पति के दोस्त की शादी में मेरी चुदाई

पति के दोस्त की शादी में मेरी चुदाई

आज मैं आपको अपनी एक और चुदाई Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories के बारे में बताना चाहती हूँ। मैं अपने पति के साथ मेरे पति के एक दोस्त की शादी में जबलपुर गए हुए थे। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | यह बात 6 महीने पहले की है। मई का महीना था, हम लोग जबलपुर के एक होटल में रुके हुए थे.. शादी में आए हुए सभी लोगों रुकने का इंतजाम पति के दोस्त की तरफ से उसी होटल में किया गया था।
हम लोगों का कमरा तीसरे माले पर था, मेरे कमरे के सामने वाले कमरे में दूल्हे के जीजाजी भी रुके हुए थे, उनसे मेरी मुलाकात संगीत कार्यक्रम में हुई.. जो शादी के एक दिन पहले यानि 10 मई को था.. और शादी अगले दिन यानि 11 मई को थी।

मैं उस दिन एक रानी कलर की साड़ी पहने हुई थी और बहुत खूबसूरत लग रही थी। क्योंकि करीब सब की निगाहें मेरे ही ऊपर घूम रही थीं.. ख़ासतौर पर उन सब में दूल्हे के जीजाजी मुझे कुछ ज्यादा ही लाइन मार रहे थे। मैं भी बार-बार उस अजनबी को देख कर मुस्कुराने लगी।
सच बताऊँ दोस्तों.. मैं उसको देखते ही.. उसकी नज़रों से नजरें मिलते ही मेरे मन में एक अलग सी मस्ती छाने लगी थी।
मुझे लगा कि कोई तो है इस महफ़िल में जो मेरी तरफ देखने वाला है। मैं भी उसको अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश कर रही थी.. इसी लिए मैं भी मुस्कुराने और शरमाने लगी।

मेरे मुस्कुराने से और शरमाने की अदा से वो समझ गया कि मैं भी उसमें रूचि ले रही हूँ। बस फिर क्या था.. वो बहाने से मेरे पास आ गया और मुझसे बातें करने लगा।

मेरे लोकट ब्लाउज से मेरे उरोज यानि चूचियां काफी खुली नज़र आ रही थीं।

अब रात काफ़ी गहरा चुकी थी और शादी का मधुर संगीत चालू था। हम दोनों ऐसे ही कुछ इधर-उधर की बातें करते रहे और बात करते हुए मैं संगीत कार्यक्रम से एक तरफ हटने लगी। मैं वहाँ से सब की नजर बचा कर होटल की लाबी में बढ़ गई और साथ में अरूण मोदी जी मतलब वही दूल्हे के जीजा जी.. उनका नाम अरूण मोदी है.. मेरे पीछे-पीछे लाबी की तरफ आ गए और मुझसे बातें करने लगे।
उनसे बातों के दौरान बार-बार अरूण जी का मुझे छूना.. मुझसे सटना मेरे तन-बदन में और चूत में आग लगा रहा था। वो बातें करते जा रहे थे.. पर मेरे कानों में कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था। मैं तो अपने ख्यालों में खोई हुई अपनी जाँघों से चूत को दाबे हुए.. अन्दर उठती तरंग का मजा ले रही थी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

तभी अरूण मोदी ने कहा- भाभी जी चलिए.. कहीं बैठ कर बातें की जाएं..
मैं जैसे चौंक कर किसी ख्वाब से बाहर आई।
मैंने कहा- हाँ.. क्यों नहीं.. पर कहाँ कोई देखेगा.. तो हम लोगों के बारे में क्या सोचेगा?

अरूण जी ने कहा- इस टाईम सब कार्यक्रम में मस्त हैं कोई ध्यान नहीं दे रहा है.. आपको बुरा ना लगे तो आप मेरे साथ मेरे कमरे में चल सकती हो। आप ही के कमरे के सामने मेरा भी कमरा है। वहाँ मुझे और आपको कोई नहीं देखेगा और आपका साथ पाकर मुझे भी खुशी होगी।

मैं ना चाहते हुए भी ‘हाँ’ में सर हिला कर अरूण जी के साथ उनके कमरे की तरफ चल दी। पर एक संकोच और बेचैनी की वजह से दरवाजे पर ही रुक गई।
‘अन्दर तो आईए..’

अरूण जी की आवाज मेरे कानों में पड़ी। यह कहते अरूण मोदी ने देर नहीं लगाई.. मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अन्दर खींच लिया और मुझे सोफे पर बैठा दिया, फिर मेरा हाथ अपने हाथों में लिए हुए खुद ही मुझसे सट कर बैठ गए।

एक गैर मर्द को अपने करीब पाकर मुझे कुछ होने लगा.. मेरी चूत कुलबुलाने लगी और मुझे बस यही लग रहा था कि मैं किसी भी पल इस आदमी से मैं चुद सकती हूँ या यह मुझे किसी पल अपने लौड़े से चोद सकता है।

तभी अरूण मोदी की आवाज से में अपनी सोच से बाहर आई, उन्होंने पूछा- तुम कहाँ से हो?
मैं बोली- बनारस उत्तर प्रदेश से हूँ.. आप?
उसने कहा- मैं सिवनी मध्यप्रदेश से हूँ और मैं दूल्हे का जीजा हूँ।
मैंने पूछा- क्या मैं आप को इतनी अच्छी लग रही थी.. जो आप मुझे ही देख रहे थे?
तो वो मुस्कुरा कर बोले- हाँ.. तुम मुझे बहुत ही सेक्सी और हॉट लग रही हो..

मैं भी कातिलाना अंदाज से मुस्कराते हुए बोली- तब तो आपकी नीयत ठीक नहीं लगती..
अरूण जी ने कहा- नहीं.. नीयत बिलकुल ठीक है.. तभी आप जैसी हसीन औरत मेरे पास बैठी है। ये तो मेरा भाग्य ही है कि आप मेरे साथ हो.. आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

यह कहते हुए अरूण मोदी जी ने उठकर दरवाजा बन्द कर दिया.. और अगले ही पल मैं उनकी बाँहों में थी। उसने मुझे जोर से कस लिया और बेसब्री से मुझे चूमने लगा। मेरी भी हालत कुछ अलग नहीं थी। मैं भी सालों की प्यासी की तरह उसका साथ देते हुए बोली- यह आप क्या कर रहे हैं.. छोड़ दीजिए प्लीज.. ऐसा मत कीजिए.. आआह.. हहहहसी..
मेरा मन और चूत मचल उठा।
एक पराए मर्द की बाँहों में होने का मजा ले रही थी।

उसने कहा- भाभी.. तुम बहुत सुंदर हो। कब से बस पार्टी में घूम-घूम कर देख रहा था और सोच रहा था कि ऐसा क्या करूँ कि आपके हुस्न का रस पान कर सकूँ। बहुत दिल करता था कि आपको अपनी बाँहों में लेकर आपके होंठों का रसपान कर लूँ.. आप बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी औरत हो.. मेरी जान.. तुम एक गरम और चुदक्कड़ माल हो। मैं तो तुम्हारे पति को बहुत ही खुशनसीब समझता हूँ.. जिसे तुम्हारे जैसे गरम और गदराई जवानी से भरपूर औरत मिली है।

अपनी तारीफ़ में यह सब सुनकर मैं बहुत खुश हुई, मैंने भी कहा- जब से तुम यहाँ आए हो और मैंने तुमको देखा है.. तबसे तुम्हारे बारे में सोच रही थी। मैं भी चाहती थी कि तुम्हारे जैसा कोई तगड़ा जवान मिले जो मेरी सारी इच्छाएं पूरी कर दे.. मुझे अपनी बाँहों में ले कर जम कर मेरी ठुकाई और चुदाई करे.. मेरी चिकनी चूत चाट कर मुझे पेल दे.. आह्ह.. मेरे राजा.. आज तुम मेरी वो सारी इच्छाएं पूरी कर दो..

इतना सुनते ही अरूण ने मुझे अपने बाँहों में लेकर मेरे मम्मों पर हाथ फेरते हुए मेरी एक चूची को जोर से भींच लिया और वो मेरे गालों पर प्यार से अपनी जीभ फिराने लगे। अरूण जी कि हरकतों से मैं अब काफ़ी गर्म हो चुकी थी।

मैंने भी ज़ोर से एक किस करते हुए कहा- आआहहहह सीईईई.. मेरे राजा मुझे अपना बना लो.. और आज मेरी जवानी को अपने लण्ड से रौंद दो..

यह कहते हुए मैंने एक हाथ से उनके लण्ड को पकड़ लिया। वो भी धीरे-धीरे मेरे चूचों को मसलने लगे और अपना चेहरा मेरे पेट के ऊपर रख चूमने लगे।
मैंने सिहरते हुए कहा- आह्ह.. ज़रा आराम से करो.. मेरी यह चूत आपको ही चोदने को मिलेगी।
उसने मेरी साड़ी उतार दी और मैंने बस लाज से कांपते हुए अपना चेहरा हाथों से ढक लिया। वह मुझे गोदी में उठा कर बेड पर ले जाकर.. बिस्तर पर लिटा दिया। मेरा ब्लाउज और ब्रा निकाल दिए और मेरे चूचे चूसने लगे। मैं भी अब उनका पूरा साथ देने लगी थी। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
दोस्तो, चुदास की आग लग चुकी थी, मेरे जिस्म में आज एक मस्त चुदाई की कामना घर कर चुकी थी.. बस मुझे यह देखना था कि अरुण मोदी का लवड़ा मुझे कितना संतुष्ट कर सकेगा।

आपकी चुदक्कड़ सहेली नेहा रानी की भरपूर चुदाई का कथानक आपको अगले भाग में पढ़ने को मिलेगा। तब तक जरा तसल्ली रखिए। कहानी जारी है..

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