किंजल आंटी की चूत का कचुमड

किंजल आंटी की चूत का कचुमड

नमस्कार दोस्तों,
मेरा नाम संदीप सिंह है और मैं पिछले कई सालों से Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories हिंदी सेक्स कहानियां मस्तराम डॉट नेट पर पढता हुआ अपना और ओरों का दिल भी बहलाता हुआ आ रहा हूँ | इसके पहले मै गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर कहानिया लिखता था | आज मैं आज अपनी एक रिश्तदार में लगने वाली किंजल आंटी की कहानी बताने जा रहा हूँ जिनपर मैं पहली बार में ही अपना दिल खो बैठा था | उन आंटी का अक्सर मेरे घर आना जाना लगा रहता था क्यूंकि वो मेरी माँ की अच्छी ही दोस्त थी | आंटी कभी – कभार अपनी तिरछी नज़रों से मुझे देखकर घास भी डाल दिया करती थी | इसमें कोई हैरानी की बात नहीं क्यूंकि मुश्किल से आंटी मुझसे २ साल भी बड़ी होंगी | आंटी का पति अक्सर घर के बहार ही किसी ना किसी काम से लगा रहता था जिससे मैं भी किंजल आंटी से कभी मौका पाकर थोड़ी बहुत बात कर लिया करता |
एक दिन मैंने किंजल आंटी को अपने घर के बाहर झाड़ू लगते देखा उन्होंने उस वक्त मैक्सी पहनी हुई थी और अंदर ब्रा भी नहीं पहना हुआ था जिसके कारण जब वो झुकी ही हुई थी मुझे उनके तरबूज जैसे लटकते हुए चुचे साफ़ दिखाई दे रहे थे | मैं वहीँ खड़े होकर बस आंटी के चुचों पर नज़र गडाये खड़ा था तभी आंटी एकदम से उप्पर उठी और उन्होंने मुझे देख लिया | मैं कुछ कहने लायक ना था बस अपना मुंह नीचे किये खड़ा था | तभी आंटी मेरे पास आई और बोली,
आंटी – क्यूँ रे छोरे . . बड़ी जवानी फुट रही है . . ! !
अब मेरे लंड नीचे से खड़ा हो रहा था और उसका साफ़ उभरा हुआ उभार मेरी पैंट पर दिखाई दे रहा था | आंटी ने पहले घूर के मेरे लंड को देखा और तभी कहा,
आंटी – क्यूँ . .पानी नहीं पिएगा . ??
मैं कुछ ना कह सका और आंटी के साथ चुप – चाप उनके घर के अंदर चल पड़ा | आंटी ने तभी मुझे अपने अंदर वाले कमरे में ले जाते हुए बोली,
आंटी – उम्र कितनी है रे तेरी . .?
मैं – २१ साल . . ! ! (मुस्कुराते हुए)
तभी आंटी ने मेरे लंड को चड्डी के उप्पर से ही पकड़ते हुए कहा,
आंटी – इसीलिए सोचूं . . एक बार में ही मुझे क्यूँ भा गया ! !
मैं आंटी से हाथों से स्पर्श से अपने अंदर उठ रहीं जलन देने वाली आग को ना रोक सका और अपना एक हाथ को उनके चुचों पर रखते हुए उनसे लिपट कर हांफने लगा | मेरी लंबी सांसें कुछ अंदर चल रहे डर की वजह से हो रही थी तभी आंटी ने मुंह आगे बढ़ाते हुए मेरे होटों पर चूम उठीं | अब बस वही पल काफी था मरे अंदर के अश्लील शेर को जगाने के लिए | मैंने किंजल आंटी को पीछे से अपने बाहों में भींच लिया मेरा लंड उनकी गांड के उभार को चूमने लगा | मैंने आंटी के पूरी साडी को एक बार में खोल दिया और किसी कुत्ते की तरह अपने लंड को उनके गांड के पीछे लिपटकर चोदने का भाव लेने लगा | आंटी ने मुझे अंदर लेजाकर अपने सोफा पर बिठा दिया और खुद भी वहीँ पर लेट गयी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
मैंने अब आंटी के उन मोटे गुदगुदे चुचों को भर – भर के दबा के चूसा और कुछ देर बाद मैंने अब अपना निशाना कहीं और साधना शुरू किया | आंटी केवल अब अपनी पैंटी में रह गयीं थी जिसे मैंने निकालते हुए उनके गुलाबी चुत में अपनी उँगलियों को अन्दर – बाहर करना शुरू कर दिया | मेरी चार उँगलियाँ कुछ देर में बड़ी तेज़ी से आंटी की चुत को चीरती जा रही थी तभी एक दम से आंटी की चुत से गाढ़ा पानी निकल पड़ा | अब आंटी ने मुझे वहीँ पर लिटाया और मेरे उप्पर चढ़कर लंड को मस्त में थूक लगाके चूसते हुए फिर से अपनी चुत में ऊँगली देने लगीं | जब मैं भी अच्छे से गर्म होकर पूरी तरह से तन चूका था और लिटा दिया आंटी को और खोल दिया उनकी टांग नाम की पंखुड़ियों को | मैंने लंड को पकड़ उनकी चुत में ज़ोरदार झटकों से अंदर – बहार करते हुए पूरा का पूरा घुसा दिया |
आंटी भी मज़े में और उत्तेजित ढंग से कामुक आवाजे निकालने लगी और मैं अपनी आंटी रांड को ज़बरदस्त धक्कों के साथ पेलता रहा | कुछ देर बाद मैं भी थक – हार कर वहीँ लेट गया जिसपर आंटी उठी और मेरे लंड को अपने हाथ से मसलते हुए अपने मुंह बार के चूसने लगी | मुझे ऐसा लगा रहा था जैसे जन्नत से कोई अप्सरा मेरे लंड को सहला रही हो | काफी देर तक आंटी झुकी हुई मेरे लंड को चूसती रही और मैं उनके चुचों को भींचता रहा और अचानक पूरा माल आंटी के मुंह में निकल पड़ा जिसे वो पूरा अंदर ले गयीं | उस दिन के बाद अब आंटी का मैं रंडवा बन चूका था और वो जब भी मेरे घर में आती तो मेरी मम्मी से छुपते हुए मुझे कोने में लेकर पागल रांड की तरह चूमने और चूसने लग जाती और मेरे मज़े तो बिना किसी शक्क के थे ही | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | एक दिन मेरे घर में कोई नही था मै अकेला था और आंटी को पता था की आज घर पे कोई नही रहेगा | औंर आंटी मुझे बिना बताये घर आ गयी और मै भी खुश हो गया आंटी ने आते ही अपनी साड़ी और साया निकल दिया ब्रा और पैंटी में क्या लग रही थी साली फिर मै क्या बस टूट पड़ा और उनकी पैंटी निकल दिया और बेड पे लिटा के उनकी दोनों टागे ऊपर उठा दिया और चूत में मुह लगा दिया और चाटने लगा जब उनकी गांड में जीभ लगता तो उनके मुह से कामुक आवाजे आने लगती उनकी चूत से लगातार पानी निकलता जा रहा था | उनका चेहरा एकदम रेड हो चूका था ज्यादा देर ना करते हुए उन्होंने मुझे अपने ऊपर खीच लिया और मेरा लंड अपनी चूत के अंदर घुसा ली और वो निचे से घक्के देने लगी मै भी धक्के मारने लगा करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद मै झड़ने वाला था मैंने बोला आंटी मै जाने वाला हूँ इतने में आंटी ३ बार झड चुकी थी आंटी ने कुछ नही बोला और मै धक्के मारते मारते उनकी चूत में ही झड़ने लगा उन्होंने मुझे कस के पकड़ लिया मै थोड़ी देर तक उनके ऊपर ही पड़ा रहा और फिर शाम को मम्मी पापा आने वाले थे | उस दिन हम करीब ३ बार चुदाई किये अब जब भी टाइम मिलता है या तो आंटी मेरे घर में आ जाती है या मै उनके घर में चला जाता हूँ और खूब चुदाई करता हूँ | दोस्तों कहानी कैसी लगी जरुर बताना | अगली कहानी आप लोगो के विचार आने के बाद लिखुगा | धन्यवाद |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *