मम्मी और मामा का संभोग

मम्मी और मामा का संभोग

मेरा नाम श्रेयांस और उम्र १६ वर्ष है व मूलतः Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories कानपुर उत्तर प्रदेश का हूँ और मैं हाल में जबलपुर से इन्जनियरिंग प्रथम सेमेस्टर कर रहा हूँ। यह घटना लगभग ५ साल पहले ग्वालियर मध्य प्रदेश की है जहाँ मेरा ननिहाल है। यह कहानी मेरी मम्मी और उनके भाई संचित मामा की है। तब मैं छोटा था और “संभोग” के बारे में कुछ नहीं जानता था लेकिन आज इतना बडा हूँ कि सब समझ में आता है कि उन दिनों मेरी मम्मी और संयम मामा क्या किया करते थे। मैं और मेरी मम्मी सुचिता गर्मियों की छुट्टियां बिताने ग्वालियर आये हुए थे। मेरी मम्मी एक स्नातकोत्तर पढ़ी लिखी घरेलू महिला हैं। उनका कद 5 फ़ुट 8 इन्च, चेहरा अति आकर्षित, रंग गोरा और उस वक्त उम्र तकरीबन 26 साल थी।

मेरी मम्मी सुचिता और मेरे मामा संयम जुड़वा भाई बहन हैं और शुरू से दोनों में “गहरा” प्यार है। संयम मामा पेशे से डाक्टर हैं और ठाठीपुर स्थित उनकी विशाल कोठी मे रहते थे जबकि नानाजी अपने पैतृक निवास शिंदे की छावनी में रहा करते थे। संयम मामा विवाहित थे परंतु उनकी पत्नी अकसर अपने पीहर झांसी चली जाती थीं जिसके कारण उनको अक्सर अपना खाना स्वयं पकाना पड़ता था क्योंकि वो नोकरों के हाथ का पकाया खाना कतई पसंद नहीं करते थे।
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ग्वालियर आते ही जब मेरी मम्मी को पता चला कि कल ही भाभी ३ महीने के लिये झांसी रवाना हो चुकी हैं तो उन्होंने तत्काल नाना को उन्हें ठाठीपुर छोड़ने को कहा। मम्मी ने पहले अकेले ही मामा के घर जाने का इरादा किया था परंतु मेरे जिद करने पर उन्हें मुझे अपने साथ लेकर जाना पड़ा। संचित मामा के घर पहुंचने पर उन्होंने दरवाजा खोला और बोले- “अरे मेरा बेटा श्रेयांस भी आया है ” और उन्होंने मुझे प्यार किया और गोद में उठाया और अन्दर लेकर आ गये। मेरे साथ मम्मी भी अंदर आ गईं। अंदर आते ही मैं घर को इधर उधर देखने लगा और मम्मी व मामा बातचीत मे मशगूल हो गये।

वो लोग बातें कर रहे थे पर मुझे उनकी बातों से क्या मतलब था क्योंकि मैं बहुत छोटा था। वो धीरे धीरे बातें कर रहे थे, वो दोनों एक सोफे पर ही बैठे थे जो एक डबल बेड के आकार का था। थोड़ी देर के बाद बात संचित मामा ने मुझसे कहा “तुम बाहर जाकर खेलो क्योंकि मैं अब तुम्हारी मम्मी का चैकअप करूंगा”। मैंने मम्मी की तरफ़ देखा तो उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और ऐसा लग रहा था जैसे मेरी मौजूदगी से उनको किसी तरह की शर्म आ रही हो। मुझे लगा कि शायद संचित मामा मेरी मम्मी को वस्त्रहीन करके परीक्षण करेंगे परन्तु वहाँ से उठकर जाने मे मेरी कोई दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि मैं शुरू से बहुत जिद्दी और लाडला भी था। फिर मम्मी ने भी मुझसे कहा- बेटा तुम थोड़ी देर बाहर जाकर खेलो, संचित मामा जब मेरा चैकअप कर लेंगे तब हम तुम्हें अंदर बुला लेंगे। अब मेरी मम्मी सोफे पर लेट गई।

ऐसा लग रहा था कि दोनों की रजामंदी आँखों ही आँखों में हो गई थी पर मैं वहीं एक तरफ़ कोने मे छुपकर खडा हो गया और बाहर की तरफ़ देखने लगा और वो एक-दूसरे में ही खो गये। शायद उन्होंने अपना ध्यान मेरी तरफ़ से हटा लिया था। अब मेरी मम्मी ने अपनी साड़ी ऊपर करने के बाद अपने पैर फ़ैलाए तो उनकी पायल की खनक ने मेरा ध्यान उनकी गतिविधियों की ओर गया और अब वो दोनों मेरी ओर ध्यान नहीं दे रहे थे। तब मैंने देखा कि मेरी मम्मी ने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर किया जिससे मैंने अपनी मम्मी की गोरी-गोरी सुडौल जांघों का नज़ारा देखा, मम्मी की जांघों को देखकर संचित मामा की आँखों में चमक आ गई और वो अपने होंठों पर जीभ फेरने लगे जैसे भूखे शेर के सामने गोश्त का टुकड़ा रख दिया हो। मैं मम्मी की गोरी गोरी टाँगें देखकर हैरत में पड़ गया क्योंकि वो ऊपर से तो कभी भी इतनी गोरी नहीं दिखती थी। इतनी देर बाद भी उनका ध्यान मेरी तरफ़ नही गया।

उधर संचित मामा घुटनों के बल सोफे पर खड़े हुए थे। अब मम्मी ने अपनी गदराई हुई सुडौल टांगों को फ़ैलाया, संचित मामा मम्मी को “संभोग” के लिये तैयार होने तक रुके हुए थे। अब मम्मी ने अपनी साडी के अंदर हाथ डालकर अपनी अंडरवीयर को नीचे सरकाकर पैर के पंजों से अलग करके निकाल दिया। अब मेरी मम्मी संचित मामा को अपनी योनि का भोग देने के लिये पूरी तरह से तैयार थी और संचित मामा का इंतजार कर रहे थी। इधर संचित मामा ने भी अपनी पैंट का हुक फिर जिप और बाद में अंडरवीयर खोलकर अलग कर दी। फिर मैंने देखा कि दस इंच का काला मोटा शिश्न मेरी मम्मी की योनि का भोग लगाने के लिये बैचेन हो रहा था। अब संचित मामा धीरे धीरे मेरी मम्मी के ऊपर लेटने लगे और मेरी मम्मी को पूरा अपने कब्जे में ले लिया और पूरी तरह से मम्मी के ऊपर चढ़ गये जैसे कोई उनसे मम्मी को छीन न ले। अब मैंने देखा उनकी वो पैंट का वो खुला हुआ हिस्सा और मम्मी का खुला हुआ हिस्सा आपस मे मिल रहे हैं, पर मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये लोग कर क्या रहे हैं। तभी संचित मामा ने झटका मारा, जिससे पूरी सोफा हिल गया। करीब पांच मिनट बाद मैंने सोचा कि आखिर ये लोग कर क्या रहे हैं। मैं फिर अचानक से अंदर चला गया तो दोनो हक्के-बक्के रह गये। शायद वो दोनो बहुत गर्म हो चुके थे और मेरे यकायक अंदर आने के कारण उनके संभोग मे बाधा पड़ गई थी।

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