एक मजेदार ब्लू फिल्म की कहानी-4

एक मजेदार ब्लू फिल्म की कहानी-4

गतांग से आगे …. अब अपने जीन्स को पूरी तरह से उतार दो Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories नवजुदीन का अगला आदेश पानी के बाहर निकली हुए मछली की तरह छटपटाती हुई नीता ने अब पॅंट भी उतार दी, अब वो सिर्फ़ ब्रा पनटी मे थी अपने हाथ से अपने ही कपड़े उतरना .अपने अधनंगे जिस्म की नुमएइश करना वो भी एक अंजान नौजवान के सामने नीता पर अब शर्म कम और एक्शितमेंट ज़्यादा हावी थी वो जल्द से जल्द अपने अंदर की आग बुझाने की कोशिश मे थी. “नीता डार्लिंग अब ज़रा यहा, मेरे पास आओ तुम्हारी ये गदराई जवानी देख कर मेरा लंड बहुत टाइट हो गया हैं इसे प्लीज़ मेरी पॅंट से आज़ाद कर दो.” नीता पर फिर से शर्म और एक्शितमेंट हावी हो गई, उसने धीरे धीरे चल कर, नवजुदीन के पॅंट तक का फासला तय किया, और अपनी नाज़ुक उंगलियो से नवजुदीन के पॅंट की ज़िप खोलने लगी इस मिशन मे वो उकड़ू बैठी हुई थी, उसके कूल्हे बाहर निकले हुए थे, उसने नवजुदीन का लंड जैसेही च्छुआ, उसे अर्जुन अंकल के लंड की याद आई अर्जुन का लंड नवजुदीन से भी ज़्यादा मोटा और लंबा था. “अब इसे अपने मूह मे लेकर चूसना हैं तुम्हे लेकिन डार्लिंग तुम्हारे जिस्म पर ये ब्रा,पनटी अच्छी नही लग रही हैं मुझे, मैं तो तुम्हे मदरजात नंगी देखना चाहता हू नवजुदीन का शैतानी दिमाग़ एक से बढ़ कर एक ह्युमाइलियेशन के आइडिया पैदा कर रहा था. नीता तो पहले से ही बेकाबू हो गयी थी उसने तुरंत नवजुदीन जैसे गिरे हुए शाकस के सामने अपने जिस्म को नंगा करना शुरू किया जबकि वो आम हालत मे कभी नही करती लेकिन आज हालात कुछ और थे. नीता ने नवजुदीन का लंड मूह मे लिया, और चूसने लगी, उसके प्यारे नाज़ुक होटो मे वो ठीक से अड्जस्ट नही हो पा रहा था, फिर भी जैसे तैसे उसने आधा लंड तो मूह मे ले ही लिया. नवजुदीन खुश था, उत्तेजित था, उसने नीता के तरफ देखा, वासना मे घिरी होने के बावजूद उसकी मासूमियत मे कोई कमी नही आई थी. नवजुदीन ने अब अपने पैर का अंगूठा धीरे से लंड चुसती हुए नीता की चूत पर टीका दिया. और दोनो हाथो को नीता के कंधो पर रख कर उसे नीचे दबा दिया, अंगूठा अब गीली हो चुकी, कमसिन चूत मे घुस गया .नीता लंड मूह मे होने की वजह से चीख भी ना सकी, सिर्फ़ उूउउन्न्ं कर बैठी. अब नवजुदीन ने अंगूठे को अंदर बाहर करना शुरू किया हलकी अंगूठा कोई लंड का मज़ा तो नही दे सकता था पर, नीता को और बहका सकता था, पूरा लंड खाने के लिए अब नीता भी, इस दोहरे हमले से जोश आ गयी थी एक र्हिदम पैदा होगया था लंड चूसने मे और अंगूठा लेने मे. तकरीबन 20 मिनिट तक ये सिलसिला चलता रहा, नवजुदीन का लंड अब झदने की कगार पर था, उसने नीता के बाल पकड़ कर, उसके चेहरे को लंड से दूर हटाया, अपना अंगूठा भी निकल लिया, नीता का चेहरा देखने लायक था, जैसे बच्चे का फेवरेट चोकोबार उससे छीन लिया हो , वो सवालिया नज़रो से नवजुदीन को देखने लगी, उसकी हालत देख कर नवजुदीन का दिल बागबाग हो गया “मेरा लंड ज़डने वाला हैं,,,,बोल चूत मे लेगी की मूह मे ? नवजुदीन ने नीता को दो चाय्स दिए, दोनो ही नशीले थे, सेक्शिले थे. लंड का चूत मे झड़ना ख़तरनाक साबित होगा ये तो कच्ची काली भी जानती थी, लिहाजा “मूह मे ” “चल मूह खोल पूरा माल पेट मे जाना चाहिए, ज़मीन पे गिराया तो, फर्श चटवाउन्गा” गौर तलब बात ये है की, वैसे तो नीता पर कोई दबाव नही था,की वो नवजुदीन की ये ह्युमाइलियेशन बर्दाश्त करे पर वो वासना की गर्त मे इस कदर डूबी हुए थी के जब तक, उसके शरीर मे भड़की हवस की आग बुझ ना जाए, वो कुछ भी करने को तैय्यर थी, नवजुदीन की हर गांडी बात मानने पर मजबूर थी. उसने फिर से मूह खोल दिया, नवजुदीन ने अब अपने हाथो से लंड को हिलना शुरू किया, नीता मूह खोले इंतज़ार कर रही थी .आख़िर इंतज़ार ख़त्म हुआ, नवजुदीन ने अपना लंड फ़ौरन नीता के मूह मे डाल दिया आखरी 3,4 झटके मारे और एक के बाद एक वीर्या के फ़ौव्वारे छूटने लगे, सीधे नीता के गले से होकर पेट मे चले गये. जब गोलिया पूरी तरह से खाली हो गयी, नवजुदीन ने लंड बाहर खिच लिया नवजुदीन ने नीता को उठा कर अपनी गोद मे बिठा लिया,उसके नर्म नाज़ुक मुलायम बदन को सहलाने लगा, होटो को कुचल ने लगा, अधखिले स्तानो को चूसने लगा,निपल्स तो इतने बड़े नही थी मूह मे लेकर चूसे जाय, वो पूरे स्तनो को ही मूह मे भरने की कॉिश करने लगा इस वाइल्ड अटॅक से नीता फिर से झड़ने की कगार पर थी, वो पहले कितनी बार झाड़ चुकी थी, उसे भी याद नही था. नवजुदीन का लंड अब फिर से अपनी औकात मे आने लगा . आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसने नीता को बेड पर लिटा दिया उसकी आँखो मे झाँकता हुआ बोला “क्या चाहती हो नीता खुल के बोलो !” “चोदो मुझे जम के चोदो मैं पागल हो रही हू .प्लीज़ अभी और मत तडपा ओ जल्दी से डाल दो अपना लंड ये आग बुज़ादो मैने तुम्हारी हर बात मानी हैं प्लीज़ अब शुरू हो जाओ” अत्यधिक उत्तेजना,सेक्स की आग,हवस के तूफान मे घिरी नीता लाज,शर्म छोड़ कर गिड़गिदा रही थी. अब नवजुदीन भी उसे और तड़पाने के मूड मे नही था, खुद को भी रहा नही जा रहा था, उसने नीता की टाँगे फैलाई, चूत पहले से ही गर्म और गीली थी, पहले भी चुद चुकी थी, ल्यूब्रिकेशन की कोई ज़रूरत नही थी, नवजुदीन ने लंड निशाने पे लगाया ओर एक ज़ोर का झटका लगाया नीता की चीख निकल गयी, वो छटपटाने लगी, होठ भिचने लगी, गर्दन एधर उधर हिलने लगी दूसरे झटके ने लंड को पूरी तरह से उस 16 साल की कमसिन चूत मे दाखिला दिला दिया. नीता की चीखे, लंड के हर झटके के साथ कम होती गयी, नवजुदीन का मोटा लंड, चूत की दीवारो को फैला रहा था, ये रगड़ान, ये फैलाव पिस्टन से चलता लंड, उसे अजीब सी खुशी, संतुष्टि का अहसास दिला रहे थे, धीरे धीरे वो मंज़िल के करीब पहुच रही थी, नवजुदीन को भी अहसास हो रहा था, उसकी भी मंज़िल आने का, .नीता के बदन मे अकड़न पैदा होने लगी, चूत की दीवारे लंड पर कसने लगी .आहह आहह की कामुक सिसकारियो के साथ नीता ने नवजुदीन के लंड को नहला दिया वो निढाल सी पड़ी रही नवजुदीन ने अब अपना लंड बाहर खिच लिया, वो नीताकी छाती पर जा बैठा, धीरे से ज़्यादा दबाव ना डालते हुए, लंड को नीता की गदराई चुचियो के बीच ले गया नीता उसका इशारा समझ गयी, उसने अपने हाथो से अपनी चुचियो को लंड के इर्द गिर्द कस दिया, नवजुदीन ने आखरी धके मारने शुरू किए थोड़ी ही देर मे उसके लंड ने ढेर सारा वीर्या उगल दिया, नीता के चेहरे पर, बालो मे, हर जगह वीर्या ही वीर्या था. और चेहरे पर थे परमसंतुष्टि के भाव. उस रात नीता लूटती रही बार बार, उसका वासना का खुमार उतर चुका था, अपने आप को धिक्कार रही थी अर्जुन की बात और थी, वो शादी शुदा, घर गृहस्थी वाला शरीफ इसान था, जो वक़्ती तौर पर भावनाओ मे बह गया था लेकिन उसीने नीता को समझाया भी था पर ये लोग ये शरीफ कतई नही थे .लड़कियो को फसाना ऐश करना, उनका पसंदीदा खेल था .नीता का जिस्म कांप उठा ये क्या कर बैठी थी वो क्यू रोक नही पाई, अपने आप को क्यो सेक्स की इस हद तक दीवानी हो गयी थी वो अब अगर घर वालो को किसी तरह से पता चला तो वो सिहर उठी पासचताप से उसके आँखो मे आँसू आए और उसे याद आई नवोदिता की पूरी रात वो कहा थी.? उसके साथ क्या बीती थी.? सुबह हो रही थी, नीता ने जैसे तैसे कपड़े पहने,वो कमरे से बाहर निकली, और एक एक कमरा देखने लगी, लगभग हर कमरा खुला ही पड़ा था, हर कमरे की कहानी एक जैसी ही थी, नंगी पड़ी लड़किया, उनके उपर या आसपास्स आड़े तिरच्चे पड़े लड़के, अस्तव्यस्त फैले कपड़े, खाली पड़ी शराब की बोटले, ड्रग्स लेने की नीदल्स नीता को अपने आप से घृणा होने लगी, पूरी रात वो भी तो इसी माहौल का हिस्सा थी, एक कमरे मे उसे नवोदिता दिखाई दी उसकी हालत देख कर नीता एक दम से डर गयी नवोदिता बेहोश सी लग रही थी .जाँघो के बीच मे खून दिखाई दे रहा था, हॉट खून से सने हुए थे, उसका सर के तरफ से आधा शरीर बेड से नीचे लटक रहा था बदन पर कई खरोन्चे थी, बेड शीट एक तरफ गठरी की शक्ल मे जमा हुई थी प्रदीप, लकी,नवजुदीन और महिमा भी वही पड़े हुए थे महिमा का सर नवोदिता के पेट पर था, एक हाथ अभी भी नवोदिता की चुचि पर था सबसे बड़ी बात, महिमा का मूह भी खून से सना था नीचे प्रदीप,लकी, नवजुदीन नंगे पड़े थे उनके लंड भी खून से सने थे शराब की बोटले, नशे का समान सब बिखरा पड़ा था सिचुटेशन गंभीर लग रही थी नीता का दिल जोरो से धड़क रहा था किसी अंजानी आशंका से. वो धीरे धीरे नवोदिता के पास पहुचि बिना कोई आवाज़ किए उसने सबसे पहले नवोदिता की छाती से कान सटा ये, और राहत की सास ली .धड़कन चल रही थी, लेकिन बहुत ही धीरे धीरे उसने फिर महिमा का सर नवोदिता के पेट से हटाया महिमा गहरी नींद (या नशे मे ?) मे थी फिर वो कोशिश करने लगी नवोदिता को जगाने की पहले तो उसने नेलु को बेड पर सीधा लिटा दिया फिर उसके गालो को थपथपाकर, हल्के हल्के पुकारने लगी. “नवोदिता नवोदिता जाग जाओ, चलो घर चल ते हैं” .लेकिन नवोदिता पर कोई असर नही हुआ, वो थोड़ी और ज़ोर से पुकाराने लगी, साथ साथ कंधे पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी .’उठो नवोदिता, जाग जाओ नवोदिता प्लीज़ आँखे खोलो नवोदिता जल्दी जाग जाओ ह्यूम घर जाना हैं” लेकिन नवोदिता टस से मस नही हुई, तो वो घबरा गयी क्या हुआ हैं इसे साँसे तो चल रही हैं, ये उठती क्यो नही हैं होश मे क्यो नही आ आराही हैं उसने एधर उधर देखा, कोने मे फ्रिज दिखाई दिया भाग कर नीता ने पानी की बोतल बरामद की, और पूरी उंड़ेल दी नवोदिता के चेहरे पर .फ्रिज का चिल्ड पानी डालने के बावजूद जब नवोदिता को होश नही आया तो नीता की सांस फूलने लगी, पैर जवाब देने लगे, किसी आशंका से दिल लरजने लगा आँखो से बरबस आँसू बहने लगे. वो अब झपट पड़ी महिमा की तरफ उसे जगाने की कोशिश किए बगैर, उसने सीधे महिमा पर ठंडा पानी डाल दिया .तुरंत असर हुआ महिमा हड़बड़ा कर उठ गयी कुछ पल तो उसे कुछ समझ ही नही आया फिर धीरे से उसे समझ मे आने लगा उसने नीता की तरफ देखा वो गुस्से से और डर से कांप रही थी ! “क्या किया हैं तुम लोगो ने नवोदिता के साथ उसकी हालत देखो .पूरी खून से लथपथ है होश मे नही आ रही हैं क्या किया हैं उसके साथ बोलो ? नीता बेकाबू सी हो रही थी, महिमा के कंधे पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से झंझोड़ रही थी. और महिमा फ़टीफटी आँखो से नवोदिता को देख रही थी, उसका दिमाग़ सुन्न हो गया था, वो तरीके से सोच भी नही पा रही थी, ड्रग्स,शराब और रात भर के सेक्स का नशा, अब भी उस पर हावी था वो कभी नवोदिता को देखती तो कभी नीता को, तो कभी फर्श पर नंगे पड़े अपने उन ‘खास’ दोस्तों को. महिमा अब पूरी तरह से होश मे आगाई थी, स्थिति की गंभीरता उसके समझ मे आने लगी थी. वो तुरंत उठी, फटाफट कपड़े पहन लिए, ठंडे पानी से मूह धो कर, सबसे पहले अपने लिए एक लार्ज पेग बनाया विस्की का, दो बड़े बड़े घूँट पेट मे जाते ही, उसका दिमाग़ तेज़ी से कम करने लगा. कल रात का पूरा ट्रेलर उसकी नज़रो के आगे गुजरने लगा, वो नवोदिता की हालत की वजह कुछ कुछ समझ रही थी, सिचुयेशन बहुत गंभीर थी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | दोनो परिवारो की इज़्ज़त का सवाल था, अगर नीता वाहा नही होती तो वो, इस सारे सिलसिले को आराम से निपट सकती थी, दोनो परिवारो की सहायता से. उसने तुरंत फर्श पर पसरे पड़े दोस्तो को जैसे तैसे जगाया, और सबसे पहले कपड़े पहनने को कहा थोड़ी सी ख़ुसरफुसर के बाद सब के समझ मे स्थिति की गंभीरता आ गयी, वो रह रह कर कभी बेहोश पड़ी नवोदिता की तरफ तो कभी सुबक्ती हुई नीता की तरफ देख रहे थे फिर तीनो ने अपने लिए पेग बना लिए, ताकि उनके भी दिमाग़ काम करने लगे. अब महिमा ने नीता की तरफ रुख़ किया “देखो नीता, जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ, हम सभी सिर्फ़ मौज मस्ती करना चाहते थे, .और तुम भी तो यही चाहती थी, रात को नवजुदीन के सामने गिड़गिदा रही थी अपनी खुजली मिटाने के लिए क्यो क्या मैं झूठ बोल रही हू बोलो ? नीता कुछ नही बोली क्या बोलती वो बहक तो गयी थी, लाज शरम तक पर रख कर गिड़गिदई थी वो लेकिन ये बात महिमा को कैसे पता चली वो पूछने का साहस नही कर सकी “देखो नीता, तुम आचे से जानती हो मेरे और नवोदिता के परिवार मे गहरे रिलेशन्स हैं, दोनो ही परिवार नही चाहेंगे, की यहा जो भी हुआ उसकी खबर बाहर, लोगो तक, मेडिया तक, या पोलीस तक पहुचे, इस मे सब की बदनामी होगी, दोनो ही परिवरो के बिजनेस पर बुरा असर होगा, इस लिए और तुम्हारी भी भलाई इसी मे हैं की तुम अपनी ज़बान बंद रखो, हम सब सम्हाल लेंगे, मैं तुम्हे गौरनटी देती हू, नवोदिता को कुछ नही होगा” महिमा की आवाज़ मे एक ऐसा ठंडा पन था, एक ऐसी खुश्की थी, एक बार के लिए नीता सिहर उठी, उसे पता था महिमा के परिवार के हाथ बहुत उपर तक पहुचे थे, वो सच मे कुछ भी कर सकते थे लेकिन क्या उनकी ये पहुच नवोदिता की जान बचा सकते थे, क्या पैसा और पोवेर होने से ही सारी समस्या सुलझ जाती हैं उसकी आँखे फिर बरस पड़ी अपनी प्यारी सहेली के किए. महिमा के दोस्तो ने तबतक हॉस्पिटल मे फोन किया था, सभी बेचैनी से आंब्युलेन्स की रह देख रहे थे नवजुदीन, प्रदीप, और लकी, इन मे से कोई भी महिमा जैसे बड़े बाप के बेटे नही थे वो तो सिर्फ़ महिमा का पैसा और उसका जिस्म देख कर उससे चिपके हुए थे अब तीनो की चेहरे पर हवैया उड़ने लगी थी इतने मे आंब्युलेन्स भी आ गयी हॉस्पिटल के कर्मचारियो ने कोई सवाल नही पूछा उन्होने नवोदिता को स्ट्रॅचर पर रखा और आंब्युलेन्स मे डाल कर खामोशी से हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़े. “तुम हमारे साथ हॉस्पिटल चलॉगी या हम तुम्हे घर पर ड्रॉप कर दे” .महिमा ने नीता को बड़े ठंडे स्वर मे पूछा “मैं हॉस्पिटल चलूंगी” चाहती तो जल्द से जल्द घर पहुचना, लेकिन ना जाने क्यू उसे लग रहा था, नवोदिता को इन दरिंदो के साथ अकेला छोड़ना ठीक नही होगा. दोपहर के 2.00 बजे थे, ‘डेंजर ज़ोन’ मे ग्राहक कम ही थे, ज़्यादा तर टेबल्स खाली पड़े थे, बार टेंडर उंघ रहा था, एक्का दुक्का टेबल्स पर जो ग्राहक बैठे थे, उन्हे कोई जल्दी नही लगती थी, बाहर धूप कड़क रही थी. आमिर उन्ही गिने चुने ग्राहको मे से एक था. अपने लगभग खाली हुए बियर की बोतल को बड़े ध्यान से, मगर आनमने ढंग से देख रहा था, उस बोतल के जैसे ही उसकी जेब की स्थिति थी, लगभग खाली, वो मन ही मन हस पड़ा. उसके बाप ने उसका नाम ‘आमिर’ ये सोच के रखा था की वो एक दिन अपने नाम की तरह अमीर बन जाएगा लेकिन बेचारे को क्या मालूम, अगर सिर्फ़ नाम रखने से आदमी वैसा बन जाए, तो हर कोई अपनी बेटी का नाम, ऐश्वर्या, या मधुरी रखेगा, और बेटे का नाम र्हितिक, शाहरुख, या सलमान रखेगा. आमिर ख़ान देखने मे एक आकर्षक पर्सनॅलिटी का तंदुरुस्त युवक था, जिसके बारे मे आम धारणा ये थी की वो एक मस्त कलंदर टाइप का आदमी था, बेफिकिरी उसके चेहरे पर हमेशा छाई रहती थी, खाओ,पियो ऐश करो वाले नियत का लगता था लेकिन, सचाई ये थी की आमिर ख़ान एक खोजी पत्रकार था, इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट, उसकी खबर सूंघने की शक्ति, कुत्ते को भी मात देती थी, सूंघने के मामले मे, एक बार खबर की सूंघ लगजाए तो आमिर उसे दो नज़रिए से देखता था. एक तो, क्या इस मे रोकडा निकल सकता है ? यदि हाँ तो वो उसके पीछे ही पड़ जाता था, दूसरा अगर उस खबर से रोकडा नही निकल सकता, तो वो उसे छापने के लिए दे देता था ! बिल्कुल सॉफ सुथरा गणित था उसका. ये बात अलग थी की उसके लाख प्रयत्नो के बावजूद, वो पैसा कभी जमा कर के नही रख पाया था, जितना भी कमाता था, वो पूरे खर्च कर डालता था, उसकी जेब मे पैइदाएशी छेद था, रोकडा उसके पास टिकता ही नही था, .आज भी वो ऐसे ही खाली जेब को लेकर ‘डेंजर ज़ोन’ मे बैठा था. अचानक वो चौंक गया, उसके पूरे शरीर पे जैसे कान निकल आए हो वो सॅटार्ट होगआया,उसके अंडर का खोजी पत्रकार जाग उठा उसके पीछे कुछ लोग आके बैठे थे, जो शकला सूरत से डॉक्टर्स लगते थे |

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