एक मजेदार ब्लू फिल्म की कहानी-3

एक मजेदार ब्लू फिल्म की कहानी-3

गतांग से आगे …. नीता ने एधर उधर देख .माहौल अब और ज़्यादा बदल चुका था Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories कई लड़कियो के कपड़े पहले से कम हो गये थे, जो लड़किया किराए पर बुलाई गयी थी, वो तो लगभग नंगी थी कोई किसी का नही था वाहा थे तो सिर्फ़ मर्द और औरत, सिर्फ़ माले और फीमेल और सिर्फ़ एक ही रिश्ता था सेक्स का, संभोग का. कोई किसी की चुचियो से खेल रहा था, तो कोई होठ को चूस रहा था कोई साथ वाली लड़की की चूत को सहला रहा था, तो कोई कुल्हो को पार्टी अब ऑर्जी की तरफ बढ़ रही थी. अचानक नीता चिहुक उठी कब नवजुदीन का हाथ उसके टी-शर्ट के उंड़र घुसा,कब उसने उसकी चुचियो को मसलाना शुरू काइया, कब उसने अपनी उंगलियो मे उसके निपल्स दबाए नीता को पताही नही चला “क्या हुआ मेरी जान .तकलीफ़ हो रही हैं क्या” नवजुदीन ने बड़े ही अश्लील अंदाज़ मे कहा .”डार्लिंग ज़रा अपनी उस सहेली को तो देखो, जिसकी तुम आज मेहमान हो देखो कैसे दो, दो को ले रही हैं. नीता ने नज़ारे घुमा कर देखा तो वो दंग रह गयी उसे अपनी आँखो पर विश्वास नही हो रहा था महिमा के कपड़े तो जिस्म पर मौजूद थे पर अपनी सही जगह पर नही थे उसका टॉप उपर खिसक चुका था उसकी बड़ी बड़ी चुचियो को दो लड़के चूस रहे थे महिमा के चेहरे पर परमानंद के भाव थे, वो एंजाय कर रही थी उसकी स्कर्ट अपनी जगह पर नही थी कमर तक उपर उठ चुकी थी ,उसके हाथ दोनो लड़को के पॅंट पर, उभरे हुए हिस्से को सहला रहे थे. नीता अत्यधिक गरम हो चुकी थी, नवजुदीन की आक्टिविटीस उसे तड़पा रही थी , सेक्स डर पर हावी होता जा रहा था. नीता की चूत से एकदम बौछार सी होने लगी नवोदिता की हालत भी नीता से जुड़ा नही थी. प्रदीप ने उसे पीछे से जाकड़ लिया था, हाथ टी-शर्ट के उंड़र थे, और नवोदिता के नाज़ुक,कमसिन चुचियो को आटे की तरह गूँथ रहे थे,नवोदिता ही ही कर रही थी,उत्तेजित हो रही थी, उसकी आँखे बंद थी शायद उसे लगता हो,उसके आँख बंद करलेने से दुनिया भी नही देख पाएगी, उशाए साथ क्या हो रहा हैं. प्रदीप के होठ नवोदिता के गुलबो से भी नाज़ुक होटो को कुचल रहे, मसल रहे थे. हर तरफ माहौल कामुक हो गया था, कोई अपने होश मे नही था, कौन किसके साथ हैं इससे किसी को कोई लेना देना नही था, था तो सिर्फ़ तन की प्यास बुज़ाने से, अपनी खुजली मिटाने से, शराब की नादिया बह रही थी .जिस्म एक दूसरे से टकरा कर गरमी पैदा कर रहे थे. कुछ जोड़े अब धीरे धीरे महिमा के बुंगलोव मे गायब हो रहे थे अगली कार्यवाही के लिए सिर्फ़ कुछ ख़ास्स जोड़े सबको ये सुविधा हासिल नही थी नीता अब वासना के तूफान मे पूरी तरह फस चुकी थी वो नवजुदीन का कोई विरोध नही कर रही थी, बल्कि साथ दे रही थी नवजुदीन के पॅंट मे बढ़ता हुआ उसका पौरुष, उसके नितंबो पर ठुमके लगा रहा था नीता के अंदर की आग को भड़का रहा था उसकी चूत के होठ खुल, बंद हो रहे थे .मसले जा रहे निपल, चूसे जाने को तड़प रहे थे और होठ, वो तड़प रहे थे, किसी और चीज़ के लिए, जो उनकी साइज़ से भी बड़ी हो, लंबी हो “क्यो ना हम अंदर चल कर, एक दूसरे को अछी तरह जान ले, इन कपड़ो के बिना हम कैसे दिखते हैं, ये जानने की कोशिश करे” नवजुदीन नीता के कानो मे बुदबुडाया नीता थर्रा उठी, शर्म से, कामुकता से, काँपने लगी मूह से बोल नही फुट रहे थे. उसकी खामोशी को ही स्वीकृति मान कर, नवजुदीन ने उसे उठा लिया, और चल पड़ा, एक ख़ास्स कमरे की तरफ .जहा से शुरू होने वाला था नीता की बर्बादी का सफ़र | महिमा के बंग्लॉ के शानदार कमरे मे नवजुदीन नीता को ले आया. आते ही उसे बेड पर लिटा दिया, नीता आँखे बंद थी, उसका अचेतन मन उसे सतर्क कर रहा था, लेकिन बदन मे लगी आग उसपर ज़्यादा हावी हो रही थी, नवजुदीन उसके पास बैठ गया, पहले उसके खूबसूरत चेहरे को देखता रहा, नीता के गुलाबी अधखुले होठ थरथरा रहे थे, नवजुदीन की नज़र अब नीता की हर सांस के साथ उपर नीचे हो रही छातियो पर पड़ी पूरी तरह से पके हुए अनार के साइज़ की चुचिया उसे निमंत्रित कर रही थी, खेलने के लिए, चखने के लिए टॉप उपर खिच जाने से पेट नंगा हो गया था, खूबसूरत नाभि उसको पुकार रही थी, सुडौल लंबी टाँगे, उसके कमर पर कसने के लिए बेताब थी नवजुदीन ज़्यादा देर तक देखता नही रहा पाया उसने फटाफट अपने कपड़े उतार फेके, और वो नीता के उपर झुक गया. उसके होठ का स्पर्श अपने होठ पर होते ही नीता ने आँखे खोल दी, सिर्फ़ एक पल के लिए, फिर बंद हो गयी, शर्म से, या वासना से वो नही जानती थी, उसके हाथ अपने आप नवजुदीन की पीठ पर कसते चले गये किसी भी बात पर कोई विरोध नही हो रहा था नीता को सहयोग करता पाकर, नवजुदीन का जोश बढ़ गया .मन ही मन महिमा को धनयवाद दे रहा था उसकी बदौलत, ये कची कली आज उसे भोगने को, कुचलने को मिल रही थी, और वो भी पूरे सहयोग के साथ. नवजुदीन नीता के चेहरे पर हर जगह पर किस कर रहा था, चाट रहा था, उसके हाथ चुचियो से खेल रहे थे, धीरे से उसने नीता का टॉप उपर उठाया, गले तक, अब ब्लॅक ब्रा मे कसे पके अनार उसके सामने थे क्या नज़ारा था नवजुदीन का लंड बेकाबू होने लगा, उसने ब्रा से झाँकाती चुचियो को चूमा, हल्केसे अपनी जीभ उसकी चुचियो पर घुमाने लगा नीता की कामुक सिसकारिया बढ़ने लगी,.वो अपने आप को कंट्रोल मे रखने के लिए,टाँगे कसने लगी नवजुदीन के सर को ज़ोर से अपनी कड़ी चुचियो पर दबाते हुए बड़बड़ाने लगी आहह आहह नवजुदीन, चूसो और ज़ोर से चूसो आ अछा लग रहा हैं मुझे प्यार करो, खूब प्यार करो आअहह मेरे अंदर आग लगी हैं उसे बुझादो प्लीईआअसए. अंधे को क्या चाहिए .नवजुदीन को भी क्या चाहिए था .लेकिन अब उसके शैतानी दिमाग़ मे एक नया आइडिया आया अब वो इस कमसिन कली को तड़पा, तड़पा कर, अपने एशारे पर नचा, नचा कर चोदना चाहता था वो नीता के शरीर से हट गया ओर उसके अलग होने से नीता तड़प गयी, मचल गयी, मछली की तरह छटपटाने लगी “क्या हुआ नवजुदीन त तू तुम दूर क्यू हट गये .? नवजुदीन के होटो पर कुटिल मुस्कान तेर गयी. “नीता डार्लिंग, अगर तुम सचमुच पूरा मज़ा लेना चाहती हो तो, तुम्हे मेरी हर बात माननी होगी .विदाउट हेसिटेशन नही तो तुम जा सकती हो !” नीता का तो मानो काटो तो खून नही, जैसा हाल हो रहा था. वो वासना के आग मे जल रही थी, झुलस रही थी, इस आग को बुझाने के लिए तड़प रही थी, पागल हो रही थी .बेशर्मी की हर हद लाँघ सकती थी “क्या चाहते हो तुम” उसने थरथराती आवाज़ मे पूछा नवजुदीन समझ गया ये चिड़िया अब उसके एशारे पर नाचेगी, फुदकेगी. “यहाँ मेरे सामने खड़ी हो जाओ ना ना ना टॉप नीचे लेने की ज़रूरत नही ” नवजुदीन का पहला आदेश था नीता उसी अवस्था मे, उसके सामने खड़ी हो गयी, टॉप गले तक उठा हुआ कमर से लेकर, ब्रा मे कसी चुचियो तक सब खुला था, सेक्स की देवी लग र्है थी नीता. “अब टॉप उतार दो ” .टॉप तुरंत उतर गया. “अब जीन्स खोलो .थोडा नीचे सरकाओ पूरा नही मूज़े पनटी की झलक दिखाओ !” ये होती हैं कच्ची उम्र की कामुकता एक बार बदन मे वासना के शोले भड़क उठे .तो सोचने समझ ने की ताक़त चली जाती हैं, घर परिवार, समाज़, सेल्फ़ रेस्पेक्ट,अपनी नाबालिग,कची उम्र, कुछ भी नही बचता, सब जल जाता हैं सेक्स की उस आग मे. उस वक़्त ज़रूरत होती हैं एक मोटे, लंबे, तगड़े लंड की जो चूत की दीवारो को रगड़ कर,फैला कर, अंदर तक जाए और बुझाए उस आग को अपनी तेज़ बौछार से नीता इन सब भावनाओ से काफ़ी दूर जा चुकी थी, उसे महसूस हो रही थी सिर्फ़, पूरे जिस्म को झुलसने वाली आग, उसे शांत करने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैय्यार थी, उसने नवजुदीन की इच्छा के अनुसार, अपनी जीन्स के उपारले हिस्से को खोला, थोड़ा नीचे खिसकाया अब उसके कुल्हो को, और चूत को छुपति पनटी साफ नज़र आ रही थी.

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