चूत तो बड़ी चिकनी मस्त निकली-1

चूत तो बड़ी चिकनी मस्त निकली-1

आज मै किरन एक मजेदार कहानी अपने मस्ताराम Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories नेट के पाठको के लिए ले के आई हूँ आशा करती हूँ की मेरी सभी कहानियो की तरह इस कहानी को भी एन्जॉय करेगे | मैं तो चाहती थी कि वो पहले मुझे चुसे और फिर मेरे बॉडी के सारे अंगों को धीरे धीरे सहलाए और उन्हें किस करे, उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत गांड ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है।
ये सविता भी एक नंबर की चुदक्कड है। शालिनी और प्रदीप के बारे में कुछ बताती ही नहीं। इस से अच्छी तो नताशा ही थी जो पूरे मोहल्ले की खबर बता देती थी। किस लौंडिया का किस लौंडे के साथ चक्कर चल रहा है। फलां ने रात को अपनी औरत को कैसे चोदा कितनी बार चोदा और गांड मारी। मिसेज चौबे ने अपने मियां को कल रात कैसे चोदा ? और स्नेहा आंटी ने पाण्डेय अंकल को पिछले दस दिनों से अपनी चूत मारने तो क्या उस पर हाथ भी नहीं रखने दिया है। पर दो-तीन महीने पहले वो अपने तीन बच्चों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ भाग गई तो इस कम्बख्त सविता को मजबूरी में काम पर रखना पड़ा। पर ये सविता की बच्ची तो कुछ बताती ही नहीं। इसे तो हर समय बस पैसे की ही लगी रहती है। अब कल की ही बात लो एक हज़ार रुपये एडवांस मांग रही थी और साथ में चार दिनों की छुट्टी। तो फिर चार दिनों तक घर का काम और सफाई क्या उसकी अम्मा आकर करेगी ? आज आने दो खबर लेती हूँ।
आप चौंक गई होंगी कि यह सविता, शालिनी और प्रदीप का क्या चक्कर है ?
ओह असल में ये शालिनी नई नई आई है ना। क्या कमाल का फिगर है साली का। मोटे नैन नक्श, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, कमान की तरह तनी भोंहें, कंधारी अनार की तरह गज़ब के स्तन और पतली कमर ! रेशमी बाहें और खूबसूरत चिकनी टांगें। नितम्बों का तो पूछो ही मत और उस पर लटकती काली चोटी तो ऐसे लगती है जैसे कि कोई नागिन लहराकर चल रही हो। एक दम क़यामत लगती है साली। कूल्हे मटका कर तो ऐसे चलती है जैसे इसके बाप की सड़क हो। पूरे मोहल्ले के लौंडो को दीवाना बना रखा है। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |
मेरा तो जी करता है कि इसका टेंटुआ ही पकड़ कर दबा दूँ। साली ने मेरा तो जीना ही हराम कर दिया है। जो पहले मेरी एक झलक पाने को तरसते थे आज मेरी ओर देखते ही नहीं, शालिनी जो आ गई है। मुझे समझ नहीं आता इस शालिनी में ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है ?
अगर सच पूछो तो ३६ साल की उम्र में भी मेरी फिगर बहुत कातिलाना लगती है। बस कमर कोई २-३ इंच जरूर फालतू होगी। मेरे नितम्ब और बूब्स तो उस से भी २१ ही होंगे। मेरे नितम्बों के कटाव तो जानलेवा हैं। जब मैं नाभि-दर्शना काली साडी पहनकर चलती हूँ तो कई मस्ताने मेरे नितम्बों की लचक देखकर गस खाकर गिर ही पड़ते है। पीछे से बजती हुई सीटियाँ सुन कर मैं तो निहाल ही हो जाती हूँ। पिछले ८-१० सालों में तो मैंने इस पूरे मोहल्ले पर एकछत्र राज ही किया है। पर जब से ये शालिनी आई है
मेरा तो जैसे पत्ता ही कट गया।

और ये साला प्रदीप तो किसी की ओर देखता ही नहीं। पहले तो इसकी मौसी इसे अपने पल्लू से बांधे फिरती थी और उसके जाने के बाद ये शालिनी आ गई। ये प्रेम का बच्चा भी तो एक दम प्रदीप बना हुआ है अपनी शालिनी का। आज सुबह जब ऑफिस जा रहा था तो कार तक आकर फिर वापस अन्दर चला गया जैसे कोई चीज भूल आया हो। जब बाहर आया तो शालिनी भी साड़ी के पल्लू से अपने होंठ पोंछते हुए गेट तक आई। हाईई क्या किस्सा-ए-तोता शालिनी है। मेरी तो झांटें ही जल गई। बाथरूम में जाकर कोई २० मिनट तक चूत में अंगुली की तब जाकर सुकून मिला।
मैंने कितनी कोशिश की है इस प्रदीप पर लाइन मारने की, पर साला मेरी ओर तो अब आँख उठा कर भी नहीं देखता। पता नहीं अपने आप को अजय देवगन समझता है। ओह. कल तो हद ही कर दी। जब बाज़ार में मिला तो विश करते हुए आंटी बोल गया और वो भी उस हरामजादी शालिनी के सामने। क्या मैं इतनी बड़ी लगती हूँ कि आंटी कहा जाए ?
मैं तो जल भुन ही गई। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | जी में तो आया कि गोली ही मार दूं ! पर क्या करुँ। खैर मैंने भी सोच लिया है इस प्रेम के बच्चे को अगर अपना प्रदीप बना कर सीताराम नहीं बुलवाया तो मेरा नाम भी निर्मला नहीं।
मैं अभी अपने खयालों में खोई ही थी कि कॉल-बेल बजी। सविता आई थी। वो अपनी टांगें चौड़ी करके चल रही थी। उसके होंठ सूजे हुए थे और गालों पर नीले निशान से पड़े थे। जब मैंने उस से इस बाबत पूछा तो उसने कहा,”ओह ! बीबीजी हमें शर्म आती है !” कहकर अपनी साड़ी के पल्लू को मुंह में लगा कर हंसने लगी।
मुझे बड़ी हैरानी हुई। कहीं मार कुटाई तो नहीं कर दी उसके पति ने ? मैंने उस से फिर पूछा तो उसने बताया “कल रात नंदू ने हमारे साथ गधा-पचीसी खेली थी ना ?” उसने अपना सिर झुका लिया।
“गधापचीसी ? ये क्या होती है ?”
उसने मेरी ओर ऐसे देखा जैसे मैं किसी सर्कस की कोई जानवर हूँ ! और फिर उसने शरमाते हुए बताया, “वो वो. कभी कभी पीछे से करता है ना ?”
“ओह ” मेरी भी हंसी निकल गई। “तू तो एक नंबर की छिनाल है री ? तू मना नहीं करती क्या ?”
“अपने मरद को मना कैसे किया जा सकता है ? मरद की ख़ुशी के लिए वो जब और जैसे चाहे करवाना ही पड़ता है। क्या आप नहीं करवाती ?”
“धत् . बदमाश कहीं की ….? अच्छा तुझे दर्द नहीं होता ?”
“पहले पहले तो होता था पर अब तो बड़ा मज़ा आता है। गधापचीसी खेलने के बाद वो मुझे बहुत प्यार जो करता है ?”
मैं उस से पूछना तो चाहती थी कि उसके पति का कितना बड़ा है और कितनी देर तक करता है पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी। मैंने बातों का विषय बदला और उससे कहा “अच्छा पहले चाय पिला फिर झाडू पोंछा कर लेना !” मैं आज शालिनी और प्रदीप के बारे में तफसील से पूछना चाहती थी इसलिए उसे चाय का लालच देना जरूरी था।
मैं सोफे पर बैठी थी। सविता चाय बना कर ले आई और मेरे पास ही फर्श पर नीचे बैठ गई। चाय की चुस्कियां लेते हुए मैंने पूछा “अरी सविता एक बात बता ?”
“क्या बीबीजी ?”
“ये शालिनी कैसी है ?”
“शालिनी कौन बीबीजी ?”
“अरी मैं उस सामने वाली छमकछल्लो की बात कर रही हूँ !”
“ओह.। वो सुमन दीदी ? ओह वो तो बेचारी बहुत अच्छी हैं !”
“तुम उसे अच्छी कहती हो ?”
“क्यों क्या हुआ ? क्या किया है उसने वो तो. वो तो. बड़ी.. !”
“अच्छा उसकी वकालत छोड़. एक बात बता ?”
“क्या ?”
“ये शालिनी और प्रदीप दिनभर अन्दर ही घुसे क्या करते रहते हैं ?”
“दिन में तो साहबजी दफ्तर चले जाते हैं !”
“ओह ! तुम भी निरी जाहिल हो ! मैं ऑफिस के बाद के बाद की बात कर रही हूँ।”
सविता हंस पड़ी, “ओह. वो. बड़ा प्यार है जी उन दोनों में !”
“यह तो मैं भी जानती हूँ पर ये बता वो प्यार करते कैसे हैं ?”
“क्या ?? कहीं आप उस वाले प्यार की बात तो नहीं कर रही ?”
“हाँ हाँ चलो वो वाला प्यार ही बता दो ?”
“वो तो बस आपस में चिपके ही बैठे रहते हैं !”
“और क्या करते हैं ?” मेरी झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी। यह सविता की बच्ची तो बात को लम्बा खींच रही है असली बात तो बता ही नहीं रही।

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गतांग से आगे ….
सविता हंसते हुए बोली “रात का तो मुझे पता नहीं पर कई बार मैंने छुट्टी वाले दिन उनको जरूर देखा है !” उसने आँखें नचाते हुए कहा।
अब आप मेरी चूत की हालत का अंदाजा लगा सकती है वो किस कदर पनिया गई थी और उसमें तो जैसे आग ही लग गई थी। मैंने अपनी जांघें जोर से भींच लीं।
“अरी बता ना ? क्या करते हैं ?”
“वो बाथरूम में घुस जाते हैं और और ….”
हे भगवान् इस हरामजादी सविता को तो किसी खुफिया उपन्यास की लेखिका होना चाहिए किस कदर रहस्य बना कर बता रही है। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | ओफो अब आगे भी तो कुछ करते होंगे बताओ ना ?”
सविता हंसते हुए बोली “और क्या फिर दोनों कपालभाति खेलते हैं !”
“कैसे ?”
“सुमन दीदी पहले उनका वो चूसती हैं फिर साहबजी उनकी बूब्स को चूसते हैं ….!”
मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और मेरी बूब्स तो अब बस पीहू पीहू करने लगी थी। उसमें तो कामरस की बाढ़ सी आ गई थी। और अब तो उसका रस मेरी गांड के सुराख तक पहुँच गया था। जी तो कर रहा था कि अभी उसमें अंगुली डालकर आगे पीछे करने लगूं पर सविता के सामने ऐसा कैसे किया जा सकता था। मैंने अपनी जांघें जोर से कस लीं।
“फिर ?”
“फिर क्या सुमन दीदी दिवाल की तरफ मुंह करके घोड़ी बन जाती हैं और वो पीछे से आकर उनसे चिपक जाते हैं !”
“फिर ?”
“फिर मैच चालू हो जाता है !”
“कितनी देर लगाते हैं ?”
“कोई आधा घंटा तो लगता ही होगा !”
“हाय राम आधा घंटा ?” मैंने हैरानी से पूछा।
“हाँ और नहीं तो क्या ? आपको कितना लगता है ?”
“चुप छिनाल कहीं की ?”
सविता हंसने लगी। मैंने उस से फिर पूछा “उसका कितना बड़ा है ?”
“अब हमने कोई नापा थोड़े ही है पर फिर भी बित्ते भर का तो जरूर है !”
“बित्ते बोले तो ?”
“हथेली (पंजे) को चौड़ा करके अंगूठे और छोटी अंगुली की दूरी जितना। बस ये समझ लो कि मोटा और लम्बा सा खीरा या बैंगन हो !”
“और रंग कैसा है ?”
“रंग तो गोरा ही लगता है !”
“लगता है मतलब ?”
“ओह, बीबीजी अब मैंने कोई पकड़ कर या अन्दर जा कर तो देखा नहीं। उस चाबी के छेद में से तो ऐसा ही नजर आएगा ना ?”
“और उस शालिनी की चूत कैसी है ?”
“हाईई क्या गोरी चिट्टी एक दम पाँव रोटी की तरह फूली हुई एक दम झकास। साहबजी तो उसे चूस चूस कर लाल ही कर देते हैं।”
“कभी गधापचीसी भी खेलते हैं ?”
“वो तो मैंने नहीं देखा ! क्यों ?”
अब आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकती हैं कि मेरी चूत में कितनी खलबली मची होगी उस समय। अब बर्दाश्त करना बड़ा मुश्किल था। बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारनी ही पड़ेगी। मैंने सोफे से उठते हुए उससे कहा, “अच्छा चल छोड़ तू एडवांस मांग रही थी ना ?”
“हाँ बीबीजी बहुत जरुरत है मेरी भतीजी की शादी है ना अगले हफ्ते ? अब ३-४ दिन मैं नहीं आ पाउंगी !”
“ठीक है तू सफाई कर जाते समय ले जाना !” मैंने कहा और भाग कर बाथरूम में घुस गई और ???
आज तो सविता ने मुझे ऐसी खुशखबरी सुनाई कि मैं तो बस झूम ही उठी। मुझे लगने लगा कि अब तो इस प्रदीप को सीताराम बुलाने का सुनहरा मौका हाथ आ ही जाएगा। शालिनी आज जयपुर जाने वाली थी ना ४-५ दिनों के लिए ? हे भगवान् कुछ ऐसा कर कि ये साली वहीं पड़ी रहे। हे लिंग महादेव कुछ ऐसा कर कि इसकी टांग ही टूट जाए और २-४ महीने बिस्तर से ही ना उठ पाए और मैं और मेरा प्रदीप यहाँ गुटरगूं करते रहें।
आप सोच रही होंगी मैं इस प्रदीप की इस कदर दीवानी क्यों हो गई हूँ ? दरअसल पिछले एक डेढ़ साल से नंदू मगन भाई (मेरे पति) को मधुमेह (शूगर) की तकलीफ़ हो गई है और वो मेरे साथ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। खस्सी तोता बन गए हैं बिलकुल लप्पू-झन्ना।..

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वैसे भी उनका ३-४ इंच का ही तो है। हाथ के अंगूठे जितना मोटा। और बस एक दो मिनट में ही टीं बोल जाते हैं। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | शादी के १-२ साल तक तो मैंने कोई ज्यादा चिंता नहीं की। फिर पता नहीं मेरी किस्मत अच्छी थी कि जीनत पैदा हो गई और उसके प्यार में मैं सब कुछ भूल सी गई। मेरी खूबसूरती की तो पूरी दुनिया कायल थी फिर मोहल्ले के लौंडे लपाड़े तो मुझे देखकर आगे पीछे घुमते ही रहते थे जैसे मैं कोई हूर ही हूँ। मेरा दावा है कि अगर आज भी मैं काली जीन पेंट और खुला टॉप पहन कर निकलूँ तो मेरे मटकते नितम्ब देखकर अच्छे अच्छों का पेंट में ही निकल जाए।
अपने बारे में बता दूं। मेरी उम्र ३६ साल है। लम्बाई ५’ ४” साइज़ ३६-३०-३६, मैं पंजाबी परिवार से हूँ। मेरे पिताजी का सूरत में ट्रांसपोर्ट का काम धंधा है। नंदू भाई भी सूरत से हैं। मेरे ससुराल में सोने चांदी और हीरों का का कारोबार है। एक बार मैं उनके शो-रूम में कानों में पहनने वाली सोने की बालियाँ लेने गई थी तो नंदू ने एक की जगह २ जोड़ी बालियाँ दे दीं। और बोला- बदल बदल कर पहन लेना, आपको बहुत सुन्दर लगेंगी।
पता नहीं क्या बात थी मुझे उसकी बातें बहुत अच्छी लगी और हमने प्रेम विवाह कर लिया। शादी के बाद नंदू ने भरतपुर में ज्वेलरी का शो-रूम खोल लिया। घर में सब तरह का आराम है। मुझे गहनों से तो जैसे लाद ही रखा है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। बस कमी है तो एक अदद लंड की। शादी हुए १०-१२ साल हो गए हैं। नंदू की उम्र ४२-४३ की है। जीनत पैदा होने के बाद मैंने अपनी चूत के नीचे टाँके लगवा लिए थे और अब तो उसका चीरा केवल ३ इंच का ही रह गया है। मैं तो चाहती हूँ कि कोई मोटा और लम्बा सा लंड एक ही झटके में मेरी इस फुदकती चूत में ठोक दे और आधे घंटे तक बिना रुके रगड़ता ही रहे, भले ही उसके २-३ टाँके ही टूट जाएँ, सारे कसबल निकाल दे। पर अब नंदू तो गोबर नंदू ही बन गया है। मैं तो चाहती हूँ कि एक मोटा सा लंड हो जिसे मुंह में लेकर सारी रात चूसती ही रहूँ और फिर उसकी ४-५ चम्मच मलाई गटागट पी जाऊं। पर क्या करुँ नंदू की तो मुश्किल से २-४ बूँदें ही निकलती हैं और वो भी १०-१५ दिनों के बाद। मैं तो इस चूत में अंगुली कर कर के थक गई हूँ और इतना आजिज़ (तंग) आ चुकी हूँ कि कभी कभी सोचती हूँ कि जबरदस्ती किसी को पकड़ कर उसका लंड ही काट खाऊं।
हे भगवान् ! तू कितना दयालु है। नंदू एक हफ्ते के लिए सूरत गए हुए हैं साथ में किट्टी भी अपने दादा दादी से मिलने चली गई है। और खास बात तो यह है कि आज शालिनी भी चली जायेगी तो प्रदीप भी मेरी तरह अकेला होगा। मैं तो यह सोच कर ही रोमांच से भर गई हूँ। जब सविता ने बताया था कि प्रदीप रोज़ रात को शालिनी को फ़ोन करेगा और फ़ोन पर आपस में बातें करते हुए दोनों मुट्ठ मारेंगे तो समझो मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गई थी। एक बड़ा राज़ कितनी आसानी से मेरे हाथ लग गया था। आज मुझे लगा कि इन नौकरानियों को १००-२०० रुपये फ़ालतू या एडवांस देकर कितना बड़ा फायदा उठाया जा सकता है। सविता मेरी जान तेरा बहुत बहुत शुक्रिया।
और फिर मैंने रात के टिच्च १० बजे अपने मोबाइल से प्रदीप को फ़ोन लगाया। मैंने तो तुक्का ही मारा था। अब मुझे क्या पता था कि वो सचमुच ही मुट्ठ मार रहा था उस समय। बेचारे की हालत ही पतली हो गई थी। मैंने भी ऐसे ऐसे सवाल पूछे कि उसका तो सिर ही चकरा गया होगा। वो तो मेरा नाम ही पूछता रह गया। जब मैंने उस से पूछा कि उसने
शालिनी की कभी गांड मारी है?

तो उसने शरमाते हुए बताया कि वो तो बहुत चाहता है पर सुमन (शालिनी) नहीं मानती।
चूतिया है साला एक नंबर का। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | मैं तो कहती हूँ कि ऐसी मटकती गांड तो किसी भी कीमत पर मारे बिना नहीं छोड़नी चाहिए। फिर उसने मेरे साथ साथ ही मुट्ठ मारी और हम दोनों एक साथ ही झड़े थे। उसने मेरा नाम जानने कि बहुत कोशिश की पर मैंने फ़ोन काट दिया था। वो तो बस अंदाजा ही लगता रह गया होगा। मैं जानती हूँ वो दिन भर रात वाली बात को याद करके अपने लंड को सहलाता रहा होगा।
आज तो दिन भर मैं रात की तैयारी में ही लगी रही। सबसे पहले अपनी मुनिया को चकाचक बनाया और फिर पूरे शरीर पर सविता से मालिश और उबटन लगवाकर, गुलाबजल मिले गर्म पानी से स्नान किया। आज मैंने अपनी शादी वाला जोड़ा पहना था। गले में मंगलसूत्र, हाथों में लाल रंग की चूड़ियाँ, बालों में गज़रा और आँखों में कज़रा। पांवों में पायल और कानों में सोने की छोटी छोटी बालियाँ जैसी मैंने चूत की दोनों पंखुडियों पर भी पहनी हुई हैं। मैंने हाथों में मेंहंदी लगाई और पावों में महावर। मैं तो आज पूरी दुल्हन की तरह सजी थी जैसे कि मेरी सुहागरात हो।
पूरे कमरे में गुलाब की भीनी भीनी खुशबू और पलंग पर नई चादर, गुलाब की पंखुडियां पूरे बेड पर बिछी हुई और ४-५ तकिये। साइड टेबल पर एक कटोरी में शहद और गुलाबजल, ५-६ तरह की क्रीम, तेल, वैसलीन, पाउडर आदि सब संभाल कर रख दिया था। एक थर्मोस में केशर, बादाम और शिलाजीत मिला गर्म दूध रख लिया था। आज तो पूरी रात हमें मस्ती करनी थी। और आज ही क्यों अब तो अगले ४ दिनों तक उस प्रदीप को पूरा निचोड़ कर ही दम लूंगी। साले ने मुझे बहुत तड़फाया है गिन गिन कर बदला लूंगी।

कहानी जारी रहेगी … आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए कहानी की सुरुवात अच्छी है तो कमेंट करना ना भूले |

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