उसके बॉयफ्रेंड ने धोखा दिया मैंने

उसके बॉयफ्रेंड ने धोखा दिया मैंने

दोस्तों ये सच्ची कहानी है बस कहानी में पात्रो के नाम और स्थान बदल के लिख रहा हु ताकि किसी की बदनामी ना हो दोस्तों ये दुनिया बड़ी अजीब है अगर किसी लड़की को सच्चे दिल से चाहो तो पता चलता है वो किसी और को प्यार करती है खैर जो भी है आप कहानी पढ़ के जान लेगे आखिर क्या बात है जो मै येसा बोल रहा हूँ | ये कहानी मेरी गर्लफ्रेंड की है चलिए अब कहानी पर चलता हूँ|

मेरा एक दोस्त था चन्दन (बदला हुवा नाम ) ! वो देखने में उतना ख़ास नहीं था पर लड़कियाँ पटा कर चोदने में उस्ताद था। वो हर वक्त इसी फिराक में रहता कि कैसे कोई लड़की पटे और उसको नई चूत चोदने के लिए मिल जाए। वो लड़की पटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। जब हमारा ग्रेजुएशन का आखिरी वर्ष था तब एक नई लड़की हमारी ही क्लास में आई। उसके पापा का ट्रांसफर हमारे शहर में हो गया था।

उसका नाम था आँचल। आँचल देखने में थी बला की खूबसूरत ! गोरा रंग, उस पर लंबे काले बाल, बाएँ गाल पर डिम्पल और होंठों के दाईं ओर एक छोटा सा तिल। फिगर ऐसा कि कोई मॉडल भी शरमा जाए। वो एक गजब की गायिका भी थी। वो कई सारे एल्बम में गा चुकी थी।
जिस दिन से उसको चन्दन ने देखा, उसी दिन से उसको चोदने के सपने देखने लगा। कई बार उसने मुझे भी अपने सपनों के बारे में बताया कि कैसे उसने आँचल को जमकर चोदा सपने में।
उसके बाद उसने आँचल के आगे पीछे घूमना शुरु कर दिया। आँचल तो पहले पहले किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी, लेकिन एक दिन अचानक चन्दन ने कुछ ऐसा किया कि वो उसके जाल में फंसती चली गई। वो उसके लिए नोट्स ला देता, हमेशा उसकी कुछ ना कुछ मदद करता रहता। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | एक दिन तो हद ही हो गई- जब आँचल ने अपनी स्कूटी से एक बच्चे को ठोक दिया, तभी पास में जा रहा चन्दन वहाँ आकर आँचल का कसूर अपने सर ले गया कि स्कूटी असल में वो ही चला रहा था।

उसको एक दिन जेल में बितानी पड़ी, मगर इससे उसको आँचल के दिल में एक ख़ास जगह मिल गई। उसके बाद आँचल हफ़्ते में एक दो बार हमारे हॉस्टल में भी आने लगी। क्योंकि मैं चन्दन का रूममेट था इसलिए जब आँचल आने के लिए फ़ोन करती तो वो मुझे किसी बहाने से बाहर भेज देता। कुछ दिन बाद चन्दन ने आँचल को प्रोपोज़ कर दिया और आँचल मान भी गई। अब वो दोनों घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे।

अब तो चन्दन सिर्फ़ उसको चोदने के लिए मौके के इन्तजार में रहने लगा। एक दिन जब आँचल चन्दन से मिलने हमारे हॉस्टल आई तो चन्दन ने मुझे बाहर जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर देने को कहा और मैंने वैसा ही किया। मेरे मोबाइल पर दो घंटे बाद चन्दन का कॉल आया और मैंने दरवाजा खोल दिया और आँचल चली गई।
अगले एक महीने में ऐसा कई बार हुआ। तब मेरे मन में उत्सुकता बढ़ने लगी कि आख़िर ये लोग बंद कमरे में दो दो घंटे तक करते क्या हैं ?

कामसूत्र क्या है ? कामसूत्र किसने किसने लिखा ?

तभी मेरे मन में एक योजना आई। मैंने मेरे एक दोस्त से एक हैन्डीकैम मांग कर अपने पास रख लिया। एक दिन जब चन्दन आँचल से फ़ोन पर बातें कर रहा था तब मुझे पता चला कि आँचल आज हॉस्टल आने वाली है। मैंने मौका मिलते ही चन्दन से छुपाते हुए कैम को सेट कर दिया जिससे कि चन्दन का बेड पूरा उस पर रिकॉर्ड हो सके। और उसे ऑन करके इन्तजार करने लगा। कुछ देर बाद आँचल आई और पहले की तरह मैं बाहर चला गया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। करीब ढाई घंटे बाद चन्दन का कॉल आया, मैंने दरवाजा खोल दिया और आँचल चली गई। कुछ देर बाद चन्दन भी उठा और कहीं घूमने चला गया।

तब मैंने कैम निकाला और उस पर जो रिकॉर्ड हुआ था उसे देखते ही दंग रह गया। आँचल उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले रंग के टॉप पर टाइट जींस गजब ढा रहे थे। उसका गोरा बदन जैसे कि कोई सफ़ेद मोती धूप में रखा हो। उसके गुलाबी लब जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ सुबह की ओस में भीगे हुई ! उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे। उसके कसे टॉप से उसके स्तन झाँक रहे थे जैसे दो पहाड़ियों के बीच में एक खाई हो। आँचल को पहले चन्दन ने बेड पर बिठाया और कुछ स्नैक्स खाने के लिए दिए।

फिर पानी दिया। उसके बाद चन्दन उसकी पीठ की तरफ़ आ गया और पीछे से ही गले पर चूमने लगा। आँचल थोड़ी अंगडाईयाँ लेने लगी। फिर चन्दन ने उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और उसके लबों पर अपने होंठ सटा लिए। आँचल ने अपने आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी।

इसी बीच चन्दन ने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर रखा जो कि संगमरमर की तरह लग रहा था। फिर हाथ सरकाते हुए वो उसके वक्ष तक पहुँच गया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही स्तन दबाने लगा। आँचल सिसकारियाँ भरने लगी। फिर चन्दन ने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरकाए और धीरे से बोबों के उभारों को चाटने लगा।

फिर उसने अपना शर्ट उतार दिया और आँचल का भी टॉप ऊपर से खींच कर निकाल दिया। आँचल के स्तन ब्रा के बंधन में जकड़े हुए आजाद होने का इन्तजार करते हुए से लग रहे थे। फिर चन्दन ब्रा के ऊपर से ही उसके वक्ष को मसलता रहा और आँचल सिसकारियाँ लेती रही। कुछ देर बाद चन्दन ने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ लेजाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। आँचल की चूचियाँ आजाद होकर झूम उठी। वो न तो बड़ी, न ही छोटी, सही आकार की और बिल्कुल ही मक्खन की तरह लग रही थी। बीच में गोलाकार चुचूक थे जो कि भूरे रंग के थे। आँचल के चुचूक ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनमें से मधु निकल रहा हो और उसे पीने के लिए किसी का भी मन मचल उठे।

फिर चन्दन ने उन नाजुक बोबों को अपने दोनों हाथों में लिया और मसलने लगा। उसके हाथों की जकड़न से बोबे के आकार कई तरह से बदल रहे थे। आँचल इसी बीच जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। वो चन्दन के बालों में अपने हाथ फेरते हुए उसके चेहरे को अपने मोमों में दबा रही थी। तभी चन्दन ने अपने हाथ नीचे सरकाए और आँचल की जींस की चैन खोलने लगा और कुछ ही देर में वो आँचल को सिर्फ़ पैंटी में ले आया। आँचल का गदराया बदन किसी अप्सरा सा लग रहा था। जी कर रहा थी कि तभी उसको अपनी बाँहों में भर लूँ।

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गतांग से आगे …
आँचल ने चन्दन का लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। चन्दन का लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था। चन्दन ने फिर अपनी जींस खोल दी और अंडरवियर भी निकाल फेंका। उसका 6″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। चन्दन ने अब आँचल की पैंटी भी उतार फेंकी। आँचल की चूत एक नन्हे गुलाब सी कोमल और रस से भरी हुई सी लग रही थी। वो दोनों अब एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तयार थे।

तभी चन्दन नीचे सरक गया और आँचल के चूत में एक गहरा चुम्बन लिया। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | आँचल का पूरा बदन झूम उठा। फिर चन्दन ने अपने उंगली से आँचल की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। आँचल तो जैसे इस दुनिया में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई थी। चन्दन आँचल के सारे बदन को चूमता जा रहा था और आँचल उसके बालों को सहलाती जा रही थी।

आँचल जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और चन्दन उसके एक बोबे को चूमता और दूसरे को हाथ से पुचकार रहा था। उसके बाद आँचल का धीरज जवाब दे गया और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला कर चन्दन के लिए जन्नत का रास्ता खोल दिया और बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी !
चन्दन तब पूरी तरह से आँचल के ऊपर आ गया। अपना 7″ का लंड आँचल की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। आँचल के मुँह से आःह निकल पड़ी। फिर वो अपना लंड धीरे धीरे अन्दर- बाहर करने लगा। बीच-बीच में बोबों को चूम लेता और चूस लेता।

कभी कभी लबों को चूम लेता। कुछ देर बाद चन्दन ने अपनी गति बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। आँचल अपने कमर को जुम्बिश देती चन्दन का भरपूर साथ देने लगी। करीब आधे घंटे बाद चन्दन और तेजी से चोदने लगा फिर अचानक अपना लंड निकाल के आँचल के पेट पर सारा माल गिरा दिया।

फिर करीब पाँच मिनट तक वो दोनों चूमा-चाटी करते रहे। फिर चन्दन उठा और एक कपड़े से आँचल के पेट से सारा माल पौंछ डाला। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए। इस वीडियो को मैंने एक सीडी में उतार लिया और हैंडीकैम अपने दोस्त को लौटा दिया। तब से हर वक्त आँचल का गदराया बदन मेरे सामने नाचता रहता। मैं भी आँचल को चोदने के सपने देखने लगा।
तभी से मैं आँचल को पाने के लिए योजना बनाने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | कुछ दिन बाद चन्दन कुछ काम से अपने घर चला गया। यही मेरे लिए सोने पे सुहागा जैसा था। तो मैंने आँचल को चोदने की सारी योजना पर अमल करने लगा। उस दिन मैं सुबह के करीब नौ बजे ही कॉलेज पहुँच गया और आँचल के आने का इन्तजार करने लगा। लगातार उसकी स्कूटी की आवाज की तरफ कान खड़े हुए थे।

जैसे ही उसकी स्कूटी की आवाज आई, मैं कॉलेज के लाइब्रेरी में उसका इन्तजार करने लगा क्योंकि वो कॉलेज आते ही हर रोज पहले लाइब्रेरी जाती थी। जब वो लाइब्रेरी आई तो मैं जाकर उसकी मेज़ पर उसके आगे बैठ गया। वो हमेशा की तरह एक मोम की गुड़िया जैसी लग रही थी। उसके गहरे नीले टॉप से उसकी चूचियों के उभार बाहर झाँक रहे थे। उसकी खूबसूरती के आगे जैसे मेरे मुँह में ताला लग गया था।

कामसूत्र चुदाई के अलग अलग आसन और प्रयोग चित्र समेत

फिर मैंने उससे पूछा,” आँचल, क्या पढ़ रही हो ?” फिर मैंने उससे पूछा,” आँचल, क्या पढ़ रही हो ?”
” मैथ्स !”
” मुझे तो मैथ्स का कुछ भी नहीं आता, क्या तुम मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझा दोगी, जिससे मैं पास हो जाऊं?”
” हाँ, समझा तो दूँगी, मगर कब और कहाँ ?” ”
अरे तुम हॉस्टल में आकर मुझे समझा देना।”
” ठीक है, कल तो सन्डे है, मैं सुबह पहुँच जाउंगी, ओके !”
” थैन्क्स, तो मैं कल
तुम्हारा इन्तजार करूँगा, ओके बाय !”
तब मैं हॉस्टल चला आया और आँचल को चोदने के ख्याल से ही बेचैन हो रहा था। मेरा लंड तभी से खड़ा हो गया था और रोंगटे खड़े होने लगे थे। मैंने रात जैसे- तैसे काटी। सुबह-सुबह मैं बाजार गया और कंडोम ले कर आया। फिर नहा कर फ्रेश होकर आँचल का इन्तजार करने लगा। करीब नौ बजे मेरे कमरे के दरवाजे के दस्तक हुई। मैंने जाकर दरवाजा खोला तो आँचल को अपने आगे पाया जिसको चोदने के सपने मैं करीब एक महीने से देख रहा था और आज वो सपना पूरा होने जा रहा था। यही सोच के सारे बदन पर अजीब सी मस्ती छा रही थी।
आज आँचल दूसरे दिनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत नजर आ रही थी।

उस दिन उसने पीले रंग का सलवार-सूट पहन रखा था। उस पर काले रंग का दुपट्टा ! उसे देख कर मैं तो यह भी भूल गया कि उसे अन्दर भी बुलाना है। करीब दस सेकंड बाद मुझे पता चला और मैंने आँचल को अन्दर बुला लिया।
उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। वो आराम से बैठ गई। फिर मैंने उसे चाय पानी पूछा। उसने मना कर दिया।
तब आँचल ने मेरी तरफ देखा और मैथ्स की किताब लाने को कहा। मैं मैथ्स की किताब ले आया तो वो मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझाने लगी। करीब 15 मिनट बाद मैंने बोला,” काफी बोरिंग है ये मैथ और मैंने जाकर लैपटॉप ऑन कर दिया और उसे लाकर टेबल पे आँचल के सामने रख दिया।
तब मैं आँचल से बोला,”आज मैं तुम्हें कुछ दिखने जा रहा हूँ !”

और मैंने लैपटॉप पर वो फ़िल्म चला दी। खुद को वीडियो में देख के आँचल भौंचक्की सी रह गई। फिर जब चन्दन ने उसके कपड़े उतारने शुरु किए तो उसका चेहरा लाल हो गया। उसने शर्म के मारे अपना हाथ अपने चेहरे पर रख दिया। कुछ देर बाद वो फूट फूट के रोने लगी। उसने मेरे पैर पकड़ लिए और रोते हुए बोली,” देव, तुमने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, मेरे मम्मी पापा यह जान गए तो खुदकुशी कर लेंगे।

ये तुम और किसी को मत दिखाना प्लीज़ ! तुम्हें हमारी दोस्ती की कसम !”
“दोस्ती है, तभी तो अब तक किसी को नहीं दिखाया, लेकिन अगर तुमने वो नहीं किया जो मैं चाहता हूँ तो कल तक यह वीडियो सारी दुनिया देखेगी।”
” क्या करना होगा मुझे? मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ !”
” तुम्हें मेरे साथ वही करना होगा, जो तुमने चन्दन के साथ इस वीडियो में किया है।” ” क्या? तुम इतने गिरे हुए इंसान हो, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था !”
” मुझे और नीचे गिरने में ज्यादा देर नहीं लगेगी !”
तब आँचल कुछ देर खामोश रही जैसे पत्थर की मूरत बन गई हो और फिर मेरे बिस्तर पर आकर बैठ गई, अपना दुपट्टा नीचे गिरा कर बोली,” कर लो जो करना है !”
मैं तो पूरा मज़ा लूटने के मूड में था, इसलिए बोल दिया,” तुम्हें मेरा पूरा साथ देना होगा, जैसे तुमने चन्दन का साथ………

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गतांग से आगे …
तब मैं आगे बढ़ा और अपना हाथ आँचल के लबों पर रख दिया, वो फूल से कोमल तो थे लेकिन शोलों सी गर्मी थी उनमें ! मुझे लग रहा था जैसे वो रस के भंडार हैं और मैं उसकी बूँद बूँद पीने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। फिर मैंने अपने लब उसके लबों पे रख दिए और धीरे धीरे लबों को काटने और चूसने लगा। मेरी और उसकी जबान टकराने लगी। जैसा कि मैंने पहले ही उसे बोल दिया था, उसे भी साथ देना पड़ा। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो मेरे बालों को सहलाती जा रही थी।
फिर मैंने अपना दायाँ हाथ उसके भरे हुए सीने के ऊपर रख दिया तो वो जैसे चौंक सी गई। दूसरे हाथ से मैं उसकी पीठ सहलाता जा रहा था। मैं उसकी को पूरी तरह से अपने रोम-रोम में महसूस करना चाहता था। कुछ देर बाद मैंने धीरे से उसका कमीज़ उतार दिया। अन्दर आँचल की चूचियों को एक काले रंग की ब्रा जकड़े हुए थी। उसके बोबे ब्रा के बंधन से छूटने के लिए उतावले मालूम पड़ रहे थे।

मैं उन पहाड़ियों की कोमल और रेशमी दुनिया में खो जाना चाहता था। लेकिन मैंने जल्दबाजी ना करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने का फ़ैसला किया। मैंने फिर उसकी ब्रा के उपरी हिस्से से झांकती चूचियों को चूम लिया और चाटने लगा। फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को खूब मसला। आँचल की सिसकारियाँ छूटनी शुरु हो गई थी। वो ना चाहते हुए भी मेरी इस हरकतों से धीरे धीरे गर्म होने लगी थी। मैंने आँचल के पूरे बदन को अपने लबों से छुआ। आँचल इससे मचलने लगी।

उसके नाभि पर चुम्बन लिया तो जैसा पूरे बदन में कंपकंपी सी दौड़ गई। अब मैंने उसकी पहाड़ियों को आजाद करने का सोचा और उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया। अब आँचल मेरे आगे आधी नंगी थी। उसकी जवानी मेरे आगे अंगडाई भर रही थी। उसके मोमे जैसे मुझे बुला बुला के बोल रहे हों,” आओ, हमें अपने हाथों से पुचकारो, अपने होठों से दुलारो, और हमारा रस पी जाओ !”
मैं आँचल के दाईं चूची के चुचूक को चूसने लगा और बाईं को अपनी हाथ से पुचकारने लगा। आँचल आँखें मूँद कर गहरी सांसें भर रही थी। फिर मैंने अपना टी-शर्ट उतार दिया। मेरा बदन देख कर आँचल की आँखें जैसे फटी रह गई, क्योंकि मेरा बदन चन्दन से काफी ज्यादा कसा हुआ और मरदाना था। फिर मैंने आँचल की पैंट उतार दी। अब उसके शरीर पर एक पैंटी ही बची थी। उसकी टांगें जैसे किसी कारीगर की सालों की मेहनत के बाद बनी मूर्ति की भाँति लग रही थी, एक भी दाग या खराबी नहीं थी उनमें !
फिर मैं आँचल की टांगों को चूमता गया और आँचल सीसकारियाँ लेती रही। मैंने अब अपनी पैंट भी उतार दी। मेरा लंड तो कब से खड़ा होकर अन्दर से पैंट फाड़ के बाहर आने को बेताब हो रहा था।

पैंट खोलते ही लंड एक नुकीले चीज की तरह चड्डी को सामने धकेल रहा था, यह देख कर आँचल शरमा सी गई।
फिर मैं आँचल के पैंटी की तरफ बढ़ा और उसे उतारने लगा तो आँचल ने मेरे हाथ पकड़ लिए। लेकिन मैंने उसकी पैंटी को टांगों के रास्ते उतार दिया। आँचल ने अपना चेहरा दोनों हाथों से ढक लिया। मैंने जिसको ख्वाबों में इतनी बार चोदा था आज वो मेरे आगे पूर्ण नग्नावस्था में पड़ी थी और मुझे जन्नत की सैर कराने के लिए तैयार थी। उसकी दोनों टांगों के बीच तिकोने आकार में छोटे छोटे बालों का एक जंगल था और उसके नीचे थी दो गुलाबी पंखुड़ियाँ और उनके बीच जन्नत में दाखिल होने के लिए छोटा सा रास्ता !
उसे देखते ही मेरा मन जल्दी से जन्नत देखने को उतावला होने लगा। अब मैंने अपनी चड्डी उतार दी और मेरी सात इन्च का लंड तना हुआ खड़ा था। लंड को देखकर आँचल के चेहरे पर कुछ बेताबी और घबराहट के निशान नजर आने लगे क्योंकि चन्दन का लंड मेरे इतना न ही लंबा था और न ही मोटा। मैं आँचल की जांघ की भीतरी चिकनी सतह को चाटता गया और आँचल के पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी।

अब मैं धीरे-धीरे आँचल के उस अंग के ओर बढ़ चला जो कि एक लड़की की सबसे अनमोल चीज़ होती है, मैं उसे आज लूट लेना चाहता था। उसकी चूत से मदहोश करने वाली गंध आ रही थी। मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और चूत की एक पंखुड़ी को अपनी होंठों के बीच लेकर थोड़ा भींच लिया और आँचल जैसे तड़प सी उठी। मैंने दोनों पंखुड़ियों को कई बार ऐसा किया और हाथों से मसला भी। अब मैं आँचल की भग-कलि को मसलने लगा और आँचल और जोर जोर से मचलने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी। उसकी चूत थोड़ा थोड़ा पानी छोड़ने लगी थी।

मैं जैसे बहती हुई पहाड़ी नदी बन गई थी

अब मैं समझ गया कि वो आखिरी पल आ गया है जिसका इन्तजार मैं इतने दिनों से कर रहा था। मैं आगे बढ़ा और मेरा पूरा शरीर आँचल के शरीर के ऊपर आ गया। उसके स्तन मेरी बालों भरी मरदाना छाती के नीचे दबे हुए थे। मैंने दोनों चूचियों को कुछ देर तक होंठों से चूसा। अब आँचल की बेताबी चरम पर पहुँच चुकी थी। मैंने अब अपने लण्ड का सुपारा उसकी छोटी सी चूत के आगे रखा और धीरे धीरे अन्दर धकेलने देने लगा। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | आँचल थोड़ा चिल्लाई और मेरा सुपारा उसकी चूत के अन्दर था।

आँचल की चूत अन्दर से मक्खन की तरह चिकनी, नर्म और काफी गीली थी और काफी गर्म भी थी। मुझे जन्नत दिखाई देने लगी थी। अब बिना किसी कोशिश के ही धीरे-धीरे लंड चूत के अन्दर और अन्दर घुसता ही जा रहा था। कुछ देर बाद लंड और अन्दर नहीं गया तो मैंने थोड़ा जोर लगाया और आँचल दर्द से चीख उठी। मेरा लंड अब पूरा का पूरा आँचल के अन्दर था।
आँचल की चूत ने मेरे लंड को जकड़ रखा था। वो अनुभव शब्दों में बयान नहीं जा सकता। खुद का लंड किसी चूत में जाने से ही पता लग सकता है असली चूत का मज़ा। अब मैं धीरे-धीरे लण्ड को को अन्दर-बाहर करने लगा। आँचल की चूत काफी गीली हो चुकी थी इसलिए लंड आसानी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैंने करीब दस मिनट तक आँचल को उसी तरह चोदा। फिर मैंने उसे चौपाये की अवस्था में आने को कहा और पीछे से उसके चूत में अपना लौड़ा डाला। इस अवस्था में और ज्यादा मज़ा आने लगा। बीच-बीच में मैं आगे झुक के उसके स्तनों को जकड़ लेता और आँचल सिसकार उठती। मैं उसके पीठ पर चुम्बन किए जा रहा था।

करीब 15 मिनट तक चोदने के बाद हम दोनों फिर से पहले वाली अवस्था में आ गये। अब मैं कंडोम ले आया शेल्फ से और पहन लिया। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से आँचल को कोई मुसीबत झेलनी पड़े। कंडोम पहनने के बाद मैंने फिर से मेरा लंड आँचल के चूत में डाला और पहले धीरे-धीरे, फिर जोर-जोर से चोदने लगा। आँचल भी अब अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगी। करीब दस मिनट बाद मेरे लंड पर आँचल की चूत का दवाब अचानक बढ़ गया और आँचल निढाल हो गई। मैंने अब भी जोर जोर से चोदना चालू रखा और कुछ देर बाद अपना सारा माल कंडोम के अन्दर गिरा दिया।
कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे बिस्तर पर ! हम दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे। फिर मैंने धीरे से अपना लंड आँचल की चूत से निकाला, खड़ा हो गया, आँचल के होठों पर एक चुम्बन करके चला आया। मैंने कंडोम उतारा और बाथरूम चला गया। कुछ देर बाद बाहर आया और आँचल को अन्दर जाने के लिए बोल दिया। आँचल अन्दर गई और नहा कर बाहर आई। अब मैंने अपने कपड़े पहन लिए थे।

आँचलने भी अपने कपड़े पहन लिए। फिर आँचल मुझसे बिना कुछ कहे बाहर निकल गई। उसके कुछ दिन बाद तक वो कॉलेज नहीं आई। मैं घबरा गया था, कहीं वो कुछ कर तो नहीं बैठी। फिर सात दिन बाद चन्दन लौट आया और आँचल भी कॉलेज आने लगी, लेकिन वो जब भी मुझे देखती उसका खिला सा चेहरा मुरझा जाता और उसमें नफरत साफ झलकती थी। पहले कुछ दिन तो आँचल और चन्दन के बीच सब कुछ सामान्य था लेकिन चन्दन का मन अब आँचल से ऊब चुका था और वो एक नई लड़की के पीछे लग गया था।

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