मस्ती ही मस्ती

मस्ती ही मस्ती

बर्षा की यौन प्यास Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex खाना खाने के बाद सब इधर उधर हुये तो मैं और शफ़ात फ़िर एक साथ टहलने लगे!
“आओ ना, कहीं सिगरेट पीते हैं…” नॉर्मल सर्कमस्टान्सेज में शायद वो मेरे साथ सिगरेट नहीं पीता मगर उस दिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद फ़ौरन तैयार हो गया!
“चलिये, उधर चलते हैं…” उसने उस तरफ़ इशारा किया जिस तरफ़ से शायद गुडिया सुबह ऊपर गयी थी!
“चलो… लगता है, वो रास्ता तुम्हें पसंद आ गया है…”
“हाँ, अब वो रास्ता किसको नहीं पसंद होगा… सभी उसी रास्ते पर तो जाना चाहते हैं…”
“हाँ, वो भी अंदर तक…”
“अंदर बोलते हैं… मैं तो साला हाथ पाँव, सब अंदर घुसा दूँ… भैया, आपने देखा नहीं था, क्या हाल था…”
“हाँ, देखा तो था…”
हम जल्दी ही काफ़ी अंदर तन्हा से एरीआ में पहुँच कर एक पत्थर पर बैठ गये! वो अपनी टाँगें फ़ैला के बैठा था, जिस कारण उसकी टाँगों के बीच का हिस्सा खुला सामने दिख रहा था! उसकी पैंट की सिलाई दोनो टाँगों से दौडती हुई उसके आँडूए के ऊपर, उसकी ज़िप के पास एक जंक्शन बना रही थी!

“यार भैया, क्या सीन देखने को मिला… बता नहीं सकता, अभी तक क्या हाल है…”
“तो मुठ मार ली होती…”
“मुठ मार के मज़ा नहीं खराब करना चाहता था… साली, जब दिखती है ना वो, बस वही सीन याद आता है…”
“तो क्या करोगे? उससे माँगोगे क्या?”
“हाँ, सोच तो रहा हूँ… वरना साली का उठा के रेप कर दूँगा…”
“अच्छा? बडा खतरनाक इरादा है…”
“वैसे भैया, साली ने उसका पूरा का पूरा ले लिया था… मतलब साला बडा भयँकर लँड था…”
“हाँ, था तो बहुत बडा साले का…”
“बिल्कुल शायद घुटने तक आ जाता…”
“हाँ, नीचे झुका हुआ भी तो था…”
“आपने देखा था ना… कॉन्डोम भी बस एक तिहाई लँड ही कवर कर पाया था…”
“हाँ” मैने नोटिस किया कि शफ़ात भी शिवेन्द्र के लँड से बहुत प्रभावित था और रह रह कर उसके साइज़ की तारीफ़ कर रहा था!
“बिल्कुल देसी लौडा था…”
“हाँ, देसी तो होगा ना… साला फ़नफ़ना फ़नफ़ना कर बुर को डस रहा था…” उसने फ़िर कहा!
“हाँ, कैसे उठा उठा के सवारी करवा रहा था लौडे की…” मैने भी कहना जारी रखा!
“आप भी मस्त हो गये थे ना.. क्यों?”
“हाँ यार, सीन ही ऐसा था…”
“आपने तो मेरा ही थाम लिया था… अगर थोडी और देर होती तो शायद चूसने लगते…”
“हाँ यार, हो सकता है…”
“क्या?”
“हाँ यार, अगर थोडी देर और होता तो शायद चूस भी लेता…”
“हाँ, जिस तरह से आपने मेरा लँड थाम के हिलाना शुरु कर दिया था, मुझे यही लगा…”
“तुमने मना भी तो नहीं किया था ना यार…” मैने सिगरेट अपने पैर से बुझाते हुये कहा!
“क्यों मना करता? मज़ा भी आ रहा था ना.. आप ऐसे हिला रहे थे… पकड अच्छा रखा था आपने…”
“तुम भी सीन देखने में मस्त थे…”
“मतलब, ज़ाइन नहीं आता तो आप चूस लेते मेरा लौडा??? मेरा तो घाटा हो गया…” वो हँसते हुये बोला!
“हाँ यार” मैने उसकी जाँघ पर हाथ रखते हुये कहा!
“तुम चुसवाना चाह रहे थे क्या?”
“तब तो चुसवाना चाह रहा था…”
“और अब?”
“अब क्या बोलूँ… अब तो आपके ऊपर है…”
“अगर मैं बोलूँ कि ठीक है, तो?”
“तो चुसवा दूँगा…”
“अब यहाँ ठीक नहीं रहेगा ये सब… आराम से फ़ुर्सत से ज़्यादा सही लगता है…”
“कैसे यार, अब यहाँ फ़ुर्सत कैसे मिलेगी?” मैने उसकी पीठ पर हाथ फ़ेरा और दूसरा हाथ उसके लँड की तरफ़ ले जाने लगा!
“वापस चलिये, वापस चल के देखा जायेगा… कुछ छोटा छोटा पेग लगाया जायेगा… ज़्यादा मज़ा आयेगा…”
“वाह, तुम पेग भी लगा लेते हो?”
“और क्या, अब इसमें क्या है… जब मूड हल्का करना होता हो तो लगा लेता हूँ…”
“तब तो तुम्हारे साथ महफ़िल सही जमेगी…”
“और क्या भैया… बहुत सही जमेगी…”

हम थोडी देर और वहीं बैठ के बातें करते रहे और फ़िर वापस चलने का शोर होने लगा! वापसी में मैं आराम से अपने मर्दाने ड्राइवर को ही देखता रहा! मेरे बगल में ज़ाइन था! जिसको मैं आराम से रगड भी रहा था… दो और लोग भी थे! बनारस पहुँचते पहुँचते ७ बज गये थे! सब थके हुये थे! मैं जब अपने घर जाने लगा तो शफ़ात दिखा!
“आओ, थोडा आराम कर लेते हैं…”
“बस १० मिनिट में आता हूँ, थोडा सा काम है… बस आता हूँ, आप चाय बनवाइये…” वो अपने शोल्डर पर एक बैग टाँगें हुये था! वापस आया तो मैं अपने कमरे में था! मेरा रूम सैकँड फ़्लोर पे था! थर्ड फ़्लोर पर बस दो कमरे थे और फ़ोर्थ पर, जैसा मैने बताया था, सिर्फ़ एक ही था! उसने अपना बैग उतार के बगल में रख दिया!
“कहाँ भाग के गये थे??? गुडिया को देखने गये थे क्या?”
“अरे नहीं… आप भूल गये क्या? कुछ बात हुई थी… या आपने इरादा बदल दिया?”
“क्या?”
“पेग वाली बात…”
“अच्छा… अरे तो पूछ तो लेते… मेरे पास स्टॉक है…”
“मैं अपनी ब्राँड लाने गया था…” कहकर उसने व्हाइट मिस्चीफ़ की बॉटल निकाल के दिखाई और वापस बैग में रख दी! मैं बेड पर टेक लगा के लेटा हुआ था! वो भी बेड पर ही बैठ गया!
“ग्लास-व्लास का इन्तज़ाम कर लीजिये ना…”
“हाँ… हो जायेगा…” मैं अब एक्साइटेड हो रहा था! लौंडा जिस आसानी से मेरे जाल में फ़ँसा था मुझे खुद ताज्जुब था! नमकीन सा चिकना लौंडा, जिसके बडे भाई को फ़ँसाने के लिये मैने बहुत कोशिश की थी मगर फ़ँसा नहीं पाया था! पहले पैग में ही उसने मेरा दिल तोड दिया!

“वैसे, आज मैं जल्दी चला जाऊँगा… मेरे रूम मेट की बर्थ-डे है…”
“तो??? अच्छा, ठीक है… चले जाना…”
“आओ ना, छत पर चलते हैं…” फ़िर मैने माहौल चेंज करने की कोशिश की!
“चलिये, खुली हवा में बैठेंगे…”
हम सबसे ऊपर वाली चत पर बैठे, चारों तरफ़ का नज़ारा देख रहे थे!

“आप बहुत चुप हैं…” तीसरे पेग के बाद वो बोला!
“यार, तूने दिल जो तोड दिया…”
“क्यों?”
“जाने की बात करके…”
“अरे ठीक है… देखा जायेगा… अभी तो हूँ, अभी तो बात-चीत करिये… आज दिन में तो बहुत बातें कर रहे थे, अब इतना चुप हैं…”
हम ज़मीन पर एक गद्‍दा डाल के मुंडेर से टेक लगा के बैठे थे!
“सच बताइये ना, आज कैसा लगा?”
“आज का दिन तो बहुत ही अच्छा निकला यार…”
“हाँ लाइव ब्लू फ़िल्म देखने को मिली… मगर साले का लौडा था बडा भयँकर…” उसने फ़िर शिवेन्द्र के लँड की तारीफ़ की!
“उसको देख के लगा नहीं था कभी की इतना लँड मोटा होगा…”
“हाँ यार, देख के नहीं लगता…”
“देसी आदमी है ना… देसी लौंडों के लँड बडे होते हैं…”
“अब बडा तो किसी का भी हो सकता है…”
“किसी गे को मिल जाये तो वो तो उसके लँड को छोडे ही नहीं…” शफ़ात ने कहा और अचानक ये कह कर उसने मेरी तरफ़ देखा!
“हाँ, वो तो है…”
“अगर मेरी जगह वो होता आज तो?”
“क्या मतलब… अच्छा अच्छा… तब तो मुझे दोनो हाथों से पकडना पडता… हा हा हा…”
“मगर उसका चूस नहीं पाते आप…” कहते कहते उसने मेरे कंधों पर अपना एक हाथ डाल दिया तो उसके हाथ की गर्मी से मैं मचलने सा लगा और मेरी ठरक जग उठी!
“तुम्हें कैसे पता कि नहीं चूस पाता?”
“मुह में ही नहीं ले पाते… साँस रुक जाती…”
“बडे लँड चूसने का अपना तरीका होता है…” मुझे नशा भी था और ठरक भी… इसलिये मैं हल्के हल्के खुल के ही बात करने लगा था!
“तुम्हारा कितना बडा है?”
“उतना बडा तो नहीं है… फ़िर भी काम लगाने लायक सही है…”
“अब सबका उतना बडा तो होता नहीं है… वो तो एक्सेप्शन था…” मैने कहा और उसकी जाँघ पर हाथ रख के हल्के हल्के सहलाने लगा!
“सोच रहा हूँ… अब ना जाऊँ, वरना पीने का सारा मज़ा खत्म हो जायेगा…” उसने कहा तो मैं खुश हो गया!
“हाँ, नहीं जाओ… यहीं रह जाओ आज…”
“मगर कपडे नहीं है…”
“मेरे ले लो ना… क्या पहन के सोते हो?”
“कुछ भी चलता है… वैसे आज लुँगी सही रहेगी और यहीं छत पर सोते हैं… कुछ ओढने के लिये ले आयेंगे!”
“चलो, अभी ही ले आते हैं…”

उसने एक लुँगी पहन ली और मैने एक शॉर्ट्स! वो ऊपर बनियान पहने हुये था और मैं अपनी एक टी-शर्ट! अब लुँगी के अंदर उसका लँड फ़िर उभर के हिलता हुआ दिखने लगा था और मैने भी शॉर्ट्स में अपना लँड खडा कर लिया था!
इस बार जब हम छत पर बैठे तो उसने लुँगी मोड के घुटनों पर कर ली और अपनी चिकनी जाँघें दिखाने लगा!

“बताइये… कभी सोचा भी नहीं था कि आपके साथ बैठ कर ऐसे दारू पियूँगा…”
“जब होता है ना तो ऐसा ही लगता है… क्यों अच्छा नहीं लग रहा है क्या?”
“अच्छा तो बहुत लग रहा है…”
“एक बात पूछूँ? बुरा तो नहीं मानेंगे आप…”
“पूछो यार…”
“आपने कभी ऐसा सीन पहले कहीं देखा था?”
“नहीं यार…”
“आपने मेरा पकड क्यों लिया था?”
“अब तुम्हारा इतना खडा था और खूबसूरत लग रहा था…”
“खूबसूरत?”
“हाँ खडा हुआ उछलता हुआ लँड खूबसूरत ही होता है…”
“पहले कभी… मतलब…”
“हाँ, एक दो बार…”
“कहाँ?”
“यहाँ भी… दिल्ली में भी…”
“आपके पकडने के स्टाइल से समझ गया था…”
“और तुमने किया कभी?”
“अभी तक तो नहीं… मगर एक बात बताऊँ? सच सच…”
“बताओ ना…”
“आज जब शिवेन्द्र उसकी ले रहा था, और जो उसकी गाँड दिख रही थी, मेरा दिल हुआ कि जब वो चूत ले रहा था, मैं उसकी गाँड में लँड डाल दूँ…”
“वाह यार, क्या सीन बताया… अगर ऐसा होता तो देख के मज़ा आ गया होता…”
“मैं उसकी गाँड के अंदर धक्‍के देता और वो चूत में धक्‍के देता…” अब उसका नशा बोल रहा था और उसने अपना लँड पकड लिया था!
“तो दे देते ना…”
“कहाँ हो पता है ऐसा… आप का क्या मन हुआ था?”
“मैं तो उसकी गाँड में मुह दे देता… उसकी बालों से भरी गाँड में…”
“वाह भैया वाह.. और… और…”
“और चूत से लँड निकलवा के चूस डालता…”
“अआह… चूत के पानी में डूबा हुआ लँड… मज़ा आ गया होता…”
“साले ने आपके मुह में मूत दिया होता तो?”
“उसको भी पी जाता…”
“हाँ… दारू का पेग बना के पी जाते हम… मतलब आप…”
“हाँ, यार हाँ… तुमको भी पिला देता…”
“मैने कभी पिया नहीं है…”
“तो आज पी लेते… वैसे तुम भी गे हो क्या?” मेरे अचानक पूछने पर वो चुप हो गया!
“पता नहीं… कभी हुआ ही नहीं तो क्या बताऊँ… वैसे दोनो का ही दिल करता है… चूत और गाँड दोनो का…”

मैने अब उसका लँड थाम लिया! वो सुबह की तरह फ़िर हुल्लाड मार रहा था!
“तुम्हारा लँड बहुत प्यासा है…”
“हाँ साले की प्यास आज तक बुझी ही नहीं है ना…”
“मैं बुझा दूँगा…” कहकर मैं झुका और मैने उसके लँड को मुह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और देखते देखते हम नँगे हो गये! उस रात शफ़ात ने मुझे अपनी जवानी से हिला दिया! ऐसे ऐसे धक्‍के दिये कि मैं मस्त हो गया! उसने मुझे उस रात पहले दो बार चोदा, फ़िर भोर में जब हम नीचे कमरे में आ गये तो तीसरी बार फ़िर अपना लँड चुसवाया! उसमें बहुत भूख थी! वही भूख जिसकी मुझे प्यास रहती है!

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