बस में मिली बेडरूम में चुत चुदाई 2

बस में मिली बेडरूम में चुत चुदाई 2

वो- तुमने किसी के साथ किया है?
मैं- क्या?
वो- किसी लडकी के साथ सेक्स..?
मैं- हाँ.. एक लडकी के साथ।
वो- कितनी बार?
मैं- 2 बार।
वो- जीएफ?
मैं- नहीं… पडोस की भाभी।
वो- क्या-2 किया?
मैं- सब कुछ। तुमको करना है क्या?
वो- हाँ… तुम्हारा कितना बडा है?
मैं- खुद देख लेना जब चुत में लेगी।
इस तरह हमारी चुदाई की बाते शुरू हो गई। वो भी खुल कर चुत लंड चुदाई जैसे शब्द बोलने लगी।
एक दिन वो बस स्टैंड पर बात करने के लिए नही रूकी और मुझे जल्दी चलने को बोला। मैंने कारण पुछा तो बताया कि उसके घर पर आज कोई नही है सब रात को आऐंगे। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैं उसके साथ चल दिया। उसके घर जाने से पहले मैंने एक कंडोम और गर्भ निरोधक गोली ले ली।
उसके घर में घुसते ही उसने मुझे गले से लगा लिया और एक स्मूच किया और बोली- इस दिन का मैं बहुत दिनो से इंतजार कर रही थी।
मैं- मुझे भी तुझे चोदने का बहुत मन था।
फिर उसने अपना और मेरा बैग सोफे पर रख दिया। मैंने उसकी शर्ट खोल दी, उसने अंदर समीज पहनी हूई थी। मैंने उसके मौसमी के बराबर के चुचे पकड लिए।
उसने भी मेरी शर्ट उतार दी और मेरी पैंट खोलने लगी। मैंने भी उसकी स्कर्ट खोल दी। और अपना बनियान उतार दिया। अब वो समीज और पैंटी में थी। और मैं सिर्फ चड्डी में ।
मैंने उसे गोद में उठा लिया और बैडरूम का पुछा। उसने अपने बैडरूम की तरफ उंगली से इशारा किया।
मैं उसे किस करते हुए उसके बैडरूम में ले गया। बैडरूम में जाते ही उसे बैड पर लेटा दिया। और मैं उसके ऊपर लेट गया। उसने अपनी टांगे मेरी कमर में लपेट ली। हम किस करने लगे। मैं किस करते हुए उसके चुचे दबाने लगा समीज के ऊपर से ही।
कुछ देर किस करने के बाद हम अलग हुए। मैंने उसकी समीज उतार दी। अब वो ऊपर से नंगी हो गई। मैंने तुरंत उसका एक चुचा मुहँ में ले लिया। और दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
दिव्या को मजा आने लगा। मैंने उसके दोनो चुचे बारी-2 चुस कर लाल कर दिए। फिर मैं उसके चुचो के बीच से जीभ फेरता हुआ उसकी नाभी तक पहुँचा। नाभी पर चाटने के बाद मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत पर किस किया और फिर पैंटी उतार दी। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैं उसकी बिना बालो वाली चुत चाटने लगा। वो मदहोस होने लगी और सिसकारने लगी। मेरा सिर अपनी चुत पर दबाने लगी।
मैं भी कभी उसकी चुत चाट रहा था तो कभी जीभ से चुत चोद रहा था। कुछ देर तक ऐसा करने से उसकी चुत बहुत गीली हो गई। फिर मैंने अपनी चड्डी उतार दी और हम 69 में आ गए। उसने मेरे लंड को पकड कर अपने मुहँ में ले लिया।
उसके लंड मुहँ में लेकर चुसने से मैं 4-5 मिनट में ही झड गया। उसने मेरा सारा रस पी लिया। उसने मेरा लंड चाट कर साफ किया। और फिर मुहँ में लेकर फिर से खडा कर दिया।
अब मैं सीधा होकर उसके पैरो के बीच में आ गया। तब मुझे कंडोम की याद आई जो बहार हॉल में मेरी पैंट में था। मैं कंडोम लेने जाने लगा तो दिव्या ने मुझे खींच लिया और बोला- मेरी चुत की सील बिना कंडोम के फाड। बाद में गोली ले लुंगी…..

कहानी जारी है …. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे …|

उसने मेरा लंड पकड कर अपनी चुत पर रखा। और बोली- चोद मुझे.. अब नहीं रहा जाता।
मैंने भी एक जोर का धक्का लगाया। उसकी चुत गीली होने से मेरा लंड उसकी चुत में थोडा सा घुस गया। वो चिल्लाने लगी। और मुझे हटाने लगी। पर मैं हटा नही वही रूक कर उसके चुचे चुसने लगा। और एक हाथ उसके मुहँ पर रख दिया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
जब उसे आराम मिला तो मैंने फिर एक और धक्का लगाया और अपना 5″ का लंड उसकी चुत में उतार दिया। और धीरे-2 चोदने लगा।
कुछ देर में जब दिव्या को मजा आने लगा तो वो भी अपने कुल्हे उठा-2 कर चुदने लगी। उसने फिर से अपनी टांगे मेरी कमर में लपेट ली। 15 मिनट के बाद वो अकडने लगी और झड गई। उसके झडने के साथ ही मैं भी झड गया उसकी चुत में।
और उसके ऊपर लेट गया। जब हमारी सांसे सामान्य हुई तो हम अलग हुए। दिव्या अपनी पैंटी पहनने लगी तो मैंने उसे रोक दिया।
हम नंगे ही कमरे से बहार हॉल में आ गए। मैं सोफे पर बैठ गया और उसे अपनी गोद में बैठा लिया। हम टीवी देखने लगे।
दिव्या बोली- यार आज पहली बार मेरा प्यार मेरे घर आया और मैंने उसे कुछ खाने को भी नहीं पुछा।
मैं- तेरी चुत मिल गई अब क्या चाहिए।
वो रसोई में जाने लगी। मैं भी उसकी मटकती गांड देखता हुआ उसके पीछे चल दिया।
वो फ्रिज में कुछ देखने के लिए झुकी तो मैंने झट से उसकी कमर पकड ली और अपना लंड उसके कुल्हो के बीच गांड की दरार में लगा दिया।
मेरे ऐसा करने से वो पीछे मुडी और बोली- सब्र कर सब मिलेगा। अभी कुछ खा ले जिससे थोडा दम बने।
फ्रिज में अंगुर और जूस था।
वो बोली- मम्मी जूस बना कर रख गयी।
वो जूस और अंगुर ले कर बहार हॉल में आने लगी। मैं उससे चिपक कर चल रहा था। हमे थोडी परेशानी हो रही थी पर मजा भी आ रहा था।
वो मुझे अंगुर खाने को बोलने लगी।
मैं- मैं ऐसे अंगुर नहीं खाऊंगा।
वो- तो कैसे खाऐगा?
मैं- तु सोच कैसे खिला सकती है।
कुछ सोचने के बाद वो सोफे पर लेट गई। और एक अंगुर ले कर अपनी चुत पर रख दिया। मैंने झट से अंगुर खा लिया। फिर उसने अपने मुहँ में लेकर मुझे अंगुर खाने को दिया। मैंने वो भी बडे कामुक तरीके से खा लिया।
इस तरह हम दोनो ने अंगुर खाए। अब जूस की बारी थी। मैंने जूस गिलास में डाला और दिव्या की चुत में थोडा-2 डाल कर उसकी चुत चाटने लगा। इससे हम दोनो को मजा आया। आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
अब दिव्या ने भी जूस का गिलास ले कर मेरा लंड जूस में डूबो दिया और लंड चूसने लगी।
उसके लंड मुहँ में लेने से मेरा लंड फिर से तन गया। अब जूस का गिलास मैंने ले लिया। और धीरे-2 लंड पर जूस डालने लगा। जिसे दिव्या पीने लगी।
जब जूस खत्म हो गया तो मैं दिव्या को गोद में लेकर बैठ गया और टीवी पर सेक्सी गाने लगा दिए। और दिव्या को चुमने चाटने लगा।
जब हम दोनो फिर से तैयार हो गए तो मैंने उसे वहीं घोडी बना दिया। दिव्या सोफे की दीवार को पकड कर घोडी बन गई। मैंने फिर पीछे से उसकी चुत मारी। इस बार हमारा खेल पहले ले लंबा चला।
मैं दिव्या के घर 4 घंटे रूका। 4 घंटो में मैंने दिव्या को 3 बार चोदा। लेकिन उसने अपनी गांड मारने नहीं दी।
फिर मैं जब जाने लगा तो दिव्या ने मेरा लंड चुसा और मुझे किस किया। वो मुझे स्टैंड तक छोडने आई। वहाँ उसे उसकी एक सहेली मिली। जिसने मुझे उसके साथ देख लिया।
मैं बस पकड कर घर आ गया। बाद में मैंने दिव्या की गांड भी मारी और उसकी सहेली को भी चोदा।
दोस्तो कैसी लगी मेरी और दिव्या की चुदाई की कहानी?
आप मुझे मेरे ई-मेल के जरिए बता सकते हैं। मैं आगे भी आपको अपनी कहानी भेजता रहूंगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *