दीदी की कुवारी ननद-1

दीदी की कुवारी ननद-1

मेरी मेरे परिवार में मै हूँ माताज़ी, Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories पिताजी हें और मुझ से तीन साल बड़ी दीदी है जिस का नाम है अर्चना. मैं और दीदी एक दूजे से बहुत प्यार करते हें. भाई बहन से ज़्यादा हम दोस्त हें. हम एक दूजे की निजी बातें जानते हें और कभी जरुरत पड़ने पर राय लेते देते हें. सेक्स के बारे में हम काफ़ी खुले विचार के हें, हालाँकि हम ने आपस में चुदाई नहीं की है जब में छोटा था तब अक्सर वो मुज़े नहलाती थी. उस वक़्त मात्र कुतूहल से दीदी मेरी नुनु के साथ खेला करती थी. मुज़े गुदगुदी होती थी और नुनु कड़ी हो जाती थी. जैसे जैसे उमर बढ़ती चली तैसे तैसे हमारी छेड़ छाड़ बढ़ती चली. ये बिना बनी तब मैं १६ साल का था और वो २० साल की. तब तक मैंने उस की चुचियाँ देख ली थी, चूत देख ली थी और उस ने मेरा लंड हाथ में लेकर मुठ मार लिया था. चुदाई क्या है कैसे की जाती है क्यूं की जाती है ये सब मुझे उसने सिखाया था.कहानी शुरू होती है अर्चना की शादी से. पिताजी ने बड़ी धाम धूम से शादी मनाई. बारात दो दिन मेहमान रहे. खाना पीना, गाना बजाना सब दो दिन चला. जीजाजी कमलेश कुमार उस वक़्त बाइस साल के थे और बहुत ख़ूबसूरत थे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | दीदी भी कुछ कम नहीं थी. लोग कहते थे की जोड़ी सुंदर बनी है बारात में सोलह साल की एक लड़की थी, गुडिया, जीजू की छोटी बहन दीदी की ननद. वे भाई बहन भी एक दूजे से बहुत प्यार करते थे. गुडिया ५.६” लंबी थी, गोरी थी और पतली थी. गोल चहेरे पैर काली काली बड़ी आँखें थी बाल काले और लंबे थे. कमर पतली थी और नितंब भारी थे. कबूतर की जोड़ी जैसे छोटे छोटे स्तन सीने पर लगे हुए थे. मेरी तरह वो बचपन से निकल कर जवानी में क़दम रख रही थी.क्या हुआ, कुछ पता नहीं लेकिन पहले दिन से ही गुडिया मुझ से नाराज़ थी. जब भी मुझ से मिलती तब डोरे निकालती और हु कह कर मुँह मुचकोड़ कर चली जाती थी. एक बार मुझे अकेले में मिली और बोली : तू मनीष हो ना ? पता है ? मेरे भैया तेरी बहन की फाड़ के रख देंगे .ऐसी बालिश बात सुन कर मुझे ग़ुस्सा आ गया. भला कौन दूल्हा अपनी दुल्हन की सील तोड़े बिना रहता है ? अपने आप पर कंट्रोल रख कर मैने कहा : तू भी एक लड़की हो, एक ना एक दिन तेरी भी कोई फाड़ देगा .मुँह लटकाए वो चली गयी .दीदी ससुराल से तीन दिन बाद आई. मैने मा को उसे कहते सुना : डरने की कोई बात नहीं है कभी कभी आदमी देर लगाता है सब ठीक हो जाएगा .अकेली पा कर मैने उसे पूछा : क्यूं री ? साजन से चुदवा के आई हो ना ? कैसा है जीजू का लंड ? बहुत दर्द हुआ था पहली बार ?दीदी : कुछ नहीं हुआ है मनीष. वो गुडिया अपने भैया को छोडती नही, रोज़ हमारे साथ सोती है तेरे जीजू ने एक बार अलग कमरे में सोने को कहा तो रोने लगी और हंगामा मचा दिया.मैं समझ गया, दीदी चुदाये बिना आई थी. पाँच सात दिन बाद वो फिर ससुराल गयी और एक महीने के बाद आई. अब की बार उसे देख कर मेरा दिल डूब गया. उस के चहरे पर से नूर उड़ गया था, कम से कम पाँच किलो वज़न घट गया था, आँखें आस पास काले धब्बे पड़ गये थे. उस का हाल देख कर माताज़ी रो पड़ी. दीदी ने मुझे बताया की वो अब भी कँवारी थी, जीजू ने एक बार भी चोदा नहीं था. मैने पूछा : जीजू का लंड तो ठीक है ना, खड़ा होता है या नहीं ?दीदी : वो तो ठीक है नहाते वक़्त मैने देखा है रात को मौक़ा नहीं मिलता.मैं : हनीमून पर चले जाओ ना .दीदी : तेरे जीजू ने ये भी ट्राय कर देखा. वो साथ चलने पर तुली.मैं : सच कहूँ ? तेरी ये ननद को चाहिए है एक मोटा तगड़ा लंड. एक बार चुदवायेगी तो शांत हो जाएगी.दीदी : तेरे जीजू भी यही कहते हें. लेकिन वो अभी सोलह साल की है कौन चोदेगा उसे ?मैने शरारत से कहा : मैं चोद लूं ?दीदी हस कर बोली : तू क्या चोदेगा ? तेरी तो नुन्नी है चोद ने के लिए लंड चाहिए.मैने पाजामा खोल कर मेरा लौड़ा दिखाया और कहा : ये देख. नुन्नी लगती है तुझे ? कहे तो अभी खड़ा कर दूं. देखना है ?दीदी : ना बाबा ना. सलामत रहे तेरा लंड में : मान लो की मैने गुडिया को चोद भी लिया, जीजू को पता चले की मैने उसे चोदा है तो तेरे पैर ख़फा नहीं होगे ?दीदी : ना, वो भी उन से थक गये हें. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | कहते थे की कोई अच्छा आदमी मिल जाय तो उसे हर्ज नहीं है गुडिया की चुदाई में .मैं : तो, दीदी, मुझे आने दे तेरे घर. ट्राय करेंगे, कामयाब रहे तो सही वरना कुछ नहीं.दीवाली के दिन आ रहे थे. स्कूल में डेढ़ महीने की छुट्टियाँ पड़ी. दीदी ने जीजू से बात की होगी क्यूं की उन का ख़त आया पिताजी के नाम जिस में मुझे दीवाली मनाने अपने शहर में बुलाया था. मैं दीदी के ससुराल चला आया. मुझे मिल कर दीदी और जीजू बहुत ख़ुश हुए. हर वक़्त की तरह इस बार भी गुडिया हून्ह — कर के चली गयीजीजू सिविल कोर्ट में नौकरी करते थे और अपने पुरखों के मकान में रहते थे. मकान पुराना था लेकिन तीन मज़ले वाला बड़ा था. आस पास दूसरे मकान जो थे वो भी पुराने थे लेकिन ख़ाली पड़े थे. शहर के बीच होने पर भी जीजू ने काफ़ी प्राईवसी पाई थी….

कहानी जारी है ………… अगला भाग पढने के लिए पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट …. |

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