कोई मेरी बीवी को चोद दो

कोई मेरी बीवी को चोद दो

Chudai Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex हाय, मैं रतलाम से हूँ और मेरा नाम विनोद हैं. मैं गे नहीं हूँ लेकिन मुझे अपनी बीवी को पराएँ मर्दों से चुदवाते देख के बड़ा मजा आता हैं. मैं भी उसे चोदता हूँ लेकिन जब वो किसी और से चुद रही हो तो मुझे मूठ मारना बड़ा अच्छा लगता हैं. मेरी बीवी को पहले यह सब से बहुत घिन आती थी लेकिन मैंने जब उसे देसी ककोल्ड के कुछ वीडियो दिखाएँ तो वो धीरे धीरे मानने लगी. उसका नाम मालिनी हैं और आज मैं आप को मालिनी और गोविन्द की चुदाई की कहानी बताऊंगा. गोविन्द हमारा नौकर था जिसने कई बार मालिनी को मेरे सामने चोदा लेकिन यह कहानी उसकी पहली चुदाई की हैं. तो चलिएँ मैं आप को उस दिन से ही बताऊँ जब गोविन्द नौकरी के लिए मेरे घर आया. उसे मेरे दोस्त अनूप ने भेजा था.

मैं अख़बार पढ़ रहा था, सन्डे का दिन था और गोविन्द आया.

गोविन्द: साहब मुझे अनूप भैया ने भेजा हैं. उन्होंने कहा आप को घर के काम के लिए आदमी चाहियें.

मैं: हाँ चाहियें तो, तुम कहा से हो.? क्या पगार लोंगे और क्या क्या काम कर लोंगे?

गोविन्द: साहब मैं धुलिया से हूँ, पगार अनूप भाई जो कहें आप वो दे देना. और काम आप जो भी कहोंगे कर लूँगा.

सही बंदा था. उसकी आखरी लाइन मुझे सब से अच्छी लगी की मैं जो बोलूँगा वो वोह कर लेगा. ऐसे ही लड़के की तलाश थी मुझे जो जवान हो क्यूंकि जवान लड़के भाभियाँ चोदना बहुत पसंद करते हैं. मैंने उस से पूछा, “शादीसुदा हो या कुंवारे हो?”

गोविन्द: कुंवारा हूँ साहब.

मेरी बीवी मालिनी के लिए नया लंड आया
और भी अच्छी बात थी क्यूंकि कुंवारे लौंडे चोदने का मजा और भी जोर से दे सकते थे. मेरी बीवी मालिनी किचन के दरवाजें के पास खड़ी गोविन्द को देख रही थी, उसे भी पता था की मैं नौकर को उसके उपर चढाने वाला ही हूँ. इसके पहले के नौकर को मैंने मालिनी के हवाले किया था लेकिन वो हरामी अब ब्लेकमेलिंग पे उतर आया था इसलिए उसे अलविदा कहना पड़ा. मैं गोविन्द को काम बता दिया और उसे 3 हजार रूपये महिना के हिसाब से नौकरी रख लिया. वो बोला की कल आऊंगा और चला गया. मालिनी को इशारा कर के मैंने बुलाया.

मैं: अपनी गांड जरा मटका के चलना दो तिन दिन, कबूतर नया हैं इसलिए भडकाओ उसे थोडा.

मालिनी: अरे अब बस भी करो यह सब. मुन्नी चार साल की हो गई हैं किसी दिन देख ना लें हमें…!

मैं: अरे कुछ नहीं होंगा डार्लिंग. मुझे इसमें मजा आता हैं, और वैसे भी कंडोम के बिना कहाँ कुछ करना हैं हमें.

दुसरे ही दिन से मालिनी गोविन्द के आगे गांड मटका के चलने लगी. वो जानबूझ के उसके आगे झुक के अपने बड़े बड़े चुंचे उसे दिखाती थी और अगर उसका ध्यान इधर उधर हो तो उसके एकदम पास से निकलती थी. मैं जानता था की गोविन्द मालिनी को सोच के थोड़े दिन मूठ जरुर मारेंगा, आखिर इंसान हैं वो बेचारा. मैं भी उसके ऊपर नजर रखे था और देख रहा था की वो अब मालिनी को कुतियाई नजर से देख रहा था. एक दो बार मैंने उसे मालिनी की मटकती गांड निहारते देखा. यह सब देख के एक हसबंड को वैसे मजा नहीं गुस्सा आना चाहियें. लेकिन पता नहीं क्यूँ मुझे यह सब पसंद हैं और मैं उसे देख के उत्तेजित हो रहा था. मुझे बीवी को चोदता देख के एक नशा आता हैं और उसी नशे के बाद मैं उसे चोद पाता हूँ. गोविन्द का लोहा गरम था.

शाम को मैंने उसे अपने कमरे में बुलाया. उसके आते ही मैंने दरवाजा बंध किया.

मैं: गोविन्द क्या मालिनी ने तुम से कुछ बात की हैं…?

गोविन्द: किस बारे में बाबू जी?

मैं: तुम उसे अजीब तरीके से देखते हो, क्या बात हैं?

उसका चहरा पिला पड़ रहा था. वोप घबरा गया था और उसकी हलक उपर निचे हो रही थी.

गोविन्द: क्या बात कर रहे हो आप बाबू जी, मेरी कुछ समझ मैं नहीं आ रहा हैं. भाभी हमारे लिए माँ समान हैं.

मैं हंस पड़ा उसकी इस डायलोग बाजी से.

मैं: लेकिन अब वही माँ तुम से चुदवाना चाहती हैं.

गोविन्द के चहरे पे एक हजार सवाल थे उस वक्त. मैंने इसके कंधे पे हाथ रख दिया और कहा, “देखो गोविन्द मालिनी की इच्छा हैं की तुम उसे चोदो. और तुम अगर उसे चोदना चाहों तो मुझे कोई ऐतराज नहीं हैं.”

गोविन्द: बाबूजी माँ कसम हमने भाभी को कभी नहीं छेड़ा हैं. आप को गलतफहमी लगी हैं कुछ.

अब इस हरीशचन्द्र को क्या समझाऊं साला. मैंने उस से कहा, “अरे घबराओ मत, तुम चाहों तो उसे चोद सकते हों. मालिनी खुद चाहती हैं तुमसे चुदवाना.”

गोविन्द अब थोडा आश्चर्य से मुझे देख रहा था. उसे शायद अभी भी डर था की मैं उसकी पिटाई करूँगा. मैं दरवाजा खोला और मालिनी को आवाज लगाई. दूसरी ही मिनिट वो अपनी पिली साडी में अंदर आई. मैंने उसे देख के कहा, “तुम ही गोविन्द को कहो की तुम उस से चुदना चाहती हों. वो डर रहा हैं.”

गोविन्द को कहा की तुम मेरी बीवी को चोद दो
मालिनी कुछ नहीं बोली और उसने सीधे अपना हाथ बढ़ा के गोविन्द के लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया. मेरी बीवी की यही बात मुझे बहुत पसंद हैं, वो सीधे पॉइंट की बात पे आ जाती हैं. गोविन्द अभी भी मेरी और देख रहा था. मैं उसे अपनी आँख मार के मालिनी की तरफ आँखों से इशारा किया. उसकी हिम्मत अब खुल गई और उसने अपने हाथ से मालिनी को गले लगा लिया. गोविन्द के हाथ मालिनी की बड़ी फैली गांड पे थे जिसे वो दबा रहा था. मैंने दरवाजे को स्टोपर लगा दी और एक साइड में आ गया. मालिनी ने मेरी और देखा और फिर गोविन्द की और. गोविन्द अभी भी जैसे की समझ नहीं पाया था की साला हो क्या रहा हैं. मालिनी अब अपने घुटनों के ऊपर जा बैठी और उसने गोविन्द के लंड को बहार निकाला. अरे वाह मेरी बीवी को चोद सकें ऐसा मजबूत लंड था गोविन्द के पास में. मालिनी ने उसकी पेंट की क्लिप खोल दी और गोविन्द की गांड के ऊपर से पेंट को निचे सरका दी. गोविन्द ने अंदर कोई चड्डी नहीं पहनी थी और उसका लंड अब टाईट हो के खड़ा था मालिनी के मुहं के सामने. मालिनी ने अपना मुहं खोल के उसके सुपाडे को चूम लिया. गोविन्द दो कदम पीछे हटा और उसने मालिनी के लिए मस्त जगह बना दी.

मालिनी अब लंड को मुहं में ले चुकी थी. गोविन्द भी अब मेरी बीवी को चोद देने के ख़याल से उत्तेजित लग रहा था. उसका डर अब दूर हो गया था. उसने अपने हाथों से अपनी शर्ट के बटन खोल दिए. उसकी चौड़ी छाती देख के मालिनी उसके लंड को अपने मुहं में जोर जोर से चला रही थी. गोविन्द की आँखे बंध हो गई थी और वो मालिनी के मुहं को चोदने के लिए उतावला लग रहा था. उसकी गांड आगे पीछे हो रही थी और वो अपने लंड को मालिनी के मुहं में ठोक रहा था. अब इधर मैंने भी अपनी पेंट उतार दी. बीवी को चोद कार्य में तल्लीन देख के मेरा लंड भी खड़ा हुआ था. मैं अपने खड़े लंड को ले के मालिनी के पास गया. उसने गोविन्द के लंड को चूसते हुए मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसे हिलाने लगी. गोविन्द मेरी और देख के होंठो में मुस्कुरा रहा था. शायद वो मन में सोच रहा था की यह कैसा आदमी हैं जो बीवी को चोदने के लिए दुसरो को कहता हैं. लेकिन मुझे ही पता था की बीवी की चुदाई देख के कैसा मजा आता हैं. मालिनी मेरे सुपाडे को अपने हाथ से रगड़ रगड़ के हिला रही थी.

गोविन्द के लंड को 5 मिनिट जितना चूसने के बाद मालिनी अब खड़ी हुई. मैंने अपने हाथ से उसकी पिली साडी को खोला और बेड में फेंका. गोविन्द ने ब्लाउज के बटन खोले और ब्रा उतारने का काम हम दोनों ने मिल के किया. मालिनी ने अपने पेटीकोट को खोलने के लिए नाड़ा खोला और उसे निचे खिंच दिया. उसकी झांटो वाली चूत देख के गोविन्द का लंड जरुर फनफना उठा होंगा. मालिनी ने गोविन्द के चिकने लंड को पकड के जोर जोर से हिलाया और वो जाके बेड में लेट गई. अब मैंने गोविन्द को कंधे से पकड के बेड की तरफ धकेला जैसे मैं उसे कह रहा था की जाओ मेरी बीवी को चोद डालो. गोविन्द ने बेड पे चढ़ के अपने लंड को चूत के अंदर पेलना चाहा तभी मालिनी ने उसे हाथ के इशारे से रोक दिया. उसने मेरी और देखा और मैं समझ गया की यह ब्रेक क्यूँ लगी थी. मैंने अपनी अलमारी से कंडोम निकाला और खुद खोल के गोविन्द के लंड के ऊपर पहना दिया. उसका लंड सच में काफी गरम हो चूका था.

मालिनी ने अपने हाथ में उस जवान लंड को पकड़ा और अपनी चूत की तरफ खिंचा. गोविन्द ने अपने हाथ से मालिनी के चुंचे पकडे और उन्हें मसलने लगा. मैं अपने लंड को हिला रहा था और उन दोनों को चोदते हुए देख रहा था. मालिनी ने लंड को अपनी चूत के छेद पे सेट किया और बोली, “मारो धक्का, अभी सही जगह बैठा हैं.”

गोविन्द की गांड हिली और उसका लंड चमड़ी को चीरता हुआ मेरी बीवी की चूत में जा घुसा. मालिनी ने अपने हाथ गोविन्द की गांड पे रख दिए और वो उसे आगे पीछे होने में मदद करने लगी. गोविन्द की गांड हिलने लगी और वो मेरी बीवी को चोदने में व्यस्त हो गया. मैंने अपने लंड को अब जोर जोर से हिलाना चालू कर दिया था. मालिनी ने मुझे देखा और मैं उसके पास जा के खड़ा हो गया. मालिनी ने गोविन्द से चुद्वाते हुए मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया. वो मेरे लंड को हिलाने लगी. मस्त सिन था यह गोविन्द मेरे सामने मेरी बीवी को चोद रहा था और मेरी बीवी मेरा लंड हिला रही थी. मैंने मालिनी का मुहं खोल के अपना लंड उसके मुहं में डाल दिया. इधर गोविन्द के झटके एकदम तीव्र हो गए थे और वो बहुत जोर जोर से मालिनी की चूत में अपना लौड़ा अंदर बहार कर रहा था. मैंने भी अपने लंड को मालिनी के मुहं में मारना चालू कर दिया था.

कुछ 5 मिनिट मालिनी को ऐसे ही चुदवाता देख के मेरा लंड अपना पानी छोड़ बैठा. मालिनी ने मेरा माल पी लिया और वो अब केवल गोविन्द के ऊपर ध्यान दे रही थी. उसने गोविन्द को पूछा, “कभी किसी को कुतिया बना के चोदा हैं तुमने?”

गोविन्द: नहीं भाभी.

मालिनी: आ जाओ मैं तुम्हें आज वो मजा भी देती हूँ.

इतना कह के मालिनी ने गोविन्द के लंड को पकड के अपनी चूत से बहार निकाल दिया, फिर वो बेड में ही उलटी हो गई. मैं उसके पास जा के उसके कूल्हों को फाड़ा. मालिनी की गीली चूत का छेद मस्त दिख रहा था. एक हाथ से कूल्हों को पकडे रखा और दुसरे हाथ से मैं चिकने कंडोम को पकड के चूत के छेद पे सुपाडे को सेट किया. गोविन्द ने एक और झटका दिया और अपने लंड को चूत के अंदर पेल दिया. मेरी बीवी को चोद देने का कार्य फिर से चालू हो गया. अब मालिनी अपनी चौड़ी गांड को और भी जोर जोर से हिला रही थी और गोविन्द के मुहं से आआआ आह्ह्ह की आवाजें निकलने लगी. मालिनी अपनी गांड को गोविन्द की जांघो से टकरा रही थी और जोर जोर से चुद रही थी. उसने गोविन्द को उकसाने के लिए कहा, “गोविन्द मुझे और भी जोर जोर से चोदो ना. अपनी इस भाभी की चूत को मार दो आज जोर जोर से.”

इतना सुनते ही गोविन्द जैसे की सनक गया. उसने मालिनी की गांड पकड़ी और लग गया चुदाई के झटको की तीव्रता बढाने. उसका लंड अब फचफच की आवाज कर के मालिनी को मस्त चोद रहा था. मालिनी भी ऐसे ही अपनी गांड उठा उठा के इस नौकर को मजे दे रही थी. गोविन्द लम्बा टिक नहीं पाया. उसने दो झटके लगाये और फिर वो मालिनी की गांड के ऊपर ही लुडक गया. मालिनी की चूत के अंदर उसने वीर्य छोड़ा था जो कंडोम की छतरी की वजह से निकल नहीं पाया. मालिनी ने उसके लंड को अपनी चूत से धीरे से बहार किया. गोविन्द वही बेड पे लेट गया. मेरा लंड अब टाईट हो गया था फिर से. बीवी की चुदाई देख के मैं भी उतेजित हो चूका था. मालिनी की चूत में मैंने अपना लंड बिना कंडोम के डाला और उसे चोदने लगा. अभी तक गोविन्द मेरी बीवी को चोद रहा था और अब वो उसे मुझ से चुदता देख रहा थ. मालिनी की मस्त चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में ही निकाल दिया.

यह थी मेरी बीवी और नौकर की पहली चुदाई. उसके बाद तो गोविन्द उसका फेवरेट चुदक्कड हो गया था. गोविन्द हर दुसरे तीसरे दिन मेरे सामने ही मालिनी को चोदता हैं. अब तो वो अक्सर उसकी गांड में भी अपना लंड देता हैं. मैं उसे तिन हजार के ऊपर 1500 रूपये और देता हूँ अपनी बीवी की चुदाई करने के

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