भाभी की प्यासी जवानी

भाभी की प्यासी जवानी

Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex मैं आपकी प्यारी भाभी कोमलप्रीत कौर अपनी चिकनी चूत ले कर फिर से आपकी सेवा में हाज़िर हूँ. मेरे पति आर्मी में हैं. मेरा कद 5’3” के करीब है और मेरी बॉडी स्लिम है, मेरे 34 साइज़ के बूब्स एक दम गोल मटोल है. इन गोल मटोल खरबुजो के नीचे मेरी पतली कमर (27) है, एक दम नागिन जैसी बल खाती और उसके नीचे मेरे बड़े बड़े चुतड 36 साइज़ है, और चूतडों पर लहराते मेरे काले घने लम्बे रेशमी बाल लड़कों का दिल लुट के ले जाते हैं.

जब भी कभी में गली से गुजरती हूँ तो लड़के मेरे बूब्स और मटकते चूतडों को ही देखते रह जाते हैं. मेरे गुलाबी पतले होंठ हर लड़का चूसने को तरसता है. मगर चुदाई के लिए तो मैं भी तरस रही थी, मुझे भी एक बड़े लम्बे तगड़े लंड की बहुत जरुरत थी.

ऐसे ही हमारे पड़ोस में एक लड़के को नई नई जवानी आई थी, करीब 18-19 का होगा, मगर बॉडी काफी हेल्दी थी. कॉलेज से आते ही वो छत पर चढ़ जाता और छुपकर मुझे देखता रहता. उसका नाम संजू था. कई बार तो जानबूझ कर हमारे घर में बॉल फैंककर मुझे पकड़ने को बोलता और कई बार खुद आ जाता. मैंने भी उसकी नियत भांप ली थी, मुझे भी तो एक लंड चाहिए था.

एक दिन में घर पर अकेली थी, में किचन से बाहर आई तो अचानक संजू की बॉल हमारे घर में आकर गिर गयी, मुझे पता था की संजू ने बॉल जानबूझ कर फैंकी है और अब वो बॉल खुद लेने आएगा. मैंने भी बॉल पकड़ कर छुपा ली. तभी डोर बेल बजी और मैंने दरवाजा खोला तो संजू ही था. आते ही बोला भाभी मेरी बॉल इधर आई है और हमारे घर में आकर ढूंढने लगा.

मैंने कहा- मैंने तो कोई बॉल नहीं देखी.

तो वो बोला- नहीं भाभी अभी अभी इधर आई है.

मैंने डीप गले का कमीज़ पहना हुआ था, जिस में से मेरे गोल मटोल बूब्स आधे दिखाई दे रहे थे. संजू की नजर बार बार मेरे बूब्स पर ही जा रही थी.

मैंने कहा- अच्छा तो तुम ढूंढ लो और वो इधर उधर बॉल देखने लगा.

में भी उसके पास ही खड़ी रही, मगर उसका तो ध्यान मेरे बूब्स पर ही जा रहा था. मैंने संजू को और जलवा दिखाने के लिए गले में ली हुई चुन्नी को उतार दिया और कहा संजू क्या मैं भी ढूंढ दू तुम्हारी बॉल. संजू की आँखे तो खुली की खुली ही रह गयी वो बोला हाँ भाभी जरुर.. मुझे तो कहीं नहीं मिल रही..

मैं उसको और नजारा देने के लिए- नीचे झुक कर इधर उधर देखने लगी. मगर संजू को तो अब एक बॉल नहीं दो दो बॉल दिखाई दे रही थी.

फिर मैंने कहा की बॉल कहीं रूम में तो नहीं चली गयी, में अन्दर देखती हूँ. (ऐसा बोलते हुए में कमरे में चली गयी, यहां पर मेने बॉल छुपाई थी.)

और फिर अन्दर से आवाज लगायी संजू तुम्हारी बॉल मिल गयी. वो भी झट से कमरे में आ गया और पूछने लगा की कहा है. मैंने बॉल हाथ में पकड़ते हुए कहा की यह रही मगर में दूंगी नहीं.

तो संजू बोला- क्यों भाभी क्यों नहीं दोगे आप मेरी बॉल.

तो मैंने कहा की तुम रोज रोज जानबूझ कर हमारे घर बॉल फेंक देते हो.

वो बोला- नहीं भाभी खेलते खेलते आ जाती है.

मैंने कहा- फिर भी में नहीं दूंगी, अगर तुम छीन कर ले जा सकते हो तो ले जाओ (मैंने मुस्कुराते हुए कहा)

संजू के तो जैसे मन में लड्डू फूट रहे थे, वो भी तो मुझे टच ही करना चाहता था, और उसे भी पता था की बॉल की छिना झपटी में पता नहीं भाभी के कहाँ कहाँ हाथ लगेंगे.

संजू हंसते हुए बोला- अच्छा भाभी मैं अभी छीन लेता हूँ और वो मेरी तरफ लपका..

मैं जल्दी से बेड के ऊपर चढ़ गयी तो संजू भी मेरे पीछे पीछे बेड पर चढ़ गया.

बेड पर चढ़ के संजू ने फिर से रिक्वेस्ट करते हुए कहा- भाभी क्यों सता रही हो, प्लीज दे दो ना बॉल.

मैंने फिर से हंसते हुए कहा- अगर छीन सकते हो तो छीन लो.

तभी वो जल्दी से मेरी तरफ लपका और मेरा हाथ पकड़ लिया. और बॉल छुड़ाने की कोशिश करने लगा. मैं भी जानती थी की यही वक़्त है जब संजू के बदन से बदन रगड़ने का मजा लिया जा सकता है, मैंने बॉल को कास कर पकड़ रखा था और अपने बूब्स संजू के कंधे के साथ लगा दिए, मेरे बूब्स का स्पर्श मिलते ही संजू का भी ध्यान बॉल से हट गया और वो भी बॉल छुड़ाने की नाकाम सी कोशिश करने लगा. मैं भी अंजान बनी हुई अपने बूब्स को उसके कंधे और बाजु के साथ रगड़ने लगी.

फिर मैं खुद ही बेड पर लेट गयी और साथ ही साथ संजू को भी अपने ऊपर गिरा लिया. संजू को भी ऐसा मजा पहले कभी नहीं मिला होगा, वो भी पूरा मजा लेना चाहता था मगर फिर भी वो थोडा सा डर भी रहा था. उसने मेरे हाथ से बॉल छीन ली और फिर मेरे ऊपर से उठाने की कोशिश करने लगा.

मगर मैंने कहा- अच्छा बच्चू बॉल लेकर में तुमको भागने नहीं दूंगी और दोनों हाथों से उसको झप्पी डाल दी. साथ ही में खुल कर हँसे लगी, संजू भी हंसने लगा मगर वो थोड़ी थोड़ी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था. शायद उसको समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या चाहती हूँ.

मैंने संजू को जोर से अपने ऊपर लिटाते हुए खिंचा और उसको अपने नीचे ले लिया और खुद की एक जांघ पर अपनी टांग रख कर अपनी छाती उसके पेट पर रख दी और फिर अंजान बनते हुए उस से बॉल छीनने का नाटक करने लगी. संजू को भी मजा आ रहा था इस लिए अब उसने भी कोई ज्यादा कोशिश नहीं की उठने की. हम दोनों एक दुसरे से बॉल छिनने की झूठी कोशिश कर रहे थे, मगर असल में हम दोनों एक दुसरे के बदन को ही आपस में रगड़ रहे थे.

इसी बीच मेरी कोहनी संजू के लंड वाली जगह पर लगी तो मैंने देखा की उसका लंड हार्ड हो चूका था, मैंने जानबूझ कर अपनी कोहनी उसके लंड के ऊपर रगड़ने दी. इसी बीच मेरे बाल खुल गए और संजू के चेहरे पर बिखर गए. मेरे बालों के घने बदलो में छिप कर संजू और मदहोश होने लगा, मैं कभी कभी अपने गाल भी उसके चेहरे पर रगड़ देती, संजू ने सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ रखा था, मैं जो भी कर रही थी वो मेरा पूरा साथ डे रहा था, मगर फिर भी अभी भी सब एक नाटक की तरह ही चल रहा था.

ऐसा करते हुए हमें 15 मिनट हो चुके थे. मैं थोडा सा संजू के ऊपर हो गयी और संजू का लंड पेंट के बीच में से ही मेरे पेट को टच करने लगा.

अब मुझसे और सबर नहीं हो रहा था, मैं जल्दी से जल्दी संजू का लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी और संजू भी यही चाहता था.

अब मैंने नाटक करना छोड़ा और पूरी की पूरी संजू के ऊपर लेट गयी और अपनी चूत वाला हिस्सा संजू के लंड वाले हिस्से पर टिका दिया और संजू को कस के अपनी बाँहों में जकड लिया और अपने होठ संजू की गर्दन और चेहरे पर फिरने लगी. संजू भी थोडा थोडा मेरा साथ देने लगा. मैं अपनी चूत संजू के लंड पर रगड़ रही थी. और फिर मैंने एक हाथ नीचे लेजा कर संजू के लंड को पेंट के ऊपर से पकड़ लिया.

संजू ने थोडा सा हैरान होकर कहा- भाभी क्या कर रही हो आप..?

तो मैंने उसे डाँटते हुए स्वर में कहा- चुप, अब बोल मत..

और वो चुप हो गया, फिर मैंने लंड पर हाथ घिसते हुए पेंट की हुक को खोल दिया और ज़िप भी खोल दी. और संजू का अंडरवियर नीचे करके उसका लंड हाथ में पकड़ लिया. संजू के बदन में तो जैसे बिजली दोड़ गयी हो.. संजू ने भी मुझे कस के झप्पी में ले लिया और मेरी पीठ और बालों में हाथ घुमाने लगा.

फिर मैंने बैठे हुए संजू की पेंट और अंडरवियर को उतार दिया, संजू का 7 इंच का लंड पूरा तना हुआ था. संजू भी अपने लंड की तरफ देख रहा था और फिर वो मेरी तरफ देखने लगा. मैं फिर से उसके ऊपर लेट गयी और उसकी टी शर्ट को भी लेटे लेटे ही निकल दिया. संजू पूरी तरह से नंगा हो गया था. फिर मैंने अपनी सलवार का नाडा खोला और अपनी सलवार भी उतार फैंकी और अपनी कमीज़ को भी निकल दिया. संजू के लिए यह सब कुछ किसी सपने से कम नहीं था. उसकी तो जैसे लोटरी लग गयी थी.

वो मेरे बदन को घुर घुर कर देख रहा था, मेरी ब्रा में फंसे हुए मेरे बूब्स देख कर उसकी आँखे खुली हुई थी.. मैंने संजू का हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रखा और फिर से उस पर लेट गयी. मैं ब्रा और पेंटी में थी और संजू के नंगे बदन को में मैं हर जगह से चूम रही थी. संजू भी अब मेरे बूब्स के साथ खेलने और उनको चूसने में मस्त था. और इसी दोरान संजू ने मेरी ब्रा भी निकल दी.

फिर मैंने संजू के पेट पर उसके पैरों की तरफ मुह करके बैठ गयी और अपना मुह झुकते हुए संजू के लंड को अपने मुह में ले लिया. संजू के लिए यह सब कुछ पहली बार था, वो तो जन्नत की सैर कर रहा था, संजू मेरे मोटे चूतडों पर हाथ घुमाने लगा और फिर मेरी पेंटी को नीचे खिंच दिया, मैंने भी उसकी मदद की और मेरी पेंटी उतर गयी. मैंने अपने चूत को भी उसके चेहरे पर सेट कर दिया और कहा की अब तुम भी चुसो इसको..यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे । वो भी मेरी चूत को चाटने लगा और मेरे मोटे मोटे चूतडों को अपने हाथों से दबाने लगा. मैं जोर जोर से उसका लंड चूस रही थी और अपने होटों से मसल रही थी. संजू का पूरा लंड मेरे गले तक पहुँच रहा था. अब उसका बदन अकड़ने लगा और वो अपने लंड को मेरे मुह में धकेलने लगा.

मैं भी जोर जोर से उसके लंड की चुसाई शुरू कर दी और फिर जोर से एक पिचकारी मेरे हलक में उतर गयी और फिर देखते ही देखते मेरा मुह वीर्य से भर गया. साथ ही मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया और मैंने अपनी चूत को संजू के मुह के ऊपर दबा दिया और मेरा बहता हुआ सारा पानी संजू के चेहरे पर फ़ैल गया.

हम दोनों निठाल हो गए और मैं भी बेड पर संजू के साथ लेट गयी.. संजू अपने लंड के हाथ में पकड़ कर देख रहा था और फिर बोला भाभी- यह आपने क्या किया.

मैंने कहा- कुछ नहीं किया.. तू भी तो यह सब चाहता था.. अब ये बात किसी को बताना नहीं..

वो बोला- नहीं बताऊंगा भाभी..

फिर वो झिझकते हुए बोला- अब मैं जाऊं भाभी..

तो मैंने कहा- क्यों इतनी जल्दी है क्या.. अभी कुछ और नहीं मजा लेगा..

तो संजू बोला- हाँ भाभी लूँगा.. मैं तो आप को देखकर कब से मुठ मारता था..

मैंने कहा- अब तुमको मुठ मरने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

और फिर मैंने उसको अपने ऊपर लिटा लिया और हम लोग फिर से एक दुसरे के साथ बदन रगड़ने लगे. एक दुसरे के मुह में मुह डालकर जुबान चूसने लगे. कुछ ही देर में संजू का लंड फिर से तन गया और संजू मेरी दोनों टैंगो के बीच बैठ गया.. “पडोसी”

मैंने भी अपनी टंगे खोल दी और अपने चूत को संजू के सामने कर दिया. संजू अपना लंड हाथ में पकड़ कर मेरी चूत में घुसाने लगा मगर उसे सही जगह नहीं मिल रही थी, मैंने संजू का लंड अपने हाथ में पकड़ा और कहा- यह देखो मैं तुम को सिखाती हूँ. और उसका लंड अपनी चूत के मुह पर रखा और संजू को धक्का मारने को कहा.. संजू ने धीरे से धक्का मारा तो लंड का सुपारा मेरी चूत में घुस गया. फिर मैंने लंड को छोड़ते हुए अपनी चूत को ऊपर उठाया तो संजू अपना लंड और मेरी चूत में घुसेड़ने लगा.

मगर आधा लंड ही चूत में गया था की संजू को दर्द होने लगा और वो आधे लंड से ही मुझे चोदने लगा, मैंने संजू को पूरा लंड डालने को कहा तो वो बोला की बहुत दर्द होता है, मैंने उसको अपने ऊपर लिटा लिया और उसकी कमर पर अपने दोनों टाँगे रख ली और फिर अपने हाथ उसके चूतडों पर रखते हुए जोर से अपने तरफ खिंचा तो संजू का पूरा लंड मेरी चूत में फिसल गया. मगर संजू को बहुत दर्द हुआ और वो लंड बाहर निकालने लगा. मगर मैंने उसे ऐसे ही कुछ देर लेते रहने के लिए कहा.

थोड़ी ही देर के बाद संजू मेरी चुदाई करने लगा. अभी तक उसको ठीक तरह से चोदना नहीं आ रहा था मगर मैंने उसको सब कुछ सिखाने का वादा किया. फिर मैं उसके ऊपर आ गयी और जोर जोर से अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी, ऐसे संजू को भी बहुत मजा आया और मुझे भी. फिर हम दोनों एक साथ झड गए और मैं संजू के ऊपर ही गिर गयी. कुछ देर बाद जब संजू का लंड मेरी चूत में से बाहर निकला तो उस पर खून लगा हुआ था. जो की संजू का ही था, शायद पहली बार करने से ऐसा हुआ था.

फिर संजू ने कपडे पहने और रात को फिर से मिलने का वादा किया और अपने घर चला गया. मैंने भी कपडे पहने, बेड की चादर को साफ़ किया और फिर बेड पर लेट गयी.

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