और अपना लण्ड पेलता रहा आंटी

और अपना लण्ड पेलता रहा आंटी

यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने अंकल के वहाँ चला गया जो वड़ोदरा में रहते हैं। उनका तीन लोगों का परिवार है, अंकल-आंटी और उनका 7 साल का बेटा। यह कहानी मेरी आंटी के बारे में है।
मेरी आंटी का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं ! मेरी और आंटी की बहुत जमती थी और अंकल एक बिजनेसमैन हैं, अंकल मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे।
एक दिन अंकल को किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ा। उस रात मैं और आंटी बैठे थे।
मेरी और आंटी की अच्छी बनती थी पर मैंने कभी आंटी को उस नजर से नहीं देखा था पर उसके इरादे आज मुझे साफ नहीं लग रहे थे। फ़िर भी हम बैठे थे। वो मुझे बोल रही थी- पराग अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी !
मै- क्या कहा आपने?
आंटी- शादी बुद्धू शादी।
मै- आंटी, अभी तो मेरी पढ़ाई चल रही है?
आंटी- तो क्या शादी के बाद नहीं पढ़ सकते क्या?
दोस्तो, मैं बता दूँ कि हमारी बिरादरी में शादी बहुत जल्द हो जाती है।
मै- हाँ, पढ़ तो सकते है लेकिन !
आंटी- लेकिन क्या पराग?
मेरे जवाब देने से पहले आंटी ने फ़िर पूछा- देख पराग, तेरी पसन्द में कोई और हो तो बता दो वरना !
मै- नहीं, मुझे कोई पसन्द नहीं है।
फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या?
आंटी- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ।
मैं- पर वो तो तुम्हारी बहन है। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | पर दोस्तो, मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि काजल दिखने में इतनी खूबसूरत है कि पूछो ही मत ! स्वर्ग की अप्सरा जैसी।
आंटी- तो क्या हुआ? अगर मेरी बहन तुम्हारी बीवी बने?
मै- पर अभी तो मैंने कमाना भी चालू नहीं किया और बड़ी प्रोब्लम तो यह है कि शादी के बाद क्या करते हैं, मुझे पता नहीं?
आंटी- ओेई हरिचन्द्र, तेरे पापा का अच्छा बिजनेस चल रहा है तेरे अंकल का भी अच्छी तरह से चल रहा है तो क्या मेरी बहन भूखी रहेगी तेरे घर में?
मैं- यह बात भी ठीक है !
इतने में आंटी बोली- तेरे दूसरे प्रोब्लम में मैं तेरी मदद कर सकती हूँ !
मै- वो कैसे?
आंटी- मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी।
और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर आंटी सेक्स सिखाना चाहती थी।
बातों ही बातों में रात के 12 बज गये तो मैंने कहा- चलो सो जाते हैं।
तो आंटी ने कहा- सीखना नहीं है?
“मैं कुछ समझा नहीं?”
तो अब आंटी ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है !
मै- यह आप क्या कह रही हैं?
मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज आंटी मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था।
और उसी ख्याल में मेरा लन्ड कब खड़ा हो गया पता ही नहीं चला। अब मैं भी गर्म हो गया था और आंटी तो जैसे ज्वाला की तरह गर्म थी।
तो आंटी ने मुझे अपने बेडरूम की तरफ़ इशारा किया, मैं समझ गया कि लाईन साफ़ है। मैं जब अन्दर गया तो आंटी ने मुझे अपनी ओर जोर से खींच लिया और मुझे पूरे बदन पर चुम्बन करने लगी।
मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था क्योंकि पहले कभी किसी लड़की ने मुझे छुआ तक नहीं था।
अब वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था। अब तक मैं ऐसे ही खड़ा था। अगले ही मिनट आंटी बोली- पराग, मैं तुम्हें पसन्द नहीं हूँ क्या? मै- नहीं आंटी, आप तो सुन्दर हैं।आंटी- तू झूठ बोल रहा है ! अगर मैं तुम्हें पसन्द होती तो अब तक तूने मुझे चोद दिया होता !
आंटी तीर पर तीर छोड़ रही थी और मेरे सब्र का बान्ध टूट रहा था। पर वो मेरी आंटी थी तो मैं उसे चोदना नहीं चाहता था लेकिन मैं भी जवान था, जल गया आंटी की ज्वाला में ! और मैं उसके ऊपर चढ़ गया लेकिन वो मेरे इस वार के लिए तैयार नहीं थी। फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी। आग दोनों तरफ से लगी हुई थी। अब आंटी ने मेरे शर्ट के बटन खोलने चालू किए और मुझे एक नशा सा छाने लगा। अब मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा था पर आंटी तो पूरे मूड में थी।
आंटी ने मेरी पैन्ट को नीचे कर दिया अब मैं सिर्फ अन्डरवीयर मैं आंटी के सामने खड़ा था पर अब मेरी बारी थी आंटी के कपड़े उतारने की | तो मैंने आंटी के ऊपरी वस्त्र उतारने लगा तो मैं थोड़ा डर रहा था, मैंने धीरे से उसके स्तन पर हाथ रख दिया तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया, मैंने उसका ऊपरी वस्त्र निकाल फेंका। अब उसके दोनों सन्तरे मेरे हाथों में थे तो मैं उनसे खेलने लगा। आंटी बोली- इनसे खेलते रहोगे या कुछ और करने का भी इरादा है?
तो मैंने आंटी से कहा- वैसे तो मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ मेरी जान !
इस बार आंटी थोड़ा शरमा गई तो मैंने कहा- शरमा क्यूँ रही हो?
आंटी मजाक करते हुए- तुम तो मेरे बेटे जैसे हो।
मैं- हाँ, तो आज बेटे से ही चुदवा लो !
आंटी- बड़ा आया चोदने वाला ! मैंने देखा है तुम्हारा लौड़ा ! छीः ! मुझे तो तुम्हारे लौड़े को लौड़ा कहने में भी शरम आ रही है।आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं- क्यूँ, आपने कब देखा?
आंटी- तो क्या हुआ अगर मैंने तेरा लण्ड नहीं देखा तो आज तो जी भर कर देखूँगी और…!!
इतना कह कर वो मेरे लण्ड पर टूट पड़ी। मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया मेरे मुँह से आह ह्ह..अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य आंटी के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला !
पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी। थोड़ी ही देर बाद आंटी को कस कर पकड़ कर अपना लण्ड आंटी की चूत के मुँह पर रख दिया और एक झटका लगाया तो मेर लण्ड आंटी चूत में पूरा समा गया।
दोस्तो, इस अनुभव का मैं विस्तार नहीं कर सकता !
थोड़े शब्दो में कहूँ तो ”स्वर्ग भी कुछ नहीं है इस चूत के आगे !”
पर मुझे लगा कि आंटी को कुछ परेशानी थी, उसकी आँखों से पानी निकल रहा था तो मैं रूक गया और आंटी को किस करने लगा और आंटी से पूछा- आंटी आपको बहुत दर्द हो रहा है?
आंटी- हाँ, बहुत हो रहा है, इस तरह से कोई चोदता है अपनी आंटी को?
मै- आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?
आंटी- हाँ, मादरचोद चोद दे मुझे मसल दे मेरी जवानी को…
अब मैं आंटी को जोर-जोर से चोदने लगा, आंटी दर्द के मारे मुझसे कस कर लिपट गई और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए। आंटी बुरी तरह चिल्ला रही थी पर मैंने उस पर और उसकी चूत पर बिल्कुल रहम नहीं किया और जोर-जोर से अपना लण्ड पेलता रहा आंटी की चूत में।
आंटी चिल्ला रही थी और बोल रही थी- पराग ! और जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है, अओह… पराग चोद दो मुझे ! आज मत छोड़ना ! आह…आ आह ! की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। कितनी सेक्सी आवाज थी दोस्तो ! मैं तो पूरी ताकत से चोद रहा था। इतने में सब खत्म हो गया। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैंने 20 मिनट चुदाई करके आंटी की चूत में ही झड़ गया क्योंकि मुझे पता था की आंटी की नसबंदी का ओपरेशन हो चुका है। इसलिए कोई प्रोब्लम नहीं थी। हम दोनों पर एक मदहोशी सी छाने लगी। इस दौरान आंटी तीन बार झड़ गई थी तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, उसकी आँखें नशीली हो गई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था, अब वो मुझे किस कर रही थी और मेरी छाती को भी चूम रही थी।
इतना सब होने के बाद रात के 3 बज गए, मैं और आंटी पूरी रात साथ बिना कपड़ों के ही सो गए।
सुबह जब मैं उठा तो आंटी ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया आंटी के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं आंटी के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था।
मैं चाय लेकर कम्रे में आ गया पर मैं अपने आप को रोक नहीं सका, मैं चाय पी करके रसोई में चला गया क्योंकि आंटी वहीं थी। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं रसोई में जाते ही आंटी की गर्दन पर किस करने लगा, तो आंटी पीछे मुड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और बोली- पराग, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… क्या तुम भी मुझे प्यार करते हो ? मैं- आई लव यू | दोस्तो, मैंने आंटी से यह नहीं कहा कि आप शादीशुदा हैं या ऐसा कुछ !
वैसे तो आप सभी काफी समझदार हैं, आंटी मुझसे क्यूँ चुदना चाहेगी उसका कारण तो आप जानते हो।

कहानी कैसी लगी जरुर बताना … दोस्तों मै आप लोगो के कमेंट के इन्तेजार में फिर अगली कहानी पोस्ट करुगा |

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