मेरा बॉयफ्रेंड और उसकी भांजी

मेरा बॉयफ्रेंड और उसकी भांजी

हेल्लो अल्ला ताला से दुवा करती हूँ आप सब खुश होगे Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories मै जन्नत खान आपलोगो के ढेर सारे प्यार भरे मेल मुझे मिले मुझे बहुत ख़ुशी हुयी आज मै एक और सच्ची कहानी लिख रही हूँ आशा करती हु आप लोग मेरी सभी कहानियो की तरह जरुर पसंद करेगे वैसे मै आप लोगो को बता दू ये कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ घटी थी मेरा बॉयफ्रेंड मुझसे हर बात शेयर करता है और जब उसे मेरी सच्चाई पता चली की मै भी पहले कई बार चुद चुकी थी और मेरी कहानी मस्ताराम.नेट पर लिखी हूँ तो वो बहुत खुश हुवा और अपनी सच्चाई भी बता दी और बोला मै उसकी कहानी हिंदी में टाइप कर दूँ सो अब कहानी मेरे बॉयफ्रेंड की जुबानी : जब मैं मेरी खाला के यहाँ शहर में पढ़ता था। एक दिन मेरी खाला की बेटी शबीना खाला से मिलने आई। यह जो घटना मेरे जीवन में घटी.. वो अनायास ही घटी है मेरी खाला की बेटी बहुत ही सुंदर है और वो अपनी एकलौती बेटी शबनम को साथ में लाई थी। मेरे मन में कुछ भी नहीं था.. लेकिन शबनम नई-नई जवान लौंडिया थी.. उसकी गोरी चमड़ी तथा उठे हुए मम्मे बहुत ही सुंदर लग रहे थे.. उसने सफेद फ्रॉक पहना हुआ था। शरीर से गबरू होने के कारण बहुत ही जानदार लग रही थी। उसका फ्रॉक घुटनों तक आ रहा था.. उसकी टाँगें भी बहुत चिकनी और गोरी थीं।
मैंने उसे अपनी तरफ बुला लिया और अपने पास पर बिठा लिया। वो बहुत होशियार तथा सुंदर ढंग से बातें कर रही थी.. लेकिन थोड़ी समय बाद उसके बड़े-बड़े मुलायम कूल्हों की नर्माहट ने मेरे लंड को खड़ा कर दिया।
मेरी बहन उसी शाम को वापस जाने वाली थीं.. लेकिन खाला ने ज़िद करके रोक लिया।
रात का खाना खाने के बाद बहुत गप्पें लड़ाने के बाद सोने का इंतज़ाम हुआ और चूंकि घर में सीमित साधन थे.. सो ऊपर वाले ने मेरी सुन ली.. शबनम को मेरे साथ खटिया पर सोने का प्रबंध हो गया। मेरी मुँह माँगी मुराद पूरी हो गई।
वो मुझे उम्र में छोटी थी.. मैं एकदम से उसके साथ कुछ कर तो नहीं सकता था.. लेकिन बाहरी मज़े तो ले ही सकता था। शबनम मेरी खटिया पर आकर मेरे एक तरफ लेट गई। वो मेरी तरफ पीठ करके सो गई.. उसकी फ्रॉक घुटनों के ऊपर तक आ गई थी। रात के दूधिया उजाले में वो परी सी लग रही थी।
बहुत गप्पें लड़ाने के बाद धीरे-धीरे घर के सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। लेकिन मैं जाग रहा था.. इतना कमसिन और मदमस्त माल मेरे बगल में मुझसे चिपक कर लेटा हुआ था.. पीछे से उसकी गाण्ड की गहरी दरार देखकर मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैं एक हाथ से अपने लंड को सहला रहा था।
अब रात के 11:45 हो गए.. सारे लोग गहरी नींद में सो गए थे.. तब शबनम ने मेरी तरफ़ पलटी मारी और उसने अपना एक पैर मेरे ऊपर डाल दिया.. तब मैंने अपनी रज़ाई हम दोनों के ऊपर ओढ़ ली.. और मैंने उसकी साँसों की गरमी को महसूस किया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | अब मैंने अपना बरमूडा नीचे खिसका दिया.. अब मेरे लौड़े के ऊपर सिर्फ एक निक्कर ही बची थी। अब आपस में हमारी रानों की नर्माहट को मैं महसूस कर रहा था।
एक हाथ मैंने उसकी पीठ पर रख दिया और उसे आहिस्ता से सहलाने लगा.. जब उसकी कोई उजरदारी नहीं हुई तो मैंने धीरे से उसकी फ्रॉक को ऊपर को किया और उसकी कमर के ऊपर तक उठा दिया।
अब मेरा हाथ उसके बड़े-बड़े गोल-गोल चूतड़ों पर रखा। एक छोटी सी चड्डी में उसके दो बड़े-बड़े कूल्हे फंसे हुए थे।
मैंने उसका एक पैर जो मेरे ऊपर था उसे और ऊपर कर दिया और उससे चिपक गया।
अब लोहा और चुंबक आपस में चिपक गए थे.. मैं बहुत खुश था। मेरा लवड़ा डिस्को कर रहा था।
हमारी नंगी रानें एक-दूसरे से चिपक गई थीं.. तभी मैंने उसकी गाण्ड की तरफ से उसकी चड्डी की इलास्टिक में अपना एक हाथ घुसा दिया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | कुछ पलों तक स्थिति को समझने के बाद मैंने अपना हाथ उसके गोल चूतड़ों पर दबा दिया और सहलाने लगा।
वो बेसुध सो रही थी.. मैंने उसका फ़्रॉक और ऊपर उठा दिया और आगे से उसके चीकू के आकार के स्तनों पर हाथ फेरा.. उसके बदन की मदहोश कर देने वाली खुशबू.. मुझे बेचैन कर रही थी.. मेरा कड़क हो चुका लण्ड उसकी चूत के सामने निक्कर से बाहर आने के लिए फुंफकारें भर रहा था।
तब मैंने शबनम को चित्त लिटा दिया और पहली बार मैंने उसकी नाज़ुक चूत पर उसकी चड्डी की ऊपर से हाथ रखा।
उसकी चूत गरम साँसें छोड़ रही थी। मैं धीरे से उसके स्तनों को सहलाता हुआ.. नीचे उसकी नाभि को भी सहलाने लगा। फिर नाभि से नीचे उसकी चड्डी की इलास्टिक में हाथ घुसा दिया.. अब उसकी चूत का इलाका.. जिधर उसकी चूत पर इने-गिने रेशम से मुलायम बाल उगे हुए थे।
आज एक कच्ची कली मेरे पास थी.. और बस मैं कैसे खुद को रोकता.. नीचे मेरी उंगलियाँ सरक गईं.. मेरी हथेली उसकी फूली हुई पावरोटी की तरह चूत पर छा चुकी थी।
तब उसकी साँसें निकल गईं.. उसकी चूत के फलक बड़े-बड़े थे.. आपस में एकदम से मिले हुए थे।
मैं अपनी बहन को धन्यवाद दे रहा था कि क्या चूत को जन्म दिया है।
मैं क्या करूँ ये मेरी समझ में नहीं आ रहा था। तब मैंने मेरा लंड निक्कर से बाहर निकाला और हिम्मत करके उसके दोनों पैर मेरी कमर पर रख लिए।

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