत मधुर है।
“सच? और क्या क्या अच्छा लगता है?”
मैं बोला- सब कुछ !
“आप ठीक से बताइए न ! अब तो हम दोस्त हैं ना?”
मैंने कहा- सच बता दूँ?
जैस्मिन सेक्सी ऊहं भरती हुई बोली- जल्दी बताइए न?
मैं बोला- मुझे सबसे अच्छे आपके संतरे लगते हैं ! सच, रस पीने का बड़ा मन करता है।

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